Category Archives: AYUSH

केन्द्रीय होम्योपैथिक अनुसन्धान परिषद द्वारा प्रकाशित जर्नल नि: शुल्क आनलाइन उपल्ब्ध ( Free Subscription to Indian Journal of Research in Homoeopathy by CCRH )

CCRH WEB SITE

एक समय था जब होम्योपैथिक अनुसंधान द्वारा प्रकाशित शोधपत्रों को मै CCRH से खरीदा करता था । उन्ही दिनो यह मन मे विचार आया कि एक साइट के रुप मे होम्योपैथिक अनुसंधानों को चिकित्सक और आम लोगॊ के सामने रखना चाहिये । एक छोटा सा प्रयास था http://homeopathyresearches.blogspot.in/ के रुप मे । हाँलाकि मै जानता था कि यह काम नियम के अनुसार नही है लेकिन फ़िर भी उन रिसर्च पेपर को स्कैन कर के उनको पोस्ट के रुप मे समय –२ पर डालने का प्रयास किया गया  ।

लेकिन अब जब CCRH ने स्वयं ही इस बात का निर्णय ले लिया है कि वह होम्योपैथिक अनुसंधान के  शोधपत्रों को आनलाइन निशुल्क उपल्ब्ध करेगी तब इन साइट का कोई अर्थ नही रह जाता । http://www.journalonweb.com/ijrh CCRH का वेब पेज है जहाँ आप होम्योपैथिक अनुसंधानों को निशुल्क देख सकते हैं । विशेषकर छात्र- छात्राओं के लिये यह साइट बहुत उपयोगी सिद्ध होगी ।

Indian Journal of Research in Homoeopathy, a publication of Central Council For Research In Homoeopathy, is a peer-reviewed online journal with Quarterly print on demand compilation of issues published.

The journal’s full text is available online at http://www.journalonweb.com/ijrh

The journal allows free access (Open Access) to its contents and permits authors to self-archive final accepted version of the articles on any OAI-compliant institutional / subject-based repository.

The journal does not charge for submission, processing or publication of manuscripts and even for color reproduction of photographs.

Features of Manuscript Management System
  • Online submission
  • Wider visibility though open access
  • Higher impact with wider visibility
  • Prompt review

Visit : http://www.ijrh.org/

Courtesy : Homoeo Book

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Homoeopathy Doctor Manoj Rajoria elected to Indian Parliament

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Homoeopathy Doctor Manoj Rajoria BHMS, MD (Hom) has been elected to Indian Parliament

Whole Homoeopathic Fraternity in India  is proud of  Dr.Manoj Rajoria from Rajasthan.

We congratulate you on your success and becoming MP, You will be the voice of thousands of Homoeopaths in the Parliament. You are a dedicated Homoeopath and we know you will work for Homoeopathy too.

Dr Manoj Rajoria, Candidate of 15th Lok Sabha, Affiliated to Bharatiya Janata Party (BJP) serving Karauli Dholpur (RJ) Lok Sabha Constituency.

He took his BHMS from Dr. M.P.K. Homoeopathic Medical College Jaipur

Post Graduate Homoeopathy from  Rajasthan University in 2006

Mobile Phone :  096 67 211234

Website : http://www.drmanojrajoria.com

Source : homeobook.com

होम्योपैथिक क्लीनिकल प्रतिष्ठानों के लिए क्लीनिकल प्रतिष्ठान अधिनियम के तहत न्यूनतम मानकों का ड्राफ्ट समीक्षा के लिये उपलब्ध

clinical establishment actस्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने क्लीनिकल प्रतिष्ठानों के लिए  क्लीनिकल प्रतिष्ठान अधिनियम के तहत न्यूनतम मानकों का ड्राफ्ट  समीक्षा के लिये तैयार  किया है । यह अधिनियम व्यक्तिगत होम्योपैथिक क्लीनिक ( एकल चिकित्सको द्वारा संचालित ) और होम्योपैथिक चिकित्सको द्वारा संचालित नर्सिंग होम दोनो पर लागू होगा। ड्राफ़्ट अभी समीक्षा के लिये है और इसके लिये चिकित्सकों और आम पब्लिक से भी सुझाव  माँगे गये है ।

Download Homeopathy Draft

होम्योपैथिक चिकित्सकों से अनुरोध है कि इन मानकों  को ध्यान पूर्वक पढें और 20/04/2014 से पहले अपने  सुझाव / टिप्पणी / संशोधन डा अनिल कुमार ( सी.एम.ओ. ) कक्ष नं. 506 ‘डी’ विंग , 5 वीं मंजिल , निर्माण भवन , नई दिल्ली 110018 पर या उनके ई मेल आई डी dr.anilkumar@nic.in पर भेज दें । इन सुझावों की दूसरी कापी nsdharmshaktu@yahoo.com को भी प्रेषित अवशय करें ।

