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मेरी डायरी से -बैच फ़्लावर औषधि -‘Vine’ – ‘वाइन’ और ‘वरवैन’ ( Vervain )

 Vitis-vinifera

हिप्पोक्रेट्स से लेकर गैलन और फ़िर हैनिमैन ने इन्सान के स्वाभाव का विशेलेषण करने मे बहुत अंह भूमिका निभायी . जहाँ हिप्पोक्रेट्स (400 ई.पू.) का मानना था कि शरीर चार humors अर्थात रक्त,कफ, पीला पित्त और काला पित्त से बना है. Humors का असंतुलन, सभी रोगों का कारण है . वही गैलन Galen (130-200 ई.) ने इस शब्द  का इस्तेमाल  शारीरिक स्वभाव के लिये किया , जो यह निर्धारित करता है  कि शरीर  रोग के प्रति किस हद तक संवेदन्शील है । हिप्पोक्रेट के  Humour शब्द का तात्पर्य शरीर मे प्रवाहित हो रहे तरल पद्दार्थ से था हाँलाकि यह तकनीकी रुप से यह प्रचलित भावनाओं से जुडा था जैसे :

प्रसन्नता या खुशी का रक्त से संबध – सैन्गूयूनि टेम्परामेन्ट (Sanguine Temperament)
कफ़ का चिंता और मननशीलता से संबध – फ़ेलेगमेटेक ( phlegmatic Temperament)
पीले पित्त का क्रोध से संबध – कोरिक (Choleric Temperament)
उदासी का काले पित्त से – मेलोन्कोलिक (Melancholic Temperament)

इन चार स्वभावों को हम एक सक्षिप्त  उदाहरंण से  आसानी से समझ सकते हैं । एक होटल मे चार मित्र  सूप पीने जाते है । लेकिन अचानक चारों की नजर सूप मे तैरते बाल की तरफ़ पड जाती है  पहला  मित्र देखते ही आग बबूला हो उठा , गुस्से से उसने सूप का प्याला वेटर के मुँह पर दे मारा ( Choleric ) , दूसरे ने मुँह बनाया  अपने कोट को झाडा और सीटी बजाता हुआ निकल गया (Sanguine) , और तीसरा रुँआसा सा हो गया और बोला कि यह सब उसी की जिदंगी मे अक्सर क्यूं होता रहता है (Melancholic ) और चौथा मित्र तो बडे दिमाग वाला निकला , सूप मे से बाल को किनारे किया ;सूप पिया और वेटर से नुकसान हुये सूप के बदले दूसरे सूप की फ़रमाईश भी कर डाली ( phlegmatic)

इन चार स्वभावों के व्यक्तितव के कुछ  धन पक्ष भी हैं और  ॠण पक्ष भी  :

hippocratic temperament

4 humours in respective order: choleric, melancholic, phlegmatic, and sanguine

सैन्गूयूनि टेम्परामेन्ट (Sanguine Temperament):

धन पक्ष : हमेशा प्रसन्न रहने वाले, आत्मविशवास से भरपूर , आशावादी , बहिर्मुखी और जीवन को जीने वाले ।

ॠण पक्ष :आत्मसंतोष की कमी , संवेदन्शील, अल्पज्ञता, अस्थिरता, बाहरी दिखावा करने वाले और ईर्ष्या को झुकाव ।

फ़ेलेगमेटेक टेम्परामेन्ट ( phlegmatic Temperament) :

धन पक्ष :   अच्छी तरह से संतुलित,  जीवन के साथ संगत, भरोसेमंद, रचनात्मक और विचारशील, संतुष्ट

ॠण पक्ष : आलसी, अकर्मण्य . अपने  कर्तव्य की उपेक्षा ,  दुविधाग्रस्त, अपने कर्तवों  को टालने वाले , महत्वाकांक्षा विहीन ,  दूसरों को भी प्रेरित न कर पाना

