Category Archives: होम्यो साफ़्टवेएर

Expert Systems: Experts experience in your clinic

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एन्ड्रोएड स्मार्ट्फ़ोन्स और टैबलैट के लिये होम्योपैथिक एपलीकेशन( Homeopathic apps for Android Smart phones and tablets )

पिछ्ले दिनों अपने इलेक्ट्रोनिक गैजैडस मे एक और इजाफ़ा किया । अब कि  बारी थी टैबलेट की । बाजार मे कई आप्शन  सर्च किये किसी का प्रोसेसर  धीमा था , किसी मे ग्राफ़िक कार्ड की कमी थी और किसी मे calling की सुविधा नही थी आदि –२ । लेकिन सबसे बडी बात जो थी कि जेब भी मै बहुत अधिक ढीली नही करना चाहता था “Smile  बात फ़िर आकर  रुकी एक नानब्रान्डन्ड टैबलैट I Berrry की जिसमे मुझे वह सारे आप्शन मिल गये जिसको मै ढूँढ रहा था । अपने अनुज मित्रों मो. तल्हा और फ़जले रहीम का आभारी हूँ जिन्होने इस सर्च को और भी अधिक आसान  बनाने मे मदद की ।

The Auxus AX03G has the following specifications:

SYSTEM PROCESSOR
• CPU: 1.0 GHz ARM Cortex A8
• GPU: Dual Mali-400 OpenGL 2.0
• VPU: Dedicated Full HD Video processing
OPERATING SYSTEM
Android 4.0 Ice-Cream Sandwich
• Official Google Play Store supported
MEMORY
1GB RAM DDR3
• 24GB Storage Memory (Internal 8GB NAND Flash + External 16GB MicroSD memory)
• Expandable MicroSD slot upto 32GB
DISPLAY
• 7.0″ Capacitive Multitouchscreen
• 800×480 WVGA-Widescreen
NETWORK
Inbuilt SIM slot, GSM (2G/3G) 900/1800/2100MHz with Phone Function
• WiFi 802.11 b/g and Bluetooth
VIDEO OUTPUT
Mini HDMI, v1.3, Type C
(Full HD 1080p Supported)
CAMERA
• Back 2 MP, Front 0.3 MP
GAMES
• Dual Mali 400 GPU with OpenGL 2.0 support
• Accelerometer, Gravity & Motion Sensor
INPUT/OUTPUT
• 3.5 mm earphone jack, built-in Microphone
• Stereo Speakers, Mini USB Port
• Mini HDMI, MicroSD slot
BATTERY
• Rechargeable Li-poly 4000MAh

Sony-Ericsson-XPERIA-X10-01 Samsung-Galaxy-Tab-Price

एन्ड्रोएड फ़ोन्स के लिये होम्योपैथी एपलीकेशन

Auxus की 3  G टैबलेट की चर्चा करना इस पोस्ट का उद्देशय नही है बल्कि उन फ़्री होम्योपैथिक एपलिकेशन्श के बारे मे जानकारी देना है जिनको होम्योपैथिक यूजर एन्ड्रोएड फ़ोन्स और टैबलेट मे  जानकारी और फ़ायदे के लिये प्रयोग कर सकता है ।

गूगल प्ले ( एन्ड्रोएड मार्केट )  पर अगर सर्च करें तो कई एपलिकेशन्श नजर आयेगें । जिन दो एपलिकेशन्श की मै यहाँ चर्चा कर रहा हूँ वह निस्संन्देह उच्चकोटि के हैं ।

१. मैटिरिया मेडिका लाइट ( Materia Medica Lite )

materia medica lite

मनोहर नागिहा ने इसका सृजन किया है । गूगल प्ले पर होम्योपैथी का सबसे बढिया एपलिकेशन है । बोरिक , केन्ट , एलेन , नैश और क्लार्क की मैटिरिया मेडिका के अलावा इस नये वर्जन  में केन्ट की रेपर्टिरी का भी श्री नागिया ने समावेश किया है । आर्गेनान का छ्टा संस्करण भी है और साथ में होम्योपैथिक मैटिरिया मेडिका से संम्बधित लेक्चर भी है ।

डाउनलोड और इन्सटाल करने के लिये जायेंhttp://tinyurl.com/cctgtnw

. Bach Remedy Resource (New)

bach remedy resource

बैच फ़्लावर की ३८ दवायें , उनके लक्षण , और संक्षिप्त रिपर्टरी पर आधारित यह एपलिकेशन है ।

डाउनलोड लिंक : http://tinyurl.com/9qllxft

इन दो एपलिकेशनके अतिरिक्त आसिलो ( iSilo) और एलडिको (Aldiko ) को भी इन्सटाल करना न भूलें । विशेषकर  आइसलो क्योंकि अधिकांश  डाक्यूमेन्ट और पुस्तकें पी.डी.बी.  ( PDB ) फ़ार्मेट मे उपलब्ध हैं ।  एलडिको एडोप रीडर की तरह का ही है जो पीडी.फ़. ( PDF) फ़ार्मेट की फ़ाइलों को खोलने के लिये मोबाईल और टैबलेट मे उच्च  कोटि का एपलिकेशन है ।

