लियोकोडर्मा पर हुये होम्योपैथिक रिसर्च और दृष्टिकोण(clinical homeopathic researches and views in vitiligo)

लियोकोडर्मा यानि सफ़ेद दाग पर चल रही सीरीज का यह अन्तिम भाग  है , इसके पहले के भागों के लिये यहाँ और यहाँ देखें । हाँलाकि यह पोस्ट यहाँ समाप्त अवशय होती है लेकिन इसके बाद समय-२ पर रोग मुक्त हुये क्लीनिकल केसों से  अपडेट करने का प्रयास अवशय  रहेगा । एक बात और अगर आप होम्योपैथिक चिकित्सक हैं और इस ब्लाग से गुजर रहे हैं तो अपने क्लीनिकल अनुभवों को होम्योपैथिक से जुडने वाली नयी पीढी में बाँटने मे न हिचकें , कोई भी चिकित्सक पूर्ण नही है , हम अपने और दूसरों के अनुभवों को बाँट कर अपनी चिकित्सा प्रणाली को समृद्द और बचा सकते हैं और अगर हम ऐसा नही करेगें तो शायद हमारा हाल भी आर्युवेद्द और यूनानी पद्दति जैसा ही होगा जहाँ अच्छे-२ वैद्द विशारद अपने अनुभवों को लिये कालचक्र मे समा गये । कोई आवशयक नही कि आप मेरी बात से सहमत ही हों , विचारधाराओं मे अन्तर और उस पर एक स्वस्थ बहस ही किसी भी निष्कर्ष तक पहुँचने मे हमेशा सहायक होती है । और चलते-२ एक सलाह आंम जनों से – कृपया होम्योपैथिक औषधियों पर हाथ आजमाने की चेष्टा न करें , आपका होम्योपैथिक चिकित्सक आपको उचित और योग्य सलाह दे सकता है ।
लियोकडर्मा की इस अन्तिम पोस्ट मे हम लियोकडर्मा पर हुये होम्योपैथिक शोध कार्यों को तो देखेगें ही और साथ ही मे कुछ टिप्स नये B.H.M.S. छात्रों और चिकित्सकों के लिये भी रहेगी । सबसे पहले लेते हैं हमारे औषधि-कोष यानि रिपर्ट्री पर एक नजर और उसके बाद शोध कार्य और विभिन्न चिकित्सकों के क्लीनिकल अनुभव ।
होम्योपैथिक औषधि कोष यानि रिपर्ट्री पर एक नजर:

सबसे पहले होम्योपैथिक औषधि कोष यानि रिपर्ट्री पर एक नजर देखते हैं । आम तौर से प्रयोग होने वाली केन्ट रिपर्ट्री ,कम्पलीट रिपर्ट्री, सिन्थीसिस, मिलिनीनम या चाहे विथिलीकोस सिस्टम की बात करे तो vitiligo या leucoderma शब्द को सर्च करने का तरीका लगभग एक सा ही है।

केन्ट और कम्पलीट (KENT REPERTORY & COMPLETE REPERTORY):
1- जिस खंड मे जैसे skin मे vitiligo या leucoderma शब्द को सर्च कर   रहे हो वहाँ पहले discoloration white शब्द के अंतर्गत ढूंढे .  यही बात दूसरे खंडॊं   पर भी लागू होती है।

radar search vitigo  रडार

 

2-होमपैथ 8( HOMPATH CLASSIC 8 ) के प्रयोगकर्ता को साफ़्टवेएर मे दोनो विकल्प दिखेगें । Discoloration skin–white–vitiligo और quick repertorisation मे सीधे vitiligo शब्द को डालकर सर्च कर सकते हैं।

hompath leucoderma search होम्पैथ क्लासिक प्रीमियम

Hompath classic 8-quick repertorisation

 
3-सिन्थीसिस के लिये रडर के प्रयोगकर्ता ऊपर लिखे तरीके से ही सर्च कर सकते हैं, लेकिब्न रडार मे D/D के लिये भी एक विकल्प है जो होम्पैथ मे नही है। देखे नीचे आकृति ( रडार 9 से ली गयी)
DD of vitigo रडार

 

जिन खंड (chapters) पर विशेष ध्यान देना है उनकी आकृति नीचे दी है:

रडार  रडार

एक सही सिमिलीमम की तलाश के लिये सिर्फ़ common symptoms पर अपना जोर न रखें , रोगी के मानसिक लक्षणों को लेने की कोशिश करें ।

