मेरी डायरी से -बैच फ़्लावर औषधि -‘Vine’ – ‘वाइन’ और ‘वरवैन’ ( Vervain )

 Vitis-vinifera

हिप्पोक्रेट्स से लेकर गैलन और फ़िर हैनिमैन ने इन्सान के स्वाभाव का विशेलेषण करने मे बहुत अंह भूमिका निभायी . जहाँ हिप्पोक्रेट्स (400 ई.पू.) का मानना था कि शरीर चार humors अर्थात रक्त,कफ, पीला पित्त और काला पित्त से बना है. Humors का असंतुलन, सभी रोगों का कारण है . वही गैलन Galen (130-200 ई.) ने इस शब्द  का इस्तेमाल  शारीरिक स्वभाव के लिये किया , जो यह निर्धारित करता है  कि शरीर  रोग के प्रति किस हद तक संवेदन्शील है । हिप्पोक्रेट के  Humour शब्द का तात्पर्य शरीर मे प्रवाहित हो रहे तरल पद्दार्थ से था हाँलाकि यह तकनीकी रुप से यह प्रचलित भावनाओं से जुडा था जैसे :

प्रसन्नता या खुशी का रक्त से संबध – सैन्गूयूनि टेम्परामेन्ट (Sanguine Temperament)
कफ़ का चिंता और मननशीलता से संबध – फ़ेलेगमेटेक ( phlegmatic Temperament)
पीले पित्त का क्रोध से संबध – कोरिक (Choleric Temperament)
उदासी का काले पित्त से – मेलोन्कोलिक (Melancholic Temperament)

इन चार स्वभावों को हम एक सक्षिप्त  उदाहरंण से  आसानी से समझ सकते हैं । एक होटल मे चार मित्र  सूप पीने जाते है । लेकिन अचानक चारों की नजर सूप मे तैरते बाल की तरफ़ पड जाती है  पहला  मित्र देखते ही आग बबूला हो उठा , गुस्से से उसने सूप का प्याला वेटर के मुँह पर दे मारा ( Choleric ) , दूसरे ने मुँह बनाया  अपने कोट को झाडा और सीटी बजाता हुआ निकल गया (Sanguine) , और तीसरा रुँआसा सा हो गया और बोला कि यह सब उसी की जिदंगी मे अक्सर क्यूं होता रहता है (Melancholic ) और चौथा मित्र तो बडे दिमाग वाला निकला , सूप मे से बाल को किनारे किया ;सूप पिया और वेटर से नुकसान हुये सूप के बदले दूसरे सूप की फ़रमाईश भी कर डाली ( phlegmatic)

इन चार स्वभावों के व्यक्तितव के कुछ  धन पक्ष भी हैं और  ॠण पक्ष भी  :

hippocratic temperament

4 humours in respective order: choleric, melancholic, phlegmatic, and sanguine

सैन्गूयूनि टेम्परामेन्ट (Sanguine Temperament):

धन पक्ष : हमेशा प्रसन्न रहने वाले, आत्मविशवास से भरपूर , आशावादी , बहिर्मुखी और जीवन को जीने वाले ।

ॠण पक्ष :आत्मसंतोष की कमी , संवेदन्शील, अल्पज्ञता, अस्थिरता, बाहरी दिखावा करने वाले और ईर्ष्या को झुकाव ।

फ़ेलेगमेटेक टेम्परामेन्ट ( phlegmatic Temperament) :

धन पक्ष :   अच्छी तरह से संतुलित,  जीवन के साथ संगत, भरोसेमंद, रचनात्मक और विचारशील, संतुष्ट

ॠण पक्ष : आलसी, अकर्मण्य . अपने  कर्तव्य की उपेक्षा ,  दुविधाग्रस्त, अपने कर्तवों  को टालने वाले , महत्वाकांक्षा विहीन ,  दूसरों को भी प्रेरित न कर पाना

कोरिक टेम्परामेन्ट (Choleric Temperament):

धन पक्ष : मजबूल इच्छाशक्ति वाले , दुनिया को अपने तरीके से चलाने वाले , आत्मविशवास से भरपूर

