Monthly Archives: अक्टूबर 2008

मेरी डायरी – स्टेफ़िजगेरिया (staphyasgaria )

एक सफ़ल होम्योपैथिक चिकित्सक के लिये यह आवशयक है कि वह पूर्वाग्रहों से मुक्त रहे और रोगी मे किसी भी विशिषट दवा के चयन से अपने को दूर रखे । यानि रोग के नाम के आधार पर अगर चिकित्सा की जा रही है तो असफ़लता निशिचित है । यह बात जितनी जल्दी ही एक चिकित्सक को समझ आ जाये उतना ही बेहतर होगी । यही कारण है कि लैन्सट और अन्य चिकित्सा पद्दति वाले होम्योपैथिक के मर्म को नही समझ पाते और फ़लस्वरुप गलत धारणायें बनती हैं ।

पिछले हफ़्ते जिन महिला ने अपनी पुत्री ( पूजा -कल्पनीय नाम ) के लिये मुझसे संपर्क किया उनमे मुख्य दिक्कत लम्बे समय से चल रहे ज्वर की थी । कई डाक्टरों से राय ली गई और कई बार   एन्टीबायोटिक्स का कोर्स पूरा किया गया । मूत्र की जाँच कराने पर esch. colli. कोलाई इन्फ़ेक्शन आ रहा था लेकिन यह किसी भी दवा से दूर न हो सका । बाकी के रक्त की जाँचो मे कोई भी विकार न मिला । पूजा का temperature उस समय १०४ था , और उसके अनुसार पेशाब करने मे जलन भी काफ़ी थी । लेकिन यह लक्षण होम्योपैथिक सेलेक्शन के लिये अपर्याप्त थे । मेरे उससे कुछ प्रशन और उनके  उत्तर और निष्कर्ष  नीचे दिये हैं । यहाँ गौर करे कि एक acute केस होने के नाते लम्बे और ऊबाऊ प्रशनों का सहारा नही लिया गया और रोगी के तीन बिदुओं -Activity-Thermal-Thirst Axis और Conscientious – Diligent या Non-Diligent पर लक्षणॊं का फ़ोकस रखा गया । एक बार स्मरण कराना चाहूगाँ कि यह प्रफ़ुल्ल विजयरकर के फ़्लो चार्ट पर आधारित है |

पूजा का फ़्लो चार्ट कुछ इस तरह बना :

गतिविधि (Activity-) –सुस्त , बोझिल ..हर समय लेटे रहने की इच्छा लेकिन नींद कोई विशेष नही –( Dull)

थर्मल संवेदनशीलता  (Thermal) – ठंडक सहन नही (Chilly)

प्यास (Thirst) –नही के बराबर  ( thirstless)

तीन मुख्य बिदुओं पर लक्षण लेने के बाद मुझे रुकना पडा क्योंकि रोगी के विशेष लक्षणॊं की मुझे तलाश थी । बातों –२ उसकी माँ से मुझे मालूम हुआ कि उसका एक स्कूल लखनऊ से २० कि.मी. दूर चलता है । और इसी बात को लेकर घर मे सब नाराज भी थे कि इतना तेज बुखार होने के बावजूद यह लडकी स्कूल जाने को अडी हुयी थी । उसकी माँ ने मुझसे जोर देकर कहा कि आप इसको समझाये कि स्कूल जाने कि जिद जब तक बुखार हो छॊड दे।

मुझे मेरा अगला और विशेष  लक्षण मिल चुका था – Conscientious – Diligent

नीचे चित्र देखे कि इस ग्रुप मे निम्म दवायें थी :

Nat carb, gels, Acid Phos, Sepia, Staphisgaria, china, Ignatia, Ipecac

Diligent

praful

Diligent means Hard working, Showing care and steady effort.
Conscientious means Scrupulous, showing care and precision.
This is one of the most important quality which Dr. Prafull Vijayakar takes for treating the patient. He says.. “….Diligence does not mean exactly conscientious or anxiety of conscience or industrious etc..but it mean A sincere, hard working, steadily working, knowledge accumulating person.” The sole purpose of our existence is to evolve and progress. Each and every cell has to work for sincerely and engulf as much knowledge as possible, to face life with success and evolve to a higher state, thus fulfilling the sole object of existence.
Dr. Vijayakar divided all constitutions into 2 major group:

  • Diligent Remedies
  • Non Diligent remedies.

Diligent (50)

3 ALUM, 1 ang, 2 apis, 2 ars, 2 ars-s-f, 2 aur, 2 aur-i, 3 BAR-C, 2 bar-m, 2 bry, 2 carb-v, 3 CHEL, 3 CHIN, 2 cocc, 1 coch, 2 coff, 2 con, 1 cycl, 2 dig, 2 ferr-ar, 2 ferr, 2 ferr-i, 2 graph, 2 ign, 2 iod, 1 ip, 2 kali-bi, 2 kreos, 2 lyc, 2 m-arct, 1 mez, 1 mur-ac, 2 nat-ar, 1 nat-c, 2 nux-v, 2 ph-ac, 3 PSOR, 2 puls, 2 rhus-t, 2 sep, 2 sil, 1 spig, 3 STAPH, 2 stram, 3 SULPH, 2 thuj, 2 zinc, 2 aur-ar, 2 carc, 2 nat-sil
To make study simpler, we divide these according to families:
Aurums, Arsenics, Natrums, Ferrums are important group of diligent remedies.

