Category Archives: होम्योपैथिक समाचार

लखनऊ में खुलेगा 50 बेड का होम्योपैथी अस्पताल

homeopathy in lucknow

 

लखनऊ के अलावा कुशीनगर, बरेली, कानपुर और बनारस में 50 बेड के होम्योपैथी अस्पताल खुलेंगे। बजट मिल चुका है। डिस्पेंसरीज को भी अपग्रेड किया जाएगा। आयुष मिशन के तहत होने वाले यह काम मार्च से पहले दिखना शुरू हो जाएंगे।
– अनूप कुमार, प्रमुख सचिव, चिकित्सा शिक्षा

होम्योपैथी की सेहत सुधारने के लिए मार्च से पहले आयुष मिशन के तहत बड़े पैमाने पर काम होना है। प्रस्ताव के मुताबिक इसी मिशन के तहत शहर को पहला होम्योपैथी हॉस्पिटल मिल जाएगा। सूत्रों के मुताबिक आयुष मिशन के तहत डिस्पेंसरीज के अपग्रेडेशन और अस्पतालों के लिए करीब सात करोड़ रुपये मिल चुके हैं। पहले चरण में लखनऊ समेत आसपास के जिलों की 36 डिस्पेंसरीज को अपग्रेड किया जाएगा।• वसं, लखनऊ : राजधानी में होम्योपैथी का पहला अस्पताल खोलने की तैयारी है। आयुष मिशन के तहत बीकेटी या गोसाईंगंज में 50 बेड के अस्पताल के लिए जमीन तलाशी जा रही है। इसके अलावा राजधानी की होम्योपैथी डिस्पेंसरीज को भी अपग्रेड करने की कवायद शुरू हो गई है। अभी तक जर्जर भवनों में चल रही डिस्पेंसरीज के लिए जल्द ही नए भवन किराए पर लिए जाएंगे।

साभार : http://epaper.navbharattimes.com/details/29727-76516-2.html

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A German Train Named Samuel Hahnemann

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The founder of homeopathy have been set many monuments, streets were named after him and stamps printed in his honor and now Hahnemann will be honored with the naming of a modern train

On August 27, 2015 has baptized a train the Elbe-Saale-Bahn in the name of Samuel Hahnemann- Father of Homoeopathy –  in Köthen (Anhalt) station. Central Association of Homeopathic Doctors paid tribute in their speeches the merits of Samuel Hahnemann.

Hahnemann laid the foundation that Köthen is today associated with homeopathy worldwide.

Thomas Webel , Minister of Transport of Saxony-Anhalt, Werner Sobetzko, President of the Municipal of Köthen, Henriette Hahn, German Railways, and Monika Kölsch, Chief Financial Officer of the German Central Association of Homeopathic Doctors (DZVhÄ) paid tribute in their speeches the merits of Samuel Hahnemann.

To appoint a train to Samuel Hahnemann, a wonderful idea.Hrdly a worthier namesake provides for a train that is traveling in the home of the founder of homeopathy.

The new double-deck coaches are air-conditioned and designed for a speed of up to 160 kilometers per hour. Its features include comfortable seats with plenty of leg room and tables, generous luggage racks and large panoramic windows. The vehicles are geared to the needs of mobility impaired traveler. They feature low entrances and spacious multi-purpose compartments with shelves for wheelchairs, bicycles or prams. Modern passenger information systems facilitate orientation.

This indeed is a great respect to true master of healing. Another reason for all homeopaths to celebrate. Looking forward to travel in the train during next visit to Germany.

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From here his teaching went out into the whole world. Both took place in Germany and around the world teaching his ardent supporters, who the pugnacious scholar Hahnemann set many monuments. 1851 one in Leipzig, 1897, another in Köthen, 1900 probably the most monumental statue in Washington, in 1906 a street in Leipzig was named after him in 1955 and 1996 stamps were printed in his honor and now he is 2015, with the baptism of a modern train Elbe Saale Bahn honored to Samuel Hahnemann. That pleases us as the German Central Association of Homeopathic Doctors course especially.

http://ilovehomoeopathy.com/a-train-named-samuel-hahnemann/

source : http://www.homeobook.com/a-german-train-named-samuel-hahnemann/

होम्योपैथिक औषधियों की न्यून मात्रा और एवोगेड्रो ( Avogadro’s ) की संख्या – क्या एवोगेड्रो की संख्या से होम्योपैथी का मूल्याकंन करना उचित है ?

