India to introduce Homoeopathy in 5 railway hospitals

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Minister of Railways, Shri Suresh Prabhakar Prabhu while presenting the Railway Budget 2016-17 in Parliament today said that he was proud to lead a work force that is sincere and dedicated.

The Railway Minister said that Indian Railways will tie up with the Ministry of Health for ensuring an exchange between Railways hospitals and Government hospitals. Indian Railways will introduce AYUSH systems in 5 Railway hospitals.

Source : Homeobook

लखनऊ में खुलेगा 50 बेड का होम्योपैथी अस्पताल

homeopathy in lucknow

 

लखनऊ के अलावा कुशीनगर, बरेली, कानपुर और बनारस में 50 बेड के होम्योपैथी अस्पताल खुलेंगे। बजट मिल चुका है। डिस्पेंसरीज को भी अपग्रेड किया जाएगा। आयुष मिशन के तहत होने वाले यह काम मार्च से पहले दिखना शुरू हो जाएंगे।
– अनूप कुमार, प्रमुख सचिव, चिकित्सा शिक्षा

होम्योपैथी की सेहत सुधारने के लिए मार्च से पहले आयुष मिशन के तहत बड़े पैमाने पर काम होना है। प्रस्ताव के मुताबिक इसी मिशन के तहत शहर को पहला होम्योपैथी हॉस्पिटल मिल जाएगा। सूत्रों के मुताबिक आयुष मिशन के तहत डिस्पेंसरीज के अपग्रेडेशन और अस्पतालों के लिए करीब सात करोड़ रुपये मिल चुके हैं। पहले चरण में लखनऊ समेत आसपास के जिलों की 36 डिस्पेंसरीज को अपग्रेड किया जाएगा।• वसं, लखनऊ : राजधानी में होम्योपैथी का पहला अस्पताल खोलने की तैयारी है। आयुष मिशन के तहत बीकेटी या गोसाईंगंज में 50 बेड के अस्पताल के लिए जमीन तलाशी जा रही है। इसके अलावा राजधानी की होम्योपैथी डिस्पेंसरीज को भी अपग्रेड करने की कवायद शुरू हो गई है। अभी तक जर्जर भवनों में चल रही डिस्पेंसरीज के लिए जल्द ही नए भवन किराए पर लिए जाएंगे।

साभार : http://epaper.navbharattimes.com/details/29727-76516-2.html

Indian Cabinet approves agreement between AYUSH and WHO

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The Union Cabinet on Wednesday, Feb. 17, 2016, gave its approval to an agreement between the Ministry of Ayurveda, Yoga and Naturopathy, Unani, Siddha and Homoeopathy (AYUSH) and the World Health Organisation (WHO) in the field of traditional medicine, a move aimed at improving acceptability and branding AYUSH systems internationally.

According to a government statement, the Cabinet meeting chaired by Prime Minister Narendra Modi approved the pact, which will also help in long-term collaboration with the WHO in facilitating and generating awareness about AYUSH systems of medicine through education, skill development, workshops and exchange programmes between the Ministry of AYUSH and the WHO for building capacity.

It will also facilitate advocacy and dissemination of information on AYUSH systems amongst member states while collaborating with third parties to create synergy in implementing the WHO “Traditional Medicine Strategy: 2014-2023”, particularly in the context of AYUSH systems.

Under the pact, AYUSH and WHO will subsequently take up other mutually agreed activities and initiatives that could encompass multilateral collaboration for promotion of Traditional and Complementary Medicine (T&CM) systems. This will include development of the WHO publication on the basic terminologies for T&CM, establishment of a database for global T&CM practitioners and a network of international regulatory cooperation for T&CM practices.

The expenditure for carrying out collaborative activities will be met from the allocated budget under the existing plan schemes of Ministry of AYUSH.

http://www.ibtimes.co.in/cabinet-approves-agreement-between-ayush-who-traditional-medicine-667353

Source : Homoeobook

अनिद्रा रोग और होम्योपैथी ( Insomnia and Homeopathy )

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अच्छी सेहत के लिए सिर्फ प्रॉपर डाइट लेना ही काफी नहीं है। अच्छी नींद भी हेल्दी रहने के लिए उतनी ही जरूरी है। आजकल कई प्रफेशन में डिफरेंट शिफ्ट्स में काम होता है। ऐसे में सबसे ज्यादा नींद पर असर पड़ता है। कई बार तो ऐसा होता है कि टुकड़ों में नींद पूरी करनी पड़ती है, लेकिन छोटी-छोटी नैप लेना सेहत के लिहाज से बेहद खराब होता है। एक रिसर्च के मुताबिक, खराब नींद यानि छोटे-छोटे टुकड़ों में ली गई नींद बिल्कुल न सोने से भी ज्यादा खतरनाक होती है। इससे कई तरह की बीमारियां शरीर को शिकार बना सकती हैं।