ॠण पक्ष : प्रचंड गुस्सा , अपने को श्रेष्ठ समझना , विरोधों को सहन न कर पाना , सहानभूति का अभाव , जीवन मे छ्ल , कपट और पाखंड का सहारा लेना

मेलोन्कोलिक टेम्परामेन्ट (Melancholic Temperament) :

धन पक्ष : प्रतिभाशाली, बेहद रचनात्मक , संवेदनशील, सपने देखने वाले , अतंर्मुखी, विचारशील,  आत्म त्याग की भावना से भरपूर , जिम्मेदार, विश्वसनीय

ॠण पक्ष : चिंता और अवसाद ग्रस्त , अपनी प्रतिभा का कम उपयोग करने वाले , मुखरता की कमी , आसानी से किसी को माफ़ न कर पाना , बेहद संवेदनशील

पूरी पोस्ट के लिये देखें : व्यक्तित्व विकास, शारीरिक भाषा और होम्योपैथी – एक अभिनव अवधारणा ( Constitutional Prescribing ,Body Language and Homeopathy )

लेकिन क्या यह संभव है कि व्यक्ति के स्वभाव मे दवायें बदलाव ला सकॆ । बहुधा  यह देखा गया है कि  लम्बे समय तक चारित्रिक लक्षणॊं के आधार पर चयनित खोम्योपैथिक औषधियां  व्यवाहार मे परिवर्तन अवशय लाती हैं । हाँलाकि कई होम्योपैथिक चिकित्सक  जैसे केन्ट ने लेसर राइटिगं मे इस तथ्य से इनकार किया है कि यह व्यक्ति के स्वभाव को बदल स्कती है। हाँ , यह लक्षण स्वभावत: दवाओं के चयन में अवशय कारगर होते हैं ।

लेकिन बैच फ़्लावर औषधियों के बारे मे कम से कम मैं कह सकता हूँ कि इनका कार्य मन के उस भाव को पकडने में कमयाब रहता है जिससे स्वभाव मे बदलाव की अपेक्षा हम कर सकते है ।

एक औषधि जो मुझे हमेशा स्मरण रही वह थी वाइन । हाँलाकि वाइन का इस्तेमाल मैने अधिक नही किया लेकिन  एक केस जो मुझे हमेशा स्मरण रहा और उसकी वजह से वाइन के  लक्षण भी ।

tyranny

दो साल पहले एक २८ वर्षीय युवक मे इसके प्रयोग करने का मौका मिला ।   पेशे से वह बिल्डिग कान्टॆकटर्था  और अधिकतर उसके  कार्य सरकारी क्षेत्रों मे चलते थे । देखने और व्यवहार  में वह स्मार्ट और खूबसूरत था  , कपडे पहनने से लेकर बोलने मे एक गरिमा थी , और  जीवन मे पैसा भी था और शौहरत  भी  ।  पिछ्ले कुछ समय से वह मेरे पास तनाव आदि समस्याओं के लिये इलाज कराता रहा  जो उसके कार्य को  देखते हुये स्वभाविक भी था क्योंकि उसके अनुसार अकसर भुगतान वगैरह की समस्याओं से उसे दो चार होना पडता था ।

कुछ महीने पूर्व उसका विवाह हुआ और इस दौरान मैने अकसर क्लीनिक मे उसको अपनी पत्नी से अकसर बिना बात झँझट करते देखा  । एक दिन उसके पिता ने ने मुझसे संपर्क किया कि वह मुझसे अपने पुत्र मे हो रहे असमान्य  व्यवाहर मे परिवर्तन के बारे मे सलाह लेना चाहते हैं  । उनके अनुसार “ मेरे लडके की प्रवृति घर हो या बाहर अपने  वर्चस्व को सबसे ऊपर रखने  की रहती है । वह यह चाहता है सब उस के अनुसार चलें । घर मे माँ , बहन या बाहर भी हर किसी के साथ उसकी नही बनती । हालाकि वह बहुत मेहनती भी है लेकिन इस स्वभाव के कारण अब तक तो ठीक  ठाक रहा क्योंकि हम उसके व्यवहार को नंजरदाज करते रहे । लेकिन अब पत्नी के आने के बाद उसका स्वभाव एक घर मे अधिक तनाव का कारण बन सा गया है । क्या होम्योपैथिक इसमे कुछ मदद कर सकती है ? ”

