Monthly Archives: दिसम्बर 2008

होम्योपैथिक औषधियों मे expiry date का प्रश्न–कितना जायज ?

 
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यह साल जाते-२ होम्योपैथिक दवाओं पर तीसरी मार दे गया । साल के शुरु मे शुगर आफ़ मिल्क या दुग्ध शर्करा के रेट मे अप्रत्याशित वृद्दि , उसके बाद माननीय  उच्चतम न्यायालय ने पौंडं पैंकिंग ( ४५० मि.ली. ) की बिक्री पर लगायी रोक के कारण ३० मि.ली. की पैकिंग का चलन और अब वर्ष के अंत मे केन्द्र का  G.M.P. ( Good Manufacturing Practices ) के   अन्तर्गत होम्योपैथिक दवाओं पर expiry date  अंकित करना आवशयक हो गया है । देखें यहाँ , यहाँ और यहाँ । मदर टिन्चर और पोटेन्सी पर ५ साल और Ointments और पेटेन्ट पर ३ साल की अवधि तय की गई है । होम्योपैथिक दवाओं  की जानकारी रखता हुआ हर चिकित्सक  यह समझ सकता है यह कितना बेतुका नियम है । फ़िलहाल जो होम्योपैथ दवाओं का काफ़ी लम्बे समय तक स्टाक रखने की सोच रहे हों अब सावधान हो जायें , आपकी जेब पर डाका पडने वाला है 🙂

यह भी देखें : ( संबधित पोस्ट )

हिमाई ( HMAI ) की लखनऊ कान्फ़्रेन्स संपन्न

 

मेरा मानना है अधिकतर कान्फ़्रेन्स राजनीति का अखेडा ही होती है ; पिछ्ले २० सालों से मुझे इन होम्योपैथिक संगोष्ठियों से कोई लगाव न रहा और न मैने इसमे कभी भी दिलचस्पी ली । हाल ही मे लखनऊ मे २६ -२८ दिसम्बर तक चली H.M.A.I. की होम्योपैथिक कान्फ़्रेन्स भी कुछ ऐसे ही थी । दोपहर मे क्लीनिक बन्द करने के बाद एक बार चक्कर लगाने की सोची । डा. विथलीकोस  ( Dr Vithoulkas) के आने  की उम्मीद थी लेकिन वह नही आये । सही बात तो यह थी मै पढने के लिये कुछ नई पुस्तकें ढूँढ रहा था । कान्फ़्रेन्स के कन्वेनर बैकसन के डा. बक्शी और डा. जवाहर शाह बिल्कुल सफ़ल व्ययापारियों की तरह इधर – उधर टहलते नजर आये । तब तक मेरा ध्यान बी.जैन के बुक स्टाल पर चला गया और मुझे मेरी मनचाही पुस्तकें मिल चुकी थी । जिन ५ पुस्तकों को मैने लिया उनमे दो ५० मिलसमल पोटेन्सी पर थी जैसे  डा. हरिमोहन चौधरी की 50 Millesimal potency in Theory & Practice और डा. फ़रनान्डॊ फ़्लोरस विलेवा ( Dr Fernanado Flores Villalva ) की LM Scale 50 Milesimal Porencies : Method to Prescribe |आने  वाले साल मे प्रैकिटिस मे आर्गेनान आफ़ मेडिसन के ६ वें एडीशन के तौर तरीकों पर प्रैक्टिस करने का विचार बना रहा हूँ । ५० मिलसमल पोटेन्सी प्रयोग करने वाले अन्य होम्योपैथों की मदद की मुझे आवशयकता पडेगी , और हाँ डा. प्रवीन गोस्वामी अपना सर खपाने के लिये  तैयार रहियेगा 🙂

कीथ सौटैर ( Keith Souter )  की Remedy Selection made easy with flow charts , डा. सौरभ बैनर्जी की Miasmatic Diagnosis  with Practical Tips और डा. विटलीकोस  ( Dr Vithoulkas) की Essence of Materia Medica अन्य पुस्तकों की लिस्ट मे थी।

अगर मुझे संगोष्ठियों और वर्क-शाप को चुनने के लिये मिले तो मै work shops को चुनूगाँ , कारण वहाँ पर सीखने को काफ़ी अनुभव मिल जाता है । अगले साल अगर मौका मिला तो सहगल स्कूल आफ़ होम्योपैथी और डा. प्रफ़ुल्ल विजयरकर की Predictive Homeopathy की वर्कशाप मेरी नजर मे रहेगें ।

