होम्योपैथी-नई सोच/नई दिशायें

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कल्ब्रेथ की मैटेरिया मेडिका और फ़ार्मोकोलोजी (CULBRETH’S MATERIA MEDICA and PHARMACOLOGY)

June 1, 2008 · No Comments

 

साभार : डां मुख्तार अहमद

PDF आधारित इस e-book को डाउनलोड करने के लिये नीचे दिये लिंक पर जायें :

Part 1 :  Abies abies to Arctostaphylos (36 illustrations)
Part 2 :  Arctosraphylos (cont.) to Cannabis (33 illustrations)
Part 3 :  Capsicum to Citrus aurantium, var. sinensis (40 illustrations)
Part 4 Citrus aurantium, var. sinensis (cont.) to Ecballium elaterium (33 illustrations)
Part 5 Echinacea to Gaultheria (30 illustrations)
Part 6 :  Gaultheria (cont.) to Jateorhiza calumba (39 illustrations)
Part 7 Juglans to Nectandra (39 illustrations)
Part 8 Nepeta to Polygala senega (27 illustrations)
Part 9 Polygala senega (cont.) to Ricinus (35 illustrations)
Part 10 : Ricinus (cont.) to Styrax benzoin (41 illustrations)
Part 11 : Styrax benzoin (cont.) to Zingiber (35 illustrations)

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cold , cough & flu - an interesting flow chart

April 12, 2008 · 5 Comments

साभार : Isadore और आइरिश ग्रुप आफ़ होम्योपैथ

होम्योपैथिक थेरापियुटिक्स मे रोगों से सम्बन्धित औषधियों को उनके लक्षण के अनुसार याद रखना इतना आसान नही है । किसी भी रोग से सम्बन्धित औषधि अपने किसी खास लक्षण के अनुसार ही चुनी जाती है । फ़्लो चार्ट न सिर्फ़ समय की बचत करते हैं बल्कि व्यवाहिरक प्रयोग मे आ जाने पर अच्छी तरह से याद भी हो जाते हैं । आइरिश ग्रुप आफ़ होम्योपैथ के एक सदस्य एसाडोर ने cold, cough और flU से संबन्धित इस चार्ट को  अपलोड किया है । पी.डी.एफ़. (pdf ) आधारित इस फ़्लो चार्ट को   डाऊनलोड करने के लिये यहाँ चटका लगायें ।

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शिशुओं में दस्त और होम्योपैथी (Infantile Diarrhoea & homeopathy )

April 4, 2008 · 9 Comments

शिशुओं मे दस्तों का प्रकोप और उनसे होने वाली मृत्यु दर कई देशों की मजबूरी सा बन चुका है । W.H.O. की रिपोर्ट के अनुसर जहाँ १९७९ तक सालाना ४.५ मिलयन मृत्य सिर्फ़ शिशुओं मे दस्तों के कारण होती थी वहाँ अब यह घट कर लगभग १.६ मिलयन तक रह गयी हैं । अभी भी यह अनुपात काफ़ी अधिक हैं । होम्योपैथी औषधियों का प्रभाव इन दस्तॊं मे काफ़ी प्रभावी देखा गया है लेकिन व्यापक प्रचार-प्रसार के अभाव मे अभी भी होम्योपैथी जन साधारण से कोसों दूर है ।

दस्त ( Diarrhea ) क्या है ?

Diarrhea एक लैटिन शब्द है जिसका शब्दिक अर्थ है , ” Milk of the Anus ” ग्रीक शब्दिक अर्थ के अनुसार , ” Flow like a stream ” | ढीले औए पतले मल का बार-२ त्यागना , दस्त कहलाता है ।

कारण ( Aetiology)

  • संक्रमण : ( वायरस, बैक्टिया या परजीवी द्वारा )
  • किसी खाध पदार्थ के प्रति अधिक संवेदन्शीलता
  • किसी औषधि की प्रतिक्रिया स्वरूप

यदि दस्त का समुचित इलाज न किया जाये तो निर्जलीकरण ( शरीर मे पानी की कमी आ जाना ) हो सकती है । शरीर मे जल और अन्य द्र्व्यों की कमी के कारण मृत्यु भी हो सकती है ।

निर्जलीकरण की पहचान और लक्षण:

image

दस्त से बचाव के उपाय :

image

  • मल त्याग के बाद बच्चों मे सबुन से हाथ धोने की आदत डालें ।
  • खाने से पहले हथ अवशय साफ़ करें।
  • फ़ल और सब्जियाँ धो के खायें ।
  • खाध पदर्थों को ढक के रखें ।

क्या करें :

  • शिशु मे पानी की कमी को पूरा करें ।
  • शिशुओं को W.H.O. ओ.आर.एस. लगातार देते रहें ।
  • स्तनपान जारी रखें ।
  • शिशु का खाना बन्द न करें , बल्कि उसे नरम खाध पदार्थ जैसे केला , चावल , उबले आलू आदि देते रहें ।