क्या एक सही सिमीलिमम की तलाश पूरी हो गई , नहीं कदापि नही , रोगी के मन:स्थिति को टटोलने की कोशिश करें। रोगॊ को जिस इलाज की आश्वशयकता है उसे आपको खोजना है । वह इलाज जो उसके लिये है -उसके शरीर और मन के लिये -विशेषकर मन के लिये । अत: जो लक्षण यांत्रिक कारणॊं पर आधारित होते हैं वे रोगी का बयान नही करते अत: होम्योपैथी चिकित्सा के लिये महत्वहीन रह जाते हैं । अत: जब आप अपनी रिपर्ट्री खोलें तो रोग से सम्बनिधत लक्षणॊ को नजरान्दाज करें । ध्यान रखें जो लक्षण आपने लिये हैं वह रोगी  की ही चारित्रिक विशेषता वाले लक्षण हों न कि रोग के साधारण लक्षण । आप देखते होगें कि आपका रोगी बेहद नफ़रत करने वाली प्रवृति का है या सन्देह करता है या रोता है और सहानभूति मिलने पर खिन्न हो जाता है । रोग होने पर ऐसे लक्षण उभरते हैं या उसका व्यक्तित्व भी कुछ ऐसा ही है ।  यदि मानसिक लक्षण प्रमुख हैं और यह रोगी के सामान्य स्थिति मे बदलाव दिखाता है तो यह बेहद महत्वपूर्ण हैं । किसी कम महत्वपूर्ण मानसिक लक्षण  या छोटे लक्षण के लिये अच्छी दवा को खोने का खतरा न मोल लें । और अगर यदि वह अधिक महत्वपूर्ण है तो आपको जानना चाहिये कि जिस दवा के चुनाव मे आप लगे हैं उसके लक्षणॊं मे यह लक्षण शामिल हो । और अगर वह बेहद महत्वपूर्ण दिखने वाला मानसिक लक्षण उन लियोकोडर्मा के सामान्य दिखने वाले लक्षणों को न भी कवर कर रहा हो , तब भी यह आप की औषधि के चुनाव की महत्वपूर्ण ईकाई होगा । सच तो यह है कि यह प्रणाली सिर्फ़   सफ़ेद दाग के रोगियों के केस लेते समय ही लागू नही होती बलिक सभी जटिल रोगों के लिये आवशयक है ।

अत: इतना महत्वपूर्ण है यह मानसिक लक्षण कि अगर आपने सही ढंग से लिया है तो उसे आप आसानी से हटा भी नही सकते । अत: आपकी औषधि  यही है । मानसिक लक्षणों की होम्योपैथिक औषधि के चयन मे क्या भूमिका है , इस पर हम विस्तार से अगली किसी पोस्ट मे देखेगें , लेकिन नीचे दिया एक स्लाइड शो इस पर थोडा प्रकाश अवशय डाल सकता है ।

इस स्लाइड शो के अधिकाशं चित्र दिल्ली होम्यो.काम द्वारा प्रस्तुत एक फ़्लैश प्रेस्नट्शेन से लिए गये हैं , जिनके कुछ चित्रों को स्लाइड शो मे डाला गया है । आभार – delhihomeo.com )

आप लक्षणों को इस तरह सजायें :

मानसिक लक्षण ( mental symptoms) —–>व्यापक लक्षण ——->विशेष लक्षण ——->रोग के उतार चढाव के साथ

लेकिन अगर रोगी मे चारित्रिक लक्षण ( constitutunal symptoms ) नही मिल रहे हों तब क्या करें । मियाज्म दोष पर भी अपनी तीखी और पैनी निगाहें रखें और अगर फ़िर भी नही तो  रोगी मे उस दुर्लभ लक्षण ( rare , striking & characteristic symptoms) को ढूँढने की कोशिश करें ।

एक बात जो अकसर मै कहता रहा हूँ और इस कडी की पहली पोस्ट मे भी कही थी कि होम्योपैथिक मैटिरिया मेडिका मे हाल के दिनों मे आयी नई औषधियों का प्रयोग कैसे हो क्योंकि इनका परीक्षण पूर्ण रुप से नही हुआ है , इनमें काफ़ी बडी संख्या भारतीय मूल की औषधियों से उतप्न्न मदर टिन्चर की है । इन औषधियों को अगर हम चारित्रिक लक्षण द्वारा चयनित औषधि के साथ प्रयोग करते हैं तो रोग की  recovery काफ़ी तेज दिखाई देती है । मै तो इसी तरीके से ही प्रयोग करता रहा हूँ और डां देश बन्धु वाजपेई जी शायद आप भी इससे सहमत होगें कि इनके परिणाम अधिक सफ़ल रहते हैं । हाँ , यह बात अलग कि हम होमयोपैथी के सिद्दातों से थोडा हटकर चलते है ।

एक नजर देखते हैं उन दुर्लभ होम्योपैथिक औषधियों की तरफ़ : 

दुर्लभ होम्योपैथिक औषधियाँ ( Rare homeopathic medicines)
1. Amni Vesenega
2. Psoralia Cor
3. Mica
4. Magneferia Indica
5. Commocladia D
6. Ozone
7. Veroninia A
8. Cuprum oxy Nigrum
9. Cobalt Nitricum
10. Radium Brom
11. Hydrocotyle
12. Piper methysticum

 

 सफ़ेद दाग पर हुये होम्योपैथिक शोध कार्य और विभिन्न होम्योपैथिक चिकित्सकों के मत :

  • डां वाडिया के लियोकडर्मा के रोगियों पर लिये सफ़ल परिणाम सबसे अधिक authentic रहे । एक ऐलोपैथिक चिकित्सक होने के बावजूद उनका योगदान होम्योपैथी के लिये अतुलनीय रहा । आपके अनुसार :

