ख़ुश रहिए और सर्दी से बचिए

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तनावग्रस्त रहने वालों को सर्दी की संभावना ज़्यादा होती है

ख़ुश रहने के यूँ तो कई फ़ायदे होते हैं मगर अब एक नया फ़ायदा सामने आया है.
जो लोग ख़ुश रहते हैं, चुस्त-फ़ुर्तीले और तनाव मुक्त होते हैं उन्हें सर्दी लगने के आसार भी कम ही होते हैं.
अमरीकी वैज्ञानिकों के एक दल ने गहन अध्ययन के बाद यह जानकारी प्रकाशित की है.
इन्हीं वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके विपरीत जो लोग तनावग्रस्त रहते हैं, परेशान हो जाते हैं या अधिक ग़ुस्सा करते हैं उनकी ओर से सर्दी की शिकायत आने की आशंका भी ज़्यादा होती है भले ही उन्हें सर्दी लगी हो या नहीं.

ख़ुश रहने वालों को सर्दी की आशंका कम

पीट्सबर्ग स्थित कार्नेगी मेलन विश्वविद्यालय में शोधकर्ताओं के एक दल ने पाया कि जो लोग भावनात्मक रूप से सकारात्मक सोच रखते हैं उनमें सर्दी के लक्षण कम ही दिखते हैं.
शोधकर्ताओं ने दो हफ़्ते तक प्रति हफ़्ते तीन दिन के हिसाब से 334 लोगों से बातचीत की और देखा कि उनकी मानसिक स्थिति कैसी है.
इस जाँच-परख के बाद सर्दी के वाहक राइनोवायरस के छींटे उनकी नाक में डाले गए.
शोधकर्ताओं ने उन सभी लोगों का पाँच दिन तक परीक्षण किया और देखा कि वे उससे प्रभावित हुए या नहीं और उन्होंने उसका सामना कैसे किया.
परीक्षणों से पता चला कि सकारात्मक सोच रखने वाले व्यक्तियों पर उसका असर नहीं के बराबर हुआ.
वैसे इसकी वजह से किसी के बीमार होने के संकेत नहीं मिले.
शोधकर्ताओं के दल के प्रमुख डॉक्टर शेल्डन कोहन ने बताया, "हमने पाया कि सकारात्मक भावनाएँ सर्दी से बचने की प्रतिरोध क्षमता से जुड़ी थीं."
उन्होंने कहा, "मगर नकारात्मक सोच का असर इस तरह नहीं हुआ."
प्रतिरोध प्रणाली
डॉक्टर कोहन मानते हैं कि लोगों की सकारात्मक सोच दरअसल उनकी रोग प्रतिरोध प्रणाली को प्रभावित कर सकती है कि उसका उन पर क्या असर होता है.
उन्होंने बीबीसी को बताया कि इसी तरह अच्छा रवैया रखने वाले लोगों को दूसरी संक्रामक बीमारियों का ख़तरा भी कम ही रहता है.
डॉक्टर कोहन का कहना था, "सर्दी के लक्षण साइटोकाइन्स, हिस्टेमाइन्स और ब्रैडिकाइनिन्स जैसे रसायनों की वजह से दिखते हैं."

उन्होंने कहा कि इन रसायनों पर कुछ हद तक उन हॉर्मोनों का नियंत्रण होता है जो हमारे भीतर तरह-तरह की भावनाएँ पैदा करते हैं.
डॉक्टर कोहन ने बताया, "हमारा ख़्याल है कि ख़ुश रहने वाले लोगों में इन हॉर्मोनों का स्तर उन्हें सर्दी के वायरस के असर से कुछ हद तक बचाता है."
इसी तरह प्राइमरी केयर वायरोलॉजी ग्रुप के अध्यक्ष डॉक्टर नाइजल हिग्सन का कहना है कि इस बात के बहुत से सबूत हैं कि तनाव का व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर असर पड़ता है.
उन्होंने कहा, "ऐसा लगता है कि प्रतिरोध प्रणाली आपके ठीक होने पर निर्भर करती है और आप अगर तनावमुक्त हैं तो आप रोग से जल्दी से जल्दी निपट सकते हैं."
डॉक्टर हिग्सन का कहना था कि ये बहुत हद तक संभव है कि मस्तिष्क के रसायनों का प्रतिरोध प्रणाली के रसायनों की कार्यप्रणाली पर सीधा असर हो.

साभार : बी.बी.सी.

6 responses to “ख़ुश रहिए और सर्दी से बचिए

  1. परसों शाम से जुकामग्रस्त हूँ। देखता हूँ कोई तनाव था क्या? और था तो किस बात का?

  2. तभी मुझे इत्ती ज्यादा गर्मी लग रही है.

  3. अजी हम तो अपने आसपास वालो को भी खुश रखते है, लेकिन कभी कभी इस जुकाम को भी खुश करना पडता है….:)
    धन्यवाद

  4. payere Prabhat ji, Khus Rah kara aap sardi hi nahi sabhi prakar ke rogon s
    e bach sakte hain…

    happiness improves our immune system.

  5. सही बात है। मस्त रहो।

  6. hum to khusi me bhi sneezing karte hai

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