Category Archives: बैच फ़्लावर औषधि

मेरी डायरी–बैच फ़्लावर रेमेडी–“ गौर्स–Gorse ”

Gorse

३८ बैच फ़्लावर औषधियों मे से मै  १२-१५  दवाओं का अकसर प्रयोग करता हूँ । अधिकतर बैच फ़्लावर औषधियों  का प्रयोग अभी किया नही है । गौर्स को प्रयोग करने का पहला अनुभव बहुत अधिक संतोषजनक रहा । १५ दिन पहले मुझे जिस रोगी को देखने जाना पडा वह मेरे  एक  साथी चिकित्सक के पिता का केस था । आयु ५६ वर्ष , पिछ्ले कई  सालो से कुवैत मे किसी अच्छी सरकारी पोस्ट पर थे । डायबीटिज थी और उच्च रक्तचाप से पीडित भी  । पहला पक्षाघात का अटैक कुवैत मे ही पडा । कुछ दिन वही अस्पताल मे रहने पर जाँचॊ द्वारा मालूम पडा कि उनकॊ Tubercular meningitis भी है । इलाज शुरु हुआ लेकिन टी.बी . पर वहाँ के चिकित्सकॊ की एक राय न बन सकी । एक पक्ष Neurocysticercosis  और दूसरा चिकित्सकों का समूह टी.बी. की डाय्गोनिसस पर विभाजित रहा । टी.बी. पर कुछ दिन इलाज चलने के बाद दूसरे पक्ष के चिकित्सकों ने टी. बी. पर इलाज बन्द कर के सीसस्टीसर्कोसिस पर इलाज शुरु किया । हाँलाकि पहले इलाज के दौरान मरीज को कुछ फ़ायदा दिख रहा था ।  इस बीच  एक राय न बनने के कारण मरीज को वापस भारत जाने के लिये कहा गया ।

रोगी की पत्नी के अनुसार लखनऊ आने पर वह बेहतर हालात मे थे । उन्होने उस समय की एयर्पोर्ट की मुझे जो फ़ोटॊ दिखाई उसमे वह काफ़ी प्रसन्नचित्त और स्वस्थ दिख रहे थे ।  लखनऊ मे भी चिकित्सकों की एक राय Tubercular meningitis  की ही बनी। फ़लस्वरुप इलाज के दौरान कुछ माह के अन्दर स्वास्थ लाभ तेज हुआ और रिकवरी पूरी तरह से दिखने लगी । लेकिन साल भर के अन्दर दूसरा अटैक फ़ालिज का पडा । और फ़िर उसके बाद वह इलाज चलने के बावजूद भी रिकवर न कर पाये । टी.बी , ब्लड शुगर और  उच्च रक्तचाप   की दवाईयाँ पहले से ही चल रही थी । और वह अब पक्षाघात ( Hemiplegia )  के लिये होम्योपैथिक राय मुझसे लेना चाहते थे ।

अधिकतर फ़ालिज ग्रस्त रोगियों मे सबसे बडी  समस्या उनके अवसादों को लेकर होती है । और यहाँ भी समस्या डिप्रेशन को लेकर ही थी । DPR ( deep plantar reflexes – Babsinki sign ) पाजीटिव दिखने के बावजूद  भी रोगी मे movements काफ़ी हद तक सामान्य थे । इन हालात को देखकर मुझे लगा कि शायद कुछ उम्मीद बन सकती है लेकिन रोगी के साथ मुख्य समस्या मानसिक अवसाद की थी । रोगी की पत्नी के अनुसार न तो वह उनको सहयोग देना चाहते थे और न ही अपने फ़िजियोथिरेपिस्ट को । रोना ,  बात –२ पर क्रोधित होना । जीबन के प्रति निराशा के भाव उनकी बातचीत से ; जो हाँलाकि पक्षाघात के कारण स्पष्ट न थी , साफ़ नजर आ रही थी ।