१. iSilo

isilo

DSCN1606

आसलो एक उच्च कोटि का PDB e reader है । यह विन्डोज पर भी चलता है और मोबाइल और टैबलेट मे भी ।जो होम्योपैथिक पुस्तकें PDB फ़ार्मेट मे आसलो के द्वारा खोलने और पढने मे समर्थ हैं , उनके नाम और लिंक नीचे दिये हैं ।

isilo for androidhttp://tinyurl.com/9enawu3

Download Link for books in PDB format : http://tinyurl.com/9lmekbo

1. THE ENCYCLOPEDIA OF PURE MATERIA MEDICA By TIMOTHY F. ALLEN, A.M., M.D.

2. Keynotes And Characteristics With Comparisons of some of the Leading Remedies of the Materia Medica Henry C. Allen, M. D.

3.First Lessons in the Symptomatology of Leading Homœopathic Remedies by H. R. Arndt, M. D.

4.BONNINGHAUSEN’S CHARACTERISTICS MATERIA MEDICA & REPERTORY. by C. M. BOGER, M.D.

5. How To Use The Repertory with A Practical Analysis of Forty Homeopathic Remedies by Glen Irving Bidwell, M.D.

6. BŒNNINGHAUSEN’S CHARACTERISTICS MATERIA MEDICA by C. M. BOGER, M.D.

7. HOMŒOPATHIC MATERIA MEDICA by William BOERICKE, M.D

8. REPERTORY by Oscar E. BOERICKE, M.D

9. Studies in the Philosophy of Healing and others writing including The study of materia medica and taking the case
C. M. BOGER

10. A SYNOPTIC KEY OF THE MATERIA MEDICA By Cyrus Maxwell BOGER

11. A DICTIONARY OF PRACTICAL MATERIA MEDICA By John Henry CLARKE, M.D.

12. The Genius of Homeopathy Lectures and Essays on Homeopathic Philosophy By Dr Stuart M. CLOSE

13. Practice of Homoeopathy By Paul F. Curie, M. D.

14. DECACHORDS  by A. Gladstone Clarke.

15. A DICTIONARY OF PRACTICAL MATERIA MEDICA By John Henry CLARKE, M.D.

16. KEY-NOTES TO THE MATERIA MEDICA by HENRY N. GUERNSEY, M.D

17. Chronic Diseases – Samuel Hahnemann

18. ORGANON OF MEDICINE by Hahnemann Samuel

19. SEVEN-HUNDRED RED LINE SYMPTOMS from COWPERTHWAITE’S MATERIA MEDICA Rewritten by J. W. Hutchison, M. D.

20. The Mnemonic Similiad by Stacy Jones

21. Kent’s Aphorisms and Precepts from extemporaneous lectures

22. CLINICAL CASES By Pr James Tyler Kent

23. LECTURES ON HOMOEOPATHIC PHILOSOPHY BY James Tyler KENT, A.M., M.D.

24. LECTURES ON HOMŒOPATHIC MATERIA MEDICA by JAMES TYLER KENT, A.M., M.D.

25. What the doctor needs to know in order to make a successful prescription By Dr James Tyler Kent

26. KENT’S NEW REMEDIES

27. KENT’S REPERTORY

28. LESSER WRITINGS by Dr J. T. KENT

29. Keynotes Of The Homoeopathic Materia Medica by Dr. Adolph VON LIPPE

30. Regional Leaders by E. B. Nash, M. D.

31. Leaders In Homoeopathic Therapeutics by E. B. NASH

32. The principles and Art of Cure by Homœopathy by HERBERT A. ROBERTS, M.D.

33. Compendium Mental diseases and their modern treatment By Professor Selden Haines Talcott (A.M., M.D., Ph.D)

34. THE PRESCRIBER  by John Henry Clarke

35. ISILO: application to open the pdb books

२. एलडिको (Aldiko)

aldiko

 

PDF  फ़ाइलों को पढने के लिये एलडिको को इन्सटाल करना न भूलें

डाउनलोड लिंक : http://tinyurl.com/cdz958t

Vithoulkas Compass – Online Homeopathic Software

vithoulkas compass

Vithoulkas Comapss Online Software क्लासिकल होम्योपैथी करने वालों की नयी पीढी के लिये एक अत्यन्त उपयोगी साफ़्टवेऐर है . ग्रीस के और भारत मे भी होम्योपैथिक जगत मे बहुचर्चित डा विढॆलिकोस द्वारा निर्मित यह साफ़्टवेऐर है . रिपर्टराजेशन के अलावा यह आनलाइन मैटेरिया मेडिका और स्वयं डां विढॆलिकोस द्वारा प्रद्धत मार्गदर्शन भी देता है . फ़िलहाल यह अभी बीटा वर्जन मे है और होम्योपैथिक चिकित्सकों और शिक्षाथियों के लिये शुल्क रहित है .

