Monthly Archives: जुलाई 2008

एलेर्जिक राइनिट्स और होम्योपैथी (how to handle cases of hay fever & allergic rhinitis ? )

Hay fever रोग की वह अवस्था है जब मार्च से अगस्त तक पराग कण के वातावरण मे अत्याधिक संख्या मे होने की  वजह से रोगी लगातार जुकाम , छीकॊं , आँख और नाक मे खुजली से परेशान रहता है । कभी कुछ रोगियों मे लगातार जुकाम की वजह से अस्थमा या साँस फ़ूलने की परिस्थति भी  आ सकती है । शहरी क्षत्रों मे बढते प्रदूषण की वजह से एलेर्जिक राइनिट्सस  (allergic rhinitis ) के रुप मे इनके लक्षण  हर  सीजन मे मिल जाते हैं । एक पुराने और जटिल hay fever  और एलेर्जिक राइनिट्सस  (allergic rhinitis )  के रोगी मे प्रेसक्राबिंग का सही तरीका क्या हो ? सिर्फ़ ऊपर से दिखने वाले लक्षण , या मियाज्म दोष या  सभी लक्षणॊं को एक साथ लेकर चलना या सिर्फ़ रोगी मे व्यक्त्तिपूरक लक्षणॊं को खोजना जो खास दिखे या सिर्फ़ रोगी के मानसिक लक्षणॊं के आधार पर दवा का चयन करना जो कि सहगल स्कूल के विशेष तरीकों मे से एक है ।

जून २००८ के homeo  horizon की ई-मैगजीन मे डां सुब्रतो  बैनेर्जी का लेख " Handle Hay Fever with Courage -Practical Approach-Classical Prescribing " पढने योग्य और प्रैक्टिकली उपयोग मे लाने योग्य लेख है । allergic rhinitis के एक्यूट केस और पुराने केस को अलग-२ कैसे किन ग्रुप की औषधियों से deal करें । ऐन्टी ऐलेर्जिक एलोपैथिक दवाओं के लम्बे समय से उपयोग कर रहे रोगी के वास्तविक लक्षण सामने नही दिखते , इन केसों मे होम्योपैथिक दवा का चयन अत्यन्त कठिन हो जाता है  ऐसे रोगियों मे शुरु मे कम उपयोग मे आने वाली organopathic दवाओं का सहारा केस को आसान कर देता है और बाद मे मियाज्म दोष ( syco-psora ) के आधार पर दवा का चयन आसान हो जाता है ।

डा सुब्रतो ने फ़्लो चार्ट के जरिये इन औषधियों के अलग-२ ग्रुप बना के प्रिसक्राइबिंग को आसान बानाने का कार्य किया है । नीचे देखें फ़्लो चार्ट ।  एक पुराने और जटिल रोगी मे निम्म फ़ार्मूला हमेशा उपयोगी रहता है :

MTEK यानि

M : Miasmatic Totality

T : Totality of symptoms

E: Essence ( should include gestures , postures, behaviors etc. )

K: Keynotes ( which include encompass PQRS symptoms refer to aphorism 153 & 209 of Hahnemann Organon )

WEB LINK : Handle Hay Fever with Courage -Practical Approach-Classical Prescribing

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Flow Chart of Acute Hay Fever : Lesser Known Organopathic Medicines

Flow Chart of Acute Hay Fever : Medium Range Organopathic Medicines

प्रोस्ट्रेट के रोग और होम्योपैथी (A Multicentric Open Clinical Trial to evolve a group of Efficacious Homeopathic Medicines in " Benign Prostatic Hyperplasia (BPH) ")