पहले से ही कई अति आवशयक दवायें चल रही थी और उनको बन्द करके होम्योपैथिक दवाओं को चलाने की कोई वजह नही थी । लेकिन क्या होम्योपैथिक और बैच फ़्लावर कार्य करेगी , यह अवशय संशय था । constitutional/ pathological सेलेक्शन मे से पैथोलोजिकल सेलेक्शन को अधिक मह्त्व दिया जो कि वर्तमान लक्षणॊं मे से प्रमुख थे ।

Opium LM पोटेन्सी पहली चुनाव बना  और अब बारी थी रोगी के अवसादॊ की । बैच फ़्लावर को एक बार फ़िर से अवसादों के लिये मुख्य जगह दी गई । और दवा का सेलक्शन गौर्स पर टिका | लगभग २ सप्ताह के बाद  रोगी की पत्नी और उनके घर के अन्य सद्स्यों ने रोगी की स्वास्थ की प्रगति , ( विशेषकर उनके अवसादों ) को काफ़ी अधिक संतोषजनक बताया । उनके अनुसार रोगी बेहतर हालात में है ,  प्रसन्नचित्त रहते हैं और अपने कार्यों को स्वंय करने की कोशिश करते हैं ,  जो पहले कभी न देखी गई । यह तो आगे आने वाला समय बतायेगा कि अन्य मुख्य लक्षणॊ मे कहाँ तक प्रगति आती है लेकिन Mind – Body connections मे बैच फ़्लावर के महत्व की भूमिका को  नंजर अंदाज नही किया जा सकता ।

आखिर गौर्स ने क्या कियागौर्स का मुख्य लक्षण है – पूर्ण नाउम्मीदी ( Hopelessness ) . रोगी को यह विशवास होता है कि वह अब ठीक नही हो सकता । और या तो वह चिकित्सक को बेमन से मिलता है या फ़िर मजबूरी मे । ( ऋण पक्ष ) ऐसे रोगियों को गौर्स दोबारा जिन्दगी से लडने के लिये संबल प्रदान करता है । ( धन पक्ष )

बात जब गौर्स की है तो बैच फ़्लावर दवाओं मे नाउम्मीदी ( Hopelessness ) की अन्य दवाये भी है , जैसे :

१. Gentian ( जैन्सियन) : इसमे शक और मायूसी तो होती है लेकिन नाउम्मीदी बिल्कुल नही होती ।

२. Sweet chest Nut ( स्वीट चेस्ट नट ) : इसमे पूर्ण निराशा , जैसे सब कुछ खो गया हो और बाकी कुछ रह न गया हो ।

३. Wild Rose ( वाइल्ड रोज ) : अपनी बीमारी के लिये वह अपने पिछ्ले कर्मॊ का फ़ल समझता है ।

४. गौर्स ( Gorse ) : किसी लम्बी बीमारी मे कई ईलाज कराने के बाद वह मायूस हो जाता है और अपनी उम्मीद छोड बैठता है ।

बैच फ़्लावर की कुछ विशेष खूबियाँ मुझे इस पद्द्ति की तरफ़ आकृष्ट करती हैं । जहाँ होम्योपैथिक दवाओं मे अन्य दवाओं के साथ चलाने का झमेला रहता है वही बैच को किसी भी पद्द्ति के साथ समावेशित किया जा सकता है ।

Gorse

Gorse
Scientific name: Ulex
Family Fabaceae.
Rank: Genus
Higher classification: Faboideae

Keyword – Hope | Bach Group – Uncertainty

Gorse is the remedy for those who suffer great uncertainty in the process of life, causing them to experience feelings of hopelessness and despair. This is a state sometimes found in those with a long-term illness who have lost all hope of recovery or in those whose experiences have caused them to view life ‘as a lost cause’. When this state is very deep rooted a person may have dark rings under the eyes or be prone to sigh a lot. Taken over a period of time Gorse will help to dispel these dark feelings and promote new hope and vision for the future.

