Monthly Archives: जनवरी 2008

होम्योपैथिक तरीके से बनाई गई थाइरोक्सिन की टैडपोल पर प्रक्रिया ( The effect of homeopathically prepared thyroxine on highland frogs: influence of electromagnetic fields )

थायरोड हार्मोन का कार्य material doses मे टैडपोल के मेढंक मे कायाकल्प ( morphogenesis) की प्रक्रिया  को तेज  करना देखा गया है  । आस्ट्रिया के शोधकर्ताओं ने होम्योपैथिक तरीके से बनाई गई थाइरोक्सिन 10−30 ( thyroxine 10−30 ) के घोल मे टैडपोल को रख के देखा कि इससे मेढंक बनने की  कायाकल्प की प्रक्रिया धीमी होती पायी गई । इस शोध का महत्व बहुत अधिक है क्योंकि यह उन लोगों के मुँह मे ताला लगा सकता है जो होम्योपैथी को अवैज्ञानिक और बकवास कहते रहते हैं ।

For many years, a group of researchers in Austria has experimented
with homeopathic doses of THYROXIN (a thyroid hormone).  They have given it
to tadpoles and found that it slows down their morphogenesis into frogs.
This effect makes sense from a homeopathic point of view because this
thyroid hormone in material doses normally speeds up the tadpoles evolution
into frog-dom.
       This research has now been replicated many times, and what is so
interesting is that the researchers can show the differences in photos
between those tadpoles given the homeopathic medicine and those given a
       This study below was replicated in FIVE laboratories!

The effect of homeopathically prepared thyroxine on highland frogs: influence of electromagnetic fields

british homeopathy journal

Source: Science Direct

S. Weber, P.C. Endler1, S.U. Welles1, E. Suanjak-Traidl1, W. Scherer-Pongratz1, M. Frass1, H. Spranger1, G. Peithner2 and H. Lothaller3
1Interuniversity College Graz/Castle of Seggau, Austria
2Peithner Inc., Vienna, Austria
3University of Graz, Austria
Received 13 December 2006;  revised 14 November 2007;  accepted 14 November 2007.  Available online 11 January 2008.


Background: Previous experiments show that amphibian larvae are responsive to homeopathically prepared thyroxine.

Methods: We studied the effect of a highly diluted and agitated thyroxine solution exposed to various electromagnetic fields on metamorphosis in highland Rana temporaria. The devices tested were: microwave oven, mobile phone, airport X-ray, and a red light barcode scanner. Animals were treated either with homeopathically prepared thyroxine (10−30 parts by weight, 10−35 in the water in which the animals were kept), or analogously prepared blank solution, or analogously prepared thyroxine exposed to the electromagnetic field of one of the devices tested. Solutions were administered at 48 h intervals according to a standardized protocol.

Results: Animals treated with the standard test solution thyroxine 10−30 metamorphosed more slowly than the control animals, ie the effect of the homeopathically prepared thyroxine was opposed to the usual physiological effect of molecular thyroxine. The cumulative number of test animals that had reached the four-legged stage at defined points in time was smaller in the group treated with homeopathically prepared thyroxine at most of the points in time. This was found independently by all three research teams involved.

In contrast, this effect did not occur when the thyroxine solution had been exposed to the field of the early model microwave oven, or mobile phone. There was no difference between aqueous or alcoholic solutions were used, and there was, if any, only a small protective effect from aluminum foil. Airport X-ray and red light barcode scanning did not diminish the effect of the homeopathic solution.


रजोनिवृति महिलाओं की समस्याओं में होम्योपैथिक औषधियों के सफ़ल परीक्षण (Treating hot flushes in menopausal women with homeopathic treatment–Results of an observational study )


रजोनिवृति महिलाओं मे उत्पन्न होने वाली वह  शरीर की स्वभाविक प्रक्रिया है जहाँ मासिक धर्म ४५-५० साल की आयु मे पहुँचते-२ कम और बाद मे बन्द  हो जाता है । और इसके दौरान उत्पन्न होती हैं कई प्रतिक्रियायें जैसे चिडचिडापन , बहुत गर्मी लगना , हाथ पैर मे जलन होना,सोते समय शरीर से  पसीना आना , सेक्स से वितृष्णा होना आदि । मेडिकल भाषा मे इसे hot flushes कहा जाता है ।

When a woman reaches her late forties or early fifties, her periods grind to a halt. Menopause marks the move from the reproductive years to a cessation in fertility. This literally means that her supply of eggs, which is determined at birth, has been used up.
For some this change of life comes smoothly and all she notices is that she no longer has her periods. But for others, the change is more rocky and causes much distress with symptoms of hot flushes, night sweats, vaginal dryness and irritation, poor libido, frequent urinary tract infections, poor memory and concentration, fatigue, depression, headaches, weight gain and heart palpitations.
Nearly three-quarters of all menopausal women experience hot flushes which have been described as one of the most distressing symptoms.
Hot flushes (or hot flashes) come unexpectedly. It’s the sudden feeling of intense heat that one feels all over the face and upper body. The skin may turn red and the body starts to sweat. Hot flushes at night disturb a woman’s sleep and can be so severe as to cause the bedding to be soaked in sweat.

