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हिमाई ( HMAI ) की लखनऊ कान्फ़्रेन्स संपन्न

 

मेरा मानना है अधिकतर कान्फ़्रेन्स राजनीति का अखेडा ही होती है ; पिछ्ले २० सालों से मुझे इन होम्योपैथिक संगोष्ठियों से कोई लगाव न रहा और न मैने इसमे कभी भी दिलचस्पी ली । हाल ही मे लखनऊ मे २६ -२८ दिसम्बर तक चली H.M.A.I. की होम्योपैथिक कान्फ़्रेन्स भी कुछ ऐसे ही थी । दोपहर मे क्लीनिक बन्द करने के बाद एक बार चक्कर लगाने की सोची । डा. विथलीकोस  ( Dr Vithoulkas) के आने  की उम्मीद थी लेकिन वह नही आये । सही बात तो यह थी मै पढने के लिये कुछ नई पुस्तकें ढूँढ रहा था । कान्फ़्रेन्स के कन्वेनर बैकसन के डा. बक्शी और डा. जवाहर शाह बिल्कुल सफ़ल व्ययापारियों की तरह इधर – उधर टहलते नजर आये । तब तक मेरा ध्यान बी.जैन के बुक स्टाल पर चला गया और मुझे मेरी मनचाही पुस्तकें मिल चुकी थी । जिन ५ पुस्तकों को मैने लिया उनमे दो ५० मिलसमल पोटेन्सी पर थी जैसे  डा. हरिमोहन चौधरी की 50 Millesimal potency in Theory & Practice और डा. फ़रनान्डॊ फ़्लोरस विलेवा ( Dr Fernanado Flores Villalva ) की LM Scale 50 Milesimal Porencies : Method to Prescribe |आने  वाले साल मे प्रैकिटिस मे आर्गेनान आफ़ मेडिसन के ६ वें एडीशन के तौर तरीकों पर प्रैक्टिस करने का विचार बना रहा हूँ । ५० मिलसमल पोटेन्सी प्रयोग करने वाले अन्य होम्योपैथों की मदद की मुझे आवशयकता पडेगी , और हाँ डा. प्रवीन गोस्वामी अपना सर खपाने के लिये  तैयार रहियेगा 🙂

कीथ सौटैर ( Keith Souter )  की Remedy Selection made easy with flow charts , डा. सौरभ बैनर्जी की Miasmatic Diagnosis  with Practical Tips और डा. विटलीकोस  ( Dr Vithoulkas) की Essence of Materia Medica अन्य पुस्तकों की लिस्ट मे थी।

अगर मुझे संगोष्ठियों और वर्क-शाप को चुनने के लिये मिले तो मै work shops को चुनूगाँ , कारण वहाँ पर सीखने को काफ़ी अनुभव मिल जाता है । अगले साल अगर मौका मिला तो सहगल स्कूल आफ़ होम्योपैथी और डा. प्रफ़ुल्ल विजयरकर की Predictive Homeopathy की वर्कशाप मेरी नजर मे रहेगें ।

लखनऊ, 26 दिसम्बर (जागरण संवाददाता) : केंद्रीय होम्योपैथिक परिषद ने राज्य में होम्योपैथी की शिक्षा के स्तर को काफी खराब करार दिया है। यहां किसी भी होम्योपैथिक मेडिकल कालेज में मानक पूरे न होने पर परिषद ने चिंता जतायी है। शुक्रवार से शुरू हुई आल इंडिया होम्योपैथिक कांग्रेस में बतौर विशिष्ट अतिथि उपस्थित होम्योपैथिक परिषद के उपाध्यक्ष डा. रामजी सिंह ने अपने संबोधन में विभागीय अफसरों को आड़े हाथ लिया। गांधी भवन सभागार में शुरू हुए तीन दिवसीय सम्मेलन में डा. राम सिंह ने कहा कि राज्य में होम्योपैथिक शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए बीते वर्ष विभिन्न मेडिकल कालेजों के लिए कुल 196 पद सृजित हुए थे लेकिन इन्हें भरा नहीं जा सका है। राज्य के किसी भी होम्योपैथिक कालेज में 43 शिक्षकों का मानक पूरा नहीं है। कुछ वर्ष पहले शिक्षा स्तर सुधारने के नाम पर लखनऊ का मोहन मेडिकल कालेज, जौनपुर का टीडी होम्योपैथिक मेडिकल कालेज और बिजनौर के नगीना होम्योपैथिक मेडिकल कालेज को बंद कर दिया गया था। इनके शिक्षकों को शेष सात मेडिकल कालेजों में समायोजित किया गया। बावजूद इसके बात नहीं बनी। राज्य के सभी सातों मेडिकल कालेज शिक्षकों की भयंकर कमी से जूझ रहे हैं। डा. सिंह के मुताबिक शिक्षकों की कमी के कारण ही राज्य के किसी भी होम्योपैथिक मेडिकल कालेज में स्नातकोत्तर की पढ़ाई नहीं शुरू हो पायी है। आलम यह है कि स्नातकोत्तर शिक्षकों के 18 पद सृजित होने के बाद भी इनपर कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी है। होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन आफ इंडिया की लखनऊ ईकाई के तत्वाधान में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन होम्योपैथिक चिकित्सा राज्यमंत्री राजेश त्रिपाठी ने किया। कार्यक्रम में एसोसिएशन के अध्यक्ष और निदेशक होम्योपैथिक सेवाएं डा. बीएन सिंह, सचिव डा. शैलेन्द्र सिंह, डा. रेनू महेन्द्र और डा. केके राजपूत समेत देश के विभिन्न हिस्सों से आये तमाम चिकित्सक मौजूद थे।