Dr Bachs description of Gorse:-

“Very great hopelessness, they have given up belief that more can be
done for them. Under persuasion or to please others they may try
different treatments, at the same time assuring those around that
there is so little hope of relief”

From the Twelve Healers & Other Remedies – By Dr Edward Bach ( 1936 edition)

यह भी देखें :

बैच फ़्लावर रेमेडी – एक संक्षिप्त परिचय

The Journey to simple Healing – Bach Flower Remedies Part 1

The Journey to simple Healing – Bach Flower Remedies Part 2

The Journey to simple Healing – Bach Flower Remedies Part 3

बैच फ़्लावर पर  वीडियो : साभार नेलसन रेमेडीज

दरअसल इस पोस्ट को बैच फ़्लावर की पोस्ट को लिखते समय  क्रमनुसार सबसे पहली पोस्ट के रुप मे  डालना चाहिये था लेकिन  पिछ्ले वर्ष  भवाली और मुक्तशेवर जाते समय भवाली में चेस्ट्नेट ने  होम्योपैथिक और बैच फ़्लावर मे  प्रयोगों  का  स्मरण दिला दिया । वह बैच फ़्लावर पर पहली पोस्ट थी । दूसरॊ पाइन , तीसरी वाइन और वैरवाइन और  पिछ्ली पोस्ट  रेसक्यू  रेमेडी पर थी । बैच फ़्लावर को मै नियमित रुप से प्रयोग नहीं  करता हूँ लेकिन कुछ बैच फ़्लावर मेरी पंसदीदा दवाओं मे से हैं । यह पोस्ट उन्ही अनुभवों का संकलन था ।

रेसक्यू रेमेडी के संबध में कई होम्योपैथिक चिकित्सकॊ ने बैच फ़्लावर दवाओं के  प्रयोग की विधि , डॊसेज और रीपीटीशन पर प्रशन किये हैं । होम्योपैथिक पाठयक्रम मे बैच फ़्लावर नही पढाई जाती । यह एक स्वभाविक सा प्रशन है और उत्सुकता भी ।

डा, इडवर्ड बैच इन बैच  फ़्लावर दवाओं के जनक हैं । डां बैच की मेडिकल  यात्रा एक ऐलोपैथिक चिकित्सक से हुई । डाँ. बैच  ने यूनिवर्सिटी कालेज हास्पिटल, लंदन से मेडिकल  डिग्रियाँ प्राप्त कीं। पहले उक्त संस्थान में ये आपात चिकित्साधिकारी रहे, तत्पश्चात् जीवाणु विज्ञानी। इसके बाद होम्योपैथिक का अध्यन्न और प्रैकिटिस शुरु की । रायल होम्योपैथिक कालेज लन्दन से वह लम्बे समय तक जुडॆ रहे । एक जीवाणु विज्ञानी के रुप मे होम्योपैथिक मैटेरिया मेडिका को उन्होने बौवल नोसोडॊस से समृद्ध किया । लेकिन होम्योपैथिक पद्दति में उनका मन औषधि सेलेकशन मे आ रही कठिनाईयों के कारण रास न आया । प्रकृति प्रेमी डा. बैच का ध्यान वापस प्रकृति मे विधमान साधनों पर गया । उन्होनें देखा कि कैसे जंगलों और पहाडॊं पर रहने वाले लोग बिना दवाई के स्वस्थ रहते हैं । जंगली पक्षी या जानवर कैसे फ़ूलॊ और जडी बूटियों से ही अपने आप को स्वस्थ कर लेते हैं । किस प्रकार प्रकृति मे अलग २ पौधे प्राकृतिक घटनाओं के बावजूद अपने आप को सुरक्षित रखते हैं और फ़लते फ़ूलते हैं । सन १९३० से सन १९३६ तक का सफ़र डा. बैच का इंग्लैडं के जंगलों मे एक घुमक्कड के रुप मे बीता । इन छ: साल मे जंगलॊ और पहाडॊं पर घूमते हुये उन्होनें अनेक पुष्प  इक्कठ्ठे किये और उन पुष्पों  से ३८ दवाइयाँ बनाई जिनको “ बैच फ़्लावर रेमेडिज “  के नाम से जाना जाता है

