Category Archives: कुछ इधर उधर की

ज़िंदगी को कीजिए ‘रीसेट’ – Press the Reset Button On Your Life

चिकित्सक टैली ९ का प्रयोग कैसे करें !! (How can a doctor use tally 9 to maintain his records)

 

 

चौकियें  नही , मै कोई टैली सिखाने की बात नही कर रहा हूँ , अनाडी इन्सान भला क्या सिखायेगा, गणित के सवाल और एकाउन्ट वैसे भी बायो वालों के लिये हमेशा से सरदर्द रहते हैं :)  ।  लेकिन कुछ दिन पहले जब नेट पर टैली ९ का working demo  ढूँढते-२ विनोद जी की एकाउन्टिगं की साईट पर जा पहुँचा , उनसे एक अनुरोध किया कि क्या कोई डेमो का लिंक मिल सकता है जिसमे टैली ९ की प्रयोग विधि समझाई गई हो , डेमो का तो विनोद जी कोई लिंक न दे पाये लेकिन हाँ मेरे अनुरोध पर  चिकित्सकों के लिये एक सचित्र वर्णन एक पोस्ट के जरिये से अवशय समझा दिया । देखें यहाँ और उनके  अनुभव का लाभ उठायें । टैली ९ का डेमो तो ढूँढते-२ टैली ७.२ का working demo अवशय मिल गया , देखें यहाँ ।  अब मुझे यह नही पता कि इसमे और टैली ९ मे कितना फ़र्क है । macromedia flash पर आधारित  यह एक उपयोगी working डेमो है ।

ब्लाग वार्ता – मर्ज और मरीज की बातें – (दैनिक हिन्दुस्तान दिनांक -7-5-2008 )

गत सप्ताह ७-५-२००८ के दैनिक हिन्दुस्तान में रवीश जी का लेख स्वास्थ संबधित विषयों और हिन्दी चिठ्ठाकारी पर छ्पा ।  ५-५-०८ को मुझे रवीश जी का मेल मिला औए उसके बाद शाम को एक फ़ोन काल , सवालों की दनादन बौछार , मुझे दो दिन बाद मे मालूम पडा कि यह तो समाचार पत्र के लिये एक लेख बन चुका था , स्टिगं आप्रेशन नहीं समझें  🙂

स्वास्थ विषयों पर हिन्दी मे चिकित्सकों के ब्लाग अभी कम ही हैं , लेकिन शुरुआत तो हो चुकी है । बाल रोग  विशेषज्ञ डां  बेजी जी  का ज्ञान की गंगा बिखेरता स्पंदन ,  त्वचा विशेषज्ञ डां मिहिरभोज का स्वास्थ चर्चा , दन्त विशेषज्ञ  डां प्रवीन चोपडा जी का मीडिया डाक्टर , आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक से संबधित डां रुपेश का आयुषवेद और डां देश बन्धु वाजपेयी जी का इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफ़  आदि प्रमुख हैं । आगे अलग-२ क्षेत्र से और भी चिकित्सक जुडेगें और हिन्दी को गरिमामयी स्थान दिलाने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगें । गूगल का भी योगदान कम नही है , गूगल के  भाषा अनुवाद की मदद से आगे  चिटठों को भाषा परिवर्तित करके आसानी से पढा जा सकेगा , हिन्दी को जनसाधारण और विशव मे लोकप्रिय करने का ही काम करेगा ।

शैशव काल से तरुण होती हिन्दी को जिन्होने  आरम्भ से देखा और लिखने के क्रम को जारी रखा तब जब  इन्टर्नेट में  पढने वालों की संख्या नगण्य ही थी , असली बधाई के पात्र हैं ।

समाचार पत्र ” दैनिक हिन्दुस्तान ” की इस कटिगं को साफ़ देखने के लिये नीचे दिये चित्र पर चटका लगायें  ।

दायाँ मस्तिष्क या बायाँ मस्तिष्क – जरा सी माथा-पच्ची करे ।

आपको इस नाचती हुई लडकी को देखकर क्या लगता है – यह किस दिशा मे नाच रही है – घड़ी की सुई की दिशा ( clockwise ) या घड़ी की सुई की विपरीत दिशा ( anticlockwise) में । अगर आप घड़ी की सुई की दिशा ( clockwise ) मे अपना अनुमान लगा रहे है तो आप अपने मस्तिष्क के दायें हिस्से का प्रयोग कर रहे हैं और अगर विपरीत दिशा मे तो बायें  🙂 । तो इससे क्या अर्थ निकला , नीचे डेली टेलीग्राफ़ की रिपोर्ट देखें और परिणामों से अवगत हो लें । हाँ , Daily telegraph की इस रिपोर्ट पर आ रहे कमेन्ट को देखना न भूलें ।

The Right Brain vs Left Brain test … do you see the dancer turning clockwise or anti-clockwise?