लखनऊ, 26 दिसम्बर (जागरण संवाददाता) : केंद्रीय होम्योपैथिक परिषद ने राज्य में होम्योपैथी की शिक्षा के स्तर को काफी खराब करार दिया है। यहां किसी भी होम्योपैथिक मेडिकल कालेज में मानक पूरे न होने पर परिषद ने चिंता जतायी है। शुक्रवार से शुरू हुई आल इंडिया होम्योपैथिक कांग्रेस में बतौर विशिष्ट अतिथि उपस्थित होम्योपैथिक परिषद के उपाध्यक्ष डा. रामजी सिंह ने अपने संबोधन में विभागीय अफसरों को आड़े हाथ लिया। गांधी भवन सभागार में शुरू हुए तीन दिवसीय सम्मेलन में डा. राम सिंह ने कहा कि राज्य में होम्योपैथिक शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए बीते वर्ष विभिन्न मेडिकल कालेजों के लिए कुल 196 पद सृजित हुए थे लेकिन इन्हें भरा नहीं जा सका है। राज्य के किसी भी होम्योपैथिक कालेज में 43 शिक्षकों का मानक पूरा नहीं है। कुछ वर्ष पहले शिक्षा स्तर सुधारने के नाम पर लखनऊ का मोहन मेडिकल कालेज, जौनपुर का टीडी होम्योपैथिक मेडिकल कालेज और बिजनौर के नगीना होम्योपैथिक मेडिकल कालेज को बंद कर दिया गया था। इनके शिक्षकों को शेष सात मेडिकल कालेजों में समायोजित किया गया। बावजूद इसके बात नहीं बनी। राज्य के सभी सातों मेडिकल कालेज शिक्षकों की भयंकर कमी से जूझ रहे हैं। डा. सिंह के मुताबिक शिक्षकों की कमी के कारण ही राज्य के किसी भी होम्योपैथिक मेडिकल कालेज में स्नातकोत्तर की पढ़ाई नहीं शुरू हो पायी है। आलम यह है कि स्नातकोत्तर शिक्षकों के 18 पद सृजित होने के बाद भी इनपर कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी है। होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन आफ इंडिया की लखनऊ ईकाई के तत्वाधान में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन होम्योपैथिक चिकित्सा राज्यमंत्री राजेश त्रिपाठी ने किया। कार्यक्रम में एसोसिएशन के अध्यक्ष और निदेशक होम्योपैथिक सेवाएं डा. बीएन सिंह, सचिव डा. शैलेन्द्र सिंह, डा. रेनू महेन्द्र और डा. केके राजपूत समेत देश के विभिन्न हिस्सों से आये तमाम चिकित्सक मौजूद थे।

प्रूविगं.इन्फ़ो -एक अद्वितीय साइट

Provings.info अपने मे एक  अद्वितीय साइट है. वर्तमान में इस साइट के डाटाबेस मे  2387 एकल होम्योपैथिक औषधियों का संग्रह है , तकरीबन ९३८ औषधियों को उनके दवा परीक्षण के आधार पर डाला गय है और सबसे बडी बात है कि यह प्रविष्टियां लगातार बढती जा रही है ।

इस साइट पर सर्च करने के कई और विकल्प भी है जैसे एक खोजी अगर पदार्थ पर सर्च का विकल्प चाहता है तो उसे उस निर्मित पदार्थ के लैटिन , अंग्रेजी और जरमन नाम की जानकारी मिल सकती है ।

सर्च का दूसरा विकल्प वर्गीकरण या  Taxonomy पर है जिसके मदद से किसी भी निर्मित होम्योपैथिक पदार्थ के  families, orders और classes को जाना जा सकता है । विस्तारित खोज (extended search ) के माध्यम से औषधि को सीधे किल्क करके उसका मूल लेख भी पढ सकते हैं

कृषि-होम्योपैथी पर कुछ नये लिंक

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Comparison of radish plants. On the left side, plants which were treated with Calcarea carbonica 30 CH, Calcarea phosphorica 30 CH, Calcarea fluorica 30 CH. On the right side untreated plants.

