मेरी डायरी से – 1- फ़ास्फ़ोरस ( phosphorous)

कभी-2 कुछ रोगी हमेशा एक समस्या बन जाते हैं और कभी-2 होम्योपैथिक औषधियों के परिणाम तो उससे भी अधिक आशचर्यचकित करने वाले होते हैं। अब श्रीमान ब्रीजेश को ही लें , पिछले कई सालों से अस्थमा ( bronchial asthma) से पीडित हैं और उम्र भी कुछ अधिक नहीं , मात्र 25 साल । अक्टुबर 2006 मे आप मेरे पास आये और चाहते हैं कि inhaler और bronchodilators से पूर्ण्तया छुट्कारा मिले ; जो वह कई सालों से ले रहे हैं। होम्योपैथिक तरीके से रोगी के लक्ष्णो को लिया गया जो निम्म थे :
Kent ] [Respiration]Difficult:Lying:Amel:
[Kent ] [Respiration]Difficult:Exertion:After:
[Kent ] [Respiration]Difficult:Walking:Agg:
[Complete ] [Generalities]Food and drinks:Sweets:Desires:
[Complete ] [Generalities]Food and drinks:Spices, condiments, piquant, highly seasoned food:Desires:
[Complete ] [Stomach]Heartburn:

रोगी के लक्षणों मे जो विशेष बात थी कि साँस फ़ूलने मे लेटने से आराम मिल रहा था और चलने -फ़िरने मे तकलीफ़ बहुत अधिक बढ जाती थी। इसके अलावा सीने मे जलन , खाने -पीने मे चटपटी चीजों का शौक भी था। एक बात और कि उस मौसम मे जब लखनऊ मे कोई विशेष ठंडक नही होती , वह कुछ अधिक कपडे पहने था।
रोगी जहाँ रह रहा था वह जगह स्वास्थ के लिहाज से कोई विशेष उपयुक्त नही थी, धूप का घर मे अभाव था और घर मे सीलन काफ़ी थी (hydrogenoid constitution ) ।खैर लक्षणो को रिपरटार्जेशन के लिये डाला गया और कम्पलीट रिपर्ट्री और केन्ट रिपर्ट्री की मदद ली गयी। Drug Filters को apply किया और जैसा उम्मीद थी कि Psorinum औषधि के विकल्प मे आयी । तो prescription कुछ इस तरह बना:
29-10-06 = psorinum 200 1*3 { 15 दिन मे एक बार }
nat sulph 6x 4 TDS { रोगी के hydrogenoid constitution को ध्यान रखते हुये दी गयी }

18-11-06= कोई विशेष आराम नही, औषधि बदली गई।
Nux vom 30 TDS
Nat sulph 6x
Blatta Q 10 बूंद तीन बार, आवशय्कता पडने पर { Blatta Q को palliation के लिये दिया गया ।}
22-12-06 = आराम और वह भी जब तक Blatta Q का असर रहे , जाहिर है कि यह सिर्फ़ अभी तक palliation ही था।

इस बार drug filters को apply नही करते हुये सामान्य रिपरटार्जेशन का सहारा लिया गया और दोनो रिपर्ट्री केन्ट और कम्पलीट को एक साथ प्रयोग किया गया , जिसकी आकृति नीचे है:
1
Ars, sulp,puls, phos मे से अब की बार phos देने का मन बनाया , क्योकि इसकी वजह नीचे दी गयी आकृति से स्पष्ट है :
2

25-12-06= Phosphorous 1000 {15 दिन मे एक बार }
Nat sulp 6x 4 TDS
10-1-2007= अब की बार रोगी सन्तुष्ट दिखा, इन 5 दिन के दौरान उसे न तो उसे inhalers का प्रयोग करना पडा और न तो blatta Q को लेना पडा। Wheezing न के बराबर थी और उसकी जगह crepitations ने ले ली थी।
15-1-2007= Phosphorous 1000 1*3
Nat Sulph 6x 4 TDS
22-2-2007 = Phosphorous 1000 1*3
Nat Sulph 6x 4 TDS
16-3-2007 =Phosphorous 1000 1*3
Nat Sulph 6x 4 TDS

Phosphorous 1000 ने जैसा कि अब तक लग रहा है कि फ़िलहाल रोगी को अब तक अस्थमा की समस्या से छुटकारा देने मे उपयुक्त औषधि है। अभी यह रोगी इन औषधियों का नियम से सेवन कर रहा है ।
लेकिन यह रोगी होम्योपैथिक दृष्टिकोण से मेरे लिये कई प्रशन खडे कर गया जिसका जबाब मै ढूँढ रहा हूँ ।
प्रशन 1- होम्योपैथिक मैटेरिया मेडिका मे यह कही भी वर्णित नही है कि फ़ाफ़्फ़ोरस मे साँस फ़ूलने मे लेटने से आराम मिलता है (dyspnoea > lying down )नीचे देखें। हाँ , Generalities मे अवशय लक्षण लेटने से और वह भी दायीं करवट लेटने से आराम दिलाते हैं (> Lying on right side ) और बायीं करवट से तकलीफ़ बढती है।
3
ऊपर आकृति न 2 मे केन्ट रिपर्ट्री इस लक्षण को कवर नही कर रहा है बल्कि कम्पलीट रिपर्ट्री मे यह आराम दिखा रहा है, यह कैसे हुआ। क्या यह clinical verification मे आया है । इसका जबाब मेरे पास नही है। लेकिन यह भी सच है कि रोगी को कम्पलीट रिपर्ट्री के भले ही clinical verification के जरिये से ही सही; रोग मे पूर्णतया आराम मिला है। इस लक्षण को मैने ग्रीस (Greece)के डा जार्ज विथेलीकोस (Dr George Vitholuks) से जबाब जानने के लिये एक हफ़्ते पहले मेल किया था और उनके जबाब की मुझे प्रतीक्षा है । इसके अलावा जो होम्योपैथिक चिकित्सक इस ब्लाग से गुजर रहे हो , वह भी मुझे बताये कि क्या वजह रही कि लक्षण मेटेरिया मेडिका मे न हiने के बावजूद रोगी को आराम दे गया। आपके उत्तर की प्रतीक्षा रहेगी।

