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सर्दियों मे डायरिया और होम्योपैथी उपचार ( Cold Diarrhoea & Homeopathy )

पिछ्ले कुछ हफ़्तों से लगभग सभी प्राइवेट क्लीनिक और सरकारी अस्पतालॊ मे डायरिया या दस्तों के रोगी बढे हैं । इनमे से  नवजात शिशु और कम आयु के बच्चॊ की तादाद बहुत अधिक है ।

सर्दियों मे उल्टी और दस्त गर्मी के मुकाबले अधिक खतरनाक होते हैं । इन दिनों की मुख्य वजह ठंड होती है । सर्दियां शुरू होते ही रोटा वायरस सक्रिय हो जाता है। विंटर डायरिया रोटा वायरस के कारण ही होता है।
यह मौसम स्वास्थ के दृषिकोण से रोगरहित रहता है। बीमारियां बहुत कम पास फ़टकती हैं, लेकिन ऐसे बच्चे जो कमजोर होते हैं और जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कम होती है , उन्हें संक्रमण की संभावना ज्यादा होती है। वह अक्सर विंटर डायरिया की चपेट में आ जाते हैं। आमतौर पर डायरिया एक हफ्ते में ठीक हो जाता है लेकिन अगर ये इससे ज्यादा समय तक रहे तो ये क्रॉनिक डायरिया कहलाता है और इसका इलाज समय पर न होने से ये खतरनाक भी हो सकता है लेकिन इसे जरा सी सावधानी बरत कर ठीक भी किया जा सकता है।

यदि दस्त का समुचित इलाज न किया जाये तो निर्जलीकरण ( शरीर मे पानी की कमी आ जाना ) हो सकती है । शरीर मे जल और अन्य द्र्व्यों की कमी के कारण मृत्यु भी हो सकती है ।

निर्जलीकरण की पहचान और लक्षण:

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दस्त से बचाव के उपाय :

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  • मल त्याग के बाद बच्चों मे साबुन से हाथ धोने की आदत डालें ।
  • खाने से पहले हाथ अवशय साफ़ करें।
  • फ़ल और सब्जियाँ धो के खायें ।
  • खाध पदर्थों को ढक के रखें ।

क्या करें :

  • शिशु मे पानी की कमी को पूरा करें ।
  • शिशुओं को W.H.O. ओ.आर.एस. लगातार देते रहें ।
  • स्तनपान जारी रखें ।
  • शिशु का खाना बन्द न करें , बल्कि उसे नरम खाध पदार्थ जैसे केला , चावल , उबले आलू आदि देते रहें ।

याद रखें :

  • दस्त के सभी रोगियों का निर्जलीकरण के लिये वर्गीकरण करें । जहाँ गम्भीर निर्लजीकरण हो उसे क्लीनिक मे I.V. fluid से manage करें या अस्पताल रेफ़र करें ।
  • यदि मल मे खून आ रहा हो तो उसे पेचिश के लिये वर्गीकृत करें और औषधि के चुनाव के लिये प्लान दो को देखें ।

क्या न करें :

  • शिशु को सिर्फ़ ग्लूकोज या अकेला चीनी का घोल न दें । सिर्फ़ ग्लूकोज आधारित घोल शिशु के पेट में fermentation पैदा करते हैं जिससे बैक्टर्यिल संक्रमण की संभावनायें बढ जाती हैं ।
  • ऐसे तरल पदार्थ न दें जिसमें कैफ़ीन हो जैसे कोला या काँफ़ी ।
  • दूध या दूध से बनी वस्तुओं न दें ।

घर मे तैयार नमक-चीनी का घोल या W.H.O. ORS  में किसको चुनें :

घर मे बनाये गये नमक-चीनी के घोल मे सबसे बडी दिक्कत सही अनुपात का मिश्रण न हो पाना है जिससे या तो नमक की अधिकता हो जाती है या फ़िर चीनी का अनुपात बढ जाता है जो दोनॊ ही हालातों मे शिशु के लिये  हानिकारक सिद्द होती है । लेकिन फ़िर भी अगर O.R.S. उपलब्ध नही है तो यह तरीका कारगर है ।