होम्योपैथिक  तो नही हाँ बैच फ़्लावर औषधि ‘वाइन’ को अन्य होम्योपैथिक दवाओं के साथ  जोड दिया गया , लम्बे समय तक चलने के दौरान मैने और खासकर उसके परिवार के लोगों ने उसके स्वभाव मे एक बढिया परिवर्तन देखा । न तो वह झगाडालू  रहा और न तानाशाह । और  यह संभव हुआ बैच फ़लावर औषधि ‘वाइन ‘से ।

तो क्या था वाइन मे जो श्री रा.स. के ऋण पक्ष को धन पक्ष मे बदलने मे मदददगार साबित हुआ ।

विटीऐसी परिवार की वाइन या ‘ वाइटस विनीफ़ेरा ‘के मानसिक लक्षण किसी तानाशाही व्यक्ति की प्रवृति से मिलते जुलते हैं । अत्यन्त अंहकारी , अभिलाषायें  बहुत ही उँची  , दूसरों पर छा जाने की प्रवृति, अपनी प्रभुता कायम रखना , अपने उद्देशय को पाने के लिये कुछ भी कर देना , तानाशाही स्वभाव

वाइन या अंगूर का वनस्पति नाम  ‘ वाइटस विनीफ़ेरा ‘ है  । होम्योपैथिक दवाओं मे इसके प्रयोग नही मिलते हैं , अलबत्ता यह आयुर्वेर्दिक और यूनानी दवाऒं मे अधिक प्रयोग होता है ।

हाँलाकि होम्योपैथिक दवाओं मे इससे सादृश दवायें लक्षणॊ के आधार पर चयन की जाती हैं । मुख्य लक्षण जो इस व्यक्तितव  के लिये प्रमुख हैं :

MIND – DICTATORIAL
MIND – DICTATORIAL – power, love of
MIND – HAUGHTY
MIND – EGOTISM
MIND – CONTEMPTUOUS

वाइन के सादृश औषधि है वरवैन ( vervain ) ।  वरवैन का रोगी भी जरुरत से अधिक उत्साह और अपनी शक्ति से अधिक कम करने का जनूनी होता है । लेकिन जहाँ वरवैन का जनून दूसरों के लिये मिसाल बनता है वही वाइन दूसरों से हुक्म बजाने मे अपनी महत्त्ता समझता है ।

Vine
Botanical
: Vitis Vinifera
Family: Vitaceae
Homeopathic remedy: Not used.
Description: Perennial, woody climbing vine; the  stems can grow up to 35 m length, but in cultivation usually reduced by annual pruning to 1–3 m. The leaves ar equite thin, circular to circular-ovate with branched tendrils. The fruits of the are used to produce vine or juice that can be directly consumed.
Medicinal  uses:  Analgesic,  Antiinflammatory,  Astringent,  Demulcent,  Diuretic,  Hepatic,  Laxative,
Lithontripic
Compare: Vervain
Keywords: Confident, Persuasive, Tyrannical, Self-assured
Dr Bach’s description
: Very capable people, certain of their own ability, confident of success. Being so assured, they think that it would be for the benefit of others if they could be persuaded to do things as they themselves do, or as they are certain is right. Even in illness they will direct their attendants. They may be of great value in emergency.
Essence: The Vine is a very capable person that is confident of his skills, ability and knowledge. He is
certain  that  he  is right  and he feels  that  other people should persuaded by him  to follow his goals, because these goals are the correct ones. In the positive state, this kind of people are very valuable in the crisis situations,  because  they have a clear idea about what  should be done and they will  guide others from the uncertainty.
In the negative state, the Vine tends to be very stubborn, overly self-confident and he forces other to do exactly as he commands. He may even use force to persuade them to what he wants. He tends to be tyrannical and he suppresses all opposition with all means necessary. This train manifests in the times of  sickness.  Although  the Vine person may have no knowledge of   the medical  procedures,  he will command the hospital personnel and he will direct them as he sees fit.
The difference between the Vervain and the Vine is that while the Vervain persuades others to follow his way by the means of example and with his enthusiastic energy, the Vine person is not interested in setting an example. He will force others to do as he commands without any thoughts whether this is right or not.