Drugs helpful in my Practice
At the outset, I may mention that the constitutional remedy works the best, if we can find matching symptoms. Later, an intercurrent remedy or a miasmatic remedy can be given.
1. Thuja-occ- I use this remedy very frequently. My reasons.
a) A number of vaccinations and modern drugs have been given especially in children. Here Thuja works as an antidote and clears the sycotic background.
b) Symptoms of Thuja are present not only children but adults too have dreams of falling, startling in sleep, have warts on the face or body, loss of appetite and dullness since those innoculations. After three doses of Thuja 200, the patients general condition improves. Now is the time to give the indicated remedy which starts working well.
c) My third reason for giving this remedy, is in cases of history of tuberculosis or respiratory diseases in the patient. According to Dr Barnett in his book on tumours on pg 315, Bacillinum will not act very well unless Thuja is given first. Vacinosis evidently comes in the way, very much the same as Hahnemann mentions for Psora and the use of Sulphur as an intercurrent remedy.
2. Sulphur- This is an important remedy and also the greatest antipsoric. It will also cure (along with psora) the suppressed sycotic and syphilitic miasmatic symptoms. If there is a history of suppressed shin diseases, diarrhoea, dysentery, jaundice, typhoid and other fevers then this remedy is of help. But the most important thing is that symptoms of Sulphur should be present like.
a) Heat of palms, soles, eyes, anus, vulva, vagina and top of head.
b) Generally patient is hot yet sometimes could be chilly.
c) Irritability and obstinacy can also be noticed.
d) Books describe Sulphur as a ragged philosopher but that is not found in all the cases. Due to poverty or lack of toilet facilities he may not take a bath and look dirty. The remedy can be given in clean patients also if other symptoms agree.
3. Bacillinum- The third most important remedy is Bacillinum or Tuberculinum. Many times we get cases, where the patient suffers from a chronic cold, with an occasional history of haemoptysis. Loss of weight, loss of appetite, flat chests of boys and girls, prominent ribs and clavicles etc may be other symptoms. We could get a family history of TB or pleurisy. We ask a patient of Sulphur repeatedly for a history of skin diseases, similarly we must ask a Bacillinum patient for a history of chest diseases. Many patients who are not clear or intelligent give a history of pleurisy more often than a history of TB. So we must try and get the symptoms in a tactful manner. Tuberculinum-bovinum and Drosera act better if there is a history of glandular or bony tuberculosis. The first case baby V G had bone TB for which she was given the drugs mentioned above. Now 19 years old, she goes to college in perfect health.
4. Nux-vomica- is required initially when the patient comes after taking a lot of the Modern drugs. It acts as an antidote to clear the background. This remedy also helps the patient to get over the problem of ineffectual urge for stool and also improves his digestion. It however has no specific action on the white spots.
5. Sepia- useful particularly in females. Besides the usual white discolouration, these patients have irregular menses-late, scanty, painful, menses in young girls, leucorrhoea, pruritis, dyspareunia and frigidity.
Most patients give H-O morning sickness, vomiting, nausea, travellers headache. Swings, merry-ground etc also affect her. The remedy removes the above symptoms and the white spots become pink in colour, but do not disappear completely. Sepia requires to be complemented with Nat-mur, to complete the cure.
6. Merc-Sol- is indicated in cases with a history of dysentery with mucus and blood, jaundice and liver enlargement. These patients are worse at night with salivation and have a syphilitic miasm. They perspire in bed and do not tolerate extremes of climate.
7. Acid-nit- I have used this remedy in cases of white spots around mucocutaneous junctions. There may also be fissures at the same site. Other indications are-craving for chalk, pencils etc mainly in children. This remedy, like Sepia removes the other symptoms but spots do not disappear completely.
8. Graphites and Calc-carb-also do come in the picture occasionally. Both are obese but their other symptoms are different. There is a history of suppressed itch in Graphites and irregular menses in a Calc-carb.
9. Ars-sulph-flav-Many doctors say that they are disappointed with the use of this remedy. The real cause is that they merely prescribe it as a specific for the disease. This is the most abused prescription. Very few books have given characteristic symptom of this drug. On the lookout for a good literature of the drug I was pleasantly surprised to find it in Kents Lesser Writings a detailed description on page 18. It states that if one find either mental, general or sexual symptoms along with the white spots the patient will definitely get well.
In addition to these I have used various other remedies like.
10. Cup-aceticum- in lower potencies. This is because copper is the chief source to produce melanin.
11. Cantharis- In our materia medica nothing is mentioned about skin discolouration. Dr R S Pareek who has given a great important to this remedy states that in burns the skin loses its pigmentation and Cantharis restores it.
12. Restinon- has also been recommended by a doctor friend of mine from Calcutta.
13. Psoralin- I have used this in potencies, as antidote in those cases where a lot of it was given by the allopathic doctors in crude form.
14. Carcinocin- must be used when there is a definite history of cancer in the patients family. Mrs E whose case has been mentioned was perfectly well after giving Carcinocin.
15. Bowel Nosodes- Morgan-bach, Morgan=gaertner, and Dyscentrico have been used by me with good success

