प्राचीन भारतीय औषधियाँ और उनके होम्योपैथी उपयोग

प्राचीन भारतीय औषधियाँ और उनके होम्योपैथी उपयोग

इधर कुछ वर्षों से होम्योपैथी मे प्राचीन भारतीय औषधियाँ का चलन बढा है। CCRH ने होम्योपैथी तरिको से इनका प्रमाणन किया है और सबसे खास बात यह है कि इनको प्रयोग करने के लिये कोई लक्षणों को मिलाने की आवशयकता नही पडती, सीधे दवा अपने निशाने पर जा लगती है। लेकिन इनका उपयोग नये मर्जों मे कामयाब है पर पुराने एव जटिल रोगों मे लगभग नगण्य ही है। एक होम्योपैथिक चिकित्सक के सामने सबसे कठिन क्षण नये रोगो मे ही होते है जहाँ लक्षणो को लेना संभव नही होता है, वहाँ इनका प्रयोग सार्थक है। जो होम्योपैथिक चिकित्सक इस ब्लाग से गुजर रहे है वह यह पोस्ट और आने वाली कई पोस्ट पर नजर रखे, यह उनकी प्रैकेटिस मे सहायक हो सकती है। अगर हिन्दी मे समझने मे दुशवारी आ रही हो तो अंग्रेजी मे यहाँ देखे।
1- एबोमा एगेस्टा( Abroma Augusta)

सामान्य नाम-उलट कम्बल
अंग्रेजी-Devil’s Cotton
हिन्दी-उलट कम्बल
वनस्पति परिवार-स्टकयूलियसी

विवरण:
यह अधिकांशतः भारत के गर्म प्रदेशों मे पाया जाता है। इसके जड की छाल औषधीय उद्देश्यों के लिये प्रयोग होती है। स्वदेशी पद्दति मे यह आर्त्वजनक(emmenagogue) के रुप मे लोकप्रिय है। यह कृष्टार्त्व के रक्त्सकुलता एव तत्रिका प्रकार(dysmenorrhoea) मे एक लाभदायक औषधि है। मधुमेह (diabetes mellitus & inspidus) मे भी इसका प्रयोग सार्थक है।

होम्योपैथिक उपयोग-
कलकत्ता के डा0 डी0 एन0 रे द्वारा 1919 मे तथा नई दिल्ली के डा0 जुगल किशोर द्वारा 1972 मे आशिक प्रमाणन किये थे। बाद मे C.C.R.H.( सेन्र्टरल काउनसिल आफ़ रिसर्च इन होम्योपैथी) द्वारा भी इसका प्रमाणन किया जा चुका है तथा कृष्टार्तव(dysmenorrhoea ) एव शवेतप्रदर ( leucorrhoea)के लक्षणो के लिये लाभदायक है। सत्यापन परीक्षणो के दौरान भी इसकी पुषिट हो चुकी है।

मधुमेह(diabetes)-
अत्याधिक मूत्र उग्रता-रात मे तथा अत्याधिक घनत्व के साथ्। शुष्क मुख और प्यास अधिक्। रोगी को अनिद्रा और विषाद की शिकायत रहती है तथा रोगी को किसी प्रकार का मानसिक अथवा शारिरिक परिश्रम करने की इच्छा नही होती है। रोगी मानसिक रुप से भुलक्कड और चिडचिडा हो।

कृष्टार्तव (dysmenorrhoea )-
पेट के नीचे हिस्से मे शूलकारी दर्द्। अनियमित मासिक धर्म्। गहरा एव थक्केदार रक्त्।

शवसनी-शोध(bronchitis)-
खासने पर छाती और आसपास मे दर्द्। तेजी से साँस का चलना एव उजला बलगम्।

पोटेन्सी- Q,6
आगे जारी…

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