Category Archives: Homeopathic education

केन्द्रीय होम्योपैथिक अनुसन्धान परिषद द्वारा प्रकाशित जर्नल नि: शुल्क आनलाइन उपल्ब्ध ( Free Subscription to Indian Journal of Research in Homoeopathy by CCRH )

CCRH WEB SITE

एक समय था जब होम्योपैथिक अनुसंधान द्वारा प्रकाशित शोधपत्रों को मै CCRH से खरीदा करता था । उन्ही दिनो यह मन मे विचार आया कि एक साइट के रुप मे होम्योपैथिक अनुसंधानों को चिकित्सक और आम लोगॊ के सामने रखना चाहिये । एक छोटा सा प्रयास था http://homeopathyresearches.blogspot.in/ के रुप मे । हाँलाकि मै जानता था कि यह काम नियम के अनुसार नही है लेकिन फ़िर भी उन रिसर्च पेपर को स्कैन कर के उनको पोस्ट के रुप मे समय –२ पर डालने का प्रयास किया गया  ।

लेकिन अब जब CCRH ने स्वयं ही इस बात का निर्णय ले लिया है कि वह होम्योपैथिक अनुसंधान के  शोधपत्रों को आनलाइन निशुल्क उपल्ब्ध करेगी तब इन साइट का कोई अर्थ नही रह जाता । http://www.journalonweb.com/ijrh CCRH का वेब पेज है जहाँ आप होम्योपैथिक अनुसंधानों को निशुल्क देख सकते हैं । विशेषकर छात्र- छात्राओं के लिये यह साइट बहुत उपयोगी सिद्ध होगी ।

Indian Journal of Research in Homoeopathy, a publication of Central Council For Research In Homoeopathy, is a peer-reviewed online journal with Quarterly print on demand compilation of issues published.

The journal’s full text is available online at http://www.journalonweb.com/ijrh

The journal allows free access (Open Access) to its contents and permits authors to self-archive final accepted version of the articles on any OAI-compliant institutional / subject-based repository.

The journal does not charge for submission, processing or publication of manuscripts and even for color reproduction of photographs.

Features of Manuscript Management System
  • Online submission
  • Wider visibility though open access
  • Higher impact with wider visibility
  • Prompt review

Visit : http://www.ijrh.org/

Courtesy : Homoeo Book

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सर्दियों मे डायरिया और होम्योपैथी उपचार ( Cold Diarrhoea & Homeopathy )

पिछ्ले कुछ हफ़्तों से लगभग सभी प्राइवेट क्लीनिक और सरकारी अस्पतालॊ मे डायरिया या दस्तों के रोगी बढे हैं । इनमे से  नवजात शिशु और कम आयु के बच्चॊ की तादाद बहुत अधिक है ।

सर्दियों मे उल्टी और दस्त गर्मी के मुकाबले अधिक खतरनाक होते हैं । इन दिनों की मुख्य वजह ठंड होती है । सर्दियां शुरू होते ही रोटा वायरस सक्रिय हो जाता है। विंटर डायरिया रोटा वायरस के कारण ही होता है।
यह मौसम स्वास्थ के दृषिकोण से रोगरहित रहता है। बीमारियां बहुत कम पास फ़टकती हैं, लेकिन ऐसे बच्चे जो कमजोर होते हैं और जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कम होती है , उन्हें संक्रमण की संभावना ज्यादा होती है। वह अक्सर विंटर डायरिया की चपेट में आ जाते हैं। आमतौर पर डायरिया एक हफ्ते में ठीक हो जाता है लेकिन अगर ये इससे ज्यादा समय तक रहे तो ये क्रॉनिक डायरिया कहलाता है और इसका इलाज समय पर न होने से ये खतरनाक भी हो सकता है लेकिन इसे जरा सी सावधानी बरत कर ठीक भी किया जा सकता है।

यदि दस्त का समुचित इलाज न किया जाये तो निर्जलीकरण ( शरीर मे पानी की कमी आ जाना ) हो सकती है । शरीर मे जल और अन्य द्र्व्यों की कमी के कारण मृत्यु भी हो सकती है ।

निर्जलीकरण की पहचान और लक्षण:

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दस्त से बचाव के उपाय :

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  • मल त्याग के बाद बच्चों मे साबुन से हाथ धोने की आदत डालें ।
  • खाने से पहले हाथ अवशय साफ़ करें।
  • फ़ल और सब्जियाँ धो के खायें ।
  • खाध पदर्थों को ढक के रखें ।

