होम्योपैथिक क्लीनिकल प्रतिष्ठानों के लिए क्लीनिकल प्रतिष्ठान अधिनियम के तहत न्यूनतम मानकों का ड्राफ्ट समीक्षा के लिये उपलब्ध

clinical establishment actस्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने क्लीनिकल प्रतिष्ठानों के लिए  क्लीनिकल प्रतिष्ठान अधिनियम के तहत न्यूनतम मानकों का ड्राफ्ट  समीक्षा के लिये तैयार  किया है । यह अधिनियम व्यक्तिगत होम्योपैथिक क्लीनिक ( एकल चिकित्सको द्वारा संचालित ) और होम्योपैथिक चिकित्सको द्वारा संचालित नर्सिंग होम दोनो पर लागू होगा। ड्राफ़्ट अभी समीक्षा के लिये है और इसके लिये चिकित्सकों और आम पब्लिक से भी सुझाव  माँगे गये है ।

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होम्योपैथिक चिकित्सकों से अनुरोध है कि इन मानकों  को ध्यान पूर्वक पढें और 20/04/2014 से पहले अपने  सुझाव / टिप्पणी / संशोधन डा अनिल कुमार ( सी.एम.ओ. ) कक्ष नं. 506 ‘डी’ विंग , 5 वीं मंजिल , निर्माण भवन , नई दिल्ली 110018 पर या उनके ई मेल आई डी dr.anilkumar@nic.in पर भेज दें । इन सुझावों की दूसरी कापी nsdharmshaktu@yahoo.com को भी प्रेषित अवशय करें ।

ज्ञात हो  हाल मे ही उत्तर प्रदेश मे २८ फ़रवरी २०१३ से लागू भारत सरकार के क्लीनिकल प्रतिष्ठान (पंजीकरण और नियमन) अधिनियम, 2010 ने कम पूँजी वाले चिकित्सकों की नींद उडा दी है । हाँलाकि  यह सरदर्द मात्र होम्योपैथों के लिये नही बल्कि मेडिकल सेवा मे आने वाले हर उस प्रतिषठान की है जिसमॆ एलोपैथिक चिकित्सक , डेन्टल चिकित्सक, डाइगनोस्टिक सेन्टर और आयुष पद्दतियों के सभी चिकित्सक शामिल हैं । एक बार राज्यों द्वारा अपनाने पर इस अधिनियम के अनुसार, राज्य सरकारें क्लीनिकल प्रतिष्ठानों के पंजीकरण के लिए प्रत्येक जिले में पंजीकरण प्राधिकरण की स्थापना करेंगी। किसी भी चिकित्सक को क्लीनिकल प्रतिष्ठान चलाने के लिए इस अधिनियम के प्रावधानों का पालन करना होगा। अधिक जानकारी के लिये http://clinicalestablishments.nic.in/ पर जायें ।

संक्षिप्त में इस एक्ट के अनुसार अब सरकार यह तय करेगी कि क्लीनिक चलाने के लिये आपके पास पर्याप्त जगह हो , प्रक्षिक्षत स्टाफ़ हो , क्लीनिक में शौचालय की व्यवस्था हो , आपातकालीन परिस्थितियों में अगर रोगी का इलाज क्लीनिक मे नही हो सकता है तो उसे पास के अस्पताल तक पहुँचाने के लिये एम्बुलेसं हो , आदि-२ । C.M.O. के पास यह अधिकार होगा कि अगर चिकित्सक एक्ट का पालन नही करता है तो उस पर पहली बार १०००० रु. , दूसरी बार ५०००० रु और तीसरी और अन्तिम बार ५ लाख रु तक का जुर्माना लगाया जाय । एक्ट के अनुसार यदि चिकित्सक मेडिकल सेवा के अलावा और किसी कार्य /कारोबार मे लिप्त पाया जायेगा तो उसे दुराचार ( misconduct ) की संज्ञा दी जायेगी :) विस्तृत जानकारी के लिये यहाँ देखें

 यह सिस्टम आयुष पद्दति के चिकित्सकों के लिये आघात से कम नही है । अगर देखा जाये तो ऐलोपैथिक के  प्रावाधानों को होम्योपैथिक व अन्य आयुष पदद्तियों मे डालने का यह जबरन प्रयास है ।