ज्ञात हो  हाल मे ही उत्तर प्रदेश मे २८ फ़रवरी २०१३ से लागू भारत सरकार के क्लीनिकल प्रतिष्ठान (पंजीकरण और नियमन) अधिनियम, 2010 ने कम पूँजी वाले चिकित्सकों की नींद उडा दी है । हाँलाकि  यह सरदर्द मात्र होम्योपैथों के लिये नही बल्कि मेडिकल सेवा मे आने वाले हर उस प्रतिषठान की है जिसमॆ एलोपैथिक चिकित्सक , डेन्टल चिकित्सक, डाइगनोस्टिक सेन्टर और आयुष पद्दतियों के सभी चिकित्सक शामिल हैं । एक बार राज्यों द्वारा अपनाने पर इस अधिनियम के अनुसार, राज्य सरकारें क्लीनिकल प्रतिष्ठानों के पंजीकरण के लिए प्रत्येक जिले में पंजीकरण प्राधिकरण की स्थापना करेंगी। किसी भी चिकित्सक को क्लीनिकल प्रतिष्ठान चलाने के लिए इस अधिनियम के प्रावधानों का पालन करना होगा। अधिक जानकारी के लिये http://clinicalestablishments.nic.in/ पर जायें ।

संक्षिप्त में इस एक्ट के अनुसार अब सरकार यह तय करेगी कि क्लीनिक चलाने के लिये आपके पास पर्याप्त जगह हो , प्रक्षिक्षत स्टाफ़ हो , क्लीनिक में शौचालय की व्यवस्था हो , आपातकालीन परिस्थितियों में अगर रोगी का इलाज क्लीनिक मे नही हो सकता है तो उसे पास के अस्पताल तक पहुँचाने के लिये एम्बुलेसं हो , आदि-२ । C.M.O. के पास यह अधिकार होगा कि अगर चिकित्सक एक्ट का पालन नही करता है तो उस पर पहली बार १०००० रु. , दूसरी बार ५०००० रु और तीसरी और अन्तिम बार ५ लाख रु तक का जुर्माना लगाया जाय । एक्ट के अनुसार यदि चिकित्सक मेडिकल सेवा के अलावा और किसी कार्य /कारोबार मे लिप्त पाया जायेगा तो उसे दुराचार ( misconduct ) की संज्ञा दी जायेगी 🙂 विस्तृत जानकारी के लिये यहाँ देखें

 यह सिस्टम आयुष पद्दति के चिकित्सकों के लिये आघात से कम नही है । अगर देखा जाये तो ऐलोपैथिक के  प्रावाधानों को होम्योपैथिक व अन्य आयुष पदद्तियों मे डालने का यह जबरन प्रयास है ।

  • इस एक्ट को समीक्षा के लिये डालने की आवशयकता भी इसलिये पडी क्योकि यदि होम्योपैथी क्लीनिक पर एलोपैथी के मानक तय किये जायेगें तो क्लीनिक खोलना और चलाना कठिन हो जायेगा।
  • इस एक्ट मे होम्योपैथिक के अधिकारियों एवं संस्थाओं तथा प्रतिनिधियों को समुचित स्थान नही दिया गया है तथा जिला स्तर पर भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व नही है जिससे होम्योपैथिक चिकित्सकों के हितों की अनदेखी हो सकती है ।
  • एक्ट के अंतर्गत गठित होने वाली नेशनल कांउनसिल एवं जिला कमेटियों में एलोपैथी की प्रोफ़ेशनल संन्स्थाओं , अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों को अधिक प्रतिनिधित्व दिया गया है परतुं नेशनल कांउनसिल मे भारतीय चिकित्सा पद्धतियों के तीन सदस्यों को स्थान दिया गया है जबकि केन्द्रीय होम्योपैथिक परिषद के मात्र एक प्रतिनिधि को स्थान मिला है ।
  • होम्योपैथिक चिकित्सक के लिये प्रशिक्षित स्टाफ़ उपब्ध हो पाना भी संभव नही है क्योंकि होम्योपैथी मे फ़ार्मासिस्ट का कोई अधिकृत प्रशिक्षण नही है ।

एक्ट नये प्रावधानों के साथ समीक्षा के लिये तैयार है । अब समय है होम्योपैथिक से जुडॆ चिकित्सकों का कि वह अपने सुझावों / टिप्पणियों से  इन प्रावधानों को समयनूकूल और उपयुक्त बनायें ।

Ministry of Health and Family welfare has asked for review of Draft of Minimum standards for Clinical Establishments under Clinical Establishments Act.

Remember
This is everything on Homeopathy individual clinics and hospitals

Kindly go through the minimum standards in Homeopathy carefully and give your suggestions/comments/amendments before 20/04/2014

National Council for Clinical Establishments under the Chairmanship of Director General of Health Services, Government of India in consultation with various stakeholders has prepared draft minimum standards for various categories of Clinical Establishments for implementation of the Clinical Establishments Act.