क्या करें :

  • शिशु मे पानी की कमी को पूरा करें ।
  • शिशुओं को W.H.O. ओ.आर.एस. लगातार देते रहें ।
  • स्तनपान जारी रखें ।
  • शिशु का खाना बन्द न करें , बल्कि उसे नरम खाध पदार्थ जैसे केला , चावल , उबले आलू आदि देते रहें ।

याद रखें :

  • दस्त के सभी रोगियों का निर्जलीकरण के लिये वर्गीकरण करें । जहाँ गम्भीर निर्लजीकरण हो उसे क्लीनिक मे I.V. fluid से manage करें या अस्पताल रेफ़र करें ।
  • यदि मल मे खून आ रहा हो तो उसे पेचिश के लिये वर्गीकृत करें और औषधि के चुनाव के लिये प्लान दो को देखें ।

क्या न करें :

  • शिशु को सिर्फ़ ग्लूकोज या अकेला चीनी का घोल न दें । सिर्फ़ ग्लूकोज आधारित घोल शिशु के पेट में fermentation पैदा करते हैं जिससे बैक्टर्यिल संक्रमण की संभावनायें बढ जाती हैं ।
  • ऐसे तरल पदार्थ न दें जिसमें कैफ़ीन हो जैसे कोला या काँफ़ी ।
  • दूध या दूध से बनी वस्तुओं न दें ।

घर मे तैयार नमक-चीनी का घोल या W.H.O. ORS  में किसको चुनें :

घर मे बनाये गये नमक-चीनी के घोल मे सबसे बडी दिक्कत सही अनुपात का मिश्रण न हो पाना है जिससे या तो नमक की अधिकता हो जाती है या फ़िर चीनी का अनुपात बढ जाता है जो दोनॊ ही हालातों मे शिशु के लिये  हानिकारक सिद्द होती है । लेकिन फ़िर भी अगर O.R.S. उपलब्ध नही है तो यह तरीका कारगर है ।

बनाने की विधि :

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एक लीटर अथवा ५ ऊबले और ठंडे किये पानी मे १ छॊटा चम्मच नमक एवं ८ छॊटॆ चम्मच चीनी डालकर अच्छी तरह घोल ले और इस मिश्रण को २४ घंटॆ के अन्दर ही प्रयोग करें । बाकी बचे मिश्रण को फ़ेंक दें ।

होम्योपैथिक औषधियाँ :

शिशुओं मे आम प्रयोग होने वाकी होम्योपैथिक औषधियों की यह एक संक्षिप्त जानकारी है । [नोट : स्वयं चिकित्सा करने की गलती न करें , आप का चिकित्सक ही आपको सही सलाह दे सकता है । ]

Winter Diarrhoea के अधिकतर रोगी Dulacamara , Aconite या Nux Moschata से अल्प समय मे स्वस्थ हो जाते हैं ।

 RECTUM – DIARRHEA – cold – taking cold, after ( source : Syntehesis 9.0 )
acon. agra. Aloe ant-t. ars. bar-c. bar-s. Bell. Bry. Calc. camph. Caust. Cham. chin. chinin-ar. coff. coloc. con. cop. DULC. elat. gamb. graph. guar. Hyos. Ip. Jatr-c. kali-c. kreos. laur. lil-t. merc. Nat-ar. Nat-c. nat-s. nit-ac. NUX-M. Nux-v. op. Ph-ac. podo. puls. Rhus-t. rumx. sabin. samb. sang. sel. sep. Sulph. tub. verat. zing.

 RECTUM – DIARRHEA – winter
asc-t. nat-s. Nit-ac.

अगर डल्कामारा या नक्स मासकैटा कार्य नही कर रही है तो प्लान A या फ़िर प्लान B से लक्षणॊ का चुनाव करे ।

1. प्लान “A”

2. प्लान “B ”:

IHMA Fever guidelines Version1 released

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Indian Homoeopathic Research Centre (IHRC) the research wing of Indian Homoeopathy Medical Association (IHMA) published the “Fever Guidelines” before the homeopathic community.

This is an attempt to standardize the treatment protocol for fever among Homoeopaths.The cases managed on the basis of these guide lines shall be documented for future studies.

Thus the efficacy of Homoeopathic remedies could be established in a much more scientific and systemic way.