  • इस एक्ट को समीक्षा के लिये डालने की आवशयकता भी इसलिये पडी क्योकि यदि होम्योपैथी क्लीनिक पर एलोपैथी के मानक तय किये जायेगें तो क्लीनिक खोलना और चलाना कठिन हो जायेगा।
  • इस एक्ट मे होम्योपैथिक के अधिकारियों एवं संस्थाओं तथा प्रतिनिधियों को समुचित स्थान नही दिया गया है तथा जिला स्तर पर भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व नही है जिससे होम्योपैथिक चिकित्सकों के हितों की अनदेखी हो सकती है ।
  • एक्ट के अंतर्गत गठित होने वाली नेशनल कांउनसिल एवं जिला कमेटियों में एलोपैथी की प्रोफ़ेशनल संन्स्थाओं , अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों को अधिक प्रतिनिधित्व दिया गया है परतुं नेशनल कांउनसिल मे भारतीय चिकित्सा पद्धतियों के तीन सदस्यों को स्थान दिया गया है जबकि केन्द्रीय होम्योपैथिक परिषद के मात्र एक प्रतिनिधि को स्थान मिला है ।
  • होम्योपैथिक चिकित्सक के लिये प्रशिक्षित स्टाफ़ उपब्ध हो पाना भी संभव नही है क्योंकि होम्योपैथी मे फ़ार्मासिस्ट का कोई अधिकृत प्रशिक्षण नही है ।

एक्ट नये प्रावधानों के साथ समीक्षा के लिये तैयार है । अब समय है होम्योपैथिक से जुडॆ चिकित्सकों का कि वह अपने सुझावों / टिप्पणियों से  इन प्रावधानों को समयनूकूल और उपयुक्त बनायें ।

Ministry of Health and Family welfare has asked for review of Draft of Minimum standards for Clinical Establishments under Clinical Establishments Act.

Remember
This is everything on Homeopathy individual clinics and hospitals

Kindly go through the minimum standards in Homeopathy carefully and give your suggestions/comments/amendments before 20/04/2014

National Council for Clinical Establishments under the Chairmanship of Director General of Health Services, Government of India in consultation with various stakeholders has prepared draft minimum standards for various categories of Clinical Establishments for implementation of the Clinical Establishments Act.

The comments, suggestions, objections, including deletions /additions if required in the draft documents are invited from public at large, including the stakeholders like hospitals and other clinical establishments, consumer groups etc.

The comments may kindly be sent to Dr. Anil Kumar, CMO(AK) Room No.506 ‘D’ Wing, 5th Floor, Nirman Bhawan, New Delhi-110018 at his email- id dr.anilkumar@nic.in  with in one month of publication of this Notice on the website.

A copy of the same may also be endorsed to nsdharmshaktu@yahoo.com

Note : The Indian Public Health Standards(IPHS) four Sub-centre, PHC, CHC, Sub-district/Sub-divisional hospital and District hospital are already approved documents. The comments are being invited only on the draft minimum standards and not on the IPHS.

Cashews Are A Natural Anti-Depressant

natural-anti-depressant

2 handfuls of cashews is the therapeutic equivalent of a prescription dose of Prozac. Inside you, the essential amino acid L-tryptophan is broken down into anxiety-reducing, snooze-inducing niacin. Even more important, tryptophan is also made into serotonin, one of your body’s most important neurotransmitters. Serotonin gives a feeling of well-being and mellowness, or as the Australians would say, “no worries.” This is such a profound effect that Prozac, Paxil and similar antidepressants usually either mimic serotonin or artificially keep the body’s own serotonin levels high. You can do the same thing with your food. And no one can tell us that beans, peas, cheese, nuts and wheat germ are toxic if you eat a lot of them!

Plenty of carbohydrates (starches) in your meals help tryptophan get to where it does the most good: in your brain. In order to cross the blood-brain barrier to get in, carbos are required. So cheese and crackers provides a better effect than the cheese standing alone. An egg or two on toast is better than just the egg. Beans, peas, and nuts already contain carbohydrate, so you are all set there.

Consider that five servings of beans, a few portions of peanut butter, or just one big handful of cashews provides one to two thousand milligrams of tryptophan, which will work as well as prescription antidepressants… but don’t tell the drug companies. Some skeptics think that the pharmaceutical people already know. Here are two quotes in evidence:

“Pay careful attention to what is happening with dietary supplements in the legislative arena… If these efforts are successful, there could be created a class of products to compete with approved drugs. The establishment of a separate regulatory category for supplements could undercut exclusivity rights enjoyed by the holders of approved drug applications.” (Source: FDA Deputy Commissioner for Policy David Adams, at the Drug Information Association Annual Meeting, July 12, 1993)

Read the whole article :

http://www.thebuddhistvision.com/cashews-are-a-natural-anti-depressant/

Post Graduate Courses after BHMS | Homeo Book

B.H.M.S. पूरा करने के बाद post graduste courses की एक वृहद लिस्ट
को शेऐर कर रहे है डा. मंसूर अली और डा. शिव कुमार , देखे :

Post Graduate Courses after BHMS | Homeo Book.