बनाने की विधि :

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एक लीटर अथवा ५ ऊबले और ठंडे किये पानी मे १ छॊटा चम्मच नमक एवं ८ छॊटॆ चम्मच चीनी डालकर अच्छी तरह घोल ले और इस मिश्रण को २४ घंटॆ के अन्दर ही प्रयोग करें । बाकी बचे मिश्रण को फ़ेंक दें ।

होम्योपैथिक औषधियाँ :

शिशुओं मे आम प्रयोग होने वाकी होम्योपैथिक औषधियों की यह एक संक्षिप्त जानकारी है । [नोट : स्वयं चिकित्सा करने की गलती न करें , आप का चिकित्सक ही आपको सही सलाह दे सकता है । ]

Winter Diarrhoea के अधिकतर रोगी Dulacamara , Aconite या Nux Moschata से अल्प समय मे स्वस्थ हो जाते हैं ।

 RECTUM – DIARRHEA – cold – taking cold, after ( source : Syntehesis 9.0 )
acon. agra. Aloe ant-t. ars. bar-c. bar-s. Bell. Bry. Calc. camph. Caust. Cham. chin. chinin-ar. coff. coloc. con. cop. DULC. elat. gamb. graph. guar. Hyos. Ip. Jatr-c. kali-c. kreos. laur. lil-t. merc. Nat-ar. Nat-c. nat-s. nit-ac. NUX-M. Nux-v. op. Ph-ac. podo. puls. Rhus-t. rumx. sabin. samb. sang. sel. sep. Sulph. tub. verat. zing.

 RECTUM – DIARRHEA – winter
asc-t. nat-s. Nit-ac.

अगर डल्कामारा या नक्स मासकैटा कार्य नही कर रही है तो प्लान A या फ़िर प्लान B से लक्षणॊ का चुनाव करे ।

1. प्लान “A”

2. प्लान “B ”:

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Homoeopathy Doctor Manoj Rajoria elected to Indian Parliament

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Homoeopathy Doctor Manoj Rajoria BHMS, MD (Hom) has been elected to Indian Parliament

Whole Homoeopathic Fraternity in India  is proud of  Dr.Manoj Rajoria from Rajasthan.

We congratulate you on your success and becoming MP, You will be the voice of thousands of Homoeopaths in the Parliament. You are a dedicated Homoeopath and we know you will work for Homoeopathy too.

Dr Manoj Rajoria, Candidate of 15th Lok Sabha, Affiliated to Bharatiya Janata Party (BJP) serving Karauli Dholpur (RJ) Lok Sabha Constituency.

He took his BHMS from Dr. M.P.K. Homoeopathic Medical College Jaipur

Post Graduate Homoeopathy from  Rajasthan University in 2006

Mobile Phone :  096 67 211234

Website : http://www.drmanojrajoria.com

Source : homeobook.com

मेरी डायरी से – एवियरी “ Aviare ”

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एवियरी को होम्योपैथिक मे लाने का श्रेय पैरिस के  डा. कार्टियर और अन्य होम्योपैथिक चिकित्सकों को  रहा । यह एवियन तपेदिक के जीवाणु से तैयार की जाती है । सन्‌ १८९६ में इन्टर्नेशनल होम्योपैथिक कान्फ़्रेन्स , पैरिस मे उन्होने यह शोध पत्र प्रस्तुत किया । इसको विस्तृत रुप से पढने के लिये देखे यहाँ । फेफड़ों के apices पर Aviaire प्रमुखता से कार्य करती है ।