टुकड़ों में सोने वाले लोग सुबह उठकर भी फ्रेश नहीं फील करते हैं। रिसर्च में यह साबित हो चुका है। अमेरिका के जॉन हॉपकिंस विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने अपने शोध में दो तरह की नींद का अध्ययन किया है। इसमें रुकावट के साथ सोने वाली नींद और कम समय के लिए ही सही लेकिन शांति वाली नींद शामिल है। इन लोगों के मिजाज को जब कंपेयर किया गया तो पाया कि टुकड़ों में सोने वाले लोगों की तुलना में शांति से सोने वाले लोगों का मूड बेहतर था।

खराब नींद किडनी पर भी बुरा असर डालती है। शरीर में ज्यादातर प्रोसेस नैचरल डेली रिद्म (सरकाडियन क्लॉक या शरीर की प्राकृतिक घड़ी) के आधार पर होते हैं। ये हमारी नींद से ही कंट्रोल होता है। एक रिसर्च के मुताबिक जब सोने की साइकल बिगड़ती है तो किडनी को नुकसान होता है। इससे किडनी से जुड़ी कई बीमारियां हो सकती हैं।

आधी-अधूरी नींद दिल के लिए भी खतरे की घंटी है। इससे हार्ट डिजीज होने के चांस तो बढ़ते ही हैं, साथ ही दिल का दौरा भी पड़ सकता है। एक रिसर्च में खराब नींद की शिकायत करने वालों में अच्छी नींद लेने वालों के मुकाबले 20 फीसदी ज्यादा कोरोनरी कैल्शियम पाया गया।

कम नींद लेने से दिमाग सही तरह से काम नहीं कर पाता है। इसका सीधा असर हमारी याद‌्‌दाश्त पर पड़ता है। इसके अलावा, पढ़ने, सीखने व डिसीजन लेने की क्षमताएं भी इफेक्ट होती हैं। खराब नींद से स्ट्रेस लेवल भी बढ़ता है और इमोशनली वीक लोग डिप्रेशन के भी शिकार हो सकते हैं।

होम्योपैथिक उपचार में प्रयुक्त विभिन्न औषधियों से चिकित्सा

नींद लाने के लिए बार-बार कॉफिया औषधि का सेवन करना होम्योपैथी चिकित्सा नहीं है, हां यदि नींद न आना ही एकमात्र लक्षण हो दूसरा कोई लक्षण न हो तब इस प्रकार की औषधियां लाभकारी है जिनका नींद लाने पर विशेष-प्रभाव होता है- कैल्केरिया कार्ब, सल्फर, फॉसफोरस, कॉफिया या ऐकानाइट आदि।

1. लाइकोडियम-  दोपहर के समय में भोजन करने के बाद नींद तेज आ रही हो और नींद खुलने  के बाद बहुत अधिक सुस्ती महसूस हो तो इस प्रकार के कष्टों को दूर करने के लिए लाइकोडियम औषधि की 30 शक्ति का उपयोग करना लाभदायक होता है।

2. चायना-  रक्त-स्राव या दस्त होने के कारण से या शरीर में अधिक कमजोरी आ जाने की वजह से नींद न आना या फिर चाय पीने के कारण से अनिद्रा रोग हो गया हो तो उपचार करने के लिए चायना औषधि 6 या 30 शक्ति का उपयोग करना लाभदायक है।

3. कैल्केरिया कार्ब – इस औषधि की 30 शक्ति का उपयोग दिन में तीन-तीन घंटे के अंतराल सेवन करने से रात के समय में नींद अच्छी आने लगती है। यह नींद किसी प्रकार के नशा करने के समान नहीं होती बल्कि स्वास्थ नींद होती है।

4. कॉफिया – खुशी के कारण नींद न आना, लॉटरी या कोई इनाम लग जाने या फिर किसी ऐसे समाचार सुनने से मन उत्तेजित हो उठे और नींद न आए, मस्तिष्क इतना उत्तेजित हो जाए कि आंख ही बंद न हो, मन में एक के बाद दूसरा विचार आता चला जाए, मन में विचारों की भीड़ सी लग जाए, मानसिक उत्तेजना अधिक होने लगे, 3 बजे रात के बाद भी रोगी सो न पाए, सोए भी तो ऊंघता रहें, चौंक कर उठ बैठे, नींद आए भी ता स्वप्न देखें। इस प्रकार के लक्षण रोगी में हो तो उसके इस रोग का उपचार करने के लिए कॉफिया औषधि की 200 शक्ति का उपयोग करना चाहिए। यह नींद लाने के लिए बहुत ही उपयोगी औषधि है।  यदि गुदाद्वार में खुजली होने के कारण से नींद न आ रही हो तो ऐसी अवस्था में भी इसका उपयोग लाभदायक होता है। रोगी के अनिद्रा रोग को ठीक करने के लिए कॉफिया औषधि की 6 या 30 शक्ति का उपयोग करना लाभदायक होता है।

