Monthly Archives: सितम्बर 2006

प्राचीन भारतीय औषधियाँ और उनके होम्योपैथी उपयोग-2

ईगल फ़ोलिया(AEGLE FOLIA)

AEG;LE FOLIA

सामान्य नाम-बेलपत्र
अंग्रेजी-Bengal quince
हिन्दी -बेल
वनस्पति परिवार- रूटेसी

विवरण:
यह सिर्फ़ भारत मे ही पाया जाता है और हिमालय के आसपास कम ऊँचाई के जंगलो मे बहुतायत मे पाया जाता है। इसका धार्मिक महत्व भी है।
इस पेड का फ़ल मुख्यता दस्त और पेचिश का उपचार करने मे प्रयोग होता है। चिकित्सा प्रयोजनों के लिये अधिकाशत: आधा पका फ़ल प्रयोग किया जाता है। इस पेड के फ़ल से ईगल मार्मिलोस और पतियों से ईगल फ़ोलिया तैयार किया जाता है।

होम्योपैथिक उपयोग:
ईगल मार्मिलोस की तरह यह औषधि भी पेचिश और बवासीर मे प्रभावकारी पायी गई है।

पेचिश(Amoebic dysentry):
रक्त एव बलगम मिश्रित पतले मल के साथ शूलकारी दर्द्। भोजन ग्रहण करते ही मलत्याग की इच्छा शुरु हो जाती है और मलत्याग करने से आराम मिल जाता है( Colitis)

बवासीर (Piles):
खुजलीयुक्त, दर्दनाक एव फ़ुंसीनुमा। कब्ज, सख्त एव अल्प मल्।

शवेतप्रदर(Leucorrhoea):
जलन के साथ सफ़ेद स्त्राव जो ऐडी तक पहुँच जाता है। सुधार- लेटने से

माइग्रेन ( Migraine)
पित्तीय वमन के साथ कनपटी मे फ़डकन की तरह का दर्द्। इअसके बाद कमजोरी का अनुभव्।

पोटेन्सी- 6, Q

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प्राचीन भारतीय औषधियाँ और उनके होम्योपैथी उपयोग

प्राचीन भारतीय औषधियाँ और उनके होम्योपैथी उपयोग

इधर कुछ वर्षों से होम्योपैथी मे प्राचीन भारतीय औषधियाँ का चलन बढा है। CCRH ने होम्योपैथी तरिको से इनका प्रमाणन किया है और सबसे खास बात यह है कि इनको प्रयोग करने के लिये कोई लक्षणों को मिलाने की आवशयकता नही पडती, सीधे दवा अपने निशाने पर जा लगती है। लेकिन इनका उपयोग नये मर्जों मे कामयाब है पर पुराने एव जटिल रोगों मे लगभग नगण्य ही है। एक होम्योपैथिक चिकित्सक के सामने सबसे कठिन क्षण नये रोगो मे ही होते है जहाँ लक्षणो को लेना संभव नही होता है, वहाँ इनका प्रयोग सार्थक है। जो होम्योपैथिक चिकित्सक इस ब्लाग से गुजर रहे है वह यह पोस्ट और आने वाली कई पोस्ट पर नजर रखे, यह उनकी प्रैकेटिस मे सहायक हो सकती है। अगर हिन्दी मे समझने मे दुशवारी आ रही हो तो अंग्रेजी मे यहाँ देखे।
1- एबोमा एगेस्टा( Abroma Augusta)

सामान्य नाम-उलट कम्बल
अंग्रेजी-Devil’s Cotton
हिन्दी-उलट कम्बल
वनस्पति परिवार-स्टकयूलियसी

विवरण:
यह अधिकांशतः भारत के गर्म प्रदेशों मे पाया जाता है। इसके जड की छाल औषधीय उद्देश्यों के लिये प्रयोग होती है। स्वदेशी पद्दति मे यह आर्त्वजनक(emmenagogue) के रुप मे लोकप्रिय है। यह कृष्टार्त्व के रक्त्सकुलता एव तत्रिका प्रकार(dysmenorrhoea) मे एक लाभदायक औषधि है। मधुमेह (diabetes mellitus & inspidus) मे भी इसका प्रयोग सार्थक है।