एवियन तपेदिक के जीवाणु को मानव तपेदिक के जीवाणु साथ पहचान तो की गई है, लेकिन इन दोनों  nosodes के नैदानिक गुण समान नहीं हैं । यह एक अचरज की बात है कि एवियरी का उपयोग होम्योपैथिक चिकित्सकों मे लगभग नगणय सा रहा है ; संभवत:  इस औषधि की ड्र्ग प्रूविगं सम्पूर्ण रुप न होने के कारण । लेकिन फ़िर भी विशेषकर जाडे के दिनों मे शिशुओं और बच्चों में शवास संम्बन्धित संमस्याओं मे इसका उपयोग बेहद उपयोगी  है । एवियरी को अकेले भी प्रयोग किया जा सकता है और पर्यायक्रम ( alternate ) मे अन्य होम्य्पैथिक दवाओं के साथ भी । जैसे निम्म पोटेन्सी ( विशेषकर LM में ) Aconite  , ipecac , Antim Tart और अन्य औषधियों के  लक्षण अनुसार  । लेकिन पर्याक्रम में इसका कार्य अधिक बेहतर है ।

अन्य होम्योपैथिक दवाओं जैसे Bacillinum, Tuberculinum और Arsenic Iodide से इसकी तुलना की जा सकती है ।

क्लार्क की इन्साक्लोपीडिया मे एवियरी का उल्लेख है लेकिन संक्षिप्त रुप में । क्लार्क लिखते हैं :

Aviaire.
A preparation of chicken-tuberculosis introduced by Dr. Cartier and other homeopaths of Paris.
Clinical.-Bronchitis. Influenza. Measles. Phthisis.
Characteristics.-Dr. Cartier gave an account of this nosode in his paper read at the International Hom?opathic Congress, 1896 (Transactions, Part “Essays and Communications,” p. 187). Aviaire acts most prominently on the apices of the lungs, and it corresponds most closely to the bronchitis of influenza, which simulates tuberculosis, having cured several hopeless-looking cases. It has also done excellently in some cases of bronchitis following measles. The bacillus of avian tuberculosis has been identified with that of human tuberculosis, but the clinical properties of the two nosodes are not identical.
Relations.-Compare: Bacil., Bacil. t., Tuberc., Ars. i.

एक बार फ़िर से जब स्वाइन फ़्लू के केस लखनऊ मे देखे जा रहे हैं , एक पुरानी लेकिन आज भी महत्व रखने वाली पोस्ट को reblog कर रहा हूँ ।

होम्योपैथी-नई सोच/नई दिशायें

मिनेटेस डाट काम पर शेरी ने इन्फ़्लून्जियम पर कुछ रोचक आँकडॆ दिये ।  1918 से 1957 तक इस औषधि के स्त्रोत फ़्लू से ग्रस्त रोगियों के नासिक स्त्राव और  रक्त के सैम्पल से लिये गये । और  इनमे से अधिकतर उन रोगियों से जो 1918 के फ़्लू की महामारी से ग्रस्त थे ।

1957 के बाद से दवा बनाने के  ढंग  मे बदलाव आया और दवा का स्त्रोत फ़्लू वैक्सीन से लिया गया । इग्लैंड की नेलसन होम्यो लैब इसकी मुख्य निर्माता और विक्रेता हैं और 1918 से 1957  अब तक लगभग 13 अलग –2 सैम्पल ला चुके हैं । इनमे से अधिकतर सैम्पल इसके पूर्व वर्ष मे हुये फ़्लू के वैक्सीन  से लिये गये हैं । 1918 का फ़्लू वाइरस मुख्यत: H1N1 वाइरस था और यह अब तक के सबसे अधिक खतरनाक वाइरस की श्रेणी मे आता है । होम्योपैथिक दृष्टिकोण से मुख्य है इसकी प्रूविग जिससे उत्पन्न लक्षण…

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होम्योपैथी दवाओं के लिए नोएडा में पौधों का संरक्षण