 
साभार: CCRH News Letter
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प्रोस्ट्रेट एक तरह की ग्रंथि है जो ठीक अखरोट जैसी लगती है । पुरषों के -मूत्राशय ( bladder ) के गले के जिस स्थान से मूत्रनली ( ureter) आरम्भ होती है , उस जगह ( गले ) को यह ग्रन्थि घेरे रहती है । जनेन्द्रिय की जड की हड्डी ( symphysis pubis) और रेक्टम ( rectum ) के ऊपर उसका पिछला अंश ( posterior portion ) और रेक्टम के ऊपर उसका पिछला अंश (posterior portion ) स्थित रहता है । प्रोस्ट्रेट ग्रंन्थि से निकलने वाला स्त्राव संगम के समय शुक्र प्रवाह मे सहायता करता है ।

प्रोस्ट्रेट के रोग

अधिकतर ४०-६० वर्ष मे आरम्भ हो सकते है । प्रोस्ट्रेट बढ जाने के कारण रोगी को लगातार कष्ट कर पेशाब  रुक-२ कर  और तकलीफ़ के साथ होता है । प्रोस्ट्रेट के रोग दो वर्ग मे आते हैं बैनाइन (Benign)  और असाध्य (malignant ) । बैनाइन (Benign) और प्रास्टेटाइटिस ( prostatitis ) और बी.पी.एच. ( B.P.H. ) बैनाइन (benign) के अंतर्गत आते हैं और कभी भी खतरनाक रुख नही लेते जबकि एडेनीकारसीनोमा ( adenocarcinoma )  असाध्य (malignant ) वर्ग  मे आते हैं ।

होम्योपैथिक औषधियों के प्रभाव :

काफ़ी लम्बे समय से प्रोस्ट्रेट के उपचार के लिये होम्योपैथिक चिकित्सक sabal serrulta Q पर निर्भ्रर रहते रहे है जिसके परिणाम काफ़ी अच्छे दिखते रहे हैं लेकिन सेन्ट्र्ल काउन्सिल आफ़ होम्योपैथी ने प्रोस्ट्रेट से संबधित महत्वपूर्ण लक्षणॊं को ध्यान रखते हुये रिपरटारिजेशन हेतु लक्षणॊं की सूची और औषधियों की एक सूची रखी है जो CCRH के लखनऊ , नोएडा, सिलीगुडी, भोपाल और तित्रुपति के सेन्ट्रल पर ट्रायल के लिये जारी की गयी है । देखें नीचे चित्र और डाऊनलोड करें pdf

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The prostate is a muscular, walnut-sized gland that surrounds part of the urethra, the tube that transports urine and sperm out of the body. A part of the male reproductive system, the prostate secretes seminal fluid, a milky substance that combines with sperm produced in the testicles to form semen. During sexual climax, muscles in the prostate propel this mixture through the urethra and out through the penis.
Anatomy and Physiology
The prostate is located directly beneath the bladder and in front of the rectum. Because the upper portion of the urethra passes through the prostate, if the gland becomes enlarged it can obstruct the passage of fluid through the urethra. While this is uncomfortable, it generally does not impair a man’s ability to function sexually; however, the discomfort nd embarrassment it causes can interfere with sexual activity.
Diseases of the Prostate
Benign diseases are noncancerous. They can be uncomfortable and inconvenient but are not life-threatening, and often can be treated with drugs or surgery. The two main benign diseases of the prostate are prostatitis and Benign Prostatic Hyperplasia (BPH). The main malignant (cancerous) disease of the prostate is adenocarcinoma of the prostate, or prostate cancer.
Role of Homeopathy
In homeopathy literature various medicines are given for the treatment of prostatic enlargement but no significant work has being done to elicit their efficacy. As such there is need to explore the efficacy of homeopathic medicines otherwise indicated for various diagnostic symptoms of Benign prostatic hyperplasia in the homeopathic literature.
Central Council Of Homeopathy, India has undertaken this project in its  Lucknow, Gudiwada, Bhopal, Noida, triputh & siliguri centres .