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डा. बैच के अनुसार “ मनुष्य का शारिरिक दुख मानसिक रोग का संकेत देता है । ” डां बैच ने  बीस वर्षों के अनुसंधान एंव विभिन्न रोगियों के इलाज के दौरान इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि सभी बीमारीयों की जड में हमारे नकारात्मक सोच होती है यदि इन नकारत्मक  सोच को सकारत्मक सोच मे बदल दिया जाय तो मनुष्य शारीरिक , मानसिक और भावत्मक रुप से सुखी जीवन जी सकता है । बैच फ़्लावर की ३८ दवायें मानवमात्र मे ३८ नकारात्मक सोचों का प्रतिनित्धत्व करती है ।

मानव मात्र मे ३८ नकारात्मक सोचों को को सात भागों में वर्गीकृत किया गया है । १. डर २. अनिशिचयता ३. वर्तमान मे अरुचि और भूत भविष्य में खोये रहना ४.अकेलापन ५. परिस्थतियों एव, दूसरे के विचारों से अत्याधिक प्रभावित होना ६. उदासी ७. अवसाद और निराशा

यही कारण है कि बैच फ़्लावर पद्दति से इलाज करते समय चिकित्सक को फ़्लावर दवाओं की मानसिक थीम  को रोगी मे ढूँढना पडता है । जैसे बैच फ़्लावर औषधि ’ पाइन ’ का विशेष लक्षण है , ’ self reproach ‘ यानि प्रत्येक गलती के लिये अपने को दोषी ठहराना ,यह ’ guilt complex ‘ या उनमें व्याप्त दोष भाव इतना अध्हिक प्रबल होता है कि वे किसी भी कुदरती घटना के लिये भी अपने को दोषी मानते हैं    । केस को समझने  के लिये देखे यहाँ ।  बैच फ़्लावर दवाओं  के लिये बीमारी  का नाम कोई मायने नही रखता ।  Acne vulgaris ( मुहाँसे ) से पीडित युवक/युवती के लिये क्रैब ऐपल उपयोगी चुनाव हो सकता है बर्शते अगर रोगी की मानसिक अवस्था उसको सहन करने की बिल्कुल न हो । स्क्लेरान्थस का हाल का ही केस मुझे स्मरण है , रोगी eczema ( अकोते ) से पीडित था और उससे उत्पन्न होने वाली खारिश रोगी को बैचेन कर देती थी । खारिश एक स्थान पर टिकती  भी न थी , एक जगह बदल कर दूसरी जगह  पर । स्क्लेरान्थस की कुछ ही खुराखों से उसे  खारिश से आराम मिला । बाकी का काम होम्योपैथिक  Constitutional दवा ने कर दिया ।

मानसिक लक्षणॊं को ध्यान मे रखते हुये फ़्लावर दवाओं का उपयोग सभी प्रकार के शारीरिक , मानसिक और मनोकायिक (psychosomatic diseases )  रोगों मे प्रभावी हुआ है विशेष कर मानसिक रोगॊ मे यह पद्दति प्रभावी सिद्ध हो सकती  है ।

होम्योपैथी और बैच फ़्लावर दवाओं मे कुछ समानतायें भी है । जैसे दोनों पद्द्ति मानसिक लक्षणॊं को प्राथमिकता देती हैं , दोनों मे सारे मानव को एक ईकाई मानकर ईलाज किया जाता है । लेकिन जहाँ बैच फ़्लावर सिर्फ़ मानसिक लक्षणॊं को आधार मानती है वहाँ होम्योपैथी मानसिक और शारिरिक दोनों को ही प्राथमिकता देती है । डाइनामेजेशन और प्रूविगं का बैच फ़्लावर मे कोई स्थान नही है ।