यह  भी देखें :

सनस्ट्रोक या लू लगना

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गर्मी उफ़ान पर है , इस वर्ष लखनऊ का तापमान गत वर्षों के अपेक्षा अधिक ही दिख रहा है और पिछले कई दिनों मे आने वाले रोगियों मे भी तापाघात या heat stroke के केस अधिक ही दिखे । थोडी सी सावधानी , होम्योपैथिक औषधियों का सही लक्षणॊं पर चुनाव लू लगने के केसों को सरलता और सुगमता से निपटा सकते  हैं ।

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Homeopathy Beyond Myopia

Reblogged from The John Benneth Journal:

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Homeopathy, the legal view.

The case against it picks up steam

Here we go again . .

After 200 years of phenomenal growth, clinical use for over 70,000 symptoms and superior results in epidemics and popularity among loyal users, there is still great opposition, it would seem, to homeopathy.

Here’s the latest. Apparently some jurist pedant in Australia has just discovered homeopathy, and a well known critic of homeopathy is trying to take it to the bank .

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होम्योपैथी दवाओं के लिए नोएडा में पौधों का संरक्षण

Homeopathic medication

होम्योपैथी पद्दति में  करीब 1400 प्रकार की दवाएं पौधों से बनती हैं। इनमें 50 से ज्यादा पौधे ऐसे हैं, जिनका इस्तेमाल सिर से लेकर पैर तक के रोगों की कारगर दवा बनाने के लिए किया जाता है। ऐसे ही चार दर्जन से अधिक पौधों का सेक्टर-24 स्थित केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान केंद्र संरक्षण कर रहा है। इसके लिए अनुसंधान केंद्र में ग्रीन हाउस बनाने की भी तैयारी है। इस केंद्र में नई दवाओं को इजाद करने के लिए कई शोध भी किए जा रहे हैं।
अनुसंधान केंद्र के वनस्पति वैज्ञानिक अरुण कुमार तिवारी ने बताया कि हर छोटे और बड़े औषधीय पौधे की अपनी खासियत होती है। यह पौधे गंभीर बीमारियों के इलाज की क्षमता रखते हैं। यही वजह है कि यहां पौधों से दवाएं बनाने के अलावा उनकी अन्य गुणवत्ताओं की खोजों पर भी काम किया जाता है। समय-समय पर किए जाने वाले शोधों से बेहतरीन दवा इजाद की जाती है। एक दवा को बनाने के लिए एक ही प्रजाति के तीन से चार पौधों का रस निकाला जाता है। जिस पौधे से ज्यादा रस निकालता है, उसी से ज्यादा कारगर दवा बनती है। रस को सुखाया जाता है और एल्कोहल मिलाकर दवा बनाई जाती है। अरुण कुमार ने बताया कि अनुसंधान केंद्र की छत पर एक छोटा सा ग्रीन हाउस बनाया जाएगा, जिसमें पौधे और भी सुरक्षित रहेंगे।
कुछ प्रमुख पौधे
 वसाका
इस्तेमाल में आने वाला भाग- पत्तियां
उपयोग- सर्दी-जुकाम, खांसी
——
आंवला
इस्तेमाल में आने वाला भाग- फल
उपयोग- रक्त शोधक
——-
 इमली
इस्तेमाल में आने वाला भाग- फल
उपयोग- सर्दी-जुकाम, बदजहमी
——-
सलपर्णी
इस्तेमाल में आने वाला भाग- जड़
उपयोग- बुखार, सिरदर्द, मेनेनजाइटिस
—–
 लाेंग
इस्तेमाल में आने वाला भाग- फल
उपयोग- बुखार, कफ निस्सारक
——
अश्वगंधा
इस्तेमाल में आने वाला भाग- जड़ें
उपयोग- फेरेंजाइटिस, बवासीर और बुखार
——
सतावर
इस्तेमाल में आने वाला भाग- अंकुरित हिस्सा
उपयोग- मधुमेह
——
 जामुन
इस्तेमाल में आने वाला भाग- बीज
उपयोग- मधुमेह और मुहांसे
——
एलोवेरा
इस्तेमाल में आने वाला भाग- पत्तियां
उपयोग- बवासीर और डायरिया
——-
पौधा- गिलोय
इस्तेमाल में आने वाला भाग- तना और जड़
उपयोग- पीलिया और कमजोरी
——–
पौधा- पत्थर चूर
इस्तेमाल में आने वाला भाग- पत्तियां
उपयोग- पेशाब संबंधी दिक्कतों का इलाज
——-
पौधा- कालमेध
इस्तेमाल में आने वाला भाग- पूरा पौधा
उपयोग-सर्दी- जुकाम, खांसी और पीलिया
——
पौधा- जटरोफा
इस्तेमाल में आने वाला भाग- बीज
उपयोग- हैजा, डायरिया, बदहजमी
——-
पौधे- कुंदरू
इस्तेमाल में आने वाला भाग- पत्तियां
उपयोग- मधुमेह
——-
पौधे- सर्पगंधा
इस्तेमाल में आने वाला भाग- जड़े
उपयोग- हाइपरटेंशन
——-
पौधा- सतावर
इस्तेमाल में आने वाला भाग- जड़
उपयोग- महिलाओं के लिए शक्तिवर्धक
———-
(इनको मिलाकर करीब 50 किस्मों के पौधे अनुसंधान केंद्र में मौजूद हैं)