Vithoulkas Compass Online Software के बीटा वर्जन को sign करने के लिए जायें : http://www.vithoulkascompass.com/en/Content/Index/111

Features of  Vithoulkas Compass Online Software

vithoulkas-compass-features

  • Advanced expert system based on groundbreaking research in homeopathic prescribing
  • Differential analysis mode guides the practitioner in asking questions to confirm remedies
  • Confirmed repertory, constantly being updated
  • Explanation of the remedy choice by the expert system
  • Online materia medicas and other remedy information
  • Totally web-based. No installation, multi-platform (ipad and tablet interface will be optimised shortly)
  • Simple, intuitive graphical user interface
  • Case histories are anonymously stored online and are accessible from anywhere, anytime
  • Send and Receive Case functionality between users
  • Export Case functionality to file, for printing or storing case data
  • Future payment scheme for VC will be pay-as-you-work at a modest cost.
  • Live system operated by a capable organisation supporting it and constantly developing and improving it

Treating Acute infections in Homeopathy – एक्यूट संक्रमणॊं का होम्योपैथी मे उपचार

जुलाई से लेकर सितम्बर तक के ज्वरों मे लगभग एक तरह की  समानता देखी जाती है । ज्वर की प्रवृति मे तेज बुखार, ठंड लगने के साथ, तेज सरदर्द ,वमन , बदन का टूटना आदि प्रमुख्ता से रहते हैं . लेकिन कुछ विशेष अन्तर भी रहते हैं जिनके आधार पर इनकी पहचान की जा सकती है , विशेषकर उन इलाकों मे जहाँ महँगे जाँच करवाना संभव नही होता .

क्रं. मलेरिया डेगूं चिकिनगुनिया
1. ठँड से काँपना, जिसकी पहचान डाइगोनिस्टिक किट और ब्लड स्मीर से की जाती है . डॆगूं मे अधिकतर रक्त से संबधित समस्यायें होती हैं जैसे त्वचा पर छॊटॆ लाल दाग जो WBC और platelet की कमी से होते हैं . चिकिनगुनिया में जोडॊं ( संधिस्थलों ) मे दर्द और सूजन अधिक रहती है .
2.   डॆगूं का बढना जो WBC और PLatelet ( < 100000/L ) की संख्या मे कमी से लगाया जाता है . चिकनगुनिया में WBC और platelet की संख्या मे विशेष फ़र्क नही पडता.
3.   Positive Torniquet Test : Blood pressure cuff को पांच मिनटॊं तक systolic और diastolic blood pressure के बीच के अंक पर फ़ुलाये रखें . यदि प्रति स्कैवेर इंच मे दस से अधिक छॊटॆ लाल चकत्ते दिखाई दें तो जाँच का परिणाम निशिचित रुप से positive है .  

लेकिन अगर इस बार देखें तो ज्वर की प्रकृति अलग सी देखी गई है । गत वर्ष जहाँ  डॆगूं और चिकिनगुनिया का संक्रमण अधिक था वहीं इस बार मलेरिया के केस बहुतायात मे पाये गये । आम तौर से यह समझा जाता है कि होम्योपैथी चिकित्सा पद्दति सिर्फ़ लक्ष्णॊं पर आधारित चिकित्सा पद्द्ति है और उसमे डाइगोनिसस का विशेष स्थान नही है । लेकिन यह सच नही है , विशेषकर एक्यूट रोगों मे डाइगोसिस आधारित चिकित्सा दवा के सेलेकशन मे मदद करती है और व्यर्थ  का कनफ़्यूजन  नही खडा करती । एक्यूट रोगों मे सेलेक्शन के विकल्प कई हैं ( नीचे देखें ) , इनमें क्लासिकल होम्योपैथी भी है , काम्बीनेशन  भी , मदर टिन्चर भी , क्या सही या या क्या गलत यह पूर्ण्तया चिकित्सक के विवेक पर निर्भर है , लेकिन अगर लक्षण स्पष्ट हों तो क्लासिकल को पहली पंसद बनायें नही तो और तरीके तो हैं ही 🙂

एक्यूट रोगों में सेलेकशन के विकल्प :