The comments, suggestions, objections, including deletions /additions if required in the draft documents are invited from public at large, including the stakeholders like hospitals and other clinical establishments, consumer groups etc.

The comments may kindly be sent to Dr. Anil Kumar, CMO(AK) Room No.506 ‘D’ Wing, 5th Floor, Nirman Bhawan, New Delhi-110018 at his email- id dr.anilkumar@nic.in  with in one month of publication of this Notice on the website.

A copy of the same may also be endorsed to nsdharmshaktu@yahoo.com

Note : The Indian Public Health Standards(IPHS) four Sub-centre, PHC, CHC, Sub-district/Sub-divisional hospital and District hospital are already approved documents. The comments are being invited only on the draft minimum standards and not on the IPHS.

वर्ष 2013-14 सहित बारहवीं पंच वर्षीय योजना के दौरान आयुष विभाग की प्राथमिकताएं

वर्ष 2013-14 सहित बारहवीं पंच वर्षीय योजना के दौरान आयुष विभाग की प्राथमिकताएं

देश के कोने-कोने में प्रत्येक व्यक्ति को पूर्ण स्वास्थ्य के दायरे में लाना बाहरवीं पंच वर्षीय योजना की एक प्राथमिकता है। इस दौरान आयुष चिकित्सा प्रणाली की विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए उसे आधुनिक चिकित्सा प्रणालियों के साथ-साथ प्रयोग में लाया जाएगा। रोगों से बचाव, विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ व्यक्तियों को ध्यान में रखते हुए नॉन कम्यूनिकेबल बीमारियों में, तनाव के प्रबंधन में, मानसिक रोगों की चिकित्सा में, बीमारियों से जूझते व्यक्तियों की देखभाल में और स्वस्थ्य लाभ में आयुष का प्रयोग किया जाएगा।

बारहवीं पंच वर्षीय योजना के महत्वपूर्ण उद्देश्य : –

बाहरवीं पंच वर्षीय योजनाओं में आयुष के लिए 10,044 करोड़ रूपये का प्रावधान रखा गया है। जबकी ग्यारहवीं पंच वर्षीय योजना में केवल 2994 करोड़ रूपये ही जिन उद्देश्यों के लिए खर्च किए गए वे हैः

1. स्वास्थ्य सेवाओं में आयुष के प्रयोग को बढ़ाया गया।

2. आयुष विभाग ने आयुष की विशेषताओं को चिकित्सा, विशेषतौर पर महिलाओं बच्चों और बुजुर्गों के लिए, मानसिक बीमारियों के चिकित्सा में, तनाव के प्रबन्धन में, बीमार व्यक्तियों की देखभाल में और पुनर्वास में किया।

बारहवीं पंच वर्षीय योजना के अंतर्गत जो सुझाव दिए गए हैं उनमें इन संस्थाओं को शुरू करने की सिफारिश की गई है : –

1. होमियोपैथी मेडिसिन फार्मास्यूटिकल कंपनी लिमिटेड

2. अखिल भारतीय योग संस्थान

3. अखिल भारतीय होमियोपैथी संस्थान

4. अखिल भारतीय यूनानी चिकित्सा संस्थान

5. राष्ट्रीय सोवा रिग्पा संस्थान

6. राष्ट्रीय औषधीय पौध संस्थान

7. राष्ट्रीय आयुष पुस्तकालय और अभिलेखागार

8. केंद्रीय सोवा रिग्पा अनुसंधान परिषद

9. आयुष संबंधित राष्ट्रीय मानव संसाधन आयोग

10. आयुष के लिए केंद्रीय दवा नियंत्रक

11. आयुष औषध प्रणाली का भारतीय संस्थान

12. राष्ट्रीय जराचिकित्सा संस्थान

13. मेटाबॉलिक तथा लाइफ-स्टाइल बीमारियों का राष्ट्रीय संस्थान

14. राष्ट्रीय ड्रग तंबाकू निवारण संस्थान

नए कार्यक्रम : आयुष के राष्ट्रीय मिशन के अंतर्गत कुछ और नए कार्यक्रमों की सिफारिश की गई है जो कि इस प्रकार हैः

1. आयुष ग्राम

2. फार्मेको विजिलेंश इनिशियेटिव फोर ए.एस.यू. ड्रग्स

3. शोध परिषद की इकाइयों को प्रभावी बनाना

4. राष्ट्रीय आयुष हैल्थ प्रोग्राम

5. अस्पताल और डिस्पेंसरी (आयुष के साथ-साथ राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन-एक फ्लेक्सिपूल)

source : http://www.pib.nic.in/newsite/hindirelease.aspx?relid=21511