एग्रो-होम्योपैथी यानि होम्योपैथिक औषधियों का रोगग्रस्त पौधों पर कार्य ; इस विषय पर पहले भी लिखा जा चुका है देखें यहाँ , यहाँ और यहाँ । H- pathy के दिसम्बर २००८ के संस्करण मे एग्रो होम्योपैथी पर कुछ नये लेख हैं :

यह भी देखें : संबधित पोस्ट (Related Posts)-

ख़ुश रहिए और सर्दी से बचिए

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तनावग्रस्त रहने वालों को सर्दी की संभावना ज़्यादा होती है

ख़ुश रहने के यूँ तो कई फ़ायदे होते हैं मगर अब एक नया फ़ायदा सामने आया है.
जो लोग ख़ुश रहते हैं, चुस्त-फ़ुर्तीले और तनाव मुक्त होते हैं उन्हें सर्दी लगने के आसार भी कम ही होते हैं.
अमरीकी वैज्ञानिकों के एक दल ने गहन अध्ययन के बाद यह जानकारी प्रकाशित की है.
इन्हीं वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके विपरीत जो लोग तनावग्रस्त रहते हैं, परेशान हो जाते हैं या अधिक ग़ुस्सा करते हैं उनकी ओर से सर्दी की शिकायत आने की आशंका भी ज़्यादा होती है भले ही उन्हें सर्दी लगी हो या नहीं.

ख़ुश रहने वालों को सर्दी की आशंका कम

पीट्सबर्ग स्थित कार्नेगी मेलन विश्वविद्यालय में शोधकर्ताओं के एक दल ने पाया कि जो लोग भावनात्मक रूप से सकारात्मक सोच रखते हैं उनमें सर्दी के लक्षण कम ही दिखते हैं.
शोधकर्ताओं ने दो हफ़्ते तक प्रति हफ़्ते तीन दिन के हिसाब से 334 लोगों से बातचीत की और देखा कि उनकी मानसिक स्थिति कैसी है.
इस जाँच-परख के बाद सर्दी के वाहक राइनोवायरस के छींटे उनकी नाक में डाले गए.
शोधकर्ताओं ने उन सभी लोगों का पाँच दिन तक परीक्षण किया और देखा कि वे उससे प्रभावित हुए या नहीं और उन्होंने उसका सामना कैसे किया.
परीक्षणों से पता चला कि सकारात्मक सोच रखने वाले व्यक्तियों पर उसका असर नहीं के बराबर हुआ.
वैसे इसकी वजह से किसी के बीमार होने के संकेत नहीं मिले.
शोधकर्ताओं के दल के प्रमुख डॉक्टर शेल्डन कोहन ने बताया, "हमने पाया कि सकारात्मक भावनाएँ सर्दी से बचने की प्रतिरोध क्षमता से जुड़ी थीं."
उन्होंने कहा, "मगर नकारात्मक सोच का असर इस तरह नहीं हुआ."
प्रतिरोध प्रणाली
डॉक्टर कोहन मानते हैं कि लोगों की सकारात्मक सोच दरअसल उनकी रोग प्रतिरोध प्रणाली को प्रभावित कर सकती है कि उसका उन पर क्या असर होता है.
उन्होंने बीबीसी को बताया कि इसी तरह अच्छा रवैया रखने वाले लोगों को दूसरी संक्रामक बीमारियों का ख़तरा भी कम ही रहता है.
डॉक्टर कोहन का कहना था, "सर्दी के लक्षण साइटोकाइन्स, हिस्टेमाइन्स और ब्रैडिकाइनिन्स जैसे रसायनों की वजह से दिखते हैं."

उन्होंने कहा कि इन रसायनों पर कुछ हद तक उन हॉर्मोनों का नियंत्रण होता है जो हमारे भीतर तरह-तरह की भावनाएँ पैदा करते हैं.
डॉक्टर कोहन ने बताया, "हमारा ख़्याल है कि ख़ुश रहने वाले लोगों में इन हॉर्मोनों का स्तर उन्हें सर्दी के वायरस के असर से कुछ हद तक बचाता है."
इसी तरह प्राइमरी केयर वायरोलॉजी ग्रुप के अध्यक्ष डॉक्टर नाइजल हिग्सन का कहना है कि इस बात के बहुत से सबूत हैं कि तनाव का व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर असर पड़ता है.
उन्होंने कहा, "ऐसा लगता है कि प्रतिरोध प्रणाली आपके ठीक होने पर निर्भर करती है और आप अगर तनावमुक्त हैं तो आप रोग से जल्दी से जल्दी निपट सकते हैं."
डॉक्टर हिग्सन का कहना था कि ये बहुत हद तक संभव है कि मस्तिष्क के रसायनों का प्रतिरोध प्रणाली के रसायनों की कार्यप्रणाली पर सीधा असर हो.