Homeopathic medication

होम्योपैथी पद्दति में  करीब 1400 प्रकार की दवाएं पौधों से बनती हैं। इनमें 50 से ज्यादा पौधे ऐसे हैं, जिनका इस्तेमाल सिर से लेकर पैर तक के रोगों की कारगर दवा बनाने के लिए किया जाता है। ऐसे ही चार दर्जन से अधिक पौधों का सेक्टर-24 स्थित केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान केंद्र संरक्षण कर रहा है। इसके लिए अनुसंधान केंद्र में ग्रीन हाउस बनाने की भी तैयारी है। इस केंद्र में नई दवाओं को इजाद करने के लिए कई शोध भी किए जा रहे हैं।
अनुसंधान केंद्र के वनस्पति वैज्ञानिक अरुण कुमार तिवारी ने बताया कि हर छोटे और बड़े औषधीय पौधे की अपनी खासियत होती है। यह पौधे गंभीर बीमारियों के इलाज की क्षमता रखते हैं। यही वजह है कि यहां पौधों से दवाएं बनाने के अलावा उनकी अन्य गुणवत्ताओं की खोजों पर भी काम किया जाता है। समय-समय पर किए जाने वाले शोधों से बेहतरीन दवा इजाद की जाती है। एक दवा को बनाने के लिए एक ही प्रजाति के तीन से चार पौधों का रस निकाला जाता है। जिस पौधे से ज्यादा रस निकालता है, उसी से ज्यादा कारगर दवा बनती है। रस को सुखाया जाता है और एल्कोहल मिलाकर दवा बनाई जाती है। अरुण कुमार ने बताया कि अनुसंधान केंद्र की छत पर एक छोटा सा ग्रीन हाउस बनाया जाएगा, जिसमें पौधे और भी सुरक्षित रहेंगे।
कुछ प्रमुख पौधे
 वसाका
इस्तेमाल में आने वाला भाग- पत्तियां
उपयोग- सर्दी-जुकाम, खांसी
——
आंवला
इस्तेमाल में आने वाला भाग- फल
उपयोग- रक्त शोधक
——-
 इमली
इस्तेमाल में आने वाला भाग- फल
उपयोग- सर्दी-जुकाम, बदजहमी
——-
सलपर्णी
इस्तेमाल में आने वाला भाग- जड़
उपयोग- बुखार, सिरदर्द, मेनेनजाइटिस
—–
 लाेंग
इस्तेमाल में आने वाला भाग- फल
उपयोग- बुखार, कफ निस्सारक
——
अश्वगंधा
इस्तेमाल में आने वाला भाग- जड़ें
उपयोग- फेरेंजाइटिस, बवासीर और बुखार
——
सतावर
इस्तेमाल में आने वाला भाग- अंकुरित हिस्सा
उपयोग- मधुमेह
——
 जामुन
इस्तेमाल में आने वाला भाग- बीज
उपयोग- मधुमेह और मुहांसे
——
एलोवेरा
इस्तेमाल में आने वाला भाग- पत्तियां
उपयोग- बवासीर और डायरिया
——-
पौधा- गिलोय
इस्तेमाल में आने वाला भाग- तना और जड़
उपयोग- पीलिया और कमजोरी
——–
पौधा- पत्थर चूर
इस्तेमाल में आने वाला भाग- पत्तियां
उपयोग- पेशाब संबंधी दिक्कतों का इलाज
——-
पौधा- कालमेध
इस्तेमाल में आने वाला भाग- पूरा पौधा
उपयोग-सर्दी- जुकाम, खांसी और पीलिया
——
पौधा- जटरोफा
इस्तेमाल में आने वाला भाग- बीज
उपयोग- हैजा, डायरिया, बदहजमी
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पौधे- कुंदरू
इस्तेमाल में आने वाला भाग- पत्तियां
उपयोग- मधुमेह
——-
पौधे- सर्पगंधा
इस्तेमाल में आने वाला भाग- जड़े
उपयोग- हाइपरटेंशन
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पौधा- सतावर
इस्तेमाल में आने वाला भाग- जड़
उपयोग- महिलाओं के लिए शक्तिवर्धक
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(इनको मिलाकर करीब 50 किस्मों के पौधे अनुसंधान केंद्र में मौजूद हैं)