Conclusions of Dr Wadia :

Family History percentage of cases
1. Tuberculosis
2. Leucoderma
3. Diabetes
4. Suppressed skin diseases
30%
29%
15%
15%
Past History percentage of cases
1. Past History- intestinal diseases including dysentery( Amoebic), jaundice, typhoid,and different types of worms
2.Vaccination & inoculation
3.suppressed skin diseases
4.Tuberculosis
5.Asthma
79%

25%
21%
12%
5%

Remedies that are helpful percentage of cases
1. Tuberculinum
or  Bacillinum
3. Thuja
3. Sulphur
4. Sepia
5. Merc sol
6. Acid Nitric
27%
26%
22%
14%
11%
10%

.

199 cases were studied (130 new cases(74 males & 56 females) and 69 old cases(37 male & 32 female) during the period 1st April 2004 to 31st December 2004 of these 190 cases had reported regularly. There was marked improvement in 10 patients, moderate improvement in 22 patients and mild improvement in 86 patients. The medicines found useful were Nat mur, Nux vom., Sulph., Puls., Lyco, Phos, Calc carb., Calc phos. Intercurrents on the basis of specific history and indications used were Tuberculinum, Syphilinum and Carcinosin. The Specific medicines used were Magnifera indica(prescribed to 4 patients all the 4 patients responded well) Mica (prescribed to 17 patients of which only 10 responded), Arsenic sulph flavum (prescribed to 7 patients of which 3 patients responded) and Psoralia Q (prescribed to 4 patients and all the four patients responded well). The potencies used were in 30, 200 and 1M. The 30 potency was repeated weekly, 200 potencies were repeated fortnightly and 1M potency was repeated after a month. Intercurrents were given in 200 and 1M potency.

  • प्रो सुबोध मेहता के प्रयोग अपने मे अनोखे ही थे। आपने लियोकोडर्मा के रोगियों को औषधि देने के पहले रक्त की आम जाँचे जैसे TLC, DLC,ESR के अलावा ब्लड ग्रुप, सीरम सोडियम, सीरम पोटेशियम और inorganic phosphorous के  टेस्ट करवाये और इन्ही सीरम सोडियम और सीरम पोटेशियम के अनुपात के आधार पर आपने सफ़ेद दाग के रोगियों को चार भाग मे वर्गीकृत किया:
    क- हार्मोनल
    ख-आनुवंशिक
    ग-Acquired
    घ-Idiopathic
    क- हार्मोनल- ऐसे रोगियों मे सोडियम -पोटेशियम और सोडियम – फ़ास्फ़ोरस का अनुपात कम देखा गया और इस वर्ग के लिये प्रो सुबोध ने sepia, thuja और silicea को श्रेणीबद्द किया।
    ख-आनुवंशिक-करीब 50% रोगियों मे आनुवंशिक प्रमण मिले , इस वर्ग के लिये syphilinum, thuja , silicea को तरजीह दी गयी। ऐसे रोगियों मे सोडियम पोटेशियम का अनुपात कम और सोडियम -फ़ासफ़ोरस का अनुपात अधिक पाया गया।
    ग-Acquired-ऐसे रोगियों की संख्या काफ़ी अधिक निकली और इन रोगियों मे पेट के रोग जैसे amoebic or bacillary dysentery (पेचिश), antibiotics के दुष्प्रभाव के चलते संभवत: आँत की श्लेषमा ( intestinal mucosa) प्रभावित हुयी और शायद इसी वजह से tyrosine की कमी के चलते melanin मे भी कमी आ गयी । ऐसे रोगियों मे bacillinum, phosphorous,chelidonium,nux vom, का प्रभाव देखा गया।
    घ-Idiopathic-ऐसे रोगी जो ऊपर दी गयी किसी श्रेणी मे नही आते। प्रो सुबोध के अनुसंधान का एक रोचक पहलू यह भी था कि अधिकांश रोगी ब्लड ग्रुप O से संबधित निकले जबकि ब्लड ग्रुप A इसमे लगभग छूटा ही रहा।
    लेकिन दु:ख की बात यह रही कि प्रो सुबोध हमारे बीच अब न रहे और इनके प्रयोगों को Dr Subodh Mehta Research Centre और C.C.R.H. ( सेन्ट्रल कौन्सिल आफ़ रिसर्च इन होम्योपैथी) ने कोई महत्व न दिया। ( स्त्रोत:
    Transections of International Homeopathic Congress 1967/Leucoderma by Professor Subodh Mehta )
  • डां कमल कन्सल ने लीडम पाल ( Ledum pal ) से लिये आशचर्य चकित परिणामों की जानकारी NATIONAL JOURNAL OF HOMOEOPATHY  के Volume: 1993 Mar / Apr VOL II No 2  में रखी । आपके अनुसार :