१. disease specific औषधियाँ:

specifics का रोल न होते हुये भी इस सच को नजरांदाज करना असंभव है कि कई एक्यूट रोगों मे इलाज disease specific ही होता है जैसे टाइफ़ायड मे baptisia , Echinacea , infective hepatitis में chelidonium , kalmegh  , Dengue  मे eup perf  , acute diarrhoea मे alstonia , cyanodon , आम वाइरल बुखार में Euclayptus  ,Canchalgua ,  मलेरिया के लिये  विभिन्न एर्टेमिसिआ (कोम्पोसिटी) प्रजातियां जैसे कि एर्टेमिसिआ एब्रोटनुम (एब्रोटनुम), एक मारिटिमा (सिना), एक एब्सिनठिअम (एब्सिनठिअम) , chinum sulph, china , china ars आदि ।

२. सम्पूर्ण लक्षण के आधार पर: (Totality of symptoms )

अक्सर होमियोपैथी चिकित्सा नीचे लिखे गए लक्षणो को ध्यान में रखकर दी जाती है –

  • ठंड और बुखार के प्रकट होने का समय
  • शरीर का वह भाग, जहां से ठंड की शुरूआत हुई और बढी।
  • ठंड या बुखार की अवधि
  • ठंड, गर्म और पसीना आने के चरणों की क्रमानुसार वृद्धि
  • प्यास/ प्यास लगना/ प्यास की मात्रा/ अधिकतम परेशानी का समय
  • सिरदर्द का प्रकार और उसका स्थान
  • यह जानना कि लक्षणों के साथ साथ जी मतलाना/ उल्टी आना/ या दस्त जुडा हुआ है या नहीं।

३. NWS ( Never well since ) :

अगर रोग का कारण specific हो जैसे रोगी का बारिश के पानी मे भीगना ( Rhus tox ) , दिन गर्म लेकिन रातें ठंडी ( Dulcamara ), ठंडी हवा लगने से (aconite ), अपच खाना खाने से ( antim crud , pulsatilla आदि )

४. रोगी की गतिविधि ( Activity ) , ठंडक और गर्मी से सहिषुण्ता/असहिषुणता ( Thermal  ), प्यास (Thirst )और मानसिक लक्षण में  बदलाव ( changes in mental attitude of the patient ) ;

डां प्रफ़ुल्ल विजयरकर का यह वर्गीकरण एक्यूट रोगों में संभवत: दवा सेलेकशन का सबसे अधिक कारगर तरीका है । लेकिन यह सिर्फ़ एक्यूट इन्फ़ेशन के लिये ही है , जैसा नीचे दिये चार्ट १ से स्पष्ट है कि यह indispositions और Acute Exacerbations of Chronic diseases  मे इसका कोई रोल नही है । प्रफ़ुल्ल के सूत्र आसान है , गणित की गणनाओं की तरह , रोग के दौरान रोगी की गतिविधि ( decreased , increased or no change ) , ठंडक और गर्मी से सहिषुण्ता/असहिषुणता ( Thermal : chilly / hot ) ,  प्यास (Thirst ( increased or decreased )  और मानसिक लक्षण में  बदलाव ( changes in mental attitude of the patient : diligent or non diligent ) पर गौर करें , और यह तब संभव है जब मैटेरिया मैडिका पर पकद मजबूत हो । उदाहारणत: एक रोगी जो तेज बुखार की हालत में सुस्त और ठंडक को सहन नही कर पा रहा है , प्यास बिल्कुल भी नही है और आस पास के वातावरण मे उसका intrest बिल्कुल् भी  नही है , उसका सूत्र  DCTL   (Axis : Dull +Chilly+thirstless ) होगा । इस ग्रुप में Sepia ,Gels ,Ac. Phos ,Ignatia ,Staph ,Ipecac ,Nat-Carb ,China  प्रमुख औषधियाँ हैं , चूँकि स्वभावत: वह किसी भी कार्य को करने मे अरुचि दिखा रहा है इस ग्रेड मे सीपिया प्रमुख औषधि होगी । जो चिकित्सक प्रफ़ुल्ल का अनुकरण करते हैं वह अच्छी तरह से जानते हैं कि उनके सूत्र कितने प्रभावी हैं ।

DCTL   (Axis : Dull +Chilly+thirstless )
4)Sepia 5)Gels 6)Ac. Phos 7)Ignatia 8)Staph 9)Ipecac 10)Nat-Carb 11)China

DCT (Axis : Dull+chilly+thirsty)
12)Nux-vom 13)Eup-per 14)Phos 15)Calc-c 16)Bell 17)China 18)Silicea 19)Hyos

DHTL (Axis : Dull+hot+thirstless)
20)Puls 21)Bry 22)Apis 23)Lach 24)Sulph 25)Lyc 26)Thuja 27)Opium 28)Carbo-v

DHT ( Axis : Dull+hot+thirsty)
29)Bry 30)Nat. Mur 31)Sulph 32)Lyc 33)    Merc. S. 34)Apis   

विस्तार से यहाँ बताना संभव नही है लेकिन अधिक जानकारी के लिये यहाँ और यहाँ देखें ।

vjayakar-expert1

                           चित्र १ : Dr Praful Vijayakar’s Acute system :

