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Different routes of prescribing in Homeopathy

यूटा मॆटिल की पोस्ट , ’ To swallow or not to swallow…that is the question!’ कई अर्थों मे महत्वपूर्ण है । अधिकतर होम्योपैथ दवाओं को oral route यानि मुँह द्वारा ही लेने की सलाह देते हैं जैसा कि यूटा के एक सर्वे से स्पष्ट है । स्वंय हैनिमैन ने भी आर्गेनान सेक्शन २७२ में इस तथ्य को रखा है :

In Aphorism 272 he describes to the homeopath that a “granule placed dry on the tongue, is one of the smallest administrations for the less severe, only recently developed cases of disease” [10] (p.158). He goes on to point out that as such, only few nerves are touched by the medication. Further he describes that if the granule is dissolved in water and is prior to repeated ingestion succussed; a much stronger medication is created of which even the tiniest dose comes into instant contact with many nerves [10]. Yet, this also does not deliver indications for a definite necessity of transmucosal absorption.

लेकिन इसके बावजूद हैनिमैन ने चिकित्सकों को अन्य routes को भी अपनाने की सलाह भी दी  है जिनमें olfaction method प्रमुख है । पिछ्ले वर्ष से अब तक स्वंय मैने भी इस तथ्य को क्लीनकल प्रैक्टिस मे अनुभव किया कि कई होम्योपैथिक दवायें olfaction method से बेहतर कार्य करती हैं जैसे कि acute respiratory infections विशेषकर acute asthma ( दमा ) मे Ipecac 0/3 से 0/10 . arsenic 0/5, और sambucus 0/3 मुँह द्वारा प्रयोग करने की अपेक्षा nebulizer route से अधिक प्रभावी साबित होती है । इसका कारण क्या हो सकता है , इसके बारे मे तो अगर और अधिक रिसर्च हों तो शायद कहना मुमकिन हो ।
फ़िलहाल यूटा मॆटिल की पोस्ट , ’ To swallow or not to swallow…that is the question!’ का आंकलन करें उनके ब्लाग http://cleverhomeopathy.wordpress.com
पर ।