डॉ बाक द्वारा आविष्कृत फ्लावर रेमिडिज निम्म हैं :

एग्रीमोनी, आस्पेन, बीच, सेन्टौरी, सिराटो, चेरी प्लस, चेस्टनट बड,चिकोरी, क्लेमाटिस, क्रैब एपल, एल्म, जेन्शियन, गॉर्स, हीदर,होल्ली, हनीसकु, हार्नबीम, इम्पेशेंस, लार्च, मिम्युलस, मस्टर्ड, ओक, ओलिव, पाइन, रेड चेस्टनट, राक रोज, राक वाटर, स्क्लेरान्थस, स्टार आफ बेथलहम, स्वीट चेस्टनेट, वरवेन, वाइन,वालनट, वाटर वायलेट, व्हाइट चेस्टनट, वाइल्ड ओट, वाइल्ड रोज और विल्लो।

डोसेज और रीपीटीशन

  • एक्यूट रोगों में बैच फ़्लावर दवाओं को १५-२ मिनट के अन्तर पर या उससे अधिक जल्दी –२ दे सकते हैं लेकिन एक बार आराम मिलने पर दिन मे तीन बार ।
  • दवा को सीधे पानी मे डलकर या ग्लोबियूलूस मे डालकर भी प्रयोग कर सकते है ।
  • बैच फ़्लावर दवाओं की कोई पोटेन्सी नही होती , ड्र्ग एक्ट मे शायद प्रावधानों को देखते हुये दवा निर्माताओं को बैच फ़्लावर दवाओं के आगे ३० इंगित करना पड्ता है ।

बैच फ़्लावर दवाओं के बारे में कुछ और तथ्य :

  • बैच फ़्लावर दवाओं को होम्योपैथिक या अन्य दवाओं के साथ बिना रोक टोक के चला सकते हैं । यह दवायें होम्योपैथिक दवाओं को complement करती हैं । ये न तो दूसरी दवाओं के कार्य में दखल देती हैं और न ही अन्य दवाएँ इनकी क्रिया को प्रभावित करती हैं।
  • फ़्लावर दवाओं की  एक से अधिक दवायें  सुविधानुसार काम्बीनेशन कर के प्रयोग कर सकते हैं । होम्योपैथिक दवाओं की तरह बैच फ़्लावर में दवा सेलेकशन का झमेला कम ही रहता है ।
  • primary aggravation की संभावना फ़्लावर दवाओं मे नही होती इसलिये इसका प्रयोग बच्चे, बूढ़े, स्त्री, पुरूष हर प्रकार के लोगों की प्रत्येक अवस्था में किया जा सकता है ।

मॆरी डायरी– “ बैच फ़्लावर रेमेडी– रॆसक्यू रॆमॆडी ( Rescue Remedy ) ”

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अगर बैच फ़्लावर औषधियों मे से एक दवा को निर्विवाद   रुप से चयन करने को कहा जाये तो रेस्क्यू रेमेडी का आसानी से चुनाव किया जा सकता है । एक  ऐसी औषधि जिसे हर होम्योपैथिक चिकित्सक की शेल्फ़ मे होना चाहिये लेकिन अफ़सोस वह  अधिकाशं चिकित्सकॊं के पास नही पायी जाती ।   बैच फ़्लावर औषधियों को प्रयोग मे न लाने के लिये जिम्मेदार CCH यानी सेन्ट्र्ल काउनसिल आफ़ होम्योपैथी का ऊबाऊ पाठ्यक्रम है जिसे B.H.M.S. के छात्रों पर थोपा गया है । इस विषय  पर चर्चा अन्य किसी लेख मे करुगाँ लेकिन इसमे कोई अतिशयोक्ति नही है कि एक समृद्ध होम्योपैथिक मैटेरिया मेडिका और उसके साथ अन्य वैकलिप्क पद्दतियों  का होम्योपैथिक पाठयक्रम मे उचित समावेश नही किया गया है ।