Major Contents

General approach in feverWhen and how to investigateCase definitionSupportive managementCase taking format and protocolFirst consultation at critical levelWhen to referRubric analysis of important fever remedies – a really useful sectionPreventive medicine and Genus epidemicus- RAECH guidelines

If you would like to get a copy of this book, Contact

Dr Vinod Joseph
Director IHRC
Ph: 09995403674

Web : www.ihma.in

courtesy : Indian Homoeopathic Research Centre (IHRC)

Short term studentship in Homoeopathy program by CCRH–apply now

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On behalf of Dr. R. K. Manchanda, Director General, Central Council for Research in Homoeopathy (CCRH), applications are invited from interested undergraduate homoeopathic students to participate in theShort Term Studentship in Homoeopathy Program (STSH 2014).

The Council has initiated the Short Term Studentship in homoeopathy Program in order to promote interest and aptitude for research among homoeopathic undergraduates.

The main objective of this program is to provide an opportunity to undergraduate homoeopathic students to familiarize themselves with research methodology and techniques by being associated for a short duration with their seniors on ongoing research program or by undertaking independent projects. This may serve as an incentive for them to take up research as a career in the future. The Institution must provide the student with all facilities for carrying out research.

The Council has decided to initiate the Short Term Studentship in homoeopathy (STSH) Program for homoeopathic undergraduate students of various medical colleges in the country by awarding limited number of studentships to deserving undergraduate students in March, 2014.

The student is required to register on CCRH website ONLINE from 20th June 2014 to 20th July 2014 and submit the application form and proposal from 21st July 2014 to 5th August 2014.

The received applications and proposals will be evaluated by the Council. Results will be announced in October 2014 and list of selected students displayed on the website. If selected, the student is expected to complete the project between October 2014 and March 2015 and submit the report before the last date of submission i.e. 20th April 2015.

The student will be awarded stipend and certificate only if his/her report is approved.

The value of the studentship will be Rs. 10,000/- only and is meant to be a stipend for the student. Cost of research must be borne by Medical College/ Institution where research is carried out.

For any queries please contact preferably through email:

Dr. Praveen Oberai, Scientist ’4′ / Dr. Chetana Lamba, Scientist-1,
Central Council for Research in Homoeopathy
61-65, Institutional Area, D-Block, Janakpuri, New Delhi – 110058, India

Telephone No.: 91-11-28525523, 28521162
Fax: 91-11-28521060, 28521162
E-mail: sts.ccrh@gmail.com

More at : http://ccrhscholarship.in/
courtesy  : http://homeobook.com/short-term-studentship-in-homoeopathy-program-by-ccrh-apply-now

Homoeopathy Doctor Manoj Rajoria elected to Indian Parliament

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Homoeopathy Doctor Manoj Rajoria BHMS, MD (Hom) has been elected to Indian Parliament

Whole Homoeopathic Fraternity in India  is proud of  Dr.Manoj Rajoria from Rajasthan.

We congratulate you on your success and becoming MP, You will be the voice of thousands of Homoeopaths in the Parliament. You are a dedicated Homoeopath and we know you will work for Homoeopathy too.

Dr Manoj Rajoria, Candidate of 15th Lok Sabha, Affiliated to Bharatiya Janata Party (BJP) serving Karauli Dholpur (RJ) Lok Sabha Constituency.

He took his BHMS from Dr. M.P.K. Homoeopathic Medical College Jaipur

Post Graduate Homoeopathy from  Rajasthan University in 2006

Mobile Phone :  096 67 211234

Website : http://www.drmanojrajoria.com

Source : homeobook.com

होम्योपैथिक क्लीनिकल प्रतिष्ठानों के लिए क्लीनिकल प्रतिष्ठान अधिनियम के तहत न्यूनतम मानकों का ड्राफ्ट समीक्षा के लिये उपलब्ध

clinical establishment actस्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने क्लीनिकल प्रतिष्ठानों के लिए  क्लीनिकल प्रतिष्ठान अधिनियम के तहत न्यूनतम मानकों का ड्राफ्ट  समीक्षा के लिये तैयार  किया है । यह अधिनियम व्यक्तिगत होम्योपैथिक क्लीनिक ( एकल चिकित्सको द्वारा संचालित ) और होम्योपैथिक चिकित्सको द्वारा संचालित नर्सिंग होम दोनो पर लागू होगा। ड्राफ़्ट अभी समीक्षा के लिये है और इसके लिये चिकित्सकों और आम पब्लिक से भी सुझाव  माँगे गये है ।