5. जेल्सीमियम –    यदि उद्वेगात्मक-उत्तेजना (इमोशनल एक्साइटमेंट) के कारण से नींद न आती हो तो जेल्सीमियम औषधि के सेवन से मन शांत हो जाता है और नींद आ जाती है। किसी भय, आतंक या बुरे समाचार के कारण से नींद न आ रही हो तो जेल्सीमियम औषधि से उपचार करने पर नींद आने लगती है। बुरे समाचार से मन के विचलित हो जाने पर उसे शांत कर नींद ले आते हैं। अधिक काम करने वाले रोगी के अनिंद्रा रोग को ठीक करने के लिए जेल्सीमियम औषधि का उपयोग करना चाहिए। ऐसे रोगी जिनकों अपने व्यापार के कारण से रात में अधिक बेचैनी हो और नींद न आए, सुबह के समय में उठते ही और कारोबार की चिंता में डूब जाते हो तो ऐसे रोगियों के इस रोग को ठीक करने के लिए जेल्सीमियम औषधि का प्रयोग करना चाहिए।

6. ऐकोनाइट –  बूढ़े-व्यक्तियों को नींद न आ रही हो तथा इसके साथ ही उन्हें घबराहट हो रही हो, गर्मी महसूस हो रही हो, चैन से न लेट पाए, करवट बदलते रहें। ऐसे बूढ़े रोगियों के इस प्रकार के कष्टों को दूर करने के लिए ऐकोनाइट औषधि की 30 का उपयोग करना लाभकारी है। यह औषधि स्नायु-मंडल को शांत करके नींद ले आती है। किसी प्रकार की बेचैनी होने के कारण से नींद न आ रही हो तो रोग को ठीक करने के लिए ऐकोनाइट औषधि का उपयोग करना फायदेमंद होता है।

7. कैम्फर – नींद न आने पर कैम्फर औषधि के मूल-अर्क की गोलियां बनाकर, घंटे आधे घंटे पर इसका सेवन करने से नींद आ जाती है।

8. इग्नेशिया – किसी दु:ख के कारण से नींद न आना, कोई सगे सम्बंधी की मृत्यु हो जाने से मन में दु:ख अधिक हो और इसके कारण से नींद न आना। इस प्रकार के लक्षण से पीड़ित रोगी को इग्नेशिया औषधि की 200 शक्ति का सेवन करना चाहिए। यदि किसी रोगी में भावात्मक या भावुक होने के कारण से नींद न आ रही हो तो उसके इस रोग का उपचार इग्नेशिया औषधि से करना लाभदायक होता है। हिस्टीरिया रोग के कारण से नींद न आ रही हो तो रोग का उपचार करने के लिए इग्नेशिया औषधि की 200 शक्ति का उपयोग करना फायदेमंद होता है। यदि रोगी को नींद आ भी जाती है तो उसे सपने के साथ नींद आती है, देर रात तक सपना देखता रहता है और रोगी अधिक परेशान रहता है। नींद में जाते ही अंग फड़कते हैं नींद बहुत हल्की आती है, नींद में सब-कुछ सुनाई देता है और उबासियां लेता रहता है लेकिन नींद नहीं आती है। ऐसे रोगी के इस रोग को ठीक करने के लिए इग्नेशिया औषधि का उपयोग करना उचित होता है।  मन में दु:ख हो तथा मानसिक कारणों से नींद न आए और लगातार नींद में चौक उठने की वजह से नींद में गड़बड़ी होती हो तो उपचार करने के लिए इग्नेशिया औषधि की 3 या 30 शक्ति का उपयोग करना लाभकारी है।

9. बेलाडोना –  मस्तिष्क में रक्त-संचय होने के कारण से नींद न आने पर बेलाडोना औषधि की 30 शक्ति का उपयोग करना चाहिए। रोगी के मस्तिष्क में रक्त-संचय (हाइपरमिया) के कारण से रोगी ऊंघता रहता है लेकिन मस्तिष्क में थाकवट होने के कारण से वह सो नहीं पाता। ऐसे रोगी के रोग का उपचार करने के लिए के लिए भी बेलाडोना औषधि उपयोगी है। रोगी को गहरी नींद आती है और नींद में खर्राटें भरता है, रोगी सोया तो रहता है लेकिन उसकी नींद गहरी नहीं होती। रोगी नींद से अचानक चिल्लाकर या चीखकर उठता है, उसकी मांस-पेशियां फुदकती रहती हैं, मुंह भी लगतार चलता रहता है, ऐसा लगता है मानो वह कुछ चबा रहा हो, दांत किटकिटाते रहते हैं। इस प्रकार के लक्षण होने के साथ ही रोगी का मस्तिष्क शांत नहीं रहता। जब रोगी को सोते समय से उठाया जाता है तो वह उत्तेजित हो जाता है, अपने चारों तरफ प्रचंड आंखों (आंखों को फाड़-फाड़कर देखना) से देखता है, ऐसा लगता है कि मानो वह किसी पर हाथ उठा देगा या रोगी घबराकर, डरा हुआ उठता है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के रोग को ठीक करने के लिए बेलाडोना औषधि की 30 शक्ति का उपयोग करना लाभकारी है।  अनिद्रा रोग को ठीक करने के लिए कैमोमिला औषधि का उपयोग करने पर लाभ न मिले तो बेलाडोना औषधि की 30 शक्ति का उपयोग करें।