रेसक्यू रेमेडी में  पाँच बैच फ़्लावर दवाओं  का कम्बीनेशन है । इनमें से प्रमुख हैं :

  • राक रोज (Rock Rose)
  • इम्पेशेंस (Impatiens)
  • क्लेमाटिस (Clematis):
  • चेरी प्लम (Cherry Plum)
  • स्टार आफ़ बेथलम ( star of Bethlem )

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि रेसक्य़ू रेमेडी क काम आपातकालीन परिस्थितियों और प्राथिमिक उपचारों ( First Aid ) मे किया जाता है । दवा को खाने के लिये  देते हैं और साथ ही मे चोट और जलने की परिस्थितियों  मे इसको पानी मे डालकर बाहर से लगाने के लिये भी दे सकते हैं ।

हाल ही में मियामी विश्वविद्यालय द्वारा एक नव प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया है कि बैच फ़्लावर औषधी रेसक्य़ू अवसाद और चिंता ग्रस्त रोगियों के लिये वरदान साबित हो सकती है । यह शोध कार्य मियामी राज्य के विशविधायलय के डॉ. रॉबर्ट हलबरस्टीन ने सर्कीन क्रियेटेव केन्द्र( SCLC )  के साथ संयोजित रुप से किया था ।

रेसक्य़ू रेमेडी के  पाँच घटकं दवाओं का कार्य क्षेत्र निम्म है :

राक रोज (Rock Rose) : आतंक, चरम सीमा का भय। राक रोज का सेवन तब करना चाहिए जब कोई एक दम आतंकित हो जाए, भले ही उसका स्वास्थ्य अच्छा हो या जब किसी दुर्घटनाग्रस्त होने से आतंक हो तो यह दवा प्रयोग की जाती है। दुर्घटना में बाल-बाल बचने के बाद भी उसका आतंक व्यक्ति पर छाया हो। रोगी के साथ दुर्घटना के कारण यदि आस-पास के लोगों में भी आतंक या भय छाया हो तो उन्हें भी यह दवा देनी चाहिए।

इम्पेशेंस (Impatience) : अधीरता,चिड़चिड़ापन, चरम मानसिक तनाव। किसी दुर्घटना के बाद की उत्तेजित अवस्था म चिडचिडापन और मानसिक तनाव से बचाती है ।

क्लेमाटिस (Clematis): उदासीनता, दिवास्वप्न देखना, असावधान। किसी दुर्घटना के फ़लस्वरुप हुई बेहोशी , खुमारी या स्वभाविक नींद से दूर करती है ।

चेरी प्ल्म (Cherry Plum): असहनीय पीडा , मानसिक नियंत्रण खोने का भय। घोर निराशा। स्नाययिक विकार के कारण घोर निराशा और उससे बचने के लिए आत्महत्या करने की चाह/प्रवृत्ति रखने वाले व्यक्तियों के लिए यह काफी उपयोगी औषधि है।

स्टार आफ़ बेथलम ( star of Bethlem ) : मानसिक या शारीरिक झटके के बाद के असर । मन पर लगने वाली चोटॊं का असर जिससे मानसिक और शारीरिक सन्तुलन का बिगड जाना ।

RESCUE REMEDY

A combination of five flower remedies useful as a First Aid in case of emergency or accident.
The components of Rescue Remedy are:
1) Star of Bethlehem – for trauma and numbness.
2) Rock Rose – for terror and panic.
3) Impatiens – for irritability and tension.
4) Cherry Plum – for fear of losing control.
5) Clematis – for the tendency to ‘pass out’, the sensation of being ‘far away’ that often precedes unconscious.