Download books on Homeopathy

Originally posted on Science-based Homeopathy:

38 books by 8 stalwarts.

Click on the image to view/download.

DR. SAMUEL HAHNEMANN, M.D. (5)

Organon of Medicine 6th ed.

Organon of Medicine 6th ed.

Materia Medica vol. 3

Materia Medica vol. 3

The Chronic Diseases

The Chronic Diseases

The Medicine of ExperienceThe Effects of Coffee

DR. JAMES TYLER KENT, M.D. (9)

Materia Medica

Materia Medica

Repertory

Repertory

Lesser Writings

Lesser Writings

New Remedies

New Remedies

Clinical Cases

Clinical Cases

Successful Prescriptions

Successful Prescriptions

Philosphy

Philosophy

AphorismsSexual Neuroses

Sexual Neuroses

DR. CLEMENS BOENNINGHAUSEN (5)

Materia Medica and Repertory

Materia Medica and Repertory

Fevers

Intermittent Fevers

therapeutic pocketbookDrug Affinitieslesser writings

DR. CYRUS MAXWELL BOGER, M.D. (5)

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कितना असुरक्षित है आपका ICICI Debit cum ATM card

आम तौर मै  ATM कार्ड  का  प्रयोग नही करता , क्रेडिट  कार्ड मेरे पास है नही , हाँ , इधर कुछ सालों से इन्टर्नेट  बैंकिग मुझे अधिक मुफ़ीद लगती है लेकिन कुछ दिन पहले एक दिक्कत आ पडी  जिसका अनुभव मेरा बहुत ही खराब रहा ।

कुछ दिन पहले गूगल प्ले पर एक एन्डॊरॆड एप्स मैने देखी थी जिसको लेने का मन  हुआ। Runtastic  pedometer नाम की  इस  एप्स की खरीद के लिये जब मैने किल्क किया तो मुझे इन्टेर्नेट बैंकिग को छोडकर बाकी सारे आपशन मिले  । वीजा / मास्टर डेबिट कम ATM कार्ड या फ़िर क्रेडिट कार्ड । क्रेडिट कार्ड न होने के कारण वीजा / मास्टर डेबिट कम ATM कार्ड ही अकेला आपशन था । स्टेट बैंक के मास्टर कार्ड को गूगल ने accept नही किया लेकिन ICICI के वीजा कार्ड को उसने एक बार मे ही ले लिया ।

google wallet

अब आवशकता  थी कुछ औपचाकरिकताओं की , जिसमें कार्ड नम्बर, कार्ड की expiry और security code और अपना नाम और पता को डालना था । इन सब स्टेज को पूरा कर के आगे बढे ही थे कि पेमन्ट अचानक हो गया । बिना कोई पासवर्ड माँगे , कोई भी O.T.P. ( One Time Password ) की सूचना मोबाईल पर नही आये बिना पेमेन्ट हो गया ।

One Time Password (OTP) has been introduced as an additional security feature by ‘ICICI Bank i-safe’ to protect your account from online fraud. OTP is a six digit code sent to resident customers on mobile and NRI customers on e-mail ID registered with ICICI Bank. OTP will be sent to you only when the system suspects unusual activity or change in your Internet Banking Access pattern and you will be asked to enter the OTP when you log in next.

OTP is confidential and should not be shared with anyone, even if the person claims to be an ICICI Bank official.

Please ensure that your mobile number and your email ID is updated with us to be able to transact online.

http://www.icicibank.com/online-services/otp-faq.html#1

मेरा दिमाग सन्न रह गया । यह कार्ड नम्बर अब गूगल पर स्टोर था , जाहिर है कोई भी इसका गलत इस्तेमाल कर सकता था । वह बात अलग कि बाद में गूगल वालट से हटाने का तरीका भी ढूँढना पडा ।

लेकिन बात आनलाइन बैंकिग की थी जिसका एक पक्ष ICICI bank था । अगले दिन मैं ICICI बैंक की महानगर – लखनऊ शाखा मे गया , बैक के मैनेजर और अन्य यह मानने को तैयार नही थे कि बिना पासवर्ड के या O.T.P. के यह कैसे संभव है । उन्होनें मुझे customer care को संपर्क करने के लिया कहा ।

customer care , ICICI bank का जबाब तो और भी निराला था ,पूरी जानकारी लेने के बाद उसका कहना था कि कुछ secured sites पर जैसे गूगल पर यह नियम लागू नही होता । मैं विवेक शून्य रह गया , उसका धन्यवाद किया और फ़ोन को रख दिया । लेकिन मुझे सबक मिल चुका था कि  डेबिट कार्ड का अब मै भविष्य मे प्रयोग न करुँ ।