  • AURUMS: Most of the aurums are Diligent
    Aur, Aur-ar, Aur-I, Aur-s
  • ARSENICS: Most of the Arsenics are Diligent
    Ars, Ars-s-f, Aur-ar, ferr-ar, Nat-ar,
  • NATRUMS: Most of the of the natrums – Nat-ar, Nat-sil, Nat-c, Nat-p are Diligent. Except NAT-M which is non diligent.
  • FERRUMS: Most of the ferrums – Ferr, Ferr-ar, Ferr-I, M-arct are Diligent
  • POLYCHREST: Polychrests like Sulph, Ars, Apis, Bry, China. Graph, Iod, Lyc, Staph, Nux-v, Psor, Puls, sil, Aur, Carc, Ferr, Ign, Ac-phos, Sep, Rhus-tox, Thuja, Ipec are Diligent

NON DILIGENT
All those constitutions which are unscrupulous, who are not doing their work diligently are Non-diligent remedies. So most of the remedies which are given under rubrics like – Deceitful, Malicious, Rude, Insulting, Cursing and Swearing are Non Diligent.
Non Diligent (49)
2 acon, 1 agar, 1 alco, 1 am-c, 1 anac, 1 arg, 1 arg-n, 1 bufo, 1 calc, 2 camph, 1 carb-an, 2 caust, 2 cham, 1 chlol, 1 cub, 2 cupr, 1 cupr-acet, 1 cur, 1 dros, 2 fl-ac, 1 hep, 2 hyos, 2 lach, 2 lil-t, 1 lyss, 1 mag-m, 2 med, 2 merc, 2 morph, 1 mosch, 3 NAT-M, 1 nit-ac, 2 op, 1 ozone, 2 petr, 1 phos, 1 plat, 1 plb, 1 sarr, 2 seneg, 1 sumb, 2 syph, 2 tarent, 2 tub, 2 verat, 1 androc, 1 lac-h, 1 lap-gr-m, 1 lap-mar-c
According to Family study, Most of the Ammoniums, magnesiums, Kalis, Acids, Snakes and Spiders are Deceitful.

  • AMMONIUMS: Most of the Ammoniums are Non-Diligent.
  • MAGNESIUMS: Most of the Magnesiums are Non-diligent
  • KALIS: Most of the Kali’s ae Non-Diligent
  • NATRUMS: Only Nat-Mur from the Natrum group is Non diligent.
  • ACIDS: Most of the Acids (except Ac-Phos) are Non-Diligent.
  • SNAKES AND SPIDERS: Most of the snakes and Spiders are Non-Diligent.
  • REVOLTING REMEDIES: Most of the revolting remedies like – Arg-nit, Caust, Merc are non-Diligent.
  • LIAR AND DECEITFUL: Most of the Liar and deceitful remedies are Non-Diligent.
  • POLYCHREST: Polychrests like Merc, Nat-m, Camph, Cham, Fl-ac, Hep, Hyos, Lach, Medo, Morph, Op, Syph, Tarent, Tub, Verat, Kali-c, mag-c, Mag-m, Amm-c, Am-m, Arg-n, Caust, Dros, Marble, Granite, Plat, Plb, are Non diligent.

Drug Picture staphisgaria के अनूकूल दिखी क्योंकि यह रोगी की Conscientious – Diligent (कर्मबध्त्ता और अपने काम की जिम्मेदारी को समझने की भावना ) को  सही रुप से कवर कर रही थी । स्टेफ़िस के दो प्रमुख मानसिक लक्षण और दो अन्य लक्षण जिनमे थर्मल और प्यास कोसही-२ कवर करना ।

  • अध्ययनशील और कर्मठ प्रवृति की ओर इंगित कर रहा था । .. तेज ज्वर होने के बावजूद उसका रुटीन काम को करने की इच्छा ।
  • एक गहरी शर्म और अपमान की भावना (A/F Mortifications) और यहाँ उसकी शर्म उसकी काम न कर पाने की असमर्थता के कारण थी ।

17/9/2008—- staphysgaria 200 / 1*3

20/9/2008—-ज्वर 101- 103 के मध्य , लेकिन रोगी बेहतर महसूस कर रही थी।

                      pl/1*6

22/9/2008—temp 99-100 के मध्य ।

                      pl /1*6

25/9/2008- temp नार्मल ।

                     pl/1*6

27/9/2008 — रोगी अब स्वस्थ थी और मूत्र ( urine ) की जाँच को करवाने की सलाह दी गई ।

28/9/2008…. नार्मल रिपोर्ट , कोई कोलाई इन्फ़ेक्शन नही , टेस्ट को दोबारा किसी और पैथोलोजी से करवाने की सलाह दी ।

30/9/2008- Urine – NAD , कोई इन्फ़ेक्शन नही ।

Advertisements