2013 के मध्य में शुरू होगा म्यूजियम
अनुसंधान केंद्र की सबसे ऊपरी मंजिल पर बन रहा म्यूजियम 2013 के मध्य में शुरू होगा। अनुसंधान केंद्र के उपनिदेशक डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि इस म्यूजियम में होम्योपैथी की शुरुआत, दवाओं और भविष्य में होने वाले शोध की जानकारी थ्री-डी और फोर-डी के जरिए दी जाएगी। म्यूजियम में 50 सीटों का एक छोटा सा हॉल भी होगा, जिसमें होम्योपैथी पर डॉक्यूमेंट्री मूवी दिखाई जाएगी।

साभार : अमर उजाला दिनांक १०-४-२०१२

DOWNLOAD REPERTORIAL PART OF "SENSATION AS IF" by H.A.ROBERTS

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The basis of the material was secured from three major works : Hering’s Guiding Symptoms, Clarke’s Dictionary and Allen’s Handbook. Frequent references have been made to Allen’s Encyclopædia. Other volumes less well known, and including Anshutz’s New, Old and Forgotten Remedies , have served in adding further symptoms.

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A bouquet of Homeopathic books in pdb format ( special 257th Hahnemann Birthday edition )

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This set contains 34 books & ISILO  software needed to open these books.

1. THE ENCYCLOPEDIA OF PURE MATERIA MEDICA By TIMOTHY F. ALLEN, A.M., M.D.

2. Keynotes And Characteristics With Comparisons of some of the Leading Remedies of the Materia Medica Henry C. Allen, M. D.

3.First Lessons in the Symptomatology of Leading Homœopathic Remedies by H. R. Arndt, M. D.

4.BONNINGHAUSEN’S CHARACTERISTICS MATERIA MEDICA & REPERTORY. by C. M. BOGER, M.D.

5. How To Use The Repertory with A Practical Analysis of Forty Homeopathic Remedies by Glen Irving Bidwell, M.D.

6. BŒNNINGHAUSEN’S CHARACTERISTICS MATERIA MEDICA by C. M. BOGER, M.D.

7. HOMŒOPATHIC MATERIA MEDICA by William BOERICKE, M.D

8. REPERTORY by Oscar E. BOERICKE, M.D

9. Studies in the Philosophy of Healing and others writing including The study of materia medica and taking the case 
C. M. BOGER