कोरिक टेम्परामेन्ट (Choleric Temperament):

धन पक्ष : मजबूल इच्छाशक्ति वाले , दुनिया को अपने तरीके से चलाने वाले , आत्मविशवास से भरपूर

ॠण पक्ष : प्रचंड गुस्सा , अपने को श्रेष्ठ समझना , विरोधों को सहन न कर पाना , सहानभूति का अभाव , जीवन मे छ्ल , कपट और पाखंड का सहारा लेना

मेलोन्कोलिक टेम्परामेन्ट (Melancholic Temperament) :

धन पक्ष : प्रतिभाशाली, बेहद रचनात्मक , संवेदनशील, सपने देखने वाले , अतंर्मुखी, विचारशील,  आत्म त्याग की भावना से भरपूर , जिम्मेदार, विश्वसनीय

ॠण पक्ष : चिंता और अवसाद ग्रस्त , अपनी प्रतिभा का कम उपयोग करने वाले , मुखरता की कमी , आसानी से किसी को माफ़ न कर पाना , बेहद संवेदनशील

पूरी पोस्ट के लिये देखें : व्यक्तित्व विकास, शारीरिक भाषा और होम्योपैथी – एक अभिनव अवधारणा ( Constitutional Prescribing ,Body Language and Homeopathy )

लेकिन क्या यह संभव है कि व्यक्ति के स्वभाव मे दवायें बदलाव ला सकॆ । बहुधा  यह देखा गया है कि  लम्बे समय तक चारित्रिक लक्षणॊं के आधार पर चयनित खोम्योपैथिक औषधियां  व्यवाहार मे परिवर्तन अवशय लाती हैं । हाँलाकि कई होम्योपैथिक चिकित्सक  जैसे केन्ट ने लेसर राइटिगं मे इस तथ्य से इनकार किया है कि यह व्यक्ति के स्वभाव को बदल स्कती है। हाँ , यह लक्षण स्वभावत: दवाओं के चयन में अवशय कारगर होते हैं ।

लेकिन बैच फ़्लावर औषधियों के बारे मे कम से कम मैं कह सकता हूँ कि इनका कार्य मन के उस भाव को पकडने में कमयाब रहता है जिससे स्वभाव मे बदलाव की अपेक्षा हम कर सकते है ।

एक औषधि जो मुझे हमेशा स्मरण रही वह थी वाइन । हाँलाकि वाइन का इस्तेमाल मैने अधिक नही किया लेकिन  एक केस जो मुझे हमेशा स्मरण रहा और उसकी वजह से वाइन के  लक्षण भी ।

tyranny

दो साल पहले एक २८ वर्षीय युवक मे इसके प्रयोग करने का मौका मिला ।   पेशे से वह बिल्डिग कान्टॆकटर्था  और अधिकतर उसके  कार्य सरकारी क्षेत्रों मे चलते थे । देखने और व्यवहार  में वह स्मार्ट और खूबसूरत था  , कपडे पहनने से लेकर बोलने मे एक गरिमा थी , और  जीवन मे पैसा भी था और शौहरत  भी  ।  पिछ्ले कुछ समय से वह मेरे पास तनाव आदि समस्याओं के लिये इलाज कराता रहा  जो उसके कार्य को  देखते हुये स्वभाविक भी था क्योंकि उसके अनुसार अकसर भुगतान वगैरह की समस्याओं से उसे दो चार होना पडता था ।

