मुसीबत में है होम्योपैथी चिकित्सक …बना सर दर्द क्लीनिकल प्रतिष्ठान (पंजीकरण और नियमन) अधिनियम,2010 – The Clinical Establishments (Registration and Regulation) Act

आयुष पद्दतियों में से होम्योपैथी के लिये एक और बुरी खबर !! पिछ्ले कुछ सालों से अटपटे फ़ैसलों ने चिकित्सकों को सरदर्दी मे डल दिया है । सबसे पहली मार माननीय उच्चतम न्यायालय ने पौंडं पैंकिंग ( ४५० मि.ली. ) की बिक्री पर रोक लगाकर लगाई , छोटी पैंकिग का चलन बढा , राज्य सरकारों को अधिक रेवन्यू की प्राप्ति हुई लेकिन होम्योपैथॊम्के लिये यह सरदद बन के रह गया , उसके बाद कुछ ही सालों के अब्न्दर केन्द्र ने   G.M.P. ( Good Manufacturing Practices ) के   अन्तर्गत होम्योपैथिक दवाओं पर expiry date  को अंकित करना आवशयक कर दिया । एक और बेतुका नियम , जब expiry होती ही नही तो इस चलन को क्यूं लागू किया !!

Do you want such act ?

लेकिन हाल मे ही उत्तर प्रदेश मे २८ फ़रवरी २०१३ से लागू भारत सरकार के  क्लीनिकल प्रतिष्ठान (पंजीकरण और नियमन) अधिनियम, 2010 ने रही सही कसर पूरी कर दी । लेकिन यह सरदर्द मात्र होम्योपैथों के लिये नही बल्कि मेडिकल सेवा मे आने वाले हर उस प्रतिषठान की है जिसमॆ एलोपैथिक चिकित्सक , डेन्टल चिकित्सक, डाइगनोस्टिक सेन्टर  और आयुष पद्दतियों के सभी चिकित्सक शामिल हैं । एक बार राज्यों द्वारा अपनाने पर इस अधिनियम के अनुसार, राज्य सरकारें क्लीनिकल प्रतिष्ठानों के पंजीकरण के लिए प्रत्येक जिले में पंजीकरण प्राधिकरण की स्थापना करेंगी। किसी भी चिकित्सक  को क्लीनिकल प्रतिष्ठान चलाने के लिए इस अधिनियम के प्रावधानों का पालन करना होगा।

अधिक जानकारी के लिये http://clinicalestablishments.nic.in/ पर जायें । हिन्दी में प्रारुप को डाऊनलोड करने के लिये हाँ जायें और अंग्रेजी मे डाउनलोड करें यहाँ से ।

एक्ट की नयी व्यवस्थाओं इतनी अधिक जटिल हैं कि इस के  अनुसार चिकित्सीय स्थापनों  को चलाना अब आसान नही रहा । उत्तर प्रदेश मे दम तोडती चिकित्सा आने वाले दिनों मे किस मोड पर होगी इसका अनुमान लगाना कोई मुशिकिल नही दिखता  । पहले से ही CPMT  मे अरुचि लेते छात्रों का मनूबल नयी व्यवस्था के चलते और भी घटॆगा । कुछ साल पहले जहाँ लाखों छात्र- छात्र्यें CPMT मे शरीक होते थे कुछ सालॊ मे यह प्रतिशत चन्द हजारों तक पहुँच चुका है ।

आखिर देखते है  कि क्या है यह अधिनियम और क्यूं इस एक्ट के लागू होने से आयुष चिकित्सकॊ को कठिनाईयों का सामना करना पडेगा ।

एक्ट क्या  है :

संक्षिप्त रुप मे समझें कि अब सरकार यह तय करेगी कि क्लीनिक चलाने के लिये आपके पास पर्याप्त जगह हो , प्रक्षिक्षत स्टाफ़ हो , क्लीनिक में शौचालय की व्यवस्था हो , आपातकालीन परिस्थितियों में अगर रोगी का इलाज क्लीनिक मे नही हो सकता है तो उसे पास के अस्पताल तक पहुँचाने के लिये एम्बुलेसं हो , आदि-२ ।

C.M.O. के पास यह अधिकार होगा कि अगर चिकित्सक एक्ट का पालन नही करता है तो उस पर पहली बार १०००० रु. , दूसरी बार ५०००० रु और तीसरी और अन्तिम बार ५ लाख रु तक का जुर्माना लगाया जाय ।

एक्ट के अनुसार यदि चिकित्सक मेडिकल सेवा के अलावा और किसी कार्य /कारोबार मे लिप्त पाया जायेगा तो उसे दुराचार ( misconduct ) की संज्ञा दी जायेगी🙂 section 68 part 1

What Is Clinical establishmentAct?