10. A SYNOPTIC KEY OF THE MATERIA MEDICA By Cyrus Maxwell BOGER

11. A DICTIONARY OF PRACTICAL MATERIA MEDICA By John Henry CLARKE, M.D.

12. The Genius of Homeopathy Lectures and Essays on Homeopathic Philosophy By Dr Stuart M. CLOSE

13. Practice of Homoeopathy By Paul F. Curie, M. D.

14. DECACHORDS  by A. Gladstone Clarke.

15. A DICTIONARY OF PRACTICAL MATERIA MEDICA By John Henry CLARKE, M.D.

16. KEY-NOTES TO THE MATERIA MEDICA by HENRY N. GUERNSEY, M.D

17. Chronic Diseases – Samuel Hahnemann

18. ORGANON OF MEDICINE by Hahnemann Samuel

19. SEVEN-HUNDRED RED LINE SYMPTOMS from COWPERTHWAITE’S MATERIA MEDICA Rewritten by J. W. Hutchison, M. D.

20. The Mnemonic Similiad by Stacy Jones

21. Kent’s Aphorisms and Precepts from extemporaneous lectures

22. CLINICAL CASES By Pr James Tyler Kent

23. LECTURES ON HOMOEOPATHIC PHILOSOPHY BY James Tyler KENT, A.M., M.D.

24. LECTURES ON HOMŒOPATHIC MATERIA MEDICA by JAMES TYLER KENT, A.M., M.D.

25. What the doctor needs to know in order to make a successful prescription By Dr James Tyler Kent

26. KENT’S NEW REMEDIES

27. KENT’S REPERTORY

28. LESSER WRITINGS by Dr J. T. KENT

29. Keynotes Of The Homoeopathic Materia Medica by Dr. Adolph VON LIPPE

30. Regional Leaders by E. B. Nash, M. D.

31. Leaders In Homoeopathic Therapeutics by E. B. NASH

32. The principles and Art of Cure by Homœopathy by HERBERT A. ROBERTS, M.D.

33. Compendium Mental diseases and their modern treatment By Professor Selden Haines Talcott (A.M., M.D., Ph.D)

34. THE PRESCRIBER  by John Henry Clarke

35. ISILO : software needed to open the pdb books

Download Linkhttp://www.mediafire.com/?yeqtugajq1w

 

DOWNLOAD REDISCOVERY OF HOMEOPATHY, the book.

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Rediscovery of Homoeopathy

Mandanlal L. Sehgal

ROH Book Series(I-X) Total of 11 books. I-VIII, Written by Dr. M. L. Sehgal. IX- X, Co-authoured by Dr. Sanjay Sehgal and Dr. Yogesh Sehgal. Forword:

Anything new at first appears strange, also it invites two types of reactions. One is acceptance and the other is rejection.

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डॉ. क्रिश्चियन फ्राइडरिक सैमुअल हैनिमेन- जन्म दिवस पर विशेष ( A Tribute to Dr Samuel Hahnemann )

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more about "A Tribute to Dr Samuel Hahnemann", posted with vodpod

इतिहास के चन्द पन्नों को समटेने की कोशिश करते हुये आँखे नम सी हो जाती हैं । मेरे सामने ब्रैडफ़ोर्ड की " लाइफ़ एन्ड लेटर आफ़ हैनिमैन " और हैल की " लाइफ़ एन्ड वर्कस आफ़ हैनिमैन " के उडते हुये पन्ने मानों वक्त को एक बार फ़िर समेट सा  रहे हैं । यह पुस्तकें मैने शौकिया अपने कालेज के दिनों मे ली थी लेकिन कभी भी पढने की फ़ुर्सत न मिली  । पिछ्ले साल जब hpathy.com के डा.

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मेरी डायरी से -“बैच फ़्लावर औषधि–पाइन”

pine

वनस्पति शास्त्र में चीड़ या पाइन को कोनीफरेलीज़ (Coniferales) आर्डर में रखा गया है। चीड़ दो प्रकार के होते हैं : (1) कोमल या सफेद, जिसे हैप्लोज़ाइलॉन (Haploxylon) और (2) कठोर या पीला चीड़, जिसे डिप्लोज़ाइलॉन (Diploxylon) कहते हैं। कोमल चीड़ की पत्तियों में एक वाहिनी बंडल होता है, और एक गुच्छे में पाँच, या  कम पत्तियाँ होती हैं। वसंत और सूखे मौसम की बनी लकड़ियों में विशेष अंतर नहीं होता। कठोर या पीले चीड़ में एक गुच्छे में दो अथवा तीन पत्तियाँ होती हैं। इनकी वसंत और सूखे ऋतु की लकड़ियों में काफी अंतर होता है।