Homeopathy Training Programme by Similiacare.com

कम से कम बदलाव की हवा कुछ तो बही 🙂 आयुष पद्दतियों के साथ सबसे बडी दिक्कत यह है कि बहुत कुछ होते हुये भी बाँटने मे उनके चिकित्सक कतराते रहते हैं । मै यहाँ आयुष पद्दतियों से जुडे सभी सिस्टम की बात कह रहा हूँ । कल देख कर अच्छा लगा जब सथ्या ने similiacare.com पर कुछ ट्रेनिगं प्रोग्राम के PPS लिंक दिये जो कम से कम नये छात्रों और उन होम्योपैथिक चिकित्सकों के लिये काफ़ी उपयोगी हैं जो होम्योपैथिक सिद्दातों से काफ़ी दूर चले गये हैं 🙂 । डाऊनलोड करने के लिये नीचे दिये लिंक पर जायें ।

साभार  : http://similiacare.com/2008/07/08/sahya-training-programme.html

Clinical evaluation of Homoeopathic medicines in chronic cervicitis and cervical erosion- A study report

Clinical evaluation of homoeopathic medicines in chronic cervicitis and cervical erosion

S R Sharma, Bindu Sharma , Clinical Research Unit, Shimla.

C Venkataranam, K.S.V Bharat Lakhshmi R V R Prasad, Clinical Research Unit, Tirupati.

Hari Singh, Asha Hari Singh, Praveen Oberai,Sangeeta Duggal, Savita Kattara, Regional Research Institute, New Delhi.

B. K. Singh, Ojit Singh, Clinical Research Unit, Imphal.

S D Pathak, M K Rai, Clinical Research Unit, Varanasi (U.P.).

Source : CCRH News letter 2007

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Objectives: The objectives of the study were to evolve a group of most effective homoeopathic medicines in chronic cervicitis and cervical erosion and to identify their reliable indications, useful potencies, frequency of administration and relationship with other medicines.

Methods: The study was undertaken by Central Council for Research in Homoeopathy at its Units/Institute at Shimla, Imphal, Varanasi, Tirupathi and New Delhi. Cases of Cervicitis and Cervical erosion, presenting with vaginal discharge, low backache, lower abdominal pain/discomfort or dyspaerunia confirmed by P/V & P/S examination were enrolled in the study. Cases suffering from other chronic disease(s) or under other system of treatment were excluded from the study. Homoeopathic medicines were prescribed on the basis of totality of symptoms of each case, in mother tincture (Q) or 6C, 30C, 200C & 1M potency. A total of 3213 cases were followed up for one year. Assessment of improvement was done on predefined parameters.

Results: There was varying degrees of improvement; 261 cases were cured, 1104 cases improved markedly, 982 cases moderately, 713 cases mildly and 153 cases did not improve. Medicines found effective were: Alumina(n=114), Borax(n=67), Calcarea carbonicum(n=200), Caulophyllum(n=170), Hydrastis(n=110), Kreosotum(n=300), Lachesis(n=160), Mercurius solubilis (n=74), Natrum muriaticum(n=97), Pulsatilla(n=429) and Sepia(n=433). A few of the cases, who required repeated cauterization in the past, got cured permanently and required no cauterization after homoeopathic treatment.

Conclusion: Sepia alone emerged as the most frequently indicated medicine for Cervicitis and Cervical erosion. The objective to identify indications of homoeopathic medicines was achieved. But, other objectives, such as relationship between different medicines, could not be achieved.

होम्योपैथी वृहद कोष (Encyclopedia of Homeopathy)

डॉ. एंड्रयू ने  होम्योपैथिक चिकित्सक और रॉयल होम्योपैथिक कॉलेज के संकाय के एक सदस्य के नाते होम्योपैथी के वृहद कोश का पहला संस्करण उतारा है . इस पुस्तक में  एंड्रयू  ने होम्योपैथिक फ़िलोसफ़ी , मैटेरिया मेडिका का व्यापक परिदृश्य प्रस्तुत किया है . डॉ. एंड्रयू की यह पुस्तक होम्योपैथिक चिकित्सक और छात्रों को विशेष  लाभ पहुँचा सकती है

Encyclopedia of Homeopathy को डाऊनलोड करने के लिये यहाँ किल्क करें।