2013 के मध्य में शुरू होगा म्यूजियम
अनुसंधान केंद्र की सबसे ऊपरी मंजिल पर बन रहा म्यूजियम 2013 के मध्य में शुरू होगा। अनुसंधान केंद्र के उपनिदेशक डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि इस म्यूजियम में होम्योपैथी की शुरुआत, दवाओं और भविष्य में होने वाले शोध की जानकारी थ्री-डी और फोर-डी के जरिए दी जाएगी। म्यूजियम में 50 सीटों का एक छोटा सा हॉल भी होगा, जिसमें होम्योपैथी पर डॉक्यूमेंट्री मूवी दिखाई जाएगी।

साभार : अमर उजाला दिनांक १०-४-२०१२

E-HOMOEO

Repertory of "sensation as if"

The basis of the material was secured from three major works : Hering’s Guiding Symptoms, Clarke’s Dictionary and Allen’s Handbook. Frequent references have been made to Allen’s Encyclopædia. Other volumes less well known, and including Anshutz’s New, Old and Forgotten Remedies , have served in adding further symptoms.

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चेस्टनट–होम्योपैथिक और बैचफ़्लावर पद्दतियों मे उपयोग ( Chestnut–Homeopathic & Bach flower uses )

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गत सप्ताह नैनीताल भ्रमण के दौरान मुक्तेशवर जाते समय भवाली में फ़लॊ की मार्केट को देखकर रुकने का मोह छोड न पाया । कुछ नये फ़ल मुझे दिखे जो यहाँ मैदानी इलाकों मे कम ही दिखते हैं । इनमें से चेस्ट्नेट और कोका थे । रसीला फ़ल कोका तो मुक्तेशवर पहुँचते-२ समाप्त हो गया लेकिन चेस्ट्नेट काफ़ी संख्या मे बच गये जो  अभी भी लखनऊ आने पर भवाली और मुक्तेशवर की याद दिला रहे हैं ।

चेस्ट्नेट को देखकर भवाली मे मुझे उसके होम्योपैथिक और बैचफ़्लावर दवाओं मे प्रयोगों का स्मरण हो गया । चेस्ट्नेट की कई प्रजातियाँ होम्योपैथिक और बैचफ़्लावर मे इस्तेमाल लाई जाती हैं जिनमें रेड चेस्टनट (Red Chestnut) ,  स्वीट चेस्टनेट (Sweet Chestnut) , व्हाइट चेस्टनट (White Chestnut)  तथा चेस्टनट बड (Chestnut Bud) प्रमुख हैं । इनमे से चेस्टनट बड (Chestnut Bud) या एस्कुलस हिप ( Aesculus Hipp ) बैचफ़्लावर और होम्योपैथी दोनॊ ही मे प्रयोग लाई जाती है लेकिन दवाओं की कार्यप्रणाली दोनॊ ही मे जमीन आसमान का अन्तर है । इन चारों चेस्ट्नट को संक्षेप मे समझने के पहले चेस्टनट पर एक नजर डाल लें ।