KEYNOTES

1-useful in emergency situations to prevent or quickly overcome the (mental) trauma.
2-useful in states of mental turmoil (after quarrels or disputes, after sudden bad news, after fright).
3-useful for impending events which may be causing anxiety or apprehension (visit to the dentist, attending divorce proceedings, a job interview, before a driving test or a surgery).
4-useful if one has to work in an atmosphere of permanent stress (stressful job, displeasure at work, in a courtroom, a hospital casualty department).
5-useful in burns, sprains, stings, bumps or blows, it can be used as a local application.
6-useful & ointment can be used as a precautionary to prevent soreness or blistering following friction by running or playing tennis etc.

यह भी देखें :

१- चेस्टनट–होम्योपैथिक और बैचफ़्लावर पद्दतियों मे उपयोग ( Chestnut–Homeopathic & Bach flower uses )
२-  मेरी डायरी से -“बैच फ़्लावर औषधि–पाइन”
३- मेरी डायरी से -बैच फ़्लावर औषधि -‘Vine’ – ‘वाइन’ और ‘वरवैन’ ( Vervain )

मेरी डायरी से -“बैच फ़्लावर औषधि–पाइन”

pine

वनस्पति शास्त्र में चीड़ या पाइन को कोनीफरेलीज़ (Coniferales) आर्डर में रखा गया है। चीड़ दो प्रकार के होते हैं : (1) कोमल या सफेद, जिसे हैप्लोज़ाइलॉन (Haploxylon) और (2) कठोर या पीला चीड़, जिसे डिप्लोज़ाइलॉन (Diploxylon) कहते हैं। कोमल चीड़ की पत्तियों में एक वाहिनी बंडल होता है, और एक गुच्छे में पाँच, या  कम पत्तियाँ होती हैं। वसंत और सूखे मौसम की बनी लकड़ियों में विशेष अंतर नहीं होता। कठोर या पीले चीड़ में एक गुच्छे में दो अथवा तीन पत्तियाँ होती हैं। इनकी वसंत और सूखे ऋतु की लकड़ियों में काफी अंतर होता है।

चीड की लकडी का आर्थिक महत्व भी है, विशव की लकडी की काफ़ी माँग चीड द्वारा पूरी की जाती है । चीड़ की बहुत सी जातियों के बीज खाने के काम आते हैं, जिनमें पश्चिमोत्तर हिमालय का चिलगोजा चीड़ अपने सूखे फल के लिये प्रसिद्ध और मूल्यवान् है। जैसे भारत और पाकिस्तान में – पा. जिरार्डियाना (P. gerardiana) अर्थात् चिलगोजा, यूरोप में – पा. पिनिया (P. pinea) तथा पा. सेंब्रा (P. cembra),  उत्तरी अमरीका में – पा. सेंब्रायडिस (P. cembroides) की कई किस्में, अमरीका के पा. लेंबरर्टिना (P. lambertina) की छाल से खरोंचकर रेजिन की तरह एक पदार्थ निकालते हैं, जो चीनी की तरह मीठा होता है। इसे चीड़ की चीनी कहते हैं।

औषधि के रुप में बैच फ़्लावर मे पाइन एक विशेष प्रजाति Pinus sylvestris  से बनायी जाती है ।

self reproach personality of Pine

 

बैच फ़्ल्लावर औषधि “पाइन” का विशेष लक्षण है , ’ Self-reproach‘ यानि प्रत्येक गलती के लिये अपने को दोषी ठहराना ,यह ” guilt complex ” या उनमें व्याप्त दोष भाव इतना अधिक प्रबल होता है कि वे किसी भी  घटना के लिये भी अपने को दोषी मानते हैं ।

