स्वाइन फ़्लू या शूकर इन्फ़्लूएंजा और बचाव ( Swine Flu and prophylactics)

Diagram_of_swine_flu_symptoms_HNswine flu in pigs

एक पुरानी पोस्ट लेकिन आजकल के हालात पर कुछ नये अपडेट सहित । स्वाइन फ़्लू के बचाव के लिये डां कृषणामूर्ति द्वारा मर्क साल १००००x के प्रयोगों को http://www.interhomeopathy.org/treatment_of_swineflu पर अवशय देखें । डोज का निर्धारण मर्क साल 10000X एक डोज महीने मे एक बार * तीन महीने तक लगातार ले ।

For prevention of swine flu , Merc Sol 10000X may be given one dose once a month for three months. This prevents swine flu for six months from the date of taking the first dose. The details are given HERE http://www.interhomeopathy.org/treatment_of_swineflu

होम्योपैथी-नई सोच/नई दिशायें

शूकर इन्फ्लूएंजा, जिसे एच1एन1 या स्वाइन फ्लू भी कहते हैं, विभिन्न शूकर इन्फ्लूएंजा विषाणुओं मे से किसी एक के द्वारा फैलाया गया संक्रमण है। शूकर इन्फ्लूएंजा विषाणु (SIV-एस.आई.वी), इन्फ्लूएंजा कुल के विषाणुओं का वह कोई भी उपभेद है, जो कि सूअरों की महामारी के लिए उत्तरदायी है। 2009 तक ज्ञात एस.आई.वी उपभेदों में इन्फ्लूएंजा सी और इन्फ्लूएंजा ए के उपप्रकार एच1एन1 (H1N1), एच1एन2 (H1N2), एच3एन1 (H3N1), एच3एन2 (H3N2) और एच2एन3 (H2N3) शामिल हैं। इस प्रकार का इंफ्लुएंजा मनुष्यों और पक्षियों पर भी प्रभाव डालता है। शूकर इन्फ्लूएंजा विषाणु का दुनिया भर के सुअरो मे पाया जाना आम है। इस विषाणु का सूअरों से मनुष्य मे संचरण आम नहीं है और हमेशा ही यह विषाणु मानव इन्फ्लूएंजा का कारण नहीं बनता, अक्सर रक्त में इसके विरुद्ध सिर्फ प्रतिपिंडों (एंटीबॉडी) का उत्पादन ही होता है। यदि इसका संचरण, मानव इन्फ्लूएंजा का कारण बनता है, तब इसे ज़ूनोटिक शूकर इन्फ्लूएंजा कहा जाता है।…

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