Chestnut

साभार : विकीपीडिया

शाहबलूत ( चेस्टनट )  बादाम की प्रजाती का फल है यह अखरोट का ही एक रुप माना जाता है.शाहबलूत भूरे एवं लाल रंग का छोटा सा फल है जिसका उपयोग मेवे के रुप में भी किया जाता है इसका मूल स्थान ग्रीस रहा वहां से यह यूरोप में आया और संपूर्ण विश्व में फैल गया यूरोप ,एशिया और अफ्रीका के देशों में यह प्रतिदिन इस्तेमाल होने वाला भोज्य पदार्थ है. अभी भी चीन, जापान में एक महत्वपूर्ण खाद्य फसल है, और दक्षिणी यूरोप, जहां वे अक्सर ब्रेड बनाने में इस्तेमाल होता है और इतना प्रसिद्ध है की इसे एक प्रकार का उपनाम दिया गया रोटी का पेड़.
शाहबलूत में पौष्टिक तत्व शाहबलूत में बादाम एवं अखरोट के बराबर कैलोरी मौजूद होती है इसमें का विटामिन सी, कार्बोहाइड्रेट, आयरन, वसा, प्रोटीन इत्यादि तत्व मौजूद होते हैं इसमें स्टार्च की अधीकता देखी जा सकती है.
शाहबलूत का उपयोग शाहबलूत को अनेक प्रकार के व्यंजनों में किया जाता है.यह आलू के स्थान पर उपयोग में लाया जा सकता है यूरोप, अफ्रीका मे तो यह आलू के विकल्प के रूप में प्रयोग किया जाता है.इसे छीलकर या ऐसे ही कच्चा भी खाया जाता है ओर इसके अतिरिक्त यह पकाकर, तलकर, उबालकर, जैसे भी चाहें उपयोग कर सकते हैं.इसे बनाने का सबसे अच्छा तरीका बेक करना है बेक करने पर यह आलू जैसा स्वाद देता है यह विधि तुर्की, स्पेन उत्तरी चीन, ग्रीस, फ्रांस, कोरिया और दक्षिण पूर्व एशिया के देशों में लोकप्रिय है.
शाहबलूत से आटा भी तैयार किया जाता है जो ब्रेड बनाने के लिए तो इस्तेमाल किया जाता है इसके साथ ही इसे केक, पैनकेक्स, पास्ता,इत्यादी में उपयोग होता है इसे सूप,सास तथा रसेदार सब्जियों में डाला जाता है जिससे उनमे गाढा पन आए तथा यह भोजन का एक पौष्टिक रुप है इसके आटे से बनी रोटी ज्यादा समय तक ताजी रहती है.
शाहबलूत के स्वास्थ्य लाभ शाहबलूत स्वास्थ्य के लिए फ़ायदेमंद है यह अनेक रोगों में औषधि रुप में इस्तेमाल होता है खांसी, जुकाम, में इसका सेवन लभदायक होता है श्वास संबंधी समस्याओं मे इस फल को पानी में उबालकर इसका अर्क रोगी को पिलाना चाहिए.शाहबलूत को पीस कर उसमे शहद मिलाकर सेवन करने से काली खांसी में आराम आता है.इस फल के पत्ते से सिरप और टॉंनिक का निर्माण भी किया जाता है.

( साभार : निशामधुलिका.काम )

होम्योपैथिक और बैचफ़्लावर दवाओं मे उपयोग :

एस्कुलस हिप्पोकास्टनम (Aesculus hippocastanum ) होम्यपैथिक उपयोगों मे एस्कुलस की पहचान बवासीर की उपयोगी औषधियों मे से की जाती है विशेषकर बादी बवासीर जहाँ शुष्कता के कारण मल त्याग भारी पीडादायक होता है । इसी शुष्कता के कारण रोगी को किरच सा चुभने का दर्द उत्पन्न होता है जो इस  औषधि की विशेषता है । इस औषधि का एक अन्य महत्वपूर्ण लक्षण sacro ilaic joint का कटिशूल है और यही कारण है कि यह sacroiliitis की एक विशेष औषधि है । रोगी को महसूस होता है कि कमर लगभग टूटने वाली है और कोई भी शारिरिक स्थिति उसका निवारण नही कर पाती है ।

बैच फ़्लावर दवायें  होम्योपैथिक दवाओं से बिल्कुल अलग हैं , डां बैच के अनुसार , “मनुष्य का शारिरक दु:ख मानसिक रोग का संकेत देता है “ यही वजह है कि बैच फ़्लावर दवायें मानसिक रोगों और psychosomatic diseases  में बहुत प्रभावी रोल दिखाती हैं ’ हर बैच फ़्लावर दवाओं की एक मुख्य थीम है  और चिकित्सक को रोगी में उस मुख्य थींम को ढूँढंना पडता है जैसे इन ४ चेस्ट्नट दवाओं के थींम  अलग –२ हैं ’

रेड चेस्टनट (Red Chestnut) :

Botanical: Aesculus Carnea
Family: Hippocastanaceae
Homeopathic remedy: Not used, although members of the Aesculus genus – Aesculus Hippocastanum  and Aesculus Glabra are used.

