होम्योपैथिक औषधियों मे expiry date का प्रश्न–कितना जायज ?

 
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यह साल जाते-२ होम्योपैथिक दवाओं पर तीसरी मार दे गया । साल के शुरु मे शुगर आफ़ मिल्क या दुग्ध शर्करा के रेट मे अप्रत्याशित वृद्दि , उसके बाद माननीय  उच्चतम न्यायालय ने पौंडं पैंकिंग ( ४५० मि.ली. ) की बिक्री पर लगायी रोक के कारण ३० मि.ली. की पैकिंग का चलन और अब वर्ष के अंत मे केन्द्र का  G.M.P. ( Good Manufacturing Practices ) के   अन्तर्गत होम्योपैथिक दवाओं पर expiry date  अंकित करना आवशयक हो गया है । देखें यहाँ , यहाँ और यहाँ । मदर टिन्चर और पोटेन्सी पर ५ साल और Ointments और पेटेन्ट पर ३ साल की अवधि तय की गई है । होम्योपैथिक दवाओं  की जानकारी रखता हुआ हर चिकित्सक  यह समझ सकता है यह कितना बेतुका नियम है । फ़िलहाल जो होम्योपैथ दवाओं का काफ़ी लम्बे समय तक स्टाक रखने की सोच रहे हों अब सावधान हो जायें , आपकी जेब पर डाका पडने वाला है🙂

यह भी देखें : ( संबधित पोस्ट )

11 responses to “होम्योपैथिक औषधियों मे expiry date का प्रश्न–कितना जायज ?

  1. यह भी उसी व्यावसायिक जगत की मार है जिस से होमियो पैथी लोहा ले रही है।

  2. I dont think Government is really serious & it shows these authorities are unaware what really homoeopathic medicines are?
    Homoeopathic Companies will not shout at this point b’coz its going to benefit them alot…
    Homoeopathic community must show unity on this issue…

  3. Most of Homoeopaths might be knowing that it is from Dr.Hahnemann’s case book he had given Podophyllum to a patient from a vial about 40 years old and that acted very well.What is the problem with laws and government that they have fixed norms and they want that everybody should fit that criteria. Homoeopathy had its own unique doctrine regarding every part of its science.
    Before imposting such rules government should direct CCRH ( a Govt of India body) to investigate with clinical trial that whether Homoeopathic medicines are really ineffective after years of so.
    If govt is not following this it means they are insulting CCRH and then what is the role of that body. Anyway meantime u will learn phamacuitical companies are behind scene.
    If the above said rule will be followed most of the clinics of India will found guilty.

  4. kaya pound packing sabi ki band ho gayi, means dilutions aur biochamics?

  5. @jinisingh
    dilutions और mother tinctures की पौंड पैंकिग पर तो रोक काफ़ी पहले ही लगा दी गयी थी , धीरे-२ सभी होम्योपैथिक कम्पनियाँ उसको लागू करने मे लगी हैं ।

  6. टंडन साहब कभी गलती से एक बार ETG के बारे में भी जिक्र करिये या मन में कोई विशेष आग्रह धरे बैठे हैं कि बस गुडी-गुडी ही लिखना है……

  7. मनीषा जी . E.T.G. के बारे मे सर्वप्रथम मुझे जानकारी डा. देश बन्धु वाजपेयी जी से कानपुर मे उनके निवस पर हुयी थी । आप उनके ब्लाग पर यह जानकारी प्राप्त कर सकते हैं ।
    http://etgind.wordpress.com/2007/01/31/electro-tridosha-graphy-etg/

  8. डा० टन्डन, सरकार जो कर रही है, वह कुछ मायने में सही है, इसे मैं उचित मानता हू । होम्योपैथी की दवा अनन्त काल तक तो रक्खी नहीं जा सकती, यह कह करके कि यह डा० हैनिमेन या उनके बाद के दूसरे चिकित्सकों द्वारा ऐसा प्रमाणित और निश्चित नहीं किया गया है कि दवा की एक्स्पायरी क्या हो ? आज के युग में जब विज्ञान इतना विकसित है और निरन्तर विकसित हो रहा है, हम २०० या २५० साल पुरानी लकीर लेकर उसी में नही चल सकते ? यह तो पिछड़े पन की निशानी है ? रही बात expiry date छापने की इसे साल दो साल के लिये घटाया बढाया जा सकता है ? भारत में होम्योपैथी की क्या शर्मनाक स्तिथि है, इस पर ध्यान देने की जरूरत है ? सन्गठन के नेता तो अपनी नेतागीरी चमकाने में मस्त हैं, ये सभी होम्योपैथी के नेता सारे होम्योपैथ्स को बेवकूफ और उल्लू बना रहे है । वो कोइ भी हो । आपने अभी अन्दर का हाल नहीं देखा है ? भीतर जाकर ये क्या करते हैं, आप मे से किसी को कुछ पता नहीं है ? अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर होम्योपैथी का हाल देखिये ? हम भले ही अपनी पीठ ठोंक लें , लेकिन हकीकत क्या है, यह समझने की जरूरत है । ।

  9. @ Dr Bajpei ji,

    होम्योपैथी की दवा अनन्त काल तक तो रक्खी नहीं जा सकती, यह कह करके कि यह डा० हैनिमेन या उनके बाद के दूसरे चिकित्सकों द्वारा ऐसा प्रमाणित और निश्चित नहीं किया गया है कि दवा की एक्स्पायरी क्या हो ?

    मन मे कुछ संशय है ; अधिकतर होम्योपैथिक पोटेन्सी अपनी back potencies से बनायी जाती हैं , एक बार मान भी लें कि वर्तमान मे मिल रही पोटेन्सी पर expiry date का लेबल लगेगा तब back potencies का क्या होगा ,क्या वास्तव मे दवा निर्माता उन बैक पोटेन्सी को फ़ेंक कर नयॊ बैक पोटेन्सी का प्रबन्ध करेगें , वर्तमान और भविष्य मे ऐसा नही लगता । अधिकतर बैक हैनिमैन के समय से चली आ रही हैं और उनका विकल्प यह ले आयेगें ऐसा मिमकिन नही प्रतीत होता ।

  10. वर्तमान में होम्योपैथिक दवायें आटोमेटिक पोटेंटाइजर से बनायी जा रही हैं । अब बॆक पोटेंन्सी का जमाना गया । हैनिमेन का भी जमाना गया, जब हाथ से दवायें बनाया करते थे । उस समय और अब इस समय में काफी अन्तर आ गया है । एल्कोहल की क्वालिटी में फर्क है । आप यह अन्तर्भास पुरानी फार्मेसी की किताबों और Homoeopathic Pharmacopiea of India को तुलनात्मक अध्ययन करके देख पढ सकते है ।

  11. पिंगबैक: मुसीबत में है होम्योपैथी चिकित्सक …बना सर दर्द क्लीनिकल प्रतिष्ठान (पंजीकरण और नियमन) अधिनियम,

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