9 responses to “मेरी डायरी से – 1- फ़ास्फ़ोरस ( phosphorous)

  1. aapne rogi ka to koi symptom liye hi nahi sir, sirf rog ke lakshno ko hi repertorise kar diye hain,

    phir bhi single medicine ka prayog aapne kyun nahi kiye biochemic medicine and mother tincher ka sahara kyun ?

    kindly rogi ke kuchh rubrics len.. answer mil jayega.

    kindly inquire in your patient —
    Mental Information
    Mental Traumas [write in details if any]
    Death of love own, loosing job, unemployment, money loss, hopelessness, honor wounded, frustration, domination, discord, envy, responsibility, family anxiety, carelessness from family members, divorce, indifferences, love disappointment, after retirement, and any present problem or mental pressure.

    Mental State
    Present condition of – memory, concentration, anger [why and type of anger], consolation [agg or amel ] , maliciousness, remorse, fear [from which and why], weeping [why and which type], any anxiety, envy, discontented [from which], escape nature, sympatric, depressed, fastidious [which kind], postponing nature, company desire or aversion [why], habits, hobbies, religious behavior, crowd and noise [how affects]

  2. @Dr Pravin Goswami

    aapne rogi ka to koi symptom liye hi nahi sir, sirf rog ke lakshno ko hi repertorise kar diye hain,
    डा प्रवीन, मै आप की बात से सहमत हूं कि मैने रोग के morbid symptoms को ही रिकार्ड किया , रोगी के सम्पूर्ण लक्षणों को नही । यह शायद मेरी कमजोरी ही है जो मै अक्सर मानसिक लक्षणों को लेने मे ढीला हो जाता हूँ । वैसे आप का साथ रहेगा तो यह आदत भी पड जायेगी।🙂

    phir bhi single medicine ka prayog aapne kyun nahi kiye biochemic medicine and mother tincher ka sahara kyun ?
    शायद इस बात से मै बहुत से होम्योपैथिक चिकित्सकों से सहमत नही हूं । अगर रोगी तकलीफ़ मे है तो हम क्या विकल्प उसको देगें। शायद यही कारण है कि होम्योपैथी मे लोग रूकने के बजाय भागना अधिक पसन्द करते हैं, इन्सान का शरीर तकलीफ़ अधिक बर्दाशात नही कर सकता , हमे cure के साथ temporary तरीके भी उपलब्ध करने होगें ताकि रोगी टिके , ठीक तो हम कर ही लेगें अगर हमे समय मिलेगा तब न.

  3. THE PHYSICIAN’S HIGH AND ONLY MISSION IS TO RESTORE THE SICK TO HEALTH, TO CURE AS IT IS TERMED. – HAHNEMANN.

    WE SHOULD ALWAYS REMEMBER — AS IT IS TERMED. MEANS BY APPLYING THERE RULE TRULY ….

    MIND IS THE KEY TO THE MAN… ALWAYS REMEMBER.

    PATIENT BHAG JAYE TO KOI FARK NAHI PADTA HAI — AAP APANE SIDHANT SE NA BHAGEN YE JAYADA ZAROORI HAI…..

  4. Sir, the artical on the link u sent was (no) is much more useful for all
    but sir may i aks u to have them in english? sir here in maharashtra we study homoeopathy in full english so if the materials like your artical will be more superior to be used in practice if they r in english.

    i wuld be so glad to read more such articals in future.
    Thank you!

  5. @Dr Shreesh Khandekar
    I always try to maintain a balance on both languages. However It is not possible to translate every blog in eng. However ,there are few updates on my eng blog, http://www.drptandon.blogspot.com

  6. dr prabhat if you think simply on miasmatic way you get the anser . patient had recurent complaints of asthama is sugestive of tuberculer miasm.family history may be tubercular.past history may show either supresion of U.R.T.I. or allergic condition. or tonseletomy by allopathic methods or disease in the past may show patient is of tuberculer miasm.thats why patient devolopes asthama.after repertarisation when we select the remedy consadaring the miasm your patient is tuberculer or you are treatinting dominant miasm tuberculer and not psoric condition so choice of remedy is phosphorus .asthama is not psoric.astama may be sycotic or tuberculer according to type.

  7. @kazi jl
    शुक्रिया, डा काजी। miasm को लेकर आपके विचार तथ्य-पूर्ण लगे; तो क्यों नहीं miasmatic approach को आगे बढाते हुये एक पोस्ट तैयार करें ; चाहे तो अपने ब्लाग के जरिये या फ़िर मुझे पूरी पोस्ट तैयार कर के मेल कर दे, अगले ब्लाग की पोस्ट आपके नाम से ही सही , हाँ, अपनी प्रोफ़ाइल भेजना न भूलें।

  8. i appreciate hard work done by dr. prabhat tandon,but as far approach for tratment i fully agree wid dr pravin goswami.. mind symptoms are most important and we shud follow principles..
    why u r giving nat.sulph in same time wid other potentised drugs as our medicines are prooved singly..nd mother tinctures r also not recomended

  9. पिंगबैक: homeopathy remedies

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