10. काक्युलस-  यदि रात के समय में अधिक जागने के कारण से नींद नहीं आ रही हो तो ऐसे रोगी के इस लक्षण को दूर करने के लिए काक्युलस औषधि की 3 से 30 शक्ति का उपयोग करना चाहिए।  जिन लोगों का रात के समय में जागने का कार्य करना होता है जैसे-चौकीदार, नर्स आदि, उन्हें यदि नींद न आने की बीमारी हो तो उनके के लिए कौक्युलस औषधि का उपयोग करना फायदेमंद है। यदि नींद आने पर कुछ परेशानी हो और इसके कारण से चक्कर आने लगें तो रोग को ठीक करने के लिए कौक्युलस औषधि का उपयोग करना उचित होता है।

11. सल्फर – रोगी की नींद बार-बार टूटती है, जारा सी भी आवाजें आते ही नींद टूट जाती है, जब नींद टूटती है तो रोगी उंघाई में नहीं रहता, एकदम जाग जाता है, रोगी की नींद कुत्ते की नींद के समान होती है। रोगी के शरीर में कहीं न कहीं जलन होती है, अधिकतर पैरों में जलन होती है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के इस रोग को ठीक करने के लिए सल्फर औषधि की 30 शक्ति का प्रयोग करना फायदेमंद होता है।

12. नक्स वोमिका – रोगी का मस्तिष्क इतना कार्य में व्यस्त रहता है कि वह रात भर जागा रहता है, व्यस्त मस्तिष्क के कारण नींद न आ रही हो, मन में विचारों की भीड़ सी लगी हो, आधी रात से पहले तो नींद आती ही नहीं यादि नींद आती भी है तो लगभग तीन से चार बजे नींद टूट जाती है। इसके घंटे बाद जब वह फिर से सोता है तो उठने पर उसे थकावट महसूस होती है, ऐसा लगता है कि मानो नींद लेने पर कुछ भी आराम न मिला हो। ऐसे लक्षणों से पीड़ित रोगी के रोग को ठीक करने के लिए नक्स वोमिका औषधि का उपयोग कर सकते हैं।
किसी रोगी को आधी रात से पहले नींद नहीं आती हो, शाम के समय में नींद नहीं आती हो और तीन या चार बजे नींद खुल जाती हो, इस समय वह स्वस्थ अनुभव करता है लेकिन नींद खुलने के कुछ देर बाद उसे फिर नींद आ घेरती है और तब नींद खुलने पर वह अस्वस्थ अनुभव करता है, इस नींद के बाद तबीयत ठीक नहीं रहती। ऐसे रोगी के रोग को ठीक करने के लिए नक्स वोमिका औषधि का उपयोग करना चाहिए।
कब्ज बनना, पेट में कीड़ें होना, अधिक पढ़ना या अधिक नशा करने के कारण से नींद न आए तो इस प्रकार के कष्टों को दूर करने के लिए नक्स वोमिका औषधि की 6 या 30 शक्ति का सेवन करने से अधिक लाभ मिलता है।

13.पल्स – रोगी शाम के समय में बिल्कुल जागे हुए अवस्था में होता है, दिमाग विचारों से भरा हो, आधी रात तक नींद नहीं आती, बेचैनी से नींद बार-बार टूटती है, परेशान भरे सपने रात में दिखाई देते हैं, गर्मी महसूस होती है, उठने के बाद रोगी सुस्त तथा अनमाना स्वभाव का हो जाता है। आधी रात के बाद नींद न आना और शाम के समय में नींद के झोकें आना, रोगी का मस्तिष्क व्यस्त हो अन्यथा साधारण तौर पर तो शाम होते ही नींद आती है और 3-4 बजे नींद टूट जाती है, इस समय रोगी रात को उठकर स्वस्थ अनुभव करता है, यह इसका मुख्य लक्षण है-शराब, चाय, काफी से नींद न आए। ऐसी अवस्था में रोगी को पल्स औषधि का सेवन कराना चाहिए।

14. सेलेनियम – रोगी की नींद हर रोज बिल्कुल ठीक एक ही समय पर टूटती है और नींद टूटने के बाद रोग के लक्षणों में वृद्धि होने लगती है। इस प्रकार के लक्षण होने पर रोगी का उपचार करने के लिए सेलेनियम औषधि का उपयोग कर सकते हैं।

15.  ऐम्ब्राग्रीशिया – रोगी अधिक चिंता में पड़ा रहता है और इस कारण से वह सो नहीं पाता है, वह जागे रहने पर मजबूर हो जाता है। व्यापार या कोई मानसिक कार्य की चिंताए होने से नींद आने में बाधा पड़ती है। सोने के समय में तो ऐसा लगता है कि नींद आ रही है लेकिन जैसे ही सिर को तकिए पर रखता है बिल्कुल भी नींद नहीं आती है। इस प्रकार की अवस्था उत्पन्न होने पर रोग को ठीक करने के लिए ऐम्ब्राग्रीशिया औषधि की 2 या 3 शक्ति का उपयोग करना लाभदायक होता है। इस औषधि का उपयोग कई बार करना पड़ सकता है।