आठ देशों के ९९ चिकित्सकों ने औसतन ५५ वर्ष तक की ४३८ महिलाओं पर यह क्लीकल परीक्षण किये । जिन औषधियों को मूलत: प्रयोग किया उनमे  Lachesis mutus, Belladonna, Sepia officinalis, Sulphur और  Sanguinaria canadensis प्रमुख थीं ।


Treating hot flushes in menopausal women with homeopathic treatment–Results of an observational study

british homeopathy journal

Source: Science Direct

MF Bordet , A Colas , P Marijnen , JL Masson and M Trichard
1Boiron, Sainte-Foy-lès-Lyon, France
2Reims, France
3Ecully, France
4Lyon, France
Received 13 December 2006;  revised 19 November 2007;  accepted 19 November 2007.  Available online 11 January 2008.


There is great controversy concerning treatment for menopausal symptoms. We evaluated homeopathic treatments for hot flushes and their effect on quality of life in menopausal women.


Open, multi-national prospective, pragmatic and non-comparative observational study of homeopathic treatments prescribed and their effectiveness, observing their impact on quality of life.


Ninety-nine physicians in 8 countries took part in this study and included 438 patients with an average age of 55.

Homeopathic medicines were prescribed to all patients; 98% of the prescription lines were for homeopathic medicines. Lachesis mutus, Belladonna, Sepia officinalis, Sulphur and Sanguinaria canadensis were the most prescribed. A non-homeopathic treatment and/or food supplement prescribed for 5% of the patients.

This observational study revealed a significant reduction (p<0.001) in the frequency of hot flushes by day and night and a significant reduction in the daily discomfort they caused (mean fall of 3.6 and 3.8 points respectively, on a 10 cm visual analogue scale; p<0.001).

Ninety percent of the women reported disappearance or lessening of their symptoms, these changes mostly taking place within 15 days of starting homeopathic treatment.


The results of this observational study suggest that homeopathic treatment for hot flushes in menopausal women is effective. Further studies including randomized controlled trials should be conducted.

"तारे जमीन पर"- डिस्लेक्सिया पर आधारित एक सच्चाई

सिनेमा और मेरा साथ बडी मुशकिल से ही होता है , नये साल के पहले ही दिन जब घर मे  सबने तय कर लिया  कि ” तारे जमीन पर” देखनी है तो मरता क्या न करता । रात की  क्लीनिक  दस बजे खत्म करने के बाद  सहारागंज के पी.वी.आर. मे रात ११ बजे  सपरिवार धमक ही गये । रात लगभग २ बजे तक चली इस  फ़िल्म के दौरान न तो नींद का एक भी झोंका आया और न ही नजरें इधर-उधर  गई 🙂 । कारण , यह फ़िल्म है ही इतनी अनूठी कि जो भी जिस वर्ग से है उसको सोचने पर मजबूर कर देगी ।
  यह फ़िल्म आठ साल के उस बच्चे ( ईशान ) की है जिस की अपनी दुनिया है । अपने मे खोया ,अपने मे ही मस्त , सारे जहाँ की मुसीबत अपनी जगह लेकिन उसकी दुनिया मे एक अलग तरह की मस्ती का आलम है । वह मछलियों को उडते देख सकता है लेकिन उसके साथ दिक्कत यह है कि वह अंग्रेजी वर्णमाला के  बी और डी मे भेद नही कर पाता । सीधे शब्दों को वह उल्टा बनाता है और जब तीन का पहाडा उसको सुनाने के लिये कहा जाता है तो वह अपनी जादुई दुनिया मे खो जाता है और ग्रहों की टकराहट को याद करके जबाब देता है । स्कूल मे उसका उपहास उसके साथियों और शिक्षकों द्वारा उडाया जाता है  और यहाँ तक घर मे भी  माता-पिता उसको समझ नही पाते और उसकी हरकतों से तंग आकर उसको बोर्डिग स्कूल मे डाल देते हैं । वह उदास सा रहने लगता है , लेकिन उसकी उदासी को उस स्कूल का एक टीचर ( आमिर ) पहचान लेता है , वह स्कूल के प्रिसंपल , टीचर और उसके घर वालों को भी समझाता है कि ईशान डिस्लेक्सिया से पीडित है । डिस्लेक्सिया पढने से संबंधी एक विकार है । इसमे बच्चों को शब्दों को पहचानने , पढने , याद करने और बोलने मे भी परेशानी आती है । वह कुछ अक्षरों को उच्चारित भी कर सकते हैं लेकिन उनकी पढने की रफ़्तार और बच्चॊं की अपेक्षा काफ़ी कम होती है । यह विकार ३-१५ साल के सामान्य जनसंख्या के लगभग ३% बच्चॊं मे पाया जाता है । और देशॊं के बारे मे नही कह सकते लेकिन अपने देश मे वह चाहे माता-पिता हों या स्कूल की शिक्षा -प्रणाली डिस्लेक्सिया से पीडित बच्चॊं की समस्या से मुँह मोडते हुये दिखती है । कुछ हद तक यह भी कह सकते हैं कि शायद आम लोगों को जागरुक करने का काम ही नही हुआ । अधिकतर केस मे बच्चे को मंद बुद्दि कह कर उसके अन्दर छुपी प्रतिभा को नंजरंदाज ही किया जाता तहा है । आमिर को साधुवाद कि इस फ़िल्म के माध्यम से समाज के हर वर्ग मे एक संदेश देने की पहल की । ऐसी फ़िल्में अपने देश मे बहुत कम ही बनती हैं और आमिर हम आप से आगे भी उम्मीद रखेगें कि ऐसे अछूते विषयों पर फ़िल्मे बनाने का काम जारी रखें । डिस्लेक्सिया को समझने के लिये इस वीडियो को ध्यान से देखें :