चीड की लकडी का आर्थिक महत्व भी है, विशव की लकडी की काफ़ी माँग चीड द्वारा पूरी की जाती है । चीड़ की बहुत सी जातियों के बीज खाने के काम आते हैं, जिनमें पश्चिमोत्तर हिमालय का चिलगोजा चीड़ अपने सूखे फल के लिये प्रसिद्ध और मूल्यवान् है। जैसे भारत और पाकिस्तान में – पा. जिरार्डियाना (P. gerardiana) अर्थात् चिलगोजा, यूरोप में – पा. पिनिया (P. pinea) तथा पा. सेंब्रा (P. cembra),  उत्तरी अमरीका में – पा. सेंब्रायडिस (P. cembroides) की कई किस्में, अमरीका के पा. लेंबरर्टिना (P. lambertina) की छाल से खरोंचकर रेजिन की तरह एक पदार्थ निकालते हैं, जो चीनी की तरह मीठा होता है। इसे चीड़ की चीनी कहते हैं।

औषधि के रुप में बैच फ़्लावर मे पाइन एक विशेष प्रजाति Pinus sylvestris  से बनायी जाती है ।

self reproach personality of Pine

 

बैच फ़्ल्लावर औषधि “पाइन” का विशेष लक्षण है , ’ Self-reproach‘ यानि प्रत्येक गलती के लिये अपने को दोषी ठहराना ,यह ” guilt complex ” या उनमें व्याप्त दोष भाव इतना अधिक प्रबल होता है कि वे किसी भी  घटना के लिये भी अपने को दोषी मानते हैं ।

लेकिन  इस  एक्मात्र लक्षण से एक रोगी मे व्याप्त उसकी कई मानसिक  समस्यायें इतनी जल्दी  दूर होगीं , यह मैने सोचा भी न था । श्री मु.अ. मुस्लिम धर्म के अनुयायी है । पिछ्ले साल रमजान के दिनों मे वह मुझसे मिले । समस्या अनिद्रा की थी । पिछ्ले कई महीनों से उनकी दिन और रात दोनों की ही नीद गायब थी । और गत तीन सप्ताह से किसी   मानसिक रोग विशेषज्ञ से वह इलाज करा रहे थे लेकिन कई anti depressants और नींद की दवा चलने के बावजूद वह सन्तुष्ट नही थे । नीद न आने का कारण  बताने में वह असमर्थ थे  लेकिन कुछ तो था …. जो उनको इतना अधिक व्याकुल और व्यथित किये जा रहा था । लेकिन रोगी खुल कर बताने  को तैयार नही हुआ और इस हाल में जिसका डर था वही हुआ , पहला  प्रिसक्रपशन  coffea 200 देने से कुछ भी लाभ  न हुआ ।

दो दिन बाद उनके घर से उनकी पत्नी और बेटे को बुलाना पडा । इस बार केस हिस्ट्री  पूरी तरह से ली गई । ज्ञात हुआ कि वह सनू २०१० मे वे एक उच्च  सरकारी पद से रिटायर हुये थे , जो ग्रैच्चुयिटी आदि उनको मिली वह ब्याज समेत  थी । और शायद यही उनके मन की उलझन भी थी । दोष भाव या guilt complex से वह इतना अधिक ग्रस्त थे कि बात –२ पर वह रो पडते । ज्ञात हो कि मुस्लिम धर्म में उनके शास्त्रों के अनुसार  ब्याज की रकम का उपयोग वर्जित है । और यही उनके मन की उलझन  का कारण भी था ।

मेरे सामने दो विकल्प थे ;होम्योपैथी या बैच फ़्लावर । लेकिन बैच फ़्लावर को अधिक सुगमता और सरलता की वजह से प्राथमिकता दी । पाइन की कुछ खुराखॊ मे वह पूर्णतया स्वस्थ हुये । दो दिन बाद वह जब मुझसे मिले तो प्रसन्नचित थे , नीद तो भरपूर आथी थी और साथ ही मन की उलझनें तो बिल्कुल नही दिखीं । मैने हँसते हुये उनसे पूछा कि ब्याज की रकम की समस्या का निपटारा कैसे करेगें जनाब , बिल्कुल हलके मन से वह बोले इसका भी उचित समाधान निकाल लूगाँ ।