साभार : बी.बी.सी.

ओपन रिपर्ट्री -मुक्त स्रोत फ़्री होम्योपैथिक सॉफ्टवेयर (OpenRep-free open source homeopathic software)

 screenshot_OpenRep

 ओपन रिपर्ट्री – मुक्त स्रोत फ़्री होम्योपैथिक सॉफ्टवेयर: ( चित्र को बडॆ आकार मे देखने के लिये चित्र पर किल्क करें )

साभार : ब्लादिमीर पोलोनी

व्लादिमीर पोलोनी द्वारा विकसित और निर्मित ओपेन रिपर्ट्री पहला मुक्त स्त्रोत फ़्री होम्योपैथिक साफ़्ट्वेर है । जावा आधारित इस साफ़्टवेर के कई अलग-२ संस्करण अलग-२ आपरेटिंग सिस्टम के लिये बनाये गये हैं  । एक एडवान्स यूजर के लिये इसमे बहुत कुछ नही है लेकिन होम्योपैथिक कालेज मे बी.एच.एम.एस. के सेंकडं सेमेस्टर के आगे वाले छात्रों के लिये यह उपयोगी सिद्द हो सकता है । इस सॉफ्टवेयर मे पयुक्त सभी रिपर्ट्री ओपन स्त्रोतों से ली गयी हैं ।

 Repertories की सूची में  शामिल है:

Repertorium Publicum : यह कैंट रिपर्ट्री के  नवीनतम संस्करण पर आधारित है और इसमे काफ़ी बदलाव के संकेत दिखाई दे रहे हैं । पूरी जानकारी के लिये Repertorium Publicum का परियोजना पृष्ठ देखें ।
Short Repertory of Bach Flower Remedies : इसके लेखक ब्लादिमीर पोलोनी हैं और इस रिपर्ट्री को उन्होने  मुक्त स्त्रोत कर दिया है जिसका मतलब है कि इसमे किसी भी तरह का परिवर्तन और संशोधन किया जा सकता है । देखें BachFlowerOnline.com

Boenninghausen’s Repertory by T.F.Allen  : टी.एफ़. एलेन द्वारा अनुवादित बोनिगहसन की रिपर्ट्री का यह मूल रुप है और  इसमे  बोनिगहसन के द्द्ष्टिकोण को हम साफ़-२ देख सकते हैं जहाँ लक्षणॊं को Locality, Condition, Modality और  Concomitants के घटकों मे बाँटा गया है ।

Sensations as if by Herbert Roberts : दुर्लभ लक्षणॊं  का इसमे  अद्वितीय  समावेश है , ऐसे लक्षण जिसमे रोगी को  एहसास  होता है , “sensation as if “ के नाम से इस रिपर्ट्री मे कई लक्षण आजकल की कई  आधुनिक रिपर्ट्रीयों मे भी उपलब्ध नही है ।

Homeopathic Repertory by James Tyler Kent : जेम्स टयलर केन्ट तब भी क्लासिक थे और आज भी हैं , देखा जाये तो आधुनिक रिपर्ट्री मे लक्षणॊं का आधार केन्ट से ही लिया गया है । केन्ट की रिपर्ट्री सबसे पुरानी भी है और सबसे वृहद भी ।

Boger Boenninghausen’s Repertory by Cyrus Maxwell

Dunham Notes

General Analysis by Cyrus Maxwell Boger

 डाउनलोड लिंक:

उपलब्ध संस्करणों की सूची

OpenRep FREE 1.6 (2008-11-30) MS Windows OpenRep FREE 1,6 (2008-11-30) MS Windows
डाउनलोड

OpenRep FREE 1.6 (2008-11-30) all operating systems OpenRep FREE 1,6 (2008-11-30) सभी ऑपरेटिंग सिस्टम
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OpenRep -free open source homeopathic software :

courtesy : Vladimir Polony

OpenRep is the first truly free Open Source homeopathic software, developed by Vladimir Polony with only one goal – to provide functional and portable homeopathic software that could contribute to the whole homeopathic community. The whole design is driven by the functionality and ease of use, always offering the least complicated way of repertorizing and evaluating a homeopathic case. OpenRep is the first homeopathic software developed in Java, making it the most portable homeopathic software that can be run under a wide variety of operating systems.