कुछ महीने पूर्व उसका विवाह हुआ और इस दौरान मैने अकसर क्लीनिक मे उसको अपनी पत्नी से अकसर बिना बात झँझट करते देखा  । एक दिन उसके पिता ने ने मुझसे संपर्क किया कि वह मुझसे अपने पुत्र मे हो रहे असमान्य  व्यवाहर मे परिवर्तन के बारे मे सलाह लेना चाहते हैं  । उनके अनुसार “ मेरे लडके की प्रवृति घर हो या बाहर अपने  वर्चस्व को सबसे ऊपर रखने  की रहती है । वह यह चाहता है सब उस के अनुसार चलें । घर मे माँ , बहन या बाहर भी हर किसी के साथ उसकी नही बनती । हालाकि वह बहुत मेहनती भी है लेकिन इस स्वभाव के कारण अब तक तो ठीक  ठाक रहा क्योंकि हम उसके व्यवहार को नंजरदाज करते रहे । लेकिन अब पत्नी के आने के बाद उसका स्वभाव एक घर मे अधिक तनाव का कारण बन सा गया है । क्या होम्योपैथिक इसमे कुछ मदद कर सकती है ? ”

होम्योपैथिक  तो नही हाँ बैच फ़्लावर औषधि ‘वाइन’ को अन्य होम्योपैथिक दवाओं के साथ  जोड दिया गया , लम्बे समय तक चलने के दौरान मैने और खासकर उसके परिवार के लोगों ने उसके स्वभाव मे एक बढिया परिवर्तन देखा । न तो वह झगाडालू  रहा और न तानाशाह । और  यह संभव हुआ बैच फ़लावर औषधि ‘वाइन ‘से ।

तो क्या था वाइन मे जो श्री रा.स. के ऋण पक्ष को धन पक्ष मे बदलने मे मदददगार साबित हुआ ।

विटीऐसी परिवार की वाइन या ‘ वाइटस विनीफ़ेरा ‘के मानसिक लक्षण किसी तानाशाही व्यक्ति की प्रवृति से मिलते जुलते हैं । अत्यन्त अंहकारी , अभिलाषायें  बहुत ही उँची  , दूसरों पर छा जाने की प्रवृति, अपनी प्रभुता कायम रखना , अपने उद्देशय को पाने के लिये कुछ भी कर देना , तानाशाही स्वभाव

वाइन या अंगूर का वनस्पति नाम  ‘ वाइटस विनीफ़ेरा ‘ है  । होम्योपैथिक दवाओं मे इसके प्रयोग नही मिलते हैं , अलबत्ता यह आयुर्वेर्दिक और यूनानी दवाऒं मे अधिक प्रयोग होता है ।

हाँलाकि होम्योपैथिक दवाओं मे इससे सादृश दवायें लक्षणॊ के आधार पर चयन की जाती हैं । मुख्य लक्षण जो इस व्यक्तितव  के लिये प्रमुख हैं :

MIND – DICTATORIAL
MIND – DICTATORIAL – power, love of
MIND – HAUGHTY
MIND – EGOTISM
MIND – CONTEMPTUOUS

वाइन के सादृश औषधि है वरवैन ( vervain ) ।  वरवैन का रोगी भी जरुरत से अधिक उत्साह और अपनी शक्ति से अधिक कम करने का जनूनी होता है । लेकिन जहाँ वरवैन का जनून दूसरों के लिये मिसाल बनता है वही वाइन दूसरों से हुक्म बजाने मे अपनी महत्त्ता समझता है ।