होम्योपैथिक उपयोग-
कलकत्ता के डा0 डी0 एन0 रे द्वारा 1919 मे तथा नई दिल्ली के डा0 जुगल किशोर द्वारा 1972 मे आशिक प्रमाणन किये थे। बाद मे C.C.R.H.( सेन्र्टरल काउनसिल आफ़ रिसर्च इन होम्योपैथी) द्वारा भी इसका प्रमाणन किया जा चुका है तथा कृष्टार्तव(dysmenorrhoea ) एव शवेतप्रदर ( leucorrhoea)के लक्षणो के लिये लाभदायक है। सत्यापन परीक्षणो के दौरान भी इसकी पुषिट हो चुकी है।

मधुमेह(diabetes)-
अत्याधिक मूत्र उग्रता-रात मे तथा अत्याधिक घनत्व के साथ्। शुष्क मुख और प्यास अधिक्। रोगी को अनिद्रा और विषाद की शिकायत रहती है तथा रोगी को किसी प्रकार का मानसिक अथवा शारिरिक परिश्रम करने की इच्छा नही होती है। रोगी मानसिक रुप से भुलक्कड और चिडचिडा हो।

कृष्टार्तव (dysmenorrhoea )-
पेट के नीचे हिस्से मे शूलकारी दर्द्। अनियमित मासिक धर्म्। गहरा एव थक्केदार रक्त्।

शवसनी-शोध(bronchitis)-
खासने पर छाती और आसपास मे दर्द्। तेजी से साँस का चलना एव उजला बलगम्।

पोटेन्सी- Q,6
आगे जारी…

वन्दे मातरम ।

वन्दे मातरम्

सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्

शस्य श्यामलां मातरम् ।

शुभ्र ज्योत्स्न पुलकित यामिनीम

फुल्ल कुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्,

सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम् ।

सुखदां वरदां मातरम् ॥ वन्दे मातरम्…

सप्त कोटि कन्ठ कलकल निनाद कराले

निसप्त कोटि भुजैब्रुत खरकरवाले

के बोले मा तुमी अबले

बहुबल धारिणीं नमामि तारिणीम्

रिपुदलवारिणीं मातरम् ॥ वन्दे मातरम्…

तुमि विद्या तुमि धर्मं, तुमि ह्रदि तुमि मर्मं

त्वं हि प्राणाः शरीरे

बाहुते तुमि मा शक्ति,

ह्रदये तुमि मा भक्ति,

तोमारे प्रतिमा गडि मंदिरे मंदिरे ॥ वन्दे मातरम्…

त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी

कमला कमलदल विहारिणी

वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम्

नमामि कमलां अमलां अतुलाम्

सुजलां सुफलां मातरम् ॥ वन्दे मातरम्…

श्यामलां सरलां सुस्मितां भुषिताम्

धरणीं भरणीं मातरम् ॥ वन्दे मातरम्

ब्लाग स्पाट पर कुछ पोस्ट बडी मेहनत से तैयार की थी, लेकिन अब मुझे लग रहा है कि मेरा साथ ब्लाग स्पाट से अधिक दिन तक चलने वाला नही है, रोज ही अलग -2 तरह की मुसीबत आती रहती है, इससे पहले कि कुछ अधिक बिगडे अपनी पोस्ट वहाँ से खिसका लो, कल से इसकी शुरूआत की है , एक आध दिन मे महत्वपूर्ण पोस्ट वर्डप्रेस पर ले आऊगाँ नहीं तो शुएब की तरह मै भी हाथ मलते रह जाऊगाँ।

होम्योपैथी एलोपैथी की तर्ज पर

इधर कुछ सालो से होम्योपैथी मे एलोपैथी की तर्ज पर रोग के नाम पर औषिधयों को दावा करने की होड मची है। होम्योपैथी के कई फ़ोरम मे कुछ चि्कित्सक , खासकर जोय डी सिल्वा-श्री लंका के Nat Phos 6x के संबध में झूठे दावे या फ़िर बालों को उगाने के संबध मेArnica की बकवास रिसर्च होम्योपैथी के सिदातों की धज्जी उडाते हुये दिखते है। यह बात अलग है कि अब अधिकांश फ़ोरम पर इन बाक्सोपैथ पर पाबंदी लग चुकी है। होम्योपैथी एक थोडी सी मुशिकल सांइस है, रोग की डाइगनोसिस के बाद एक चिकित्सक को औषिधयों के लक्ष्णों को भी रोगी के लक्षणों से मिलाना पडता है, सही सिमलिनम को ढूँढने के लिये एक अनुभवी चिकित्सक को आर्गेनान, होम्योपैथी फ़िलोसफ़ी और रिपरटाइजेशन का ज्ञान रखना पडता है। कौन इतनी मेहनत करे, कौन रिपरटाइजेशन करने मे अपना सर खपाये, निशा ने होम्योपैथी के एक फ़ोरम मे एक छोटा सा प्ले प्रस्तुत किया है। पिछेले साल यह मैने उस फ़ोरम मे दे्खा था और डाक्यूमेन्टस मे सजो कर रखा था। आप भी उसका लुत्फ़ उठायिये।