याद रखें :

  • दस्त के सभी रोगियों का निर्जलीकरण के लिये वर्गीकरण करें । जहाँ गम्भीर निर्लजीकरण हो उसे क्लीनिक मे I.V. fluid से manage करें या अस्पताल रेफ़र करें ।
  • यदि मल मे खून आ रहा हो तो उसे पेचिश के लिये वर्गीकृत करें और औषधि के चुनाव के लिये प्लान दो को देखें ।

क्या न करें :

  • शिशु को सिर्फ़ ग्लूकोज या अकेला चीनी का घोल न दें । सिर्फ़ ग्लूकोज आधारित घोल शिशु के पेट में fermentation पैदा करते हैं जिससे बैक्टर्यिल संक्रमण की संभावनायें बढ जाती हैं ।
  • ऐसे तरल पदार्थ न दें जिसमें कैफ़ीन हो जैसे कोला या काँफ़ी ।
  • दूध या दूध से बनी वस्तुओं न दें ।

घर मे तैयार नमक-चीनी का घोल या W.H.O. ORS  में किसको चुनें :

घर मे बनाये गये नमक-चीनी के घोल मे सबसे बडी दिक्कत सही अनुपात का मिश्रण न हो पाना है जिससे या तो नमक की अधिकता हो जाती है या फ़िर चीनी का अनुपात बढ जाता है जो दोनॊ ही हालातों मे शिशु के लिये  हानिकारक सिद्द होती है । लेकिन फ़िर भी अगर O.R.S. उपलब्ध नही है तो यह तरीका कारगर है ।

बनाने की विधि :

image

एक लीटर अथवा ५ ऊबले और ठंडे किये पानी मे १ छॊटा चम्मच नमक एवं ८ छॊटॆ चम्मच चीनी डालकर अच्छी तरह घोल ले और इस मिश्रण को २४ घंटॆ के अन्दर ही प्रयोग करें । बाकी बचे मिश्रण को फ़ेंक दें ।

होम्योपैथिक औषधियाँ :

शिशुओं मे आम प्रयोग होने वाकी होम्योपैथिक औषधियों की यह एक संक्षिप्त जानकारी है । [ नोट : स्वयं चिकित्सा करने की गलती न करें , आप का चिकित्सक ही आपको सही सलाह दे सकता है । ]

 1. प्लान “A”

2. प्लान “B “:

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होम्योपैथिक मैटेरिया मेडिका मे औषधियों के मध्य तुलनात्मक अधयन्न ( Comparative study of Homeopathic medicines in Materia Medica )

February 27, 2008 · No Comments

होम्योपैथिक मैटॆरिया मेडिका मे औषधि के अधयन्न करते समय लक्षणॊं को याद करना और बाद मे अन्य औषधियों से तुलना करते समय लक्षणॊं के सम्बन्ध समझना दिलचस्प है । मैटेरिया मेडिका मे हर लक्षण महत्वपूर्ण नही होते ; सामान्य से दिखने वाले लक्षण की अपेक्षा ऐसे लक्षण जो दुर्लभ हों और औषधि के स्वरुप को सामने लाते हों वह अधिक महत्वपूर्ण होते हैं । जैसे कोनियम के एक लक्षण को लें - चक्कर आना । कोनियम का चक्कर सिर घुमाने य इधर-उधर देखने से या बिस्तर पर करवट बदलने से बढता है ; यह कोई फ़र्क नही पडता कि यह चक्कर किन परस्थितियों मे आ रहा है , वह चाहे cervical spondylitis से जुडी हो या Meniere’s disease या hypertension से ।