homeopathy explained

होम्योपैथिक औषधियों के विरोध के प्रमुख कारणॊं मे एक प्रमुख कारण होम्योपैथिक औषधियों की न्यून मात्रा   है । होम्योपैथिक औषधियों की न्यून मात्रा को विस्तार मे समझने के लिये औषधि निर्माण की प्रक्रिया को समझना पडेगा । होम्योपैथिक औषधियों मे प्राय: दो प्रकार के स्केल प्रयोग किये जाते हैं ।

क) डेसीमल स्केल ( Decimal Scale )

ख) सेन्टीसमल स्केल ( Centesimal Scale )

क) डेसीमल स्केल मे दवा के एक भाग को vehicle ( शुगर आग मिल्क ) के नौ भाग से एक घंटॆ तक कई चरणॊं मे विचूर्णन ( triturate ) किया जाता है । इनसे बनने वाली औषधियों को X शब्द से जाना जाता है जैसे काली फ़ास 6x इत्यादि । 1X  बनाने के लिये दवा का एक भाग और दुग्ध-शर्करा का ९ भाग लेते हैं , 2X के लिये 1X का एक भाग और ९ भाग दिग्ध शर्करा का लेते हैं ; ऐसे ही आगे कई पोटेन्सी बनाने के लिये पिछली पोटेन्सी का एक भाग लेते हुये आगे की पावर को बढाते हैं । डेसीमल स्केल का प्रयोग ठॊस पदार्थॊं के लिये किया जाता है ।

ख) सेन्टीसमल स्केल मे दवा के एक भाग को vehicle ( एलकोहल) के ९९ भाग से सक्शन किया जाता है । इनकी इनसे बनने वाली औषधियों को दवा की शक्ति या पावर से जाना जाता है । जैसे ३०, २०० १००० आदि ।

सक्शन सिर्फ़ दवा के मूल अर्क को एल्कोहल मे मिलाना भर नही है बल्कि उसे सक्शन ( एक निशचित विधि से स्ट्रोक देना )  करना है । आजकल सक्शन के लिये स्वचालित मशीन का प्रयोग किया जाता है जब कि पुराने समय मे यह स्वंय ही बना सकते थे । पहली पोटेन्सी बनाने के लिये दवा के मूल अर्क का एक हिस्सा और ९९ भाग अल्कोहल लिया जाता है , इसको १० बार सक्शन कर के पहली पोटेन्सी तैयार होती है ; इसी तरह दूसरी पोटेन्सी के लिये पिछली पोटेन्सी का एक भाग और ९९ भाग अल्कोहल ; इसी तरह आगे की पोटेन्सी तैयार की जाती हैं ।

विरोध का मूल कारण और एवोगेड्रो ( Avogadro’s  ) की परिकल्पना

रसायन विज्ञान के नियम के अनुसार किसी भी वस्तु को तनु करने की एक परिसीमा है और इस परिसीमा मे रहते हुये यह आवशयक है कि उस तत्व का मूल स्वरुप बरकरार रहे । यह परिसीमा आवोग्राद्रो की संख्या ( 6.022 141 99 X 1023 ) से संबधित है जो होम्योपैथिक पोटेन्सी 12 C से या 24 x से मेल खाता है । यानि आम भाषा मे समझें तो होम्योपैथिक दवाओं की १२ वीं पोटेन्सी और 24 X पोटेन्सी मे दवा के तत्व विधमान रहते हैं उसके बाद नही । होम्योपैथिक के विरोधियों के हाथ यह एक तुरुप का पत्ता था और जाहिर है उन्होने इसको खूब भुनाया भी ।

यह बिल्कुल सत्य है कि रसायन शास्त्र के अनुसार होम्योपैथी समझ से बिल्कुल परे है । लेकिन पिछले २४ वर्षों  मे १८० नियंत्रित ( controlled ) और ११८  यादृच्छिक ( randomized )  परीक्षणों को अलग -२ ४ मेटा तरीकों  से होम्योपैथी का विश्लेषण करने के उपरांत प्रत्येक मामले में  शोधकर्ताओं ने यह निष्कर्ष निकाला कि होम्योपैथी दवाओं से मिलने वाले परिणाम प्लीसीबो से बढ कर हैं ।

होम्योपैथी के संबध मे प्राथमिक प्रशन उभरता है कि क्या सक्शन ( succession ) किये गये SAD ( serially agitated dilutes )  को तरल वाहनों जैसे एल्कोहल या जल  ( liquid vehicles e.g. alcohol , water etc )  से अलग कर के पहचान की जा सकती है जो होम्योपैथिक औषधि के रुप मे उपचार के लिये प्रयोग किये जाते हैं । हाँलाकि इससे प्लीसीबो के आरोपों से मुक्ति नही पा जा सकती लेकिन इससे पता अवशय चलता है कि हर औषधि की अपनी विशेषता क्या है ।