Source : Daily telegraph

If clockwise, then you use more of the right side of the brain and vice versa.
Most of us would see the dancer turning anti-clockwise though you can try to focus and change the direction; see if you can do it.

LEFT BRAIN FUNCTIONS
uses logic
detail oriented
facts rule
words and language
present and past
math and science
can comprehend
knowing
acknowledges
order/pattern perception
knows object name
reality based
forms strategies
practical
safe
RIGHT BRAIN FUNCTIONS
uses feeling
“big picture” oriented
imagination rules
symbols and images
present and future
philosophy & religion
can “get it” (i.e. meaning)
believes
appreciates
spatial perception
knows object function
fantasy based
presents possibilities
impetuous
risk taking

अजीबोगरीब समानतायें -क्या है इनमे सच ?

यह भी अजीब संयोग है कि प्रकृति द्वारा प्रद्दत नाना प्रकार के फ़ल और सब्जी की संरचानाये हमारे शरीर के कई अंगों और कोशिकाओं से मिलती जुलती प्रतीत होती हैं ।  चीनियों ने प्रकृति के इस निराले खेल को ५००० वर्ष पहले ही से जाना और समझा ।

कुछ अंदाज लगायें कि क्या समानता हो सकती है १. एक कटी हुई गाजर और आँख मे या २. कटॆ हुये टमाटर और ह्रदय मे  या ३. अखरोट और मस्तिषक के बीच या ४. शकरकन्दी और पैन्क्रियाज के मध्य । और भी है बहुत से ऐसे सम्बन्ध ; प्रकृति की इस निराले अंदाज को जानने के लिये नीचे इस वीडियो किल्प को देखें  ।

" Food Patterns of our Body Proof for Intelligent Design"

टीकाकरण -एक सच यह भी (Vaccination: The Hidden Truth)

टीकाकरण की उपयोगिता और उनसे होने वाली सुरक्षा से कोई भी इन्कार नही कर सकता लेकिन पिछ्ले कुछ सालों से नये-२ टीकॊं का प्रवेश , गली-२ टेन्ट लगाये ५०-१००/- तक टीकाकरण करने की होड ने एक सवालिया निशान खडा कर दिया है कि इनकी उपयोगिता वास्तव मे है या इसके अन्दर की कहानी कुछ और ही है । सरकारी जन-आन्दोलन मे टीकरण की महत्ता से हम पीछे हटने की बात नही कर रहे हैं , पोलियो, डी.पी.टी., बी.सी.जी. और खसरा के टीकों को छोडकर बाकी प्राइवेट लगने वाले टीके कितने सुरक्षित हैं , यह भी एक सवालिया निशान है । देर-सवेर अखबारों से निकलने वाली खबरें खुद ब खुद इन पर इशारा करती रहती हैं । नीचे इस वीडियो को ध्यान से देखिये और कुछ सच जानने की कोशिश करिये ।
स्त्रोत: informationliberation.com

This is the first half of the shocking but extremely informative video documentary “Vaccination – The Hidden Truth” (1998) where 15 people, including Dr. Viera Scheibner (a PhD researcher), five medical doctors, other researchers, and parents’ experiences, reveal what is really going on in relation to illness and vaccines.
With so much government and medical promotion of vaccination for prevention of disease, ironically, the important facts presented here come from the orthodox medicine’s own peer-reviewed research. The result is a damning account of the ineffectiveness of vaccines and their often harmful effects.

It shows that parents are not being told the truth by the media, the Health Department and the medical establishment, with a medical doctor, Dr. Mark Donohoe, confessing that “It is a problem for me that I am part of a profession that is systematically lying to people.”

Find out how vaccines are proven to be both useless and have harmful effects to your health and how it is often erroneously believed to be compulsory.

Many people simply refuse to believe the truth regardless of how clear it is, but the impeccable documentation presented in this amazing video has changed the minds of many who have seen it.
SOURCE: informationliberation.com

आप चिट्ठाकारी के कितने आदी है ? ( How Addicted to Blogging Are You? )

है तो यह प्रश्न अटपटा लेकिन प्रश्न तो प्रश्न ही है और जबाब भी खोजना है । मेरा जबाब तो नीचे रहा और आपका क्या है ? तो देर किस बात की, थोडा सा यहाँ घूम आयें और अपने मन मे उमडते हुये सवालों का जबाब देखें । ( वैसे जब मै अपने आप को 70% की श्रेणी मे देखता हूँ तो अन्य दिग्गज ब्लागरस पर सोचने पर मजबूर हो जाता हूँ कि उनका प्रतिशत कितना होगा ?  🙂 )