स्थान – पताल लोक मे जहाँ हैनिमैन, बोनिगहसन और केन्ट आपस मे विचार विमर्श कर रहे हैं।

Homeopathy prescribed Allopathically – This for That.
Let all Homeopath prescriber’s prescribe all Homeo medicines on the policies of Allopathy. That is “THIS FOR THAT” and so CON’VENIENT “THAT FOR THIS” . Why bother for Repertorisation. Why bother for similimum and provings. Why bother for the root cause and why bother for constitution and why bother understanding the Organon (Bible of homeopathy).
A small play to temporary’ly break the monotonic postings of this forum :
AFTER Kent (USA) and Boenninghausen (Germany) invented the repertories and Hahnemann (Germany) invented the Homeopathic world.
STAGE : One. PART : One. LIGHTS. aaaACTION.
Hahnemann, Kent, Boenninghausen start squirming together, in their caskets, six feet under the compacted earth.
Hahnemann : Hey, Why did I not think of this before ?
Kent : Think of what ? Arnica for Hair growth ? Yeah Why ?
Boenninghausen : (seriously) or for deep refreshing Sleep. ? Yeah Why ?
Hahnemann : sob … sob … my 50 years of invention gone down the drain.
Boenninghausen : Would you re-pharse that to “Gone with the Wind”. Please be more civil.
Kent : Atleast, you could have tried giving Arnica, as a placiebo for Hair Growth.
Boenninghausen : (accusingly) don’t forget its use as a palliative for the refreshingly deep beauty sleep.
Hahnemann : I guess, I over-slept over Arnica. How could I miss out on the Arnica provings. Must be my acidity & my obesity.
Boenninghausen : (sneeringly) Hey, that’s OBESITY or FAT, I see on your middle.
Kent : You must take NatriumPhos-6X and you will loose (not lose) 1 kilo every week.
Boenninghausen : (suspiciously) Hey, isn’t that the one you discovered on 25th december 2004.
Kent : Yeah….. Yeah. I gifted my discovery to this world, on christmas day.
Boenninghausen : (sighhh) Great ..isn’t it. Just like Santa Claus, the ho-ho-ho-go man who always brings us gifts on christmas day.
Boenninghausen : (with a far away look – nostalgically starts singing)
— Jingle bell … Jingle Bell …. Jingle all the way …
—– Santa Claus is coming along, riding on a sledge.
—— HEYyy … Jingle Bell …… Jingle Bell…… Jingle all the way ……
Hahnemann : Will it work on my hippopotamus. The doorway is getting too narrow for him.
Kent : Let’s all take Arnica-6 and go for sleep.
Boenninghausen : (urgently) Yes. Yes ….. But let’s first fizzle and succucess it … hmmm … how many times was it. Hold it … I’ll take Arnica-30 and not Arnica-6. I’ll bang the water bottle against my casket.
Hahnemann : Squirm … Squirm … There isn’t enough room in this casket.
Kent : Ohh nooo … my bottle did’nt fizzle.
Boenninghausen : (squintingly) … Wow … I just increased the dilution by 0.007 times.
Kent : Hey how un-hahnemann’ien ……. that’s a discovery. What a dilution. What a BOND. What a secret service to humanity.
Boenninghausen : (hissess) Yeeeesssss. This is “my discovery” and “I gift” it to this world.
Kent : Which world … below this earth world or above this earth world ?
Hahnemann : Hey …. Hey … What about me ? I proved the Arnica.
Kent : Who are you ?
Boenninghausen : (staringly) forget your dilution. Homeopathy is re-written, Herewith.
Hahnemann : (succumbs) OoohKkay. Can I borrow some Arnica from your bottle. I have balded from the top.
Kent : That’s good. Now you are talking our lingo.
Boenninghausen : (obsessingly) Hope “my discovery” is written in Gold letters on a Platinum plate.
Kent : DONE ……. let’s all say “AMEN”
(special appearance) HERING : AMEN
play written, composed and directed by NISHA-INDIA.