16. फॉसफोरस –  रोगी को दिन के समय में नींद आती रहती है, खाने के बाद नींद नहीं आती लेकिन रात के समय में नींद बिल्कुल भी नहीं आती है। ऐसे लक्षणों से पीड़ित रोगी के रोग को ठीक करने के लिए फॉसफोरस औषधि की 30 शक्ति का उपयोग करना फायदेमंद होता है।
वृद्ध-व्यक्तियों को नींद न आ रही हो तो ऐसे रोगी के रोग को ठीक करने के लिए सल्फर औषधि की 30 शक्ति का उपयोग करना चाहिए।
आग लगने या संभोग करने के सपने आते हों और नींद देर से आती हो तथा सोकर उठने के बाद कमजोरी महसूस होता हो तो इस प्रकार के कष्टों को दूर करने के लिए फॉसफोरस औषधि का उपयोग किया जा सकता है।
रोगी को धीरे-धीरे नींद आती है और रात में कई बार जाग पड़ता है, थोड़ी नींद आने पर रोगी को बड़ा आराम मिलता है, रोगी के रीढ़ की हड्डी में जलन होती है और रोग का अक्रमण अचानक होता है। ऐसे रोगी के इस रोग को ठीक करने के लिए फॉसफोरस औषधि की 30 शक्ति का प्रयोग करना अधिक लाभकारी है।

17. टैबेकम-  यदि स्नायविक-अवसाद (नर्वस ब्रेकडाउन) के कारण से अंनिद्रा रोग हुआ हो या हृदय के फैलाव के कारण नींद न आने के साथ शरीर ठंडा पड़ गया हो, त्वचा चिपचिपी हो, घबराहट हो रही हो, जी मिचलाना और चक्कर आना आदि लक्षण हो तो रोग को ठीक करने के लिए टैबेकम औषधि की 30 शक्ति का सेवन करने से अधिक लाभ मिलता है।

18.  ऐवैना सैटाइवा –   स्नायु-मंडल पर ऐवैना सैटाइवा औषधि का लाभदायक प्रभाव होता है। ऐवैना सैटाइवा जई का अंग्रेजी नाम है। जई घोड़ों को ताकत के लिए खिलाई जाती है जबकि यह मस्तिष्क को ताकत देकर अच्छी नींद लाती है। कई प्रकार की बीमारियां शरीर की स्नायु-मंडल की शक्ति को कमजोर कर देती है जिसके कारण रोगी को नींद नहीं आती है। ऐसी स्थिति में ऐवैना सैटाइवा औषधि के मूल-अर्क के 5 से 10 बूंद हल्का गर्म पानी के साथ लेने से स्नायुमंडल की शक्ति में वृद्धि होती है जिसके परिणाम स्वरूप नींद भी अच्छी आने लगती है। अफीम खाने की आदत को छूड़ाने के लिए भी ऐवैना सैटाइवा औषधि का उपयोग किया जा सकता है।

19. स्कुटेलेरिया – यदि किसी रोगी को अंनिद्रा रोग हो गया हो तथा सिर में दर्द भी रहता हो, दिमाग थका-थका सा लग रहा हो, अपनी शक्ति से अधिक काम करने के कारण उसका स्नायु-मंडल ठंडा पड़ गया हो तो ऐसे रोगी के इस रोग को ठीक करने के लिए स्कुटेलेरिया औषधि का प्रयोग आधे-आधे घंटे के बाद इसके दस-दस बूंद हल्का गर्म पानी के साथ देते रहना चाहिए, इससे अधिक लाभ मिलेगा।

20. सिप्रिपीडियम – अधिक खुशी का सामाचार सुनकर जब मस्तिष्क में विचारों की भीड़ सी लग जाए और इसके कारण से नींद न आए या जब छोटे बच्चे रात के समय में उठकर एकदम से खेलने लगते हैं और हंसते रहते हैं और उन्हें नींद नहीं आती है। ऐसे रोगियों के अनिद्रा रोग को ठीक करने के लिए सिप्रिपीडियम औषधि के मूल-अर्क के 30 से 60 बूंद दिन में कई बार हल्का गर्म पानी के साथ सेवन कराना चाहिए। रात में अधिक खांसी होने के कारण से नींद न आ रही हो तो सिप्रिपीडियम औषधि का प्रयोग करना चाहिए जिसके फलस्वरूप खांसी से आराम मिलता है और नींद आने लगती है।

21. कैमोमिला – दांत निकलने के समय में बच्चों को नींद न आए और जंहाई आती हो और बच्चा औंघता रहता हो लेकिन फिर भी उसे नींद नहीं आती हो, उसे हर वक्त अनिद्रा और बेचैनी बनी रहती है। ऐसे रोगियों के इस रोग को ठीक करने के लिए कैमोमिला औषधि की 12 शक्ति का सेवन कराने से अधिक लाभ मिलता है।