बैच फ़्लावर औषधियों की यह  एक प्रमुख विशेषता है जो मुझे इस पद्दति में आकृष्ट करती है , रोगी के ऋण पक्ष (negative thoughts) को धन्न पक्ष ( positive thoughts ) में बदलना ।

पाइन स्वभाव वाले व्यक्तित्व के कुछ और ऋण पक्ष : 

  • हीन भावना (guilty complex )
  • स्वदोषी ( self reproach )
  • अन्तर्मुखी ( introvert )
  • बात-२ में क्षमा करने का उपयोग करना ।
  • दूसरों के दोषों के लिये भी अपने को दोषी ठहराना ।
  • संकोची व्यक्तित्व

KEYNOTES OF PINE :-

  Self-reproach, guilt feelings, despondency.
-Tired and worn out feeling.
-Never really satisfied with themselves.
-Blame themselves, asks more of himself than of others, and if the high standards applied to himself cannot be lived up to, he feels guilty and desperately blames himself in his heart.
-Will tend to be the scapegoat in the class and will uncomplainingly take the punishments for crimes they have not even committed.
-Always apologizing and using apologetic phrases in conversation.
-Feels guilty when need arises to speak firmly to others.
-Childish nervousness.
-Feels unworthy, inferior. Considers self a coward.
-Masochistic desire to sacrifice themselves and may punish themselves for life by choosing an inconsiderate partner.
-Religious beliefs strong, sees sexuality as sin.
-Negative narcissism.
-Personality shuts itself off from love, feels undeserving of love.
-Feeling he does not deserve anything.
-Introverted, little joy in life.

इसको भी देखें :

चेस्टनट–होम्योपैथिक और बैचफ़्लावर पद्दतियों मे उपयोग ( Chestnut–Homeopathic & Bach flower uses )

वाइरल संक्रमण और होम्योपैथी-खसरा,छॊटी माता और कर्ण-मूल

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बदलता हुआ मौसम , बारिश के पानी मे भीगना, रिमझिम फ़ुआरों का आनन्द किसे नही डोल देता, लेकिन उसके साथ लेकर आता है तमाम तरह के वाइरल संक्रमण । फ़िर उसके साथ हमारे नगर निगमों की मेहरबानी जो नल के पानी के साथ प्रदूषित पानी देना अपना फ़र्ज समझते है, वह भी् विभन्न तरह के वाइरल और बैक्टीरियल संक्रमणों के जिम्मेदार होते है। वाइरल संक्रमण कोई आवशयक नही कि बारिश के मौसम की ही मार हो, होली के आसपास और अन्य महीनो मे खसरा, छोटी माता, कर्णमूल, इनफ़लूनजा, डेंगू बुखार का हो जोर या फ़िर प्रदूषित पानी की वजह से पीलिया , मियादी बुखार जो कि मूलभूत बैक्टीरियल संक्रमण है आम इन्सान की जिन्दगी को तंग करते रहते हैं। सबसे पहले लेते हैं वाइरल संक्रमण और देखते हैं कि होम्योपैथी इसमे कितनी मदद कर सकती है। जहां तक तुलनात्मक प्रशन है,एलोपैथी जहां वाइरल में अपने को असहाय पाती है वही होम्योपैथी बैक्टीरियल की तुलना मे वाइरल संक्रमणो में अधिक सक्षम और कारगर रहती है।

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एक पुरानी पोस्ट की याद आ गयी जो वाइरल संक्रमण विशेषकर खसरा , छॊटी माता और कर्ण मूल पर कई साल पहले लिखी थी । होली के बाद लखनऊ मे जिस तरह से खसरा , चेचक और कर्णमूल के केस बढॆ हैं , एक बार फ़िर होम्योपैथिक थेरापिटिकस को स्मरण करने की आवशयकता पड गयी है ।