एक बार फ़िर से जब स्वाइन फ़्लू के केस लखनऊ मे देखे जा रहे हैं , एक पुरानी लेकिन आज भी महत्व रखने वाली पोस्ट को reblog कर रहा हूँ ।

होम्योपैथी-नई सोच/नई दिशायें

मिनेटेस डाट काम पर शेरी ने इन्फ़्लून्जियम पर कुछ रोचक आँकडॆ दिये ।  1918 से 1957 तक इस औषधि के स्त्रोत फ़्लू से ग्रस्त रोगियों के नासिक स्त्राव और  रक्त के सैम्पल से लिये गये । और  इनमे से अधिकतर उन रोगियों से जो 1918 के फ़्लू की महामारी से ग्रस्त थे ।

1957 के बाद से दवा बनाने के  ढंग  मे बदलाव आया और दवा का स्त्रोत फ़्लू वैक्सीन से लिया गया । इग्लैंड की नेलसन होम्यो लैब इसकी मुख्य निर्माता और विक्रेता हैं और 1918 से 1957  अब तक लगभग 13 अलग –2 सैम्पल ला चुके हैं । इनमे से अधिकतर सैम्पल इसके पूर्व वर्ष मे हुये फ़्लू के वैक्सीन  से लिये गये हैं । 1918 का फ़्लू वाइरस मुख्यत: H1N1 वाइरस था और यह अब तक के सबसे अधिक खतरनाक वाइरस की श्रेणी मे आता है । होम्योपैथिक दृष्टिकोण से मुख्य है इसकी प्रूविग जिससे उत्पन्न लक्षण…

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