  • This bill makes it mandatory for each and every clinical establishment including every individual clinic, consulting chamber, laboratory or any other investigative or treatment place without indoor beds, nursing homes, hospital etc. by whatever name it may be called to register and follow minimum standards of infrastructure i.e. of space / equipment and qualified para medical staff.
  • It provides for mandatory registration of all clinical establishments, including diagnostic centers and  single-doctor clinics across all recognized systems of medicine both in the public and private sector  except those run by the Defense forces
  • As-is-where-is Initially, provisional registration would be granted within 10 days of application on ‘as- is-where-is basis upon receiving the application filed with supporting documents. Once standards have been notified, permanent registration would be provided to all those conforming to the notified standards.
  • To stabilize the emergencypatient (with its grammatical variations and cognate expressions) means, with respect to an emergency medical condition specified in clause (f), to provide such medical treatment of the condition as may be necessary to assure, within reasonable medical probability, that no material deterioration of the condition is likely to result from or occur during the transfer of the individual from one clinical establishment to other.
  • The registering authoritycan impose fines for non-compliance and if aclinical establishmentfails to pay the same, itwould be recovered as anarrear of land revenue.
  • Penalties for non registration :There are stringent and huge monitory penalties for non registration by any professional, which are more than many criminal penalties of IPC.For First Offence, 10,00 FOR SECOND 50,000,subsequent offenses Rs.5 Lakhs.
  • Any person serving in non registered establishment 25,000/-Disobeying any direction or obstruction to inspection Rs. 5 Lakhs.
  • Rajasthan and UttarPradesh have alreadyadopted the Act.
  • The state government is making an all out effort to crack the whip on private clinics and hospitals with an Act which would require them to declare the amount of fees they charge, the number of services they offer and get registration from the medical authorities to set up a health facility.
  • clinics and private hospitals will have to mention on a display board about the services they are providing and the fees they are charging for that.
  • The proposed Act envisages to have district level committees, which would include district collector, chief medical health officer and superintendent of police.
  • Act would also prescribe minimum quality standards of services at the private clinical establishments. A medical department official said under the Act, no one can open clinics and hospitals without applying for registration. For the first two years, the department would issue temporary registration and after two years, permanent registration would be provided.

होम्योपैथिक चिकित्सकों  के लिये एक्ट के ऋण पक्ष और कुछ सुझाव :

( केन्द्रीय होम्योपैथिक परिषद के सदस्य डां अनुरुद्ध वर्मा से बातचीत के आधार पर )

  • होम्योपैथी में अधिकतर क्लीनिक एकल चिकित्सकॊ द्वारा संचालित किये जाते हैं जिसमें से अधिकतर में चिकित्सक स्वंय ही औषधियों की डिस्पेन्सिंग करते हैं । ऐसी दशा में जब मानक तय किये जाये तब इन्हें एलोपैथी के मानकों पर न कसा जाये क्योंकि होम्योपैथी में कम स्थान , कम उपकरण , कम संसाधन आदि की जरुरत पडती है और चिकत्सक अपने क्लीनिक  से रोगी को औषधि उपलब्ध कराता है ।ऐसे मे होम्योपैथी के लिये क्लीनिक स्थापित करने के लिये अलग मानक तय करना चाहिये । यदि होम्योपैथी क्लीनिक पर एलोपैथी के मानक तय किये जायेगें तो क्लीनिक खोलना और चलाना कठिन हो जायेगा।
  • इस एक्ट मे होम्योपैथिक के अधिकारियों एवं संस्थाओं तथा प्रतिनिधियों को समुचित स्थान नही दिया गया है तथा जिला स्तर पर भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व नही है जिससे होम्योपैथिक चिकित्सकों के हितों की अनदेखी हो सकती है । एक्ट के अंतर्गत गठित होने वाली नेशनल कांउनसिल एवं जिला कमेटियों में एलोपैथी की प्रोफ़ेशनल संन्स्थाओं , अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों को अधिक प्रतिनिधित्व दिया गया है परतुं नेशनल कांउनसिल मे भारतीय चिकित्सा पद्धतियों के तीन सदस्यों को स्थान दिया गया है जबकि केन्द्रीय होम्योपैथिक परिषद के मात्र एक प्रतिनिधि को स्थान मिला है ।
  • होम्योपैथिक चिकित्सक के लिये प्रशिक्षित स्टाफ़ उपब्ध हो पाना भी संभव नही है क्योंकि होम्योपैथी मे फ़ार्मासिस्ट का कोई अधिकृत प्रशिक्षण नही है ।

मौजूदा हाल मे यह एक्ट होम्योपैथिक चिकित्सकों के लिये एक आधात से कम नही है । अधिक्तर मध्यम वर्गों से आने वाले छात्र / छात्रायें और उनके अभिवावक क्या इस बोझ को सह पायेगें ? आगे क्या होगा यह तो समय ही बतायेगा !!

One response to “मुसीबत में है होम्योपैथी चिकित्सक …बना सर दर्द क्लीनिकल प्रतिष्ठान (पंजीकरण और नियमन) अधिनियम,2010 – The Clinical Establishments (Registration and Regulation) Act

  1. पिंगबैक: होम्योपैथिक क्लीनिकल प्रतिष्ठानों के लिए क्लीनिकल प्रतिष्ठान अधिनियम के तहत न्यूनतम मानकों का

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