फ़िल्म छूटने के बाद मेरा ध्यान मेरे परिचित  की १० वर्षिया लडकी की तरफ़ गया जो कि डिस्लेकिस्या से पीडित है लेकिन इधर एक साल से उसमे मैने काफ़ी अच्छे परिवर्तन देखे । वह दमे से मूलत: पीडित है और काफ़ी ऐलोपैथिक इलाज करवाने के बावजूद उसकी समस्या सिर्फ़ कुछ दिनों तक ही आराम मे दिखती रही । उसकी माँ ने लखनऊ  के ही एक वरिष्ठ एलोपैथिक चिकित्सक की मदद ली जो होम्योपैथिक पद्दति का अच्छा ज्ञान रखते हैं और अपनी पद्दति के अलावा होम्योपैथी को जटिल रोगों मे अक्सर कई रोगियों मे देते रहे हैं ।  लेकिन यह भी सच था कि उसकी माँ ने दमे के लिये चिकित्सक से संपर्क किया था , डिस्लेकिस्या के बारे मे तो उसका ज्ञान न के बराबर था । दमे ( asthma ) से होने वाले attacks मे होम्योपैथिक औषधियों के प्रभाव से तो काफ़ी कमी आई लेकिन साथ मे उसकी याददाश्त ,लिखावट और  पढने -लिखने मे एक अच्छा बदलाव भी दिखा । मेरी उत्सुकता कम से कम दवाओं मे तो बिल्कुल भी न थी  क्योंकि हर रोगी होम्यो्पैथिक दृष्टिकोण  से अलग-२ होता है और दवाये भी अलग-२ निकलती हैं । कई सालो से जिस लडकी का पास होना भी मुशिकल था उसमे इतना बदलाव ! सब के लिये  लिये आशचर्य ही था ! लेकिन यह शायद यह किसी चारित्रिक लक्षणॊं ( constitutional symptoms ) पर आधारित चयन की गई औषधि का काम हो सकता था ।
अगले दिन मेरे ध्यान मे आया कि क्यों नही रिपर्टरी मे सर्च कर के देखें कि डिस्लेक्सिया पर होम्योपैथी मे क्या  हो सकता है । आखिरकार सिन्थिसीस रिपर्टरी ( synthesis repertory ) मे इसका पूरा उल्लेख मिला ।

रडार ९.२ के प्रयोगकर्ता  सर्च मे जाकर dyslexia टाइप करें । नीचे दी हुई  खिडकी कुछ इस तरह खुलेगी :


सबसे पहले वाले को  किल्क करें । उसकी आकृति इस तरह से है और एक ही औषधि की तरफ़ इंगित कर रही है ।


दूसरे रूब्रिक को किल्क करें :


ऊपर दिये रुब्रिक के नीचे लक्षणॊं के सात समूह और भी दिये हैं , इन पर भी किल्क करें । यह dyslexia से मिलते जुलते लक्षणॊं के रूब्रिक्स और उनसे संबधित औषधियों को इंगित  करता दिखेगा । जिन होम्योपैथिक चिकित्सकों के पास रडार की सुविधा नही है उनके लिये विस्तार से देखने के लिये नीचे दिये PDF लिंक पर किल्क करके डाऊन्लोड करें । PDF आधारित इस फ़ाइल को देखने के लिये acrobat reader या foxit reader का प्रयोग करें ।



यहाँ कोई दावों और प्रतिदावों जैसी कोई बात नही है , यह सिर्फ़ एक संभावनाओं की ओर इशारा कर रही है , आगे देखना यह काम चिकित्सा क्षेत्र से जुडॆ लोगों का है कि वह होम्योपैथी को होम्योपैथी के तरीकों से ही समझें और प्रयोग मे लाकर देखें , ताकि हम समाज के उस बहुत महत्वपूर्ण ईकाई को नजरान्दाज न कर सकें ।