चक्कर से संबधित अन्य औषधियों के मध्य एक रोचक तुलनात्मक पहलू देखें ।

चक्कर आये , सिर घुमाने से - conium, cal-carb, kali carb

चक्कर आये , सिर हिलाने से :- bryo, cal carb, conium

चक्कर आये , ऊपर देखने से :- pulsatilla, silicea

चक्कर आये , नीचे देखने से :- phos, spigellia

चक्कर आये , फ़ूलों की गन्ध से -Nux vom , phos

चक्कर आये , रात को जागने से या पूरी नींद न होने से : Cocculus, Nux Vom

चक्कर आये , जरा सी आवाज से :- Theridion

चक्कर आये ,अध्ययन के समय :- Nat Mur

चक्कर आये , खाना खाने के बाद :- Gratiola, nux vom, pulsatilla

चक्कर आये ,जैसे बिस्तर उलट गया हो :- conium

चक्कर आये ,बेहोशी के साथ :- nux vom

चक्कर आये ,आँखे बन्द करने पर या अन्धेरे में :- argent nit, stramonium, thyrodin

चक्कर आये ,बैठकर खडा होने पर :- bryo, phos

चक्कर आये ,बैठकर झुकने पर :-belladona

चक्कर आये ,बिस्तर से उठने पर :-bryo, chelidonium, cocculus

चक्कर आये ,झुकने पर :- bell, nux vom, puls, sulphur

चक्कर आये ,सीढियाँ चढने पर:- calc carb

चक्कर आये ,सीढियाँ उतरने पर :- borax, ferrum

चक्कर आये ,लेटने पर :- conium

चक्कर आये ,दांयें करवट लेटने से:- mur acid,phos

चक्कर आये , वायें करवट लेटने से :-iod,phos,sil

चक्कर आये ,लेट जाना पडे:- bryo, cocculus, phos, puls

चक्कर आये ,सॊने के बाद :- lachesis , petroleum

चक्कर आये ,जी मिचलाने के साथ:- cocculus ind, petroleum, chin sulph

स्त्रोत:- नैश थेरापेयुटिकस (Leaders in Homeopathic Therapeutics by Nash )

औषधियों के बीच के अन्तर समझने से औषध का चयन आसान और एक चिकित्सक का मार्ग सरल हो जाता है । अलग-२ औषधियों के मध्य तुलनात्मक अधयन्न के लिये

फ़ैरिन्टन (Farrington) ,   नैश (Nash)गौस (Gross) और  यूजिनियो ( Eugenio) की comparative मैटेरिया मेडिका अधयन्न योग्य पुस्तकें हैं ।

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सफ़ेद दाग और होम्योपैथी- आशा की एक किरण भाग- २ (Leucoderma & homeopathy- an ultimate hope-part-2 )

August 19, 2007 · 13 Comments

पिछ्ली पोस्ट से आगे……..

leucoderma

लियकोडर्मा या सफ़ेद दाग के प्रधान लक्षण - शरीर के चमडे के स्थान -२ पर सादा व उस स्थान पर लोम तक सफ़ेद हो जाते हैं , कभी-२ एक अंग का पूरा अंश सफ़ेद हो जाता है । इस रोग में चमडे के ऊपरी भाग का सूक्ष्म पर्दा ( dermis) केवल आक्रान्त होता है , इसलिये रोगी को शारिरक कष्ट तो अनुभव नही होता लेकिन मानसिक रुप से वह बुरी तरह से टूट जाता है । लियकोडर्मा स्पर्शाक्रमक यानि छूत का रोग नहीं है लेकिन इसके बावजूद भी विशेष कर ग्रामीण इलाकों में लियकोडर्मा के रोगियों को समाजिक बहिषकार तक झेलना पडता है ।

सफ़ेद दाग के कारण और विभिन्न चिकित्सकों के मत

causes of leucoderma

इस रोग की वास्तविक उत्पति का कारण आज तक निर्णीत नहीं हुआ है , बहुत से कारण हैं जिन्हें समय-२ पर विभिन्न चिकित्सकों ने देखा और परखा है , ऐसे ही कारणों पर नजर डालते हैं -

1- होम्योपैथी मे सफ़ेद दाग पर वयापक शोध मुम्बई के डा वडिया के हिस्से रहा । आपके अनुसार इस रोग का प्रधान कारण पेट के रोगों से संबधित है और इन रोगों मे पुराना अतिसार (chronic Amoebic dysentery )और आँतों मे कृमि (intestinal parasites) का होना प्रमुख है। आपके क्लीनिकल रेकार्ड को देखने पर 50% रोगी के मल की जाँचों मे Ent amoeba histolytica, giardia के अंडे या कृमि पाये गये। देखें यहाँ

२-परिवारिक अनुवांशिकता के सफ़ेद दाग के स्पष्ट प्रमाण मिलते हैं । हमारे देश मे सफ़ेद दाग की बहुतायत सोमवंश सहसर्जुन क्षत्रिय समुदाय मे अधिक पायी जाती है। देखें यहाँ (Vitiligo : a study of 998 cases attending KEM Hospital in Pune ;Tawade YV, Parakh AP, Bharatia PR, Gokhale BB, Ran )

३-मानसिक चिन्तायें, विषाद (depression), किसी तरह का सदमा(shock) ,गृह क्लेश , बेरोजगरी की समस्या के चलते मनसिक अवसद आदि भी भी इस रोग को पैदा करने मे सहायक रहे।

४- ऐसी antibiotcs जिनसे intestinal flora नष्ट हो गया , वह भी इस रोग को पैदा करने मे सहायक रही।

५- त्वचा के कई रोग जिनको एंटीबायटाकिस (antibiotcs) , स्टीरौडिस (steroids) और मलहम से दबाया गया ।

६- कुछ रोगियों मे जिनका परिवारिक यक्षमा (T.B.) का इतिहास रहा हो।

७ त्वचा का जलना, मस्से या तिल को सर्जरी से हटाना भी कभी-2 एक कारण मे देखा गया।

८- माथे पर बिन्दी का लगाना , कसे हुये कपडों का पहनना विशेष कर औरतो और युवतियो मे जहाँ कसे हुये ब्लाऊज, ब्रा