लेकिन  इस  एक्मात्र लक्षण से एक रोगी मे व्याप्त उसकी कई मानसिक  समस्यायें इतनी जल्दी  दूर होगीं , यह मैने सोचा भी न था । श्री मु.अ. मुस्लिम धर्म के अनुयायी है । पिछ्ले साल रमजान के दिनों मे वह मुझसे मिले । समस्या अनिद्रा की थी । पिछ्ले कई महीनों से उनकी दिन और रात दोनों की ही नीद गायब थी । और गत तीन सप्ताह से किसी   मानसिक रोग विशेषज्ञ से वह इलाज करा रहे थे लेकिन कई anti depressants और नींद की दवा चलने के बावजूद वह सन्तुष्ट नही थे । नीद न आने का कारण  बताने में वह असमर्थ थे  लेकिन कुछ तो था …. जो उनको इतना अधिक व्याकुल और व्यथित किये जा रहा था । लेकिन रोगी खुल कर बताने  को तैयार नही हुआ और इस हाल में जिसका डर था वही हुआ , पहला  प्रिसक्रपशन  coffea 200 देने से कुछ भी लाभ  न हुआ ।

दो दिन बाद उनके घर से उनकी पत्नी और बेटे को बुलाना पडा । इस बार केस हिस्ट्री  पूरी तरह से ली गई । ज्ञात हुआ कि वह सनू २०१० मे वे एक उच्च  सरकारी पद से रिटायर हुये थे , जो ग्रैच्चुयिटी आदि उनको मिली वह ब्याज समेत  थी । और शायद यही उनके मन की उलझन भी थी । दोष भाव या guilt complex से वह इतना अधिक ग्रस्त थे कि बात –२ पर वह रो पडते । ज्ञात हो कि मुस्लिम धर्म में उनके शास्त्रों के अनुसार  ब्याज की रकम का उपयोग वर्जित है । और यही उनके मन की उलझन  का कारण भी था ।

मेरे सामने दो विकल्प थे ;होम्योपैथी या बैच फ़्लावर । लेकिन बैच फ़्लावर को अधिक सुगमता और सरलता की वजह से प्राथमिकता दी । पाइन की कुछ खुराखॊ मे वह पूर्णतया स्वस्थ हुये । दो दिन बाद वह जब मुझसे मिले तो प्रसन्नचित थे , नीद तो भरपूर आथी थी और साथ ही मन की उलझनें तो बिल्कुल नही दिखीं । मैने हँसते हुये उनसे पूछा कि ब्याज की रकम की समस्या का निपटारा कैसे करेगें जनाब , बिल्कुल हलके मन से वह बोले इसका भी उचित समाधान निकाल लूगाँ ।

बैच फ़्लावर औषधियों की यह  एक प्रमुख विशेषता है जो मुझे इस पद्दति में आकृष्ट करती है , रोगी के ऋण पक्ष (negative thoughts) को धन्न पक्ष ( positive thoughts ) में बदलना ।

पाइन स्वभाव वाले व्यक्तित्व के कुछ और ऋण पक्ष : 

  • हीन भावना (guilty complex )
  • स्वदोषी ( self reproach )
  • अन्तर्मुखी ( introvert )
  • बात-२ में क्षमा करने का उपयोग करना ।
  • दूसरों के दोषों के लिये भी अपने को दोषी ठहराना ।
  • संकोची व्यक्तित्व

KEYNOTES OF PINE :-

  Self-reproach, guilt feelings, despondency.
-Tired and worn out feeling.
-Never really satisfied with themselves.
-Blame themselves, asks more of himself than of others, and if the high standards applied to himself cannot be lived up to, he feels guilty and desperately blames himself in his heart.
-Will tend to be the scapegoat in the class and will uncomplainingly take the punishments for crimes they have not even committed.
-Always apologizing and using apologetic phrases in conversation.
-Feels guilty when need arises to speak firmly to others.
-Childish nervousness.
-Feels unworthy, inferior. Considers self a coward.
-Masochistic desire to sacrifice themselves and may punish themselves for life by choosing an inconsiderate partner.
-Religious beliefs strong, sees sexuality as sin.
-Negative narcissism.
-Personality shuts itself off from love, feels undeserving of love.
-Feeling he does not deserve anything.
-Introverted, little joy in life.

इसको भी देखें :

चेस्टनट–होम्योपैथिक और बैचफ़्लावर पद्दतियों मे उपयोग ( Chestnut–Homeopathic & Bach flower uses )