दूसरॊं के लिये चिन्ता और डर रेड चेस्टनट का स्वभाव है . अगर बच्चा समय पर घर नही पहुँचा तो चिन्ता और अगर भाग कर रोड पार करने लगा तो चिन्ता कि कहीं किसी गाडी के नीचे न आ जाये . व्यर्थ की चिन्ता विशेशकर प्रियजनों की रेड चेस्टनट की मुख्य थीम है ’

स्वीट चेस्टनेट (Sweet Chestnut) :

Botanical: Castanea Sativa 
Family: Fagaceae
Homeopathic remedy:  Castanea Vesca

मनुष्य की ऐसी मानसिक अवस्था जिसमॆ  उसे पूर्ण मायूसी हो  जाये , कोई सहारा न दिखे औए वह अपने को लाचार समझने लगे . स्वीट चेस्ट्नट की मुख्य थीम है , “ बेहद मानसिक पीडा , घोर निराशा , मायूसी , बिल्कुल हौसला छॊड देना ” हाँलाकि ऐसे व्यक्ति सामान्य जिन्दगी मे निडर और बहादुर होते हैं ।

व्हाइट चेस्टनट (White Chestnut) :

Botanical: Aesculus Hippocastanum
Family: Hippocastanaceae
Homeopathic remedy: Aesculus Hippocastanum

मुझे याद नही पडता कि व्हाइट चेस्टनट और क्रैब एपल को छॊडकर बाकी कोई बैचफ़्लावर दवा क्लीनिक मे इतनी अधिक प्रयोग की होगी । Obscessive compulsive Neorosis , schizophrenia और कई तरह के  psychosis मे इसका उपयोग व्यापक है । और होगा  भी क्यूँ नहीं , इसकी थीम ही ऐसी है , “ पुराने और गैरजरुरी  ख्यालों मे खोये रहना , तमाम प्रयत्त्न करने के बावजूद भी जो मन मे आ जाये उसे निकाल न पाना , मन ही मन अपने आप से बाते करना और दलीलें करना’।” डां बैच लिखते हैं कि ग्रामोफ़ोन के रिकार्ड की तरह विचारों की सुई सदा घूमती रहती है ।

डां कृष्णामूर्ति ने “An exploratory study on Dr. Bach flower remedies of England” मे इस दवा के प्रयोगों का वर्णन निम्म प्रकार किया :

१. मरिज का अपने आप से बातें करना या एक ही बात या क्रिया को बार-२ दोहराना

२. मन में नापसन्द विचारों का चक्कर लगना ।

३. गिनती गिना, बार-२ दरवाजा बन्द है या नही इसको चेक करना ।

४. बडे हिसाब से प्लान बनाना और फ़िर उस पर अमल न करना ।

५. वहम( delusions ), , भ्लावा ( illusions ), छाया ( hallucinations ) , भूत –प्रेत देखना या उनकी आवाज सुनना ।

 

चेस्टनट बड (Chestnut Bud) :

Botanical: Aesculus  indica

Family: N.O. Sapindaceae

चेस्ट्नट बड की मुख्य थींम मे वह व्यक्ति जिसमे ध्यान का अभाव हो , एक ही गलती को बार-२ करे और टालामटोल की भावना से ग्रस्त हो . स्वभावत : कुछ वच्चे इससे  ग्रसित रहते हैं , पढने लिखने मे ध्यान नही लगाते और हर चीज को सीखने मे आना कानी करते हैं ।

तो अगली बार जब आप चेस्टनट खायें तो होम्योपैथिक और बैचफ़्लावर उपयोगों को न भूलें ।