Melanocytic Action of Ledum Palustre [Melanocytic Action Of Ledum Palustre]
NATIONAL JOURNAL HOMOEOPATHY by Vishpala Parthasarathy 
Volume: 1993 Mar / Apr VOL II No 2 
Author: Kamal Kansal
Subject: Materia Medica
Remedy: Led
Leucoderma of Vitiligo is a disease of unknown aetiology and variable course. Ledum-pal may be surprise prescription for all of us, but has proved a highly efficacious remedy tried on 76 patients during a period of 6 years.
Why Ledum-pal? Conventionally used medicines for Leucoderma or Vitiligo did not give me satisfactory results even with the support of constitutionally indicated catalytic remedy. Prolonged treatment has also made it more frustrating. It so happened that a patient came to me for two small marks, white in colour at the site of a burn injury on the forehead and on the chest. Patient was noninformative. A look in Boerickes Materia Medica under skin of this remedy- “long discolouration of skin after injuries” made me think about it and I prescribed Ledum-pal 200, three times and to my surprise the skin started repigmentation. I have given this medicine in patients even without history of injury and have found most encouraging results.

      Case report-B S, aged 20 years has spots on the face, neck, abdomen and legs for 7 years. (See photo a). He had been taking all kinds of therapies including Homoeopathy. He was given Ledum- pal 200 three times daily on 22nd Nov 92. Photograph on 1st Dec 92 and 22nd Jan 1993 show evident repigmentation. (See photo b). Conclusion-Materia Medica requires reproving of many drugs. It is not necessary that all symptoms of a drug have come out in earlier provings. The trial of Ledum-pal is an example to make reproving and reconfirmation of drugs a continuous process. The role of Ledum-pal on Melanin pathway cannot be ruled out.

  • चेन्नई के डा कोपिकर ( Dr S.P.Koppikar) ने Acid Nit और Sepia के अलावा Nylon 30 और Rastinon 30 से अच्छे परिणाम निकाले ।
  • कोटायम होम्योपैथिक मेडिकल कालेज के भूतपूर्व प्रधानाचार्य डा आर. पी. पटेल  ने उपचार की एक आसान सी राह सुझायी:
    क- Syphilinum 200-1000 – अगर रोग का कारण सिफ़िलिक्टिक मियाज्म हो और रोग के उत्त्भेद्द ओंठ,जनेन्द्रिय ( genital ) और bony areas पर दिखें।
    ख- Medorrhin 200-1000- अगर रोग का कारण साइकोटिक मियाज्म हो और रोग के उत्भेद्द माँसल हिस्सों (muscular parts)मे दिखें।
    ग- Sepia 3- अधिकतर शिशुऒं और युवतियों मे । रोग के उत्भेद्द ओंठ, सर की त्वचा और चेहरे पाये जायें।
    घ- Lyco 3, 30-उन रोगियों पर जो पुराने अतिसार ( chronic amoebic dysentry) , या यकृत ( liver) संबधी रोग जैसे पीलिया (jaundice) से पीडित रहे हों।
    ड- Ars iod 3- ऐसे रोगियों मे जहाँ टी बी (T.B.) का इतिहास रहा हो या टी बी (T.B.) परिबारिक पृष्ठभूमि ( hereditary) से आयी हो।
    च- Hydrocotyle 3, 10M- ऐसे रोगियों मे जहाँ त्वचा के रोग जैसे अकोता(Eczema), ल्यूप्स (Lupus) आदि को सिर्फ़ दबाया (suppress) गया हो।
    छ -Bacillinum 1M- जहाँ पूर्व या वर्तमान मे रोगी दमा(Asthma), यक्ष्मा (T.B.), त्वचा संबधी रोग विशेष कर दाद (Ringworm) से पीडित रहे हों।
    ज- Nat Mur- सफ़ेद दाग खारिश(itching) के साथ
    झ- Rasitonin- यकृत संबधी रोगों के साथ ।
  • आगरा के डा आर एस पारिख ने अपने अनुभवों के आधार पर Cuprum Acetium , Cobalt Nitricum और Cantharis पर जोर दिया।
  • हैदराबाद के डा पी एस कृष्णामूर्ति ने ब्रिटिश होम्योपैथिक जर्नल मे Amoebiasis पर एक लेख लिखा । आपने हैनिमैन की मियाज्म थ्योरी का पक्ष लेते हुये उष्ण प्रदेशों मे अतिसार मियाज्म (Dysentery miasm) को सफ़ेद दाग के लिये जिम्मेदार ठहराया। इस वर्ग के लिये उन्होने मर्क साल को वरीयता क्रम मे सबसे ऊपर रखा ।

निष्कर्ष ( Conclusions ):