एक सदी से  मेडिकल साहित्य की समीक्षा करने से पता चलता है कि ऐसे कई रिपोर्ट उपलब्ध हैं जिससे यह पहचान की जा सकती है कि इन उच्च  potentised  dilutes का प्रभाव जीवाणु , प्राणि विषयों , वनस्पति और यहाँ तक कि जन्तुओं पर भी असरदारक है । इनके लिये भौतिकी और बायोकेमिस्ट्री दोनों का ही समय-२ पर प्रमाण स्वरुप सहायता ली गई । हाँलाकि इन रिपोर्टों से SAD की आणविक संरचना समझ मे नही आती लेकिन यह बिल्कुल तय है कि यह SAD  तरल वाहनों ( liquid vehicles ) से हटकर हैं ।

इस विषय पर पहल्रे भी चर्चा हो चुकी है । देखें होम्योपैथी -तथ्य एवं भ्रान्तियाँ ” प्रमाणित विज्ञान या केवल मीठी गोलियाँ “( Is Homeopathy a trusted science or a placebo )  लेकिन नवीनतम शोघॊं मे  रसायन शास्त्री श्री बिपलब चक्र्वर्ती और डा. मो. रुहल अमीन के शोध होम्योपैथी औषधियों और एवोगेड्रो  संख्या पर प्रकाश डालने वाले हैं । उनके ब्लाग http://www.aminchakraborty.blogspot.in/  नवीन संभवनाओं को जन्म देता है । बिपलब चक्र्वती एक समय होम्योपैथिक के बडे आलोचक रहे हैं  लेकिन पिछ्ले १० सालॊ से बिपलब और डा. अमीन होम्योपिथिक दवाओं के सांइनटैफ़िक पहलू पर कार्य कर रहे हैं । आपके कई शोध पत्र विभिन्न शोध संस्थानों द्वारा सराहे गये है ।

आवाग्रादो की परिकल्पना और होम्योपैथी के विवाद मे अमीन लिखते है :

How and Why Avogadro’s Number does not Limit efficacy of the Homeopathic Remedies.
#       Homeopathic dilutions have been used since 1800 and remained unchallenged until determination of Avogadro’s number.
#       Homeopathic remedies were challenged only after the determination of Avogadro’s number by Millikan in 1910, a number of years after homeopathy came into use.
#       A mathematical calculation based on Avogadro’s Number led to the conclusion that homeopathic dilution must be nothing but placebo after homeopathy had already been used for 109 years !!
#       It is not proper to discount homeopathy simply on the basis of Avogadro’s number without clarifying the existing fundamental contradictions in science as detailed above.
#       In conventional medicines the molecules are believed to convey the medicinal power in the living body but in homeopathic dilutions it is not the molecules of medicine but the  electrical strain induced in the vehicle, by the  substance, that conveys the medicinal power of a substance in the living body.
#       When preparing serial homeopathic dilutions the electrical strain of the latter differs from the former dilution in regards to difference in molecular orientations of water  but cannot be determined due to non-availability of any such scientific instruments and for which the homeopathic dilution cannot be held responsible.
Source : How and why Homeopathy is Scientific

डा. रुहल अमीन और श्री बिपलब चक्रवर्ती के अन्य शोध लेखों को देखने के लिये निम्म लिंक पर जायें:

Haffkine institute comes up with homeopathy drug for Tuberculosis

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Source : http://www.homeobook.com/haffkine-institute-comes-up-with-homeopathy-drug-for-tuberculosis/

Haffkine Institute is a one of the oldest biomedical research institutes in the country. It was established in 1899 and is named after the scientist (Dr. Waldemar Mordecai Haffkine) who invented the plague vaccine. Since then, Haffkine Institute has emerged as a multi-disciplinary Institute engaged in training, research and testing of various aspects of infectious diseases.

MUMBAI: Haffkine Institute, the 116-year-old historical research institute in Parel that has done cutting-edge research work in the field of infectious diseases, has worked out a homeopathic medication for tuberculosis.

At a time when several western nations, including Australia and the United Kingdom, have expressed their reservations against homeopathy, Haffkine Institute delved deep into the alternative medicine’s sub-chapters on nosodes—better known as homeopathic vaccines—to prepare an anti-TB concoction. “We are not experts in homeopathy but, as microbiologists, we understand the principles of infectious diseases,” said Haffkine Institute’s director Dr Abhay Chowdhury.