22. बेल्लिस पेरेन्नि स-  यदि किसी रोगी को  सुबह के तीन बजे के बाद नींद न आए तो बेल्लिस पेरेन्निस औषधि के मूल-अर्क या 3 शक्ति का उपयोग करना लाभकारी है।

23. कैनेबिस इंडिका-  अनिद्रा रोग (ओब्सीनेट इंसोम्निया) अधिक गंभीर हो और आंखों में नींद भरी हुई हो लेकिन नींद न आए। इस प्रकार के लक्षण यदि रोगी में है तो उसके इस रोग को ठीक करने के लिए कैनेबिस इंडिका औषधि के मूल-अर्क या 3 शक्ति का उपयोग करना फायदेमंद है। इस प्रकार के लक्षण होने पर थूजा औषधि से भी उपचार कर सकते हैं।

24. पल्सेटिला- रात के समय में लगभग 11 से 12 बजे नींद न आना। इस लक्षण से पीड़ित रोगी के रोग को ठीक करने के लिए पल्सेटिला औषधि की 30 शक्ति का प्रयोग करना चाहिए।

25. सिमिसि-  यदि स्त्रियों के वस्ति-गन्हर की गड़बड़ी के कारण से उन्हें अनिद्रा रोग हो तो उनके इस रोग का उपचार करने के लिए सिमिसि औषधि की 3 शक्ति का उपयोग किया जाना चाहिए।

26. साइना-  पेट में कीड़ें होने के कारण से नींद न आने पर उपचार करने के लिए साइना औषधि की 2x मात्रा या 200 शक्ति का उपयोग करना लाभदाक है।

27. पैसिफ्लोरा इंकारनेट- नींद न आने की परेशानी को दूर करने के लिए यह औषधि अधिक उपयोगी होती है। उपचार करने के लिए इस औषधि के मल-अर्क का एक बूंद से 30 बूंद तक उपयोग में लेना चाहिए।

Indian Army to appoint Homoeopathy Doctors

Indian-Army-Logo-Though-Hindi-FontThe project will begin with 10 alternative medicine specialists being assigned to four army hospitals — Base Hospital in Delhi Cantt, Military Hospital in Jalandhar and Command Hospitals at Chandimandir and Pune.

The idea behind the experiment is to see if alternative medicine can work where allopathy has no answers,” said Lieutenant General BK Chopra, director general, Armed Forces Medical Services (AFMS).

For the first time, the military is giving a chance to specialists in different forms of alternative medicine, ranging from ayurveda and naturopathy to unani and homeopathy, to treat severely-ill soldiers.

The armed forces are preparing to kick off a bold experiment to test claims made in favour of alternative medicine by throwing open the doors of some top military hospitals to doctors specialising in these remedies, India’s top military doctor has said. .

The AFMS, a cadre consisting of more than 6,000 doctors, is tying up with the ministry of AYUSH (Ayurveda, Yoga and naturopathy, Unani, Siddha and Homoeopathy) to kick-start the experiment.

The AYUSH had mooted a proposal to integrate the alternative medicine system with the conventional system, but the army suggested that a pilot project be undertaken first.

AYUSH secretary Ajit M Sharan said some forms of alternative medicine had a legacy of more than 3,000 years but had not been exploited to their full potential. “These systems can be used to supplement conventional medicine for treating different types of cancers and TB, as standalone treatment for diseases like arthritis and dementia and also as food supplements. The tie-up will benefit soldiers,” Sharan added.

As part of the experiment, the specialists will be assigned to terminally-ill patients and those with some form of cancer. General Chopra said, “We don’t have much to offer to such patients and perhaps some other treatment could work for them. Alternative medicine systems shouldn’t be written off as they have evolved over centuries.”

The scope of the project could be expanded if alternative medicine treatment proves to be effective. This would give alternative medicine practitioners a bigger platform for research and could help address some myths about the systems they practice, Chopra said. “These traditional medicine practitioners will work under the supervision of army doctors to provide the best medical care to patients. Patients will benefit if we can find scientific evidence that suggests alternative medicine can cure or curtail diseases,” he added.

http://www.hindustantimes.com/india/army-to-throw-open-doors-to-alternative-medicine/story-PfJRoliSdSvMqeYQMeGltN.html

Smartphone will soon be the stethoscope?

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It was 200 years ago that a French doctor spared a female patient embarrassment by rolling up sheets of paper and placing them to her heart instead of putting his ear to her chest, as was the practice of examination then. This single act of propriety gave birth to that universal marker of medical practice — the stethoscope. Over two centuries the device has travelled wide — to film and TV sets (remember ER’s George Clooney with a stethoscope slung around his covetable shoulders?), S&M shops, toy stores, and of course, the medical exam room. 

Unfortunately on its 200th birthday instead of celebrations, there’s talk of dispatching the old stetho to the morgue. Last week, Jagat Narula, a cardiologist at Mount Sinai Hospital in New York, provocatively claimed “the stethoscope is dead”. 

The futurists singing dirges for modern medicine’s primary diagnostic tool say it’s on the way to being replaced by handheld ultrasound devices and smartphones. 