  • सबसे बडी समस्या सफ़ेद दाग के रोगियों मे धैयरता की है , साथ ही मे चिकित्सक की तरफ़ से भी हडबडी मे लिखे नुस्खे या बार-२ औषधि को बदलने की प्रक्रिया रोगी के रोग को incurable बना देती है । जितनी उम्मीद आप एक रोगी से रखॆं कि वह टिक कर इलाज करे उतना ही अपने नुस्खों पर भी रखें ।
  • इलाज की समय अवधि कोई निशिचित नही है , फ़िर भी सामान्य केस से लेकर बिगडे केस भी लगभग एक साल से चार साल या उससे अधिक समय ले जाते हैं ।
  • बडे चकत्तों की अपेक्षा छोटॆ सफ़ेद दाग के चकत्ते जल्द ठीक होते हैं और कई -२ रोगियों मे जहाँ चकत्ते काफ़ी अधिक बडी ऐरिया  को कवर करते हैं ऐसे रोगियों का ठीक हो पाना लगभग नामुनिकन हो जाता है ।

 

देखें सम्बन्धित पोस्ट:

1. VITILIGO & HOMEOPATHY

2. Leucoderma and Homeopathy ( सफ़ेद दाग और होम्योपैथी)

3. सेंकेंड प्रिसक्पशन और सही पोटेन्सी का चुनाव (Second Prescription & selection of potency)

4. सफ़ेद दाग और होम्योपैथी- आशा की एक किरण -भाग-१ (Leucoderma & homeopathy- an ultimate hope -Part-1)

5. सफ़ेद दाग और होम्योपैथी- आशा की एक किरण भाग- २ (Leucoderma & homeopathy- an ultimate hope-part-2 )

चिट्ठाजगत पर सम्बन्धित: homeopathy, होम्योपैथी,

19 responses to “लियोकोडर्मा पर हुये होम्योपैथिक रिसर्च और दृष्टिकोण(clinical homeopathic researches and views in vitiligo)

  1. बहुत बदीया जानकरी दी आप ने सर
    अब हमे इलाज करने मै आसानी हो गी.

  2. डॉक्टर साहब अच्छी जानकारी दी है आपने जरा साईटिका के बारे में भी लिखें हमे जानना है कि यह क्यों होती है व कैसे उपचार किया जाये…

    सुनीता(शानू)

  3. Dear Dr. Prabhat

    I must thank you very much for your most valuable and informative article on vitiligo. Your services to homoeopathy is always highly appreciated. God bless you.

  4. बड़ी टेक्निकल सी पोस्ट है. देख ली.

  5. Sir,
    Waw….Thanks ! I am in hurry so i will go through this ocean of knowledge within few hours….Really it needs time to go through it thoroughly.

  6. sir just 2 remind u in section past histoy remedies n %….plz check serial number n respective column…its not a comment so plz dnt accept it 4 posting here….

  7. देख कर अच्‍छा लगा,

    समझ कुछ नही आया🙂

  8. hello sir ,
    Thanks sir for this informative article . really it is very help ful for new dr.
    mere pass bhi leucoderma ke 2/3 case hai jisme mujhe HYDROCOTYLE & ARS SULPH FLAV se acche result mile hai .

  9. पिंगबैक: www.topbloodpressureadvice.info » लियोकोडर्मा पर हुये होम्योपैथिक …

  10. पिंगबैक: www.remediesthatheal.info » लियोकोडर्मा पर हुये होम्योपैथिक …

  11. sir
    this is very informative topic…..really liked it

  12. SIR,
    PL. ISSUE A NOTE ON GASTRO DESEASES / LIVER

  13. Sir,

    The article is very informative, I personally appreciate your efforts for providing us such a good work.

    regards

  14. The prepration realy delisious.
    its satisfy today apetite of my brain.
    no doubt its a N.H.M.C production.
    in m early practise i loss my few cases, due to my lack of knowledge.
    but soon i get in touch to Dr.Wadia sir, and he realy teach me lots in this regard, rather he write a seprate book over it, and what u publish in this blog i think most of it , all ready written in his book too.
    all rare remidy which u mention do work in reality, with there peculiar indication.
    1. Amni Vesenega
    2. Psoralia Cor
    3. Mica
    4. Magneferia Indica
    5. Commocladia D
    6. Ozone
    7. Veroninia A
    8. Cuprum oxy Nigrum
    9. Cobalt Nitricum
    10. Radium Brom
    11. Hydrocotyle
    12. Piper methysticum

    and offcourse we all keep in mind tips all above .
    so lots of thanks to you to gave such a good stuff to our brain.

  15. @ Dr Neeti Srivastava,
    Ars sulph flavum के साथ जितना दुरुपयोग हमारे यहाँ और अन्य देशों मे हुआ उसकी मिसाल नही मिलती , क्या वाकई मे ASF leucoderma की सही औषधि है , देखें नीचे लक्षणों का समूह या किल्क करें http://homeoint.org/hering/a/ars-s-f.htm

    Hahnemann published in his Materia Medica a single short proving, by Langhammer, one of the most trustworthy provers. Some reports of effects by the Old School physicians are given in Allen’s Encyclopædia, vol. 1, p. 556 ; also a symptom observed by Hencke.

    MIND. [1] [Ars. s. f.]
    Intense and torturing anxiety and apprehension greatest apprehension after a swoon.
    Mind clearer than previously.

    SENSORIUM. [2] [Ars. s. f.]
    When walking he felt as if dancing up and down, as if he must fly.
    Great weakness in head.
    Vanishing of thought.