Download Homeopathy Draft

होम्योपैथिक चिकित्सकों से अनुरोध है कि इन मानकों  को ध्यान पूर्वक पढें और 20/04/2014 से पहले अपने  सुझाव / टिप्पणी / संशोधन डा अनिल कुमार ( सी.एम.ओ. ) कक्ष नं. 506 ‘डी’ विंग , 5 वीं मंजिल , निर्माण भवन , नई दिल्ली 110018 पर या उनके ई मेल आई डी dr.anilkumar@nic.in पर भेज दें । इन सुझावों की दूसरी कापी nsdharmshaktu@yahoo.com को भी प्रेषित अवशय करें ।

ज्ञात हो  हाल मे ही उत्तर प्रदेश मे २८ फ़रवरी २०१३ से लागू भारत सरकार के क्लीनिकल प्रतिष्ठान (पंजीकरण और नियमन) अधिनियम, 2010 ने कम पूँजी वाले चिकित्सकों की नींद उडा दी है । हाँलाकि  यह सरदर्द मात्र होम्योपैथों के लिये नही बल्कि मेडिकल सेवा मे आने वाले हर उस प्रतिषठान की है जिसमॆ एलोपैथिक चिकित्सक , डेन्टल चिकित्सक, डाइगनोस्टिक सेन्टर और आयुष पद्दतियों के सभी चिकित्सक शामिल हैं । एक बार राज्यों द्वारा अपनाने पर इस अधिनियम के अनुसार, राज्य सरकारें क्लीनिकल प्रतिष्ठानों के पंजीकरण के लिए प्रत्येक जिले में पंजीकरण प्राधिकरण की स्थापना करेंगी। किसी भी चिकित्सक को क्लीनिकल प्रतिष्ठान चलाने के लिए इस अधिनियम के प्रावधानों का पालन करना होगा। अधिक जानकारी के लिये http://clinicalestablishments.nic.in/ पर जायें ।

संक्षिप्त में इस एक्ट के अनुसार अब सरकार यह तय करेगी कि क्लीनिक चलाने के लिये आपके पास पर्याप्त जगह हो , प्रक्षिक्षत स्टाफ़ हो , क्लीनिक में शौचालय की व्यवस्था हो , आपातकालीन परिस्थितियों में अगर रोगी का इलाज क्लीनिक मे नही हो सकता है तो उसे पास के अस्पताल तक पहुँचाने के लिये एम्बुलेसं हो , आदि-२ । C.M.O. के पास यह अधिकार होगा कि अगर चिकित्सक एक्ट का पालन नही करता है तो उस पर पहली बार १०००० रु. , दूसरी बार ५०००० रु और तीसरी और अन्तिम बार ५ लाख रु तक का जुर्माना लगाया जाय । एक्ट के अनुसार यदि चिकित्सक मेडिकल सेवा के अलावा और किसी कार्य /कारोबार मे लिप्त पाया जायेगा तो उसे दुराचार ( misconduct ) की संज्ञा दी जायेगी 🙂 विस्तृत जानकारी के लिये यहाँ देखें

 यह सिस्टम आयुष पद्दति के चिकित्सकों के लिये आघात से कम नही है । अगर देखा जाये तो ऐलोपैथिक के  प्रावाधानों को होम्योपैथिक व अन्य आयुष पदद्तियों मे डालने का यह जबरन प्रयास है ।

  • इस एक्ट को समीक्षा के लिये डालने की आवशयकता भी इसलिये पडी क्योकि यदि होम्योपैथी क्लीनिक पर एलोपैथी के मानक तय किये जायेगें तो क्लीनिक खोलना और चलाना कठिन हो जायेगा।
  • इस एक्ट मे होम्योपैथिक के अधिकारियों एवं संस्थाओं तथा प्रतिनिधियों को समुचित स्थान नही दिया गया है तथा जिला स्तर पर भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व नही है जिससे होम्योपैथिक चिकित्सकों के हितों की अनदेखी हो सकती है ।
  • एक्ट के अंतर्गत गठित होने वाली नेशनल कांउनसिल एवं जिला कमेटियों में एलोपैथी की प्रोफ़ेशनल संन्स्थाओं , अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों को अधिक प्रतिनिधित्व दिया गया है परतुं नेशनल कांउनसिल मे भारतीय चिकित्सा पद्धतियों के तीन सदस्यों को स्थान दिया गया है जबकि केन्द्रीय होम्योपैथिक परिषद के मात्र एक प्रतिनिधि को स्थान मिला है ।
  • होम्योपैथिक चिकित्सक के लिये प्रशिक्षित स्टाफ़ उपब्ध हो पाना भी संभव नही है क्योंकि होम्योपैथी मे फ़ार्मासिस्ट का कोई अधिकृत प्रशिक्षण नही है ।