In 2014, Indian-origin 15-year-old Suman Mulumudi invented the Steth IO in Seattle, essentially an iPhone case that amplifies heart and lung sounds and converts them into a spectrogram, which can be annotated and stored for future reference. The device is in the market. Others have cited GE Healthcare’s VScan — a portable ultrasound machine — as a possible successor. 

Then there’s the Eko Core, an FDA approved digital stethoscope that records the sounds of a patient’s heart and transmits the data to an app. The clip stored in the cloud can be transferred for a second opinion anywhere in the world. 

Some stethoscope apps play doctor and deliver snap diagnoses by applying algorithms to match the patient’s recordings with a pre-programmed index of common sounds detected in auscultation — the clinical term for listening to internal sounds of the body. 

The gains, experts say, are greater diagnostic accuracy, real-time results and streamlined treatment that saves the patient time and money by eliminating superfluous tests and medication. A compelling argument for new technology. Not all Indian medics are convinced. Dr Vanita Arora, a cardiologist at Max Healthcare, maintains what technology tells you is what you tell technology. “Apps can’t be 100% accurate. Good history-taking, and listening to a patient can never be substituted. If the machine misses even one sign, the diagnosis could be incorrect. Which is why some apps suggest you clinically correlate their findings,” she points out. Dr CT Deshmukh, professor of pediatrics at Mumbai’s Seth GS Medical College, agrees. “Ninety per cent of doctors can’t do without a stetho,” he says, adding that digital debutants will mainly contribute to storage and sharing of patient records. 

But some point out that doctors themselves could miss vital signs. (Not deliberately, like a noted doctor who’d examine his patients in a government hospital with the stetho’s eartips around his neck instead of in his ears.) Overreliance on CT Scans and cardiograms has reportedly blunted the doctor’s diagnostic skills. 

Some say stetho stand-ins won’t penetrate the Indian market until the new digital devices are introduced to students right at medical school. “When you go to tech conferences you realize that stethoscopes are going out because apps and mobile devices are more accurate and tell you more,” confirms Dr Neelesh Bhandari, co-founder of Healtho5 Solutions, a healthcare service startup that uses technology to cover the distance between doctor and patient. 

Steth IO or Eko, Pradeep Chawla isn’t afraid of what’s to come, because this manufacturer of steel stethoscopes knows at Rs 500 (going up to Rs 2,000), his devices are a bargain. “Even though electronic stethos have been available here for several years, you’ll seldom come across one in use. I doubt doctors will switch any time soon,” says Chawla, whose company, Lifeline Medical Devices, makes 17 models of stethoscopes, including a gold-plated specimen. 

The economics of owning and operating next gen stethoscopes — an app requires at least a Rs 5,000 smartphone, and GE’s VScan costs Rs 5 lakh) — may prove to be a hurdle in India. Logically, the steep imbalance in doctor-patient ratio — 6 doctors to every 10,000 people — could suppose that quicker, more efficient tools with tele-medicine capabilities would have sped up diagnosis. But then again 80% of the population is treated in rural India where steady electricity itself is a luxury. 

Which is why doctors like Dr. G Lakshmipathi believe it’s not yet time for the stethoscope to exit, although he believes that day will undoubtedly come. The Coimbatore-based cardiologist sets great store by the ‘placebo effect’ of the stetho. “It’s suggestive of the doctor’s authority. When a patient sees an individual with a stethoscope, they’re reassured that they’re in capable hands, and on the way to recovery — this confidence itself can aid recovery. If you take away the symbol, you take away from the placebo effect of the doctor,” says Dr Lakshmipathi. 

Finally, in the debate for old versus new school, it’s worthwhile to remember that a conventional stetho may not relay images, store or transfer data or have voice capabilities, but it has always had a processor — between the eartips. 

Source : http://m.timesofindia.com/home/sunday-times/Smartphone-will-soon-be-the-stethoscope/articleshow/50514613.cms

Role of homoeopathic mother tinctures in rheumatoid arthritis: An experimental study – रुमेटाइड संधिशोध मे होम्योपैथिक मदर टिन्चरों की भूमिका

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हाल ही में दो शोध पत्र प्रस्तुत हुये । एक IJRH के जर्नल में और दूसरे pub med पर पब्लिश हुये । पहले शोध पत्र मे होम्योपैथिक मदर टिन्चर जैसे Ricinus communis (RCMT), Rauwolfia serpentina (RSMT), Bellis perennis (BPMT), Curcuma longa(CLMT), Terminalia arjuna (TAMT) and Tribulus terresteris (TTMT और दूसरे शोध पत्र मे होम्योपैथिक टिन्चर Guaiacum officinale के शोधरोधी , वेदनाहार और संधिशोधरोधी प्रभाव का अध्ययन करना था ।