            साभार : http://www.hompath.com/VFeatures.html

 

 

S. No Acute Infection  Indisposition Acute Exacerbations of Chronic disease
1 Viral  fevers, Influenza, tonsilitis ,Sore Throat, Typhoid,  Pneumonia, Pneumonitis, Lung Abscess , Septicaemia, Food poisoning,Infective diarrhoea, Dysentry,Urinary tract colics,  Pleurisy. Treatment not required

constitutional
required

 

 

                 ्चित्र २

flow chart of acute cases

                                                  चित्र३ ( Flow chart of Acutes by Dr Praful Vijarkar )

vijayakar-expert2  

                                      चित्र ४ साभार : http://www.hompath.com/VFeatures.html

     

किसी भी एक्यूट केस और विशेषकर संक्रमण रोगों मे हैनिमैन द्वारा प्रतिपादित आर्गेनान के तीन सूत्र  १०० -१०२ को पढने  से हैनिमैन की विचारधारा का स्पष्ट मूलाकंन किया जा सकता है । यह भी अजीब इत्फ़ाक है कि जिस आर्गेनान को डिग्री लेने के लिये सिर्फ़ पढा जाता हो उसका सही मूल्याकंन प्रैक्टिस के दौरान अधिक बेहतर तरीके से किया जा सकता है । 🙂

हैनिमैन लिखते है :

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सूत्र १०० – महामारी और संक्रामक रोगों का उपचार

महामारी और बडे पैमाने पर फ़ैलने वाले संक्रामक रोगों की चिकित्सा करने के सिलसिले मे चिकित्सक को इस जाँच पडताल के चक्कर मे नहीं पडना चाहिये कि उस नाम की या उस प्रकार की बीमारी का प्रकोप पहले हो चुका है या नही । इस प्रकार की जिज्ञासा व्यर्थ है क्योंकि उस जानकारी को आधार बना कर वर्तमान महामारी या रोग की चिकित्सा करना जरुरी नही । चिकित्सक को तो उसे एक नया रोग मान लेना चाहिये और यही मानकर उसे रोग का सम्पूर्ण चित्र अपने मस्तिष्क मे बैठाने का प्रयास करना चाहिये । इसी प्रकार किसी भी औषधि  का  वैज्ञानिक आधार करने के लिये यह जरुरी है कि वह उस औषधि को जाने और भली भाँति परीक्षण कर ले । चिकित्सक को अपने मन मे यह धारण कभी भी न बन्ननी चाहिये कि रोग बहुत कुछ पिछ्ले रोग से मिलता हुआ है तथा रोगी मे लगभग वही लक्षण विधमान है जो पहले किसी रोग मे हो चुके हों । यदि चिकित्सक सावधानी से रोगी का परीक्षण करेगे तो यह पायेगे कि कि यह नई माहमारी पिछली माहमारी से सर्वथा भिन्न्न है और लोगों ने भ्रम वश उसे एक ही नाम दिया है । यह भिन्नता संक्रामक रोगों के अतिरिक्त बडे पैमाने पर होने वाले अन्य रोगों मे भी पायी जाती है । परन्तु खसरा , चेचक आदि संक्रामक रोगों पर यह नियम नही लागू होता ।

§ 100

In investigating the totality of the symptoms of epidemic and sporadic diseases it is quite immaterial whether or not something similar has ever appeared in the world before under the same or any other name. The novelty or peculiarity of a disease of that kind makes no difference either in the mode of examining or of treating it, as the physician must any way regard to pure picture of every prevailing disease as if it were something new and unknown, and investigate it thoroughly for itself, if he desire to practice medicine in a real and radical manner, never substituting conjecture for actual observation, never taking for granted that the case of disease before him is already wholly or partially known, but always carefully examining it in all its phases; and this mode of procedure is all the more requisite in such cases, as a careful examination will show that every prevailing disease is in many respects a phenomenon of a unique character, differing vastly from all previous epidemics, to which certain names have been falsely applied – with the exception of those epidemics resulting from a contagious principle that always remains the same, such as smallpox, measles, etc.

सूत्र १०१- महामारी का निदान

बहुधा ऐसा होता है कि चिकित्सक किसी संक्रामक रोग से पीडित व्यक्ति  को पहली बार देखने पर समझ न पाये । लेकिन उसी प्रकार के कई रोगियों को देखने के बाद चिकित्सक को रोग के सभी लक्षण और चिन्ह याद हो जायेगें । यदि चिकित्सक  तीक्ष्ण निरीक्षण वाला है तो एक या दो रोगी को देखने के बाद ही रोग के लक्षण उसके मन मे अंकित हो जायेगें और अपनी इस  जानकारी के आधार पर वह सामान लक्षण वाली दवा का चुनाव कर सकेगा ।

§ 101

It may easily happen that in the first case of an epidemic disease that presents itself to the physician’s notice he does not at once obtain a knowledge of its complete picture, as it is only by a close observation of several cases of every such collective disease that he can become conversant with the totality of its signs and symptoms. The carefully observing physician can, however, from the examination of even the first and second patients, often arrive so nearly at a knowledge of the true state as to have in his mind a characteristic portrait of it, and even to succeed in finding a suitable, homoeopathically adapted remedy for it.