    INNER HEAD. [3] [Ars. s. f.]
    Throbbing stitches in right frontal region.
    Headache in middle of forehead, drawing and stinging.
    Pain deep in, in left forehead, situated back of inner corner of eye and higher than eyebrow ; it extends towards left and deeper in, like a curve or drawn bowstring.
    After drinking beer, pain above occiput in both sides ; violent pressure in two places, right and left side symmetrical.
    Nausea, with neuralgic pains about head, when rising ; > while lying down.
    Headache, nausea and vomiting of a whitish fluid ; extremities covered with cold sweat.
    Serous apoplexy.

    OUTER HEAD. [4] [Ars. s. f.]
    External needle-like stitches in right frontal region.
    Tearing pain from parietal to frontal region.
    On stroking hair on occiput, a tensive feeling behind right ear, as if something stuck there and pressed it forward.

    SIGHT AND EYES. [5] [Ars. s. f.]
    Gum in canthi.

    HEARING AND EARS. [6] [Ars. s. f.]
    Tensive feeling behind right ear on stroking hair.

    UPPER FACE. [8] [Ars. s. f.]
    Forehead cold.

    TEETH AND GUMS. [10] [Ars. s. f.]
    Teeth pain as if loose, when chewing food.

    TASTE, SPEECH, TONGUE. [11] [Ars. s. f.]
    Taste bitter.
    Tongue : furred, yellow white ; stiff, immovable ; swollen later dry, with disgust for all nourishment.

    INNER MOUTH. [12] [Ars. s. f.]
    Mouth and throat dry.
    Pustules or herpetic ulcers, of a phagedenic character.

    PALATE AND THROAT. [13] [Ars. s. f.]
    Loss of appetite.

    HICCOUGH, BELCHING, NAUSEA AND VOMITING. [16] [Ars. s. f.]
    Nausea at noon after a meal ; and vomiting, with pain in stomach and abdomen ; diarrhœa and thirst.
    Violent, persistent vomiting.
    After vomiting offensive bile, was relieved.

    SCROBICULUM AND STOMACH. [17] [Ars. s. f.]
    Cramp in stomach, with fainting, colic, vomiting, diarrhœa. θ Gangrene of bowels.
    Burning and gnawing in stomach, with vomiting and diarrhœa.
    Indigestion.

    HYPOCHONDRIA. [18] [Ars. s. f.]
    Violent griping, with convulsions.
    Violent colic, as from a cold, morning on awaking.
    Abdomen puffed ; blue spots in fundus of stomach ; reddish-brown erosions.
    End of ileum more inflamed than duodenum.
    Sensation as if diarrhœa would set in.

    STOOLS AND RECTUM. [20] [Ars. s. f.]
    Stools like water, green and slimy, and terribly offensive.
    Diarrhœa daily at 8 A. M. and several times during day, but not at night.
    Diarrhœa with colic and backache and tenesmus.

    MALE SEXUAL ORGANS. [22] [Ars. s. f.]
    Gonorrhœa, with terrible pains ; discharge copious, yellow, constant ; burning day and night, along entire urethra, with restlessness.
    Seminal emissions. See 37.

    VOICE AND LARYNX. TRACHEA AND BRONCHIA. [25] [Ars. s. f.]
    Laryngeal phthisis. θ In a drunkard.

    RESPIRATION. [26] [Ars. s. f.]
    Respiration difficult.
    Indescribably unpleasant feeling, with oppression ; everything feels too tight, < about hypochondria ; ending in sweat.

    COUGH. [27] [Ars. s. f.]
    Cough from tickling in throat ; with pain in left side ; soreness on chest ; with heat in left chest and face, circumscribed red cheeks.
    Cough with soreness in chest and between shoulders.
    Catarrhal cough with pains in chest and rattling.

    HEART, PULSE AND CIRCULATION. [29] [Ars. s. f.]
    Lungs overfilled with blood.
    Needle-like stitches from within out in right side of chest.
    Yellow serum in pericardium.
    Pulse : frequent, hard, then small and thready ; slow, suppressed, quick, and scarcely perceptible.

    NECK AND BACK. [31] [Ars. s. f.]
    Backache confining him to bed (with caries of sternum and cough. Sulphur partly cured caries, Psorin. cough, and Arsen. sulph. backache and remaining caries).
    Pain in lumbar vertebræ when moving.

    UPPER LIMBS. [32] [Ars. s. f.]
    Eruption on outer side of left wrist ; also on inner side, after Sulphur. (Sulphur did not cure, Arsenic-sulph. did).

    LOWER LIMBS. [33] [Ars. s. f.]
    Pain in left knee, with chronic asthma.
    Knees pain and totter.
    Pain above left ankle bone.
    Feet burn.

    LIMBS IN GENERAL. [34] [Ars. s. f.]
    Severe pain, now in toes, now in shoulders ; now here, now there, ending with sweat.