Mother Theresa Institute in Pondicherry to start 2-year D pharm courses in Ayurveda, Siddha, Homoeopathy

The Mother Theresa Post Graduate and Research
Institute of Health Sciences in Pondicherry will
start two-year diploma courses in Ayurveda
Pharmacy, Siddha Pharmacy and Homoeopathy
Pharmacy from this academic year onwards, said
Dr R Murali, dean of the Institute.
This is the first time a health educational
institution in Pondicherry is starting D Pharm
course in Ayush subjects. Gujarat Ayurveda
University in Ahmedabad and Aringar Anna
Hospital of ISM in Chennai are the other two
institutes in India conducting D Pharm course in
Ayurveda and in Siddha.
The dean said the department of ISM in the
college is conducting the course in collaboration
with the Ayush department of Pondicherry
government. Message about the commencement
of the course has been sent to the Ayush
department in New Delhi. On completion of the
course, the students will have one month
internship in the ISM PHCs and private clinics in
Pondicherry.
“We got the approval from the government for
starting the course. Now we are waiting for
affiliation from Board of Medical Education,
government of Pondicherry. The course will be
started from this academic year,” he added.
The syllabus of the course will include basic
anatomy, physiology, properties of medicine,
manufacturing process, pharmacology,
pharmacognozy and dispensing practice. Besides,
there will be special papers on drugs store
management, computer application in pharmacy
and health education, the dean said.
Dr K Gopal, principal of the College of Pharmacy
at the Institute said the first three batches will be
absorbed by the Pondicherry government as there
are a lot of vacancies for Ayush pharmacists in
the hospitals and PHCs in the union territory at
present. He said three of the twelve laboratories
in the college are set aside for practical purpose
of the students joining the course. The basic
qualification of the applicant is 10+2.
Dr T Thirunarayanan, secretary of the Centre for
Traditional Medicines and Research said,
previously there was a proposal to start the
diploma course in Siddha in Pondicherry,
subsequently discussion was held with Ayush
secretary. But later it was found that the job
opportunity for the course was very less there,
and the same situation is continuing still now. He
said after three years all the Siddha D Pharm
certificate holders will become jobless.
However, he suggested that the Pondicherry
government could send a minimum of ten
students each to the government Siddha colleges
at Palayamkottai in Thirunelveli and at
Arumbakom in Chennai for the same course and
on completion of the course they could be
appointed as ISM Pharmacists at the PHCs in
Pondicherry. Else, after five years, Pondicherry will
become a state of jobless Siddha pharmacists, he
added.
source : similima

Stop self-promotion, Maha med council tells 5 doctors

According to code of Medical Ethics, no doctor can indulge in any advertisement to promote himself or his/ her practice. However the MMC says that it has been receiving many complaints on doctors flouting the rule.

The spotlight is on doctors and hospitals advertising to promote their practice.

The Maharashtra Medical Council (MMC)’s decision to penalise five doctors from Maharashtra, including two from Mumbai, for violating the medical code of ethics has sounded a strong message to the medical fraternity.

With the move, MMC has made it clear that any kind of advertising by doctors will be dealt with strictly. It has issued warning to the five doctors and asked them to submit an unconditional apology.

According to code of Medical Ethics, no doctor can indulge in any advertisement to promote himself or his/ her practice. However the MMC says that it has been receiving many complaints on doctors flouting the rule.

Dr Kishor Taori, chairman of MMC, said, “While we all know that section 6.1 of the MCI’s Code of Medical Ethics says a doctor cannot advertise for himself or herself alone or together with other doctors. The doctors were found guilty of advertising themselves and have transgressed the medical Code of Ethics.”

The doctors who got the first warning from the Maharashtra Medical Council are Dr Anil Patil and Dr Amarnath Upadhye from Mumbai, Dr Shaukat Kazi (Pune), Dr Lohiya Bhagwandas and Dr Umesh Mundada — both from Aurangabad.

According to the MMC, doctors found flouting the rule can invite punishment ranging from a warning letter to cancellation of their registration depending on the seriousness of the crime.

“Since this is their first offence, we have issued warning and asked them to submit an unconditional apology. This step should be a deterrent to others and people should learn from this episode,” said Dr Taori.

The Maharashtra Medical Council will also talk to the appropriate authority to cancel registration of the hospital or establishments found advertising.