Vine
Botanical
: Vitis Vinifera
Family: Vitaceae
Homeopathic remedy: Not used.
Description: Perennial, woody climbing vine; the  stems can grow up to 35 m length, but in cultivation usually reduced by annual pruning to 1–3 m. The leaves ar equite thin, circular to circular-ovate with branched tendrils. The fruits of the are used to produce vine or juice that can be directly consumed.
Medicinal  uses:  Analgesic,  Antiinflammatory,  Astringent,  Demulcent,  Diuretic,  Hepatic,  Laxative,
Lithontripic
Compare: Vervain
Keywords: Confident, Persuasive, Tyrannical, Self-assured
Dr Bach’s description
: Very capable people, certain of their own ability, confident of success. Being so assured, they think that it would be for the benefit of others if they could be persuaded to do things as they themselves do, or as they are certain is right. Even in illness they will direct their attendants. They may be of great value in emergency.
Essence: The Vine is a very capable person that is confident of his skills, ability and knowledge. He is
certain  that  he  is right  and he feels  that  other people should persuaded by him  to follow his goals, because these goals are the correct ones. In the positive state, this kind of people are very valuable in the crisis situations,  because  they have a clear idea about what  should be done and they will  guide others from the uncertainty.
In the negative state, the Vine tends to be very stubborn, overly self-confident and he forces other to do exactly as he commands. He may even use force to persuade them to what he wants. He tends to be tyrannical and he suppresses all opposition with all means necessary. This train manifests in the times of  sickness.  Although  the Vine person may have no knowledge of   the medical  procedures,  he will command the hospital personnel and he will direct them as he sees fit.
The difference between the Vervain and the Vine is that while the Vervain persuades others to follow his way by the means of example and with his enthusiastic energy, the Vine person is not interested in setting an example. He will force others to do as he commands without any thoughts whether this is right or not.

यह  भी देखें :

चेस्टनट–होम्योपैथिक और बैचफ़्लावर पद्दतियों मे उपयोग ( Chestnut–Homeopathic & Bach flower uses )

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गत सप्ताह नैनीताल भ्रमण के दौरान मुक्तेशवर जाते समय भवाली में फ़लॊ की मार्केट को देखकर रुकने का मोह छोड न पाया । कुछ नये फ़ल मुझे दिखे जो यहाँ मैदानी इलाकों मे कम ही दिखते हैं । इनमें से चेस्ट्नेट और कोका थे । रसीला फ़ल कोका तो मुक्तेशवर पहुँचते-२ समाप्त हो गया लेकिन चेस्ट्नेट काफ़ी संख्या मे बच गये जो  अभी भी लखनऊ आने पर भवाली और मुक्तेशवर की याद दिला रहे हैं ।

चेस्ट्नेट को देखकर भवाली मे मुझे उसके होम्योपैथिक और बैचफ़्लावर दवाओं मे प्रयोगों का स्मरण हो गया । चेस्ट्नेट की कई प्रजातियाँ होम्योपैथिक और बैचफ़्लावर मे इस्तेमाल लाई जाती हैं जिनमें रेड चेस्टनट (Red Chestnut) ,  स्वीट चेस्टनेट (Sweet Chestnut) , व्हाइट चेस्टनट (White Chestnut)  तथा चेस्टनट बड (Chestnut Bud) प्रमुख हैं । इनमे से चेस्टनट बड (Chestnut Bud) या एस्कुलस हिप ( Aesculus Hipp ) बैचफ़्लावर और होम्योपैथी दोनॊ ही मे प्रयोग लाई जाती है लेकिन दवाओं की कार्यप्रणाली दोनॊ ही मे जमीन आसमान का अन्तर है । इन चारों चेस्ट्नट को संक्षेप मे समझने के पहले चेस्टनट पर एक नजर डाल लें ।

