के जी एम यू के मानसिक विभाग के विभागाध्यक्ष डा प्रभात सिठोले पर हमला और बढती हुयी मानसिक समस्यायें

लखनऊ की आबोहवा मे धीरे-2 जहर घुलता जा रहा है। अपहरण , डकैती, चोरी एक आम बात सी हो गयी है।
के जी एम यू के मानसिक विभाग के विभागाध्यक्ष डा प्रभात सिठोले के घर मे बदमाशों ने घुसकर लूटपाट की और डा सिठोले और उनकी पत्नी को मारा पीटा। देखें बदमाशों ने डाक्टर परिवार को बंधक बना लूटा । दो दिन पहले जब मै उनसे मिलने पहुचाँ तो ज्ञात हुआ कि उनकी पत्नी को दिल का दौरा पडा है और वह लारी कार्डिलोजी मे भरती हैं। इस पूरे प्रकरण मे मुझे सब से अधिक दु:ख आई एम ए , पुलिस विभाग और राज्य सरकार के रवैये से हुआ । आई एम ए और चिकित्सकीय महासंघ वैसे तो बात-2 मे छोटी -2 बातों मे बवाल मचाते दिखते हैं लेकिन इस बार पता नही क्यों उन्होने बिल्कुल ही उदासीन रवैया अपनाया। विपत्तियॉ मे ही शायद एक इन्सान को दूसरे की आवश्यकता अधिक अनुभव होती है नही तो हम अपनी जिन्दगी मे मस्त ही रहते हैं। मेरी अपनी किस्मत अच्छी थी कि जब कुछ दिन पहले मेरी क्लीनिक मे बवाल( छात्रनेता बनकर डाक्टर से रुपये की मांग करने वाला गिरफ्तार)हुआ और यहाँ के क्षेत्रीय लोगों की बदौलत समस्या का समाधान भी निकल आया।
प्रो सिठोले जी से मेरा परिचय करीब दो सालों से अधिक रहा । और चिकित्सकों की तरह मै भी अधिकतर मानसिक रोगियों को संबन्धित मानसिक विशेषज्ञों के पास टरका देता था। वर्ष 2004 के आरभिक महीने मे के जी एम यू के मानसिक विभाग से जब “GENERAL PRACTITIONERS TRAINING PROGRAMME IN NEUROPSYCHIATRY” की कक्षायें ज्वाइन करने का निमत्रंण मिला तो समय की माँग को देखते हुये मै हाँ कर बैठा। यह एक वृहद प्रोग्राम था जो कि 3 महीने चला और इसमे 20 सेशन थे जिनमे एक सेशन मे 17 मानसिक रोगों को कवर किया गया । के जी एम यू के मानसिक विभाग के उच्च कोटि के चिकित्सकों के इन सेशन मे लेक्चर हुये । मेरा कौतूहल अन्य पद्दति के चिकित्सकों को बुलाने मे भी अधिक था। “रोज देखने वाले मरीजों मे मानसिक मरीजों की सख्या कितनी होगी?” “काफ़ी” पीछे बेन्च से आवाज आयी। “और आपका रवैया इन मरीजों से कैसा है” टालू “मैने मन ही मन सोचा। “अगर उत्तर प्रदेश को ही ले तो बढते हुये मानसिक मरीजो पर चिकित्सक और रोगी का अनुपात असमान्य दिखता है। और इनमे से अधिकांश रोगी behaviour therapy से ही ठीक हो सकते हैं । M.B.B.S. करने के बाद भी चिकित्सक अपना रुझान दूसरे क्षेत्र मे तो रखते हैं लेकिन मानसिक क्षेत्र को कोई छूना नही चाहता । “फ़ोरम के कन्वेनर प्रो.एस बी तिवारी ने कहा।” और सच ही तो है संक्रमण रोगों से भी बढती तादाद इन मानसिक रोगियों की अब है।
एक होम्योपैथिक चिकित्सक के लिये इस सेशन का महत्व औषधियों मे कतई नही था । होम्योपैथिक मेटैरिया मेडिका मे कई औषधि बहुत से मानसिक लक्षणों से भरी हुयी हैं। जरुरत है उसको सही तरीके से apply करने की । रोग का समुचित ज्ञान और औषधि के लक्षण का रोगी के लक्षणों से समुचित मिलान ही रोग का निदान कर सकता है। हाँ , behaviour therapy को सीखना हर चिकित्सक के लिये नितांत आवश्यक है, तभी वह अपने मरीजों के साथ न्याय कर सकता है। मेरे साथ उन दिनों मेरे सीनियर डा आर्य मर्दन सिह जी थे , वह तो इस सेशन से इतना प्रभावित हुये कि उन्होने PSYCHIATRIC DISORDERS AND HOMEOPATHY पर एक पुस्तक लिख डाली जिसका विमोचन जी एम यू के जिरायिटिक मानसिक विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो.एस बी तिवारी ने किया।
।नीचे महत्वपूर्ण लेक्चरों की लिस्ट है जो होम्योपैथिक चिकित्सक इन सेशन मे हुये लेक्चर से लाभान्वित होना चाहते हैं , वह मुझे बता दें, इनको स्कैन करके मेल के साथ भेज दूगाँ। मेरी तरफ़ से पूरी कोशिश रहेगी कि आप भी इसका लाभ उठा सकें ।
1- Anxiety neurosis प्रो एस सी तिवारी
2- psycho sexual problems प्रो हरजीत सिह
3- Tobacoo & other drug abuse प्रो एस दलाल
4- Alcohol related problems प्रो एस सी तिवारी
5- Emotional and behavioural problems in children & adolescents प्रो प्रभात सिठोले
6- Depression and other affective disorders
7- Stroke डा अतुल अग्रवाल
8- Psychiatric problems of elderly प्रो एस सी तिवारी
9- Psychological aspects of physical illnesses
10- Epilepsy
11- Headache
12- Psychological intervention in psychiatric problems in general practice प्रो एस सी तिवारी
13- Psychoses
14- schizophrenia
15- Persistent delusinal disorder
16- Depression

One response to “के जी एम यू के मानसिक विभाग के विभागाध्यक्ष डा प्रभात सिठोले पर हमला और बढती हुयी मानसिक समस्यायें

  1. इस सरकार के कार्यकाल मे जनता का भगवान ही मालिक है।

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