एक्ट नये प्रावधानों के साथ समीक्षा के लिये तैयार है । अब समय है होम्योपैथिक से जुडॆ चिकित्सकों का कि वह अपने सुझावों / टिप्पणियों से  इन प्रावधानों को समयनूकूल और उपयुक्त बनायें ।

Ministry of Health and Family welfare has asked for review of Draft of Minimum standards for Clinical Establishments under Clinical Establishments Act.

Remember
This is everything on Homeopathy individual clinics and hospitals

Kindly go through the minimum standards in Homeopathy carefully and give your suggestions/comments/amendments before 20/04/2014

National Council for Clinical Establishments under the Chairmanship of Director General of Health Services, Government of India in consultation with various stakeholders has prepared draft minimum standards for various categories of Clinical Establishments for implementation of the Clinical Establishments Act.

The comments, suggestions, objections, including deletions /additions if required in the draft documents are invited from public at large, including the stakeholders like hospitals and other clinical establishments, consumer groups etc.

The comments may kindly be sent to Dr. Anil Kumar, CMO(AK) Room No.506 ‘D’ Wing, 5th Floor, Nirman Bhawan, New Delhi-110018 at his email- id dr.anilkumar@nic.in  with in one month of publication of this Notice on the website.

A copy of the same may also be endorsed to nsdharmshaktu@yahoo.com

Note : The Indian Public Health Standards(IPHS) four Sub-centre, PHC, CHC, Sub-district/Sub-divisional hospital and District hospital are already approved documents. The comments are being invited only on the draft minimum standards and not on the IPHS.

Mother Theresa Institute in Pondicherry to start 2-year D pharm courses in Ayurveda, Siddha, Homoeopathy

The Mother Theresa Post Graduate and Research
Institute of Health Sciences in Pondicherry will
start two-year diploma courses in Ayurveda
Pharmacy, Siddha Pharmacy and Homoeopathy
Pharmacy from this academic year onwards, said
Dr R Murali, dean of the Institute.
This is the first time a health educational
institution in Pondicherry is starting D Pharm
course in Ayush subjects. Gujarat Ayurveda
University in Ahmedabad and Aringar Anna
Hospital of ISM in Chennai are the other two
institutes in India conducting D Pharm course in
Ayurveda and in Siddha.
The dean said the department of ISM in the
college is conducting the course in collaboration
with the Ayush department of Pondicherry
government. Message about the commencement
of the course has been sent to the Ayush
department in New Delhi. On completion of the
course, the students will have one month
internship in the ISM PHCs and private clinics in
Pondicherry.
“We got the approval from the government for
starting the course. Now we are waiting for
affiliation from Board of Medical Education,
government of Pondicherry. The course will be
started from this academic year,” he added.
The syllabus of the course will include basic
anatomy, physiology, properties of medicine,
manufacturing process, pharmacology,
pharmacognozy and dispensing practice. Besides,
there will be special papers on drugs store
management, computer application in pharmacy
and health education, the dean said.
Dr K Gopal, principal of the College of Pharmacy
at the Institute said the first three batches will be
absorbed by the Pondicherry government as there
are a lot of vacancies for Ayush pharmacists in
the hospitals and PHCs in the union territory at
present. He said three of the twelve laboratories
in the college are set aside for practical purpose
of the students joining the course. The basic
qualification of the applicant is 10+2.
Dr T Thirunarayanan, secretary of the Centre for
Traditional Medicines and Research said,
previously there was a proposal to start the
diploma course in Siddha in Pondicherry,
subsequently discussion was held with Ayush
secretary. But later it was found that the job
opportunity for the course was very less there,
and the same situation is continuing still now. He
said after three years all the Siddha D Pharm
certificate holders will become jobless.
However, he suggested that the Pondicherry
government could send a minimum of ten
students each to the government Siddha colleges
at Palayamkottai in Thirunelveli and at
Arumbakom in Chennai for the same course and
on completion of the course they could be
appointed as ISM Pharmacists at the PHCs in
Pondicherry. Else, after five years, Pondicherry will
become a state of jobless Siddha pharmacists, he
added.
source : similima