Chestnut

साभार : विकीपीडिया

शाहबलूत ( चेस्टनट )  बादाम की प्रजाती का फल है यह अखरोट का ही एक रुप माना जाता है.शाहबलूत भूरे एवं लाल रंग का छोटा सा फल है जिसका उपयोग मेवे के रुप में भी किया जाता है इसका मूल स्थान ग्रीस रहा वहां से यह यूरोप में आया और संपूर्ण विश्व में फैल गया यूरोप ,एशिया और अफ्रीका के देशों में यह प्रतिदिन इस्तेमाल होने वाला भोज्य पदार्थ है. अभी भी चीन, जापान में एक महत्वपूर्ण खाद्य फसल है, और दक्षिणी यूरोप, जहां वे अक्सर ब्रेड बनाने में इस्तेमाल होता है और इतना प्रसिद्ध है की इसे एक प्रकार का उपनाम दिया गया रोटी का पेड़.
शाहबलूत में पौष्टिक तत्व शाहबलूत में बादाम एवं अखरोट के बराबर कैलोरी मौजूद होती है इसमें का विटामिन सी, कार्बोहाइड्रेट, आयरन, वसा, प्रोटीन इत्यादि तत्व मौजूद होते हैं इसमें स्टार्च की अधीकता देखी जा सकती है.
शाहबलूत का उपयोग शाहबलूत को अनेक प्रकार के व्यंजनों में किया जाता है.यह आलू के स्थान पर उपयोग में लाया जा सकता है यूरोप, अफ्रीका मे तो यह आलू के विकल्प के रूप में प्रयोग किया जाता है.इसे छीलकर या ऐसे ही कच्चा भी खाया जाता है ओर इसके अतिरिक्त यह पकाकर, तलकर, उबालकर, जैसे भी चाहें उपयोग कर सकते हैं.इसे बनाने का सबसे अच्छा तरीका बेक करना है बेक करने पर यह आलू जैसा स्वाद देता है यह विधि तुर्की, स्पेन उत्तरी चीन, ग्रीस, फ्रांस, कोरिया और दक्षिण पूर्व एशिया के देशों में लोकप्रिय है.
शाहबलूत से आटा भी तैयार किया जाता है जो ब्रेड बनाने के लिए तो इस्तेमाल किया जाता है इसके साथ ही इसे केक, पैनकेक्स, पास्ता,इत्यादी में उपयोग होता है इसे सूप,सास तथा रसेदार सब्जियों में डाला जाता है जिससे उनमे गाढा पन आए तथा यह भोजन का एक पौष्टिक रुप है इसके आटे से बनी रोटी ज्यादा समय तक ताजी रहती है.
शाहबलूत के स्वास्थ्य लाभ शाहबलूत स्वास्थ्य के लिए फ़ायदेमंद है यह अनेक रोगों में औषधि रुप में इस्तेमाल होता है खांसी, जुकाम, में इसका सेवन लभदायक होता है श्वास संबंधी समस्याओं मे इस फल को पानी में उबालकर इसका अर्क रोगी को पिलाना चाहिए.शाहबलूत को पीस कर उसमे शहद मिलाकर सेवन करने से काली खांसी में आराम आता है.इस फल के पत्ते से सिरप और टॉंनिक का निर्माण भी किया जाता है.

( साभार : निशामधुलिका.काम )

होम्योपैथिक और बैचफ़्लावर दवाओं मे उपयोग :

एस्कुलस हिप्पोकास्टनम (Aesculus hippocastanum ) होम्यपैथिक उपयोगों मे एस्कुलस की पहचान बवासीर की उपयोगी औषधियों मे से की जाती है विशेषकर बादी बवासीर जहाँ शुष्कता के कारण मल त्याग भारी पीडादायक होता है । इसी शुष्कता के कारण रोगी को किरच सा चुभने का दर्द उत्पन्न होता है जो इस  औषधि की विशेषता है । इस औषधि का एक अन्य महत्वपूर्ण लक्षण sacro ilaic joint का कटिशूल है और यही कारण है कि यह sacroiliitis की एक विशेष औषधि है । रोगी को महसूस होता है कि कमर लगभग टूटने वाली है और कोई भी शारिरिक स्थिति उसका निवारण नही कर पाती है ।

बैच फ़्लावर दवायें  होम्योपैथिक दवाओं से बिल्कुल अलग हैं , डां बैच के अनुसार , “मनुष्य का शारिरक दु:ख मानसिक रोग का संकेत देता है “ यही वजह है कि बैच फ़्लावर दवायें मानसिक रोगों और psychosomatic diseases  में बहुत प्रभावी रोल दिखाती हैं ’ हर बैच फ़्लावर दवाओं की एक मुख्य थीम है  और चिकित्सक को रोगी में उस मुख्य थींम को ढूँढंना पडता है जैसे इन ४ चेस्ट्नट दवाओं के थींम  अलग –२ हैं ’

रेड चेस्टनट (Red Chestnut) :

Botanical: Aesculus Carnea
Family: Hippocastanaceae
Homeopathic remedy: Not used, although members of the Aesculus genus – Aesculus Hippocastanum  and Aesculus Glabra are used.

दूसरॊं के लिये चिन्ता और डर रेड चेस्टनट का स्वभाव है . अगर बच्चा समय पर घर नही पहुँचा तो चिन्ता और अगर भाग कर रोड पार करने लगा तो चिन्ता कि कहीं किसी गाडी के नीचे न आ जाये . व्यर्थ की चिन्ता विशेशकर प्रियजनों की रेड चेस्टनट की मुख्य थीम है ’

स्वीट चेस्टनेट (Sweet Chestnut) :

Botanical: Castanea Sativa 
Family: Fagaceae
Homeopathic remedy:  Castanea Vesca

मनुष्य की ऐसी मानसिक अवस्था जिसमॆ  उसे पूर्ण मायूसी हो  जाये , कोई सहारा न दिखे औए वह अपने को लाचार समझने लगे . स्वीट चेस्ट्नट की मुख्य थीम है , “ बेहद मानसिक पीडा , घोर निराशा , मायूसी , बिल्कुल हौसला छॊड देना ” हाँलाकि ऐसे व्यक्ति सामान्य जिन्दगी मे निडर और बहादुर होते हैं ।

व्हाइट चेस्टनट (White Chestnut) :

Botanical: Aesculus Hippocastanum
Family: Hippocastanaceae
Homeopathic remedy: Aesculus Hippocastanum

मुझे याद नही पडता कि व्हाइट चेस्टनट और क्रैब एपल को छॊडकर बाकी कोई बैचफ़्लावर दवा क्लीनिक मे इतनी अधिक प्रयोग की होगी । Obscessive compulsive Neorosis , schizophrenia और कई तरह के  psychosis मे इसका उपयोग व्यापक है । और होगा  भी क्यूँ नहीं , इसकी थीम ही ऐसी है , “ पुराने और गैरजरुरी  ख्यालों मे खोये रहना , तमाम प्रयत्त्न करने के बावजूद भी जो मन मे आ जाये उसे निकाल न पाना , मन ही मन अपने आप से बाते करना और दलीलें करना’।” डां बैच लिखते हैं कि ग्रामोफ़ोन के रिकार्ड की तरह विचारों की सुई सदा घूमती रहती है ।

डां कृष्णामूर्ति ने “An exploratory study on Dr. Bach flower remedies of England” मे इस दवा के प्रयोगों का वर्णन निम्म प्रकार किया :

१. मरिज का अपने आप से बातें करना या एक ही बात या क्रिया को बार-२ दोहराना

२. मन में नापसन्द विचारों का चक्कर लगना ।

३. गिनती गिना, बार-२ दरवाजा बन्द है या नही इसको चेक करना ।

४. बडे हिसाब से प्लान बनाना और फ़िर उस पर अमल न करना ।

५. वहम( delusions ), , भ्लावा ( illusions ), छाया ( hallucinations ) , भूत –प्रेत देखना या उनकी आवाज सुनना ।

 

चेस्टनट बड (Chestnut Bud) :

Botanical: Aesculus  indica

Family: N.O. Sapindaceae

चेस्ट्नट बड की मुख्य थींम मे वह व्यक्ति जिसमे ध्यान का अभाव हो , एक ही गलती को बार-२ करे और टालामटोल की भावना से ग्रस्त हो . स्वभावत : कुछ वच्चे इससे  ग्रसित रहते हैं , पढने लिखने मे ध्यान नही लगाते और हर चीज को सीखने मे आना कानी करते हैं ।

तो अगली बार जब आप चेस्टनट खायें तो होम्योपैथिक और बैचफ़्लावर उपयोगों को न भूलें ।