OBSCESSIVE COMPULSIVE NEUROSIS (झक्की स्वभाव वाले)

OBSCESSIVE COMPULSIVE NEUROSIS

Definition and Classification

OCD falls under the broad category of anxiety disorders, which encompasses conditions such as panic disorder, social phobia, and posttraumatic stress disorder (DSM-IV).
The patients have recurrent flow of thoughts, they know thoughts are absurd and try to resist but they fail. The condition is charcterised by :
a)Anxious preoccupation with some obscessive idea. The patient may ask himself over and over again some religious or metaphysical questions, e.g. “what was the begining of everything?” Some are disturbed by the reiteration of certain words or phrases in their mind.
(b) Morbid compulsions: fears associated with the obscessive ideas e.g, a fear of dirt and contamination may necessiate constant washing and scrubbing of the skin to ensure cleanliness. Patients may feel compelled to touch objects,to do things in a certain order,to steal something intrinisically worthless,(kleptomania),to commit homicidal acts or sexual assaults, to take alcohol (dipsomania) or drugs..

Some common obsessions :

* Fear of dirt or germs
* Disgust with bodily waste or fluids
* Concern with order, symmetry (balance) and exactness
* Worry that a task has been done poorly, even when the person knows this is not true
* Fear of thinking evil or sinful thoughts
* Thinking about certain sounds, images, words or numbers all the time
* Need for constant reassurance
* Fear of harming a family member or friend
Compulsions are repetitive behaviors (rituals) or mental acts that reduce the anxiety that accompanies an obsession. The person feels driven to perform them in response to their obsession, or according to rules that must be rigidly applied.
Some common compulsions include:
* Cleaning and grooming, such as washing hands, showering or brushing teeth over and over again
* Checking drawers, door locks and appliances to be sure they are shut, locked or turned off
* Repeating, such as going in and out of a door, sitting down and getting up from a chair, or touching certain objects several times
* Ordering and arranging items in certain ways
* Counting over and over to a certain number
* Saving newspapers, mail or containers when they are no longer needed

These obsessions or compulsions cause marked distress, are time consuming (>1 hour a day), or significantly interfere with the person’s normal routine, occupation (or academic) functioning, or usual social activities or relationships.

Aetiology:-

There is no single, proven cause of OCD.

1-There are no of factors responsible for OCD, like genectics,personality development, and how a person reacts to the environment around them.

2 -It affects men and women equally and knows no geographic, ethnic, or economic boundaries.

3-Typically, OCD begins in adolescence to young adult life, but at least a third of cases of adult OCD start in childhood.But they are rarely to be taken seriously then.

4- Interestingly, about 20-30% of OCD patients report a past history of tics.

Treatments

OCD was once thought to be untreatable, but today’s medicine can help most individuals achieve meaningful long-term symptom relief. Some individuals have even reported being cured of OCD. Individuals whose symptoms persist, make no sense, cause much distress, or interfere with functioning, need to seek clinical help. Once the diagnosis is made, appropriate treatment can be prescribed.

Here I am dealing with homeopathic treatment It is important to remember that in treating OCD, as in any condition, not to overly focus on the common symptoms of the disorder, but to focus on what is individuating in the case,” . “This means that the homeopath must be aware of the common symptoms of OCD.” He should not to be discouraged with the pace of healing. The cure is often slow in OCD and the possibility of a cure may take as long as a year.

The main rubrics under obscession are taken from ‘complete repertory’. The grading of symptoms is given according to the most effective use in such condition.

Busy:Tying shoes, fumbling in pockets, picking threads etc,:
Total Drugs :1

2 Kali-bi :Kali bichromicum

Compulsive disorders:
Total Drugs :22

3 Nux-v :Nux vomica
2 Ars :Arsenicum album
1 Anh :Anhalonium lewinii
1 Arg-n :Argentum nitircum
1 Calc :Calcarea carbonica Hahnemanii
1 Carc :Carcinosin Burnett
1 Caust :Causticum Hahnemanii
1 Con :Conium maculatum
1 Cupr :Cuprum metallicum
1 Foll :Folliculinum
1 Iod :Iodium
1 Kali-c :Kali carbonicum
1 Lyss :Lyssinum; Hydrophobinum
1 Manc :Mancinella venenata
1 Merc :Mercurius solubilis hahnemanni
1 Nat-m :Natrum muriaticum
1 Pin-s : Pinus sylvestris; Pine (Bach flower)
1 Rat :Ratanhia peruviana
1 Rhus-t :Rhus toxicodendron
1 Sulph :Sulphur
1 Syph :Syphilinum
1 Tub :Tuberculinum bovinum kent