दोनों ही प्रयोगों के लिये एल्बीनों चूहों का प्रयोग प्रायोगिक अध्ययन के लिये किया गया । सामान्य लक्षण विलयन में 1% कैरागीनन की 0.1 ml की मात्रा दायें पंजे मे दे कर शोध प्रेरित किया गया । सोध की मात्रा का आंकलन पंजे की सूजन के आधार पर किया गया । विस्टर एल्बीनो चूहों के प्रपद तलवे में पूर्ण फ़्रायन्ड सह औषध ( CFA ) इंजेक्शन लगाकर संधिशोध प्रेरित किया गया ।

परिणाम:

कुरकुमा लौंगा और ट्राइव्यूलस टरेसटेरिस और ग्वायकम आफ़ मातृ टिन्चर द्वारा कैरागीनन उपचारित चूहों के पाश्च पंजे के सूजन मे कमी आयी आऊ पंजे का आयतन घटा ।यह शक्तिशाली शोधरोधी सक्रियता को दर्शाता है । सभी होम्योपैथिक मातॄ टिन्चर ने चूहों में उष्ण प्रेरित तापीय वेदना में भी परिधीय वेदनाहार सक्रियता दिखाई ।

Role of homoeopathic mother tinctures in rheumatoid arthritis: An experimental study
Surender Singh1, Ritu Karwasra1, Prerna Kalra1, Rohit Kumar1, Shalu Rani1, Debadatta Nayak2, YK Gupta1
1 Department of Pharmacology, All India Institute of Medical Sciences, New Delhi, India
2 Central Council for Research in Homoeopathy, New Delhi, India
Abstract
Objectives: The objective of present preliminary study was to assess the anti-inflammatory, analgesic and anti-arthritic effect of some homoeopathic mother tinctures viz. Ricinus communis (RCMT), Rauwolfia serpentina (RSMT), Bellis perennis (BPMT), Curcuma longa(CLMT), Terminalia arjuna (TAMT) and Tribulus terresteris (TTMT).
Materials and Methods: Paw oedema was induced by administration of 0.1ml 1% carrageenan in normal saline into right hind paw. Degree of inflammation was evaluated according to paw swelling. Arthritis was induced by Complete Freund’s Adjuvant (CFA) injection in metatarsal footpad of Wistar albino rats.
Result: Curcuma longa and Tribulus terresteris mother tinctures reduced hind paw swelling decreased the paw volume in Carrageenan treated rats. Thus, revealed potent activity against inflammation. All homoeopathic mother tinctures showed peripheral analgesic activities in hot plate induced thermal algesia in mice.

Download Link : http://www.ijrh.org/text.asp?2015/9/1/42/154348
Source : Indian Journal of Research in Homeopathy

Anti-rheumatoid and anti-oxidant activity of homeopathic Guaiacum officinale in an animal model.

Sarkar A1, Datta P1, Das AK1, Gomes A2.

Author information
Abstract
BACKGROUND:

Homeopathy is a popular form of complementary and alternative medicine. Guaiacum extract is said to be useful for pain and inflammation, but there appears to be no scientific evidence to support this.

AIMS:

The aim of the present study was to evaluate the anti-rheumatic and anti-oxidant activity of homeopathic preparations of Guaiacum officinale (Gua) on experimental animal model.

DESIGN:

Rheumatoid arthritis (RA) was induced in male albino rats by Freund’s complete adjuvant (FCA) at a dose of (0.25 mg heat killed Mycobacterium tuberculosis/ml of emulsion). Gua mother tincture (MT) (prepared from the latex part of the plant) (MT), Gua 30cc and 200cc were purchased commercially from King Company, Kolkata, India. Male albino Wistar rats (130 ± 10 g) were divided into 6 groups: Sham control; Arthritis control; Standard treatment indomethacin (0.25 mg 100 g(-1) p.o. × 5 alternative days), Gua MT (1 ml kg(-1) p.o. × 5 days) treated; Gua (30c 1 ml kg(-1) p.o. × 5 days) treated; Gua (200c; 1 ml kg(-1) p.o. × 5 days) treated. Anti-rheumatic activity was examined through physical, urinary, serum parameters. All the results were expressed in terms of mean ± SEM (statistical error of mean n = 6) at each dose level. The level of significance was determined through one-way analysis of variance (ANOVA), p < 0.05 was considered significant.

RESULTS:

It was observed that body weight, ankle and knee diameter, urinary parameters (hydroxyproline (OH-P), glucosamine, calcium (Ca(2)(+)), creatinine (CRE), phosphate (PO4(3)(-))), serum ACP (acid phosphatase)/ALP (alkaline phosphatase)/Ca(2+)/CRE/PO4(3-)/gamma-glutamyl transferase (GGT)/Lipid peroxidation (LPO)/Glutathione (GSH)/Superoxide dismutase (SOD)/Catalase, serum GGT, serum interleukins like IL-1β/CINC-1/PGE2/TNF-α/IL-6, IL-12/IL-4/IL-6 levels were significantly affected. After treatment with Guaiacum in all 3 regimes was associated with normalization of these parameters compared to control group.

CONCLUSION:

These findings suggest that homeopathic G. officinale possesses anti-rheumatic and anti-oxidant activity in experimental animal and these activities may be more significant in higher potencies.

Download Link : http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/24685418

Source : Pubmet