His team tied up with homeopath Dr Rajesh Shah for the project, which started in March-April 2014.

Anti-TB medicines are mainly allopathic and homeopathy has had little role so far, admitted Dr Shah. “But we believe that our new nosode can complement allopathic medicines given to TB patients, including those with multi-drug-resistant TB,” he said.

In fact, a research paper published in Homeopathy Journal in 2014 said “add-on homeopathy in addition to standard therapy appears to improve outcome in MDR-TB”.

“Nosodes are used against infectious diseases such as anthrax, tuberculosis etcetera. However, there have been no new nosodes in recent times,” said Dr Shah. For the collaboration with Haffkine, he took an old nosode prepared using the sputum of a TB patient as well as other microbiological samples of patients suffering from MDR-TB, and decided to rework it.

After preparing a culture of these microorganisms, the Haffkine team worked on making the medicine using age-old homeopathic techniques but in modern settings. “Homeopathic medicines are prepared using the process of potentization or step-wise dilutions. We did the same but more scientifically by using molecular techniques,” said Dr Sandeepan Chowdhary, a scientific officer with Haffkine who was a part of the study. He said that Haffkine-nosode, which now has a standardized formula, is undergoing animal trials. [Source]

Web : http://www.haffkineinstitute.org/

यह भी देखें :

विश्व होम्योपैथी दिवस–एक पहल यह भी ..

 

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फोटो हैनीमैन चौराहे,  लखनऊ  की है। वर्ल्ड होम्योपैथी-डे पर शुक्रवार सुबह नेशनल होम्योपैथी मेडिकल कालेज के छात्रों का ग्रुप यहां पहुंचा और होम्योपैथी के जनक डा. हैनीमैन की मूर्ति पर लगे बैन-पोस्टर हटाकर चौराहे को साफ-सुथरा कर दिया। युवाओं ने करीब एक घंटे मेहनत की। यह देखकर अच्छा लगा कि युवा दूसरों को दोष देने के बजाय खुद कुछ कर दिखाने के लिए आगे आए हैं। लोगों को भी सबक लेना चाहिए कि वे इनकी मेहनत पर दोबारा गंदगी न फैलाएं, बल्कि उनकी इस मुहिम में उनका साथ दें।

यह भी देखें :

1. डॉ. क्रिश्चियन फ्राइडरिक सैमुअल हैनिमेन- जन्म दिवस पर विशेष ( A Tribute to Dr  Samuel Hahnemann )                                                                                                                       2.  World Homeopathy Awareness Week  
3. A bouquet of Homeopathic books in pdb format ( special 257th Hahnemann Birthday edition )

IHMA Fever guidelines Version1 released

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Indian Homoeopathic Research Centre (IHRC) the research wing of Indian Homoeopathy Medical Association (IHMA) published the “Fever Guidelines” before the homeopathic community.

This is an attempt to standardize the treatment protocol for fever among Homoeopaths.The cases managed on the basis of these guide lines shall be documented for future studies.

Thus the efficacy of Homoeopathic remedies could be established in a much more scientific and systemic way.

Major Contents

General approach in feverWhen and how to investigateCase definitionSupportive managementCase taking format and protocolFirst consultation at critical levelWhen to referRubric analysis of important fever remedies – a really useful sectionPreventive medicine and Genus epidemicus- RAECH guidelines

If you would like to get a copy of this book, Contact

Dr Vinod Joseph
Director IHRC
Ph: 09995403674

Web : www.ihma.in

courtesy : Indian Homoeopathic Research Centre (IHRC)

Homoeopathy Doctor Manoj Rajoria elected to Indian Parliament

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Homoeopathy Doctor Manoj Rajoria BHMS, MD (Hom) has been elected to Indian Parliament

Whole Homoeopathic Fraternity in India  is proud of  Dr.Manoj Rajoria from Rajasthan.

We congratulate you on your success and becoming MP, You will be the voice of thousands of Homoeopaths in the Parliament. You are a dedicated Homoeopath and we know you will work for Homoeopathy too.

Dr Manoj Rajoria, Candidate of 15th Lok Sabha, Affiliated to Bharatiya Janata Party (BJP) serving Karauli Dholpur (RJ) Lok Sabha Constituency.

He took his BHMS from Dr. M.P.K. Homoeopathic Medical College Jaipur

Post Graduate Homoeopathy from  Rajasthan University in 2006

Mobile Phone :  096 67 211234

Website : http://www.drmanojrajoria.com

Source : homeobook.com