Counting:Continually:
Total Drugs :6

1 Arg-n :Argentum nitircum
1 Cand-a :Candida albicans
1 Hyos :Hyoscyamus niger
1 Phys : Physostigma venenosa
1 Sil :Silicea; Silica terra
1 Verat :Veratrum album

Counting:Pins:
Total Drugs :1

1 Sulph :Sulphur

Counting:Continually:Things in the room:
Total Drugs :1

1 Phys : Physostigma venenosa

Fills pockets with anything:
Total Drugs :1

1 Stram :Stramonium

Gestures, makes:Actions, repeated:
Total Drugs :1

1 Chen-a :Chenopodium anthelminticus

New:Do anything, cannot:
Total Drugs :1

1 Agar :Agaricus muscarius; Amanita muscaria

Break things, desire to:Pins:
Total Drugs :1

3 Bell :Belladonna

Repeats same things:
Total Drugs :5

1 Chen-a :Chenopodium anthelminticus
1 Germ :Germanium metallicum
1 Lach :Lachesis
1 Plat : Platinum metallicum
1 Zinc :Zincum metallicum

Rest:Cannot, when things are not in proper place:
Total Drugs :5

2 Ars :Arsenicum album
1 Anac :Anacardiun orientale
1 Carc :Carcinosin Burnett
1 Sep :Sepia succus
1 Sulph :Sulphur

Washing:Cleanness, mania for
Total Drugs :4
1 Ars :Arsenicum album
1 Sep :Sepia succus
1 Sil :Silicea; Silica terra
1 Sulph :Sulphur

Religious affections:Mania:Praying all the time:
Total Drugs :1
2 Aur :Aurum metallicum

Washing:Always:Underwear, her
Total Drugs :1

1 Syph :Syphilinum

Washing:Always:Hands, her:
Total Drugs :14

2 Lac-c :Lac caninum
2 Med :Medorrhinum
2 Nat-m :Natrum muriaticum
2 Sulph :Sulphur
1 Ars :Arsenicum album
1 Coca :Coca
1 Cur :Curare woorari
1 Merc :Mercurius solubilis hahnemanni
1 Plat : Platinum metallicum
1 Psor : Psorinum
1 Sep :Sepia succus
1 Sil :Silicea; Silica terra
1 Syph :Syphilinum
1 Thuj :Thuja occidentalis

Washing:Always:Face, her:
Total Drugs :1

1 Puls : Pulsatilla nigricans; Anemone pratensis

Washing:Bathing, mania for:
Total Drugs :1

1 Zea-i :Zea italica

Touch things, impelled to:
Total Drugs :10

2 Merc :Mercurius solubilis hahnemanni
2 Thuj :Thuja occidentalis
1 Bell :Belladonna
1 Canth :Cantharis vesicatoria; Meloe vesicatorius
1 Carc :Carcinosin Burnett
1 Cina :Cina Maritima; Artemisia maritima
1 Hyos :Hyoscyamus niger
1 Lycps :Lycopus virginicus
1 Sac-alb :Saccharum officinale
1 Sulph :Sulphur

Touch things, impelled to:Children, in:
Total Drugs :2

2 Cina :Cina Maritima; Artemisia maritima
1 Carc :Carcinosin Burnett

Thoughts (see fancies, ideas):Persistent:Hedgehogs,
(small spiny animal)
1 Choc

Thoughts Persistent:Homicide:
1 Calc
1 Iod
1 Op
1 Phos
1 Stram

Thoughts Repetition, of:
1 Lam
1 Mag mur
1 Stram

Talk, talking, talks :Sufferings, troubles, constantly of his
2-MP
2NV
1 Arg n
1 Asaf
1 Zinc
1Coff-t
1Euph
1 Germ
1 Kreo
1 Lach
1 Lap-c-b
1 Plat

dr prabhat tandon

होम्योपैथी -जानिये और समझिये

एक ऐसा वीडियो जो होम्योपैथी के सिदातों और कार्य-प्रणाली को समझने मे आपकी उत्सुकता को मदद करेगा।