सूत्र १०२ – माहामारियों के ल्क्षण

महामारियों से पीडित रोगियों के लक्षण  लिखते-२ चिकित्सकों के मस्तिष्क मे रोग का चित्र और भी अधिक स्पष्टता से उभर आता है । इस प्रकार लिखे गये विवरण से रोग की और ही विशेषतायें उभर कर आ जाती हैं परन्तु इसके साथ ही कुछ लक्षण ऐसे भी प्रकाश मे आते हैं जो केवल कुछ रोगियों मे प्रकट होते हैं और सभी रोगियों मे नही पाये जाते । अत: विभिन्न प्रकृति के अनेक रोगियों को देख कर रोग की यथार्थ जानकरी प्राप्त की जा सकती है ।

§ 102

In the course of writing down the symptoms of several cases of this kind the sketch of the disease picture becomes ever more and more complete, not more spun out and verbose, but more significant (more characteristic), and including more of the peculiarities of this collective disease; on the one hand, the general symptoms (e.g., loss of appetite, sleeplessness, etc.) become precisely defined as to their peculiarities; and on the other, the more marked and special symptoms which are peculiar to but few diseases and of rarer occurrence, at least in the same combination, become prominent and constitute what is characteristic of this malady.1 All those affected with the disease prevailing at a given time have certainly contracted it from one and the same source and hence are suffering from the same disease; but the whole extent of such an epidemic disease and the totality of its symptoms (the knowledge whereof, which is essential for enabling us to choose the most suitable homoeopathic remedy for this array of symptoms, is obtained by a complete survey of the morbid picture) cannot be learned from one single patient, but is only to be perfectly deduced (abstracted) and ascertained from the sufferings of several patients of different constitutions.

आर्गेनान के इन तीन सूत्रॊं को पढने के बाद हैनिमैन के “Genus Epidemics ‘ की परीभाषा को आसानी से समझा जा सकता है । संक्रामक रोगों मे एक ही सत्र मे चुनी गई औषधि जो कई रोगियों मे व्याप्त लक्षणॊं को कवर करती है  , जीनस इपीडिमिकस कहलाती है । यही कारण था कि पिछ्ले कई महामरियों मे होम्योपैथिक दवाओं ने अपना सर्वष्रेष्ठ असर दिखलाया ।

कम्पलीट रिपर्ट्री २००९ – डाउनलोड के लिये उपलब्ध

साभार: Edwin van Grinsven & Roger van Zandvoort

complete 2009

विशव मे सभी प्रोफ़ेशनल होम्योपैथों के बीच  कम्पलीट रिपर्ट्री की पहचान अपनी पूर्णता , सटीकता और मूल स्त्रोतों के कवरेज के लिये प्रसिद्ध है । रैजर वान जैन्ड्रवुड और इडविन वैन ग्रिन्सवन इसके पहले भी समय –२  पर नवीनतम संस्करणॊं को फ़्री मे डाउनलोड के लिये उपलब्ध करा  चुके हैं ।  कम्पलीट रिपर्ट्री २००९ का नवीनतम संस्करण डाउनलोड के लिये उपलब्ध है । इस नवीनतम संस्करण की कुछ मुख्य विशेषताओं मे  सर्चिगं का तरीका  और अधिक सुगम और प्रभावशाली , नये लक्षणॊं और औषधियों  का समावेश और नये स्त्रोतों से मिल रही जानकारी का समावेश भी  है । और सबसे विशेष बात कि यह बिल्कुल मुफ़्त है । बहुत से होम्योपैथिक चिकित्सकों  जिनके लिये नये और महँगे कम्पयूटर प्रोग्रामों  को खरीदना संभव नही है , यह एक अमूल्य तोहफ़ा है ।

कम्पलीट रिपर्ट्री के नवीनतम संस्करण को डाउनलोड करने के लिये यहाँ किल्क करे ।

रैजर वान जैन्ड्रवुड और इडविन वैन ग्रिन्सवन के द्वारा किये जा रहे कार्यों को जानने के लिये किल्क करें :

कम्पलीट रिपर्ट्री :  http://www.morphologica.com

कम्पलीट डायेनेमिक :  http://www.completedynamics.com

Amongst homeopathic professionals, the Complete Repertory is worldwide renowned for its completeness, accuracy and coverage of original sources.

Some of the  features are no books to carry around, a lighter life. find anything, see authors and sources &  use all x-references etc.