The source code of OpenRep FREE is freely available for download making in the world’s first and only Open Source homeopathic software.

List of Repertories included  :

Open source repertory model
All the repertories used in OpenRep are open source, which means, that their source code is freely available and can be used in other softwares, publications, etc. provided, that the name of the author of the repertory and the repertory name is always visibly declared. The description of the repertory model of the repertories is available here.

Repertorium Publicum
The first open source repertory. It is based on the latest edition of Kent’s Homeopathic repertory and has undergone a lot of changes. For more information on the project, please see the Repertorium Publicum project page.

Short Repertory of Bach Flower Remedies by Vladimir Polony
This repertory was donated by its author Vladimir Polony and is declared to be open source. This means that it is open to any changes and modifications. See also BachFlowerOnline.com

Boenninghausen’s Repertory by Timothy Field Allen
This is the original Boenninghausen’s repertory composed by Baron Clemens Maria Franz von Boenninghausen and translated by T.F. Allen in 1891, although it is not as complete as Boenninghausen’s Repertory from C.M. Boger, it certainly does not lack the originality of approach. In this repertory we can clearly see the original Boenninghausen’s approach of dividing symptoms into their components according to Locality, Condition, Modality and Concomitants and repertorizing by putting these symptoms together based on patients symptomatology.

Sensations as if by Herbert Roberts
This is a truly unique repertory containing rare symptoms expressed as Sensations as if. It contains unique symptoms not listed even in the most modern repertories. This repertory is a must for a thorough prescriber.

Homeopathic Repertory by James Tyler Kent
This is a the classic among all the repertories. All the modern repertories have taken to some extent this repertory as their basis. It is the biggest and most complete of the older repertories.

Boenninghausen’s Repertory by Cyrus Maxwell Boger
A truly unique repertory that uses the characteristic approach of Boenninghausen. Although this repertory does not contain modern addition, from the point of view of completeness of remedies available in the repertory, it is considered the most complete and homogeneous repertory. The version you can find in OpenRep is the version from 1937 including Dunham’s notes.

General Analysis by Cyrus Maxwell Boger
Although small in size, this repertory is considered to be a life-saver when encountering difficult cases. It consists of a small number of very general symptoms with a lot of cross-references that allow to perform a general analysis of a case based on general symptoms and conditions.

Download Links :

List of available versions

OpenRep FREE 1.6 (2008-11-30) MS Windows
download

OpenRep FREE 1.6 (2008-11-30) all operating systems
download

अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ होम्योपैथी का पहला प्रकाशन – एक होम्योपैथिक गाइड स्वस्थ उपचार के लिये

 

अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ होम्योपैथी (AIH) संयुक्त राज्य अमेरिका का सबसे पुराना चिकित्सा संगठन है , इसकी स्थापना अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन से लगभग तीन साल पहले हुयी थी .  यह पुस्तक AIH का पहला प्रकाशन है और उन माता पिता के लिये यह विशेष है जो   परंपरागत औषधियों जैसे stimulants, antidepressants और एंटीबायोटिक दवाओं के अलावा दूसरे विकल्पों की तलाश मे हैं  । इसके लेखक एडवर्ड शैल्टज (Dr  Edward Shalts ) जो स्वयं एक एलोपैथिक चिकित्सक हैं और कई रोगों में होम्योपैथी दवाओं का उपयोग कामयाबी के साथ करते रहे हैं ।  होम्योपैथिक  क्या है और यह कैसे काम करता बताते हैं , एडवर्ड शैल्टज के शब्दों मे जानने के लिये यहाँ किल्क कर डाउनलोड करें ।

The American Institute of Homeopathy (AIH) is the oldest medical organization in the United States founded three years before the American Medical Association. The American Institute of Homeopathy Handbook for Parents is the first AIH publication that offers another option for parents who are reluctant to participate in the widespread extreme measures of conventional medicine such as stimulants, antidepressants, and overuse of antibiotics. Step-by-step Edward Shalts, a medical doctor who practices homeopathic medicine, explains what homeopathy is and how it works. He presents a user-friendly overview of acute and chronic issues and shows how parents can deal with them, either on their own for some problems, or in many cases, with a qualified practitioner. This important resource explains the principles of homeopathy, the nature of remedies, and the appropriate time to use homeopathy.

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