    REST. POSITION. MOTION. [35] [Ars. s. f.]
    Children are slow in learning to walk.
    Worse when rising : neuralgic pains about head.
    Better lying down : neuralgia in head.
    When moving : pain in lumbar vertebræ.

    NERVES. [36] [Ars. s. f.]
    General debility.
    Nerves severely affected.
    Annoying twitching of thirty years’ duration.
    Spasms, colic, vomiting, diarrhœa, heat and thirst next day.
    Faints after a convulsion.
    General feeling of lameness, staggering, trembling ; all strength is gone.
    Limbs paralyzed ; has itch and dropsy.

    SLEEP. [37] [Ars. s. f.]
    Starting in sleep, also in falling asleep ; as if he would fall out of bed.
    Restless at night, excited ; dreams with seminal emissions.

    TIME. [38] [Ars. s. f.]
    At 8 A. M. : daily diarrhœa.
    At noon : nausea after a meal, etc. See 16.
    Night : restless ; terrible heat.

    TEMPERATURE AND WEATHER. [39] [Ars. s. f.]
    Relieved by steam or hot water.

    FEVER. [40] [Ars. s. f.]
    Chronic intermittent fever, < every afternoon and evening ; terrible heat at night.
    Hectic without thirst.

    LOCALITY AND DIRECTION. [42] [Ars. s. f.]
    Left : pain in forehead.
    Right : tensive feeling behind ear.

    SENSATIONS. [43] [Ars. s. f.]
    Pain in teeth as if loose ; when walking felt as if dancing up and down ; as if he must fly ; as if something stuck behind right ear and pressed it forward ; as if he would fall out of bed.
    Severe pain : now here, now there.
    Needle-like stitches : in right frontal region.
    Throbbing stitches : in right frontal region.
    Terrible pains : with gonorrhœa.
    Tearing pain : from parietal to frontal region.
    Drawing : and stinging in middle of forehead.
    Griping : in abdomen.
    Burning : in stomach ; along entire urethra ; in feet.
    Neuralgic pain : about head.
    Soreness : on chest ; between shoulders.
    Pressure : above occiput, right and left side.
    Gnawing : in stomach.
    Cramp : in stomach.
    Tensive feeling : behind right ear.
    Undefined pain : deep in left forehead ; in stomach and abdomen ; in left side with cough ; in shoulders ; in left knee ; above left ankle-bone ; in toes ; in joints.
    Tickling : in throat, causing cough.
    Heat : in left chest and face.

    TISSUES. [44] [Ars. s. f.]
    Pain in joints. θ Rheumatism.

    TOUCH. PASSIVE MOTION. INJURIES. [45] [Ars. s. f.]
    Everything feels too tight about hypochondria.
    Emaciated children.

    SKIN. [46] [Ars. s. f.]
    Icterus.
    Chafing about genitals and behind ears, in children.
    Skin scaly, blackish.
    Skin itching, dry, cracked ; rhagades ; itch.

    STAGE OF LIFE, CONSTITUTION. [47] [Ars. s. f.]
    Case of caries of sternum with cough and backache of 15 years’ standing. See 31.
    A drunkard with phthisis laryngea.

    RELATIONS. [48] [Ars. s. f.]
    Similar to Calc. Carb. (children are slow in learning to walk). See 31 and 32.

  16. that is really nice work com pended dr sb.

  17. Shukria Dr. saheb. Bahut accha Article likha hai aapne bahut jankari mili. Dhanyawad aapka.

  18. Dr. Tondon, aapane bahut theek janakari dee hai, aur is par kafee mehanat ki hai. Sabase badi kami Homoeopathon mein yah hai ki ve sab philosophy ki baate bahut karate hain. Isaka karan hai. Choonki western coutries mein bhautik wad jyada raha hai, isaliye ve dharatal ki baat karate hain. Hamare yahan bilkul ulta hai. ham hava havai ki baaten jyada karate hain. “Vachanam kimm daridrata”, bolne mein kya garibi hai? Mahatma Hahnemann ne jitana bhi apani Organon mein kaha hai ya likha hai, woh sab bhautikwadi drashtikon se likha hai. Unhone koi philosophy ke drastikon se nahin likha ki unake sabhi followers Philosophy ke phalsaphe se chimat jayein. Daraasal kami hamare ander hai, chikitsa vigyan mein” if “aur “but” ka koi sthan nahin hai aur na hona chahiye. Yahan sawal jindagi aur maut ka hai. Mareej jeevan se sangharsa kar raha hai aur ham philosophical discussions mein pade huye hai. Homoeopathy ka alokpriya hone ka ek yah bhi karan hai. Ise anyatha na lijiyega, maine apane practice kaal mein yahi observe kiya hai. Maine pahale bhi aapako kisi comment mein likha hai ki, “kya karan hai ki 200 varsha se adhik beet gaye, ham koi doosara Hahenmann jaisa nahin paida kar sake, kyon?

  19. पिंगबैक: Scientific Research in Homeopathy Triple Blind studies, Double-Blind Randomised Placebo-Controlled Trial, Systematic Reviews & Meta Analysis, Evidence-base | होम्योपैथी-नई सोच/नई दिशायें

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