Thanks to Roger van Zandvoort & Edwin van Grinsven this software is available free to download .The software is available for Apple ® Mac and Microsoft ® Windows computers.Click HERE to download the free browser edition of entire complete repertory .

ओपन रिपर्ट्री -मुक्त स्रोत फ़्री होम्योपैथिक सॉफ्टवेयर (OpenRep-free open source homeopathic software)

 screenshot_OpenRep

 ओपन रिपर्ट्री – मुक्त स्रोत फ़्री होम्योपैथिक सॉफ्टवेयर: ( चित्र को बडॆ आकार मे देखने के लिये चित्र पर किल्क करें )

साभार : ब्लादिमीर पोलोनी

व्लादिमीर पोलोनी द्वारा विकसित और निर्मित ओपेन रिपर्ट्री पहला मुक्त स्त्रोत फ़्री होम्योपैथिक साफ़्ट्वेर है । जावा आधारित इस साफ़्टवेर के कई अलग-२ संस्करण अलग-२ आपरेटिंग सिस्टम के लिये बनाये गये हैं  । एक एडवान्स यूजर के लिये इसमे बहुत कुछ नही है लेकिन होम्योपैथिक कालेज मे बी.एच.एम.एस. के सेंकडं सेमेस्टर के आगे वाले छात्रों के लिये यह उपयोगी सिद्द हो सकता है । इस सॉफ्टवेयर मे पयुक्त सभी रिपर्ट्री ओपन स्त्रोतों से ली गयी हैं ।

 Repertories की सूची में  शामिल है:

Repertorium Publicum : यह कैंट रिपर्ट्री के  नवीनतम संस्करण पर आधारित है और इसमे काफ़ी बदलाव के संकेत दिखाई दे रहे हैं । पूरी जानकारी के लिये Repertorium Publicum का परियोजना पृष्ठ देखें ।
Short Repertory of Bach Flower Remedies : इसके लेखक ब्लादिमीर पोलोनी हैं और इस रिपर्ट्री को उन्होने  मुक्त स्त्रोत कर दिया है जिसका मतलब है कि इसमे किसी भी तरह का परिवर्तन और संशोधन किया जा सकता है । देखें BachFlowerOnline.com

Boenninghausen’s Repertory by T.F.Allen  : टी.एफ़. एलेन द्वारा अनुवादित बोनिगहसन की रिपर्ट्री का यह मूल रुप है और  इसमे  बोनिगहसन के द्द्ष्टिकोण को हम साफ़-२ देख सकते हैं जहाँ लक्षणॊं को Locality, Condition, Modality और  Concomitants के घटकों मे बाँटा गया है ।

Sensations as if by Herbert Roberts : दुर्लभ लक्षणॊं  का इसमे  अद्वितीय  समावेश है , ऐसे लक्षण जिसमे रोगी को  एहसास  होता है , “sensation as if “ के नाम से इस रिपर्ट्री मे कई लक्षण आजकल की कई  आधुनिक रिपर्ट्रीयों मे भी उपलब्ध नही है ।

Homeopathic Repertory by James Tyler Kent : जेम्स टयलर केन्ट तब भी क्लासिक थे और आज भी हैं , देखा जाये तो आधुनिक रिपर्ट्री मे लक्षणॊं का आधार केन्ट से ही लिया गया है । केन्ट की रिपर्ट्री सबसे पुरानी भी है और सबसे वृहद भी ।

Boger Boenninghausen’s Repertory by Cyrus Maxwell

Dunham Notes

General Analysis by Cyrus Maxwell Boger

 डाउनलोड लिंक:

उपलब्ध संस्करणों की सूची

OpenRep FREE 1.6 (2008-11-30) MS Windows OpenRep FREE 1,6 (2008-11-30) MS Windows
डाउनलोड

OpenRep FREE 1.6 (2008-11-30) all operating systems OpenRep FREE 1,6 (2008-11-30) सभी ऑपरेटिंग सिस्टम
डाउनलोड

OpenRep -free open source homeopathic software :

courtesy : Vladimir Polony

OpenRep is the first truly free Open Source homeopathic software, developed by Vladimir Polony with only one goal – to provide functional and portable homeopathic software that could contribute to the whole homeopathic community. The whole design is driven by the functionality and ease of use, always offering the least complicated way of repertorizing and evaluating a homeopathic case. OpenRep is the first homeopathic software developed in Java, making it the most portable homeopathic software that can be run under a wide variety of operating systems.

The source code of OpenRep FREE is freely available for download making in the world’s first and only Open Source homeopathic software.

List of Repertories included  :

Open source repertory model
All the repertories used in OpenRep are open source, which means, that their source code is freely available and can be used in other softwares, publications, etc. provided, that the name of the author of the repertory and the repertory name is always visibly declared. The description of the repertory model of the repertories is available here.

Repertorium Publicum
The first open source repertory. It is based on the latest edition of Kent’s Homeopathic repertory and has undergone a lot of changes. For more information on the project, please see the Repertorium Publicum project page.

Short Repertory of Bach Flower Remedies by Vladimir Polony
This repertory was donated by its author Vladimir Polony and is declared to be open source. This means that it is open to any changes and modifications. See also BachFlowerOnline.com

Boenninghausen’s Repertory by Timothy Field Allen
This is the original Boenninghausen’s repertory composed by Baron Clemens Maria Franz von Boenninghausen and translated by T.F. Allen in 1891, although it is not as complete as Boenninghausen’s Repertory from C.M. Boger, it certainly does not lack the originality of approach. In this repertory we can clearly see the original Boenninghausen’s approach of dividing symptoms into their components according to Locality, Condition, Modality and Concomitants and repertorizing by putting these symptoms together based on patients symptomatology.

Sensations as if by Herbert Roberts
This is a truly unique repertory containing rare symptoms expressed as Sensations as if. It contains unique symptoms not listed even in the most modern repertories. This repertory is a must for a thorough prescriber.

Homeopathic Repertory by James Tyler Kent
This is a the classic among all the repertories. All the modern repertories have taken to some extent this repertory as their basis. It is the biggest and most complete of the older repertories.

Boenninghausen’s Repertory by Cyrus Maxwell Boger
A truly unique repertory that uses the characteristic approach of Boenninghausen. Although this repertory does not contain modern addition, from the point of view of completeness of remedies available in the repertory, it is considered the most complete and homogeneous repertory. The version you can find in OpenRep is the version from 1937 including Dunham’s notes.

General Analysis by Cyrus Maxwell Boger
Although small in size, this repertory is considered to be a life-saver when encountering difficult cases. It consists of a small number of very general symptoms with a lot of cross-references that allow to perform a general analysis of a case based on general symptoms and conditions.

Download Links :

List of available versions

OpenRep FREE 1.6 (2008-11-30) MS Windows
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OpenRep FREE 1.6 (2008-11-30) all operating systems
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होम्योपैथिक साफ़्टवेएर- "होम्पैथ-९ " का हिन्दी संस्करण (Hindi Hompath 9.0 – Review with Features)

चित्रों को साफ़ और बडॆ आकार मे देखने के लिये चित्र पर किल्क करें । ( चित्रों के स्त्रोत : Cure Series से लिये गये हैं )

होम्पैथ ९ की संक्षिप्त समीक्षा

(डा. जवाहर शाह और नीलेश रौजै के साथ फ़ोन वार्ता और मेल के आधार पर )

जल्द ही रिलीज होने वाले होम्पैथ ९ का हिंदी संस्करण के  साफ़्टवेएर की प्रतीक्षा काफ़ी दिनों से थी । रिपर्ट्राइजेशन ( Repertorisation ) होम्योपैथिक प्रेसेक्राइंबिग का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है । रोगी के लक्षणॊं को औषधि के लक्षणॊ  के साथ के मेल कराना इतना आसान नही जितना देखने मे लगता है । लेकिन रोगी उस भाषा मे नही बोलता जिसमे हमारी रिपर्टरी मे लक्षण समाये हैं । एक सफ़ल नुस्खे के लिये एक चिकित्सक के सामने महत्वपूर्ण कार्य रोगी के लक्षणॊं को रुब्रिक्स मे बदलना और उसके बाद लक्षणॊं के साथ मिलान कराना है । लेकिन अकसर अंग्रेजी  मे लिखे गये रुब्रिक्स ( रिपर्ट्री की भाषा ) को सही-२ रोगी की भाषा मे समझने मे कई बार भूलें हो जाती है जो विशेषकर  मानसिक लक्षणॊं को लेते वक्त देखी जा सकती हैं और नतीजा गलत प्रेसेक्रिप्शन । होम्पैथ ९ हिन्दी बहुल क्षेत्रों से आये चिकित्सकों के लिये एक महत्वपूर्ण साफ़्टवेएर सिद्द हो सकता है । जैसा कि नीलेश की मेल से लग रहा है कि इस मे फ़िलहाल केन्ट रिपर्ट्री और बोरिक को ही समावेश किया गया है ।

यह कितना user friendly होगा , यह आने पर ही मालूम पडेगा । अभी कुछ बाते स्पष्ट भी नही हैं , हिन्दी मे लिखने के लिये क्या अलग से साफ़्टवेएर डालना पडेगा ( जैसे बराह ) या इसको कोई और तरीके से जोडा है । अभी फ़िलहाल यह साफ़्टवेएर पॄर्ण समीक्षा के लिये उपलब्ध नही है , जैसे ही इसका डेमो आता है तब इसकी समीक्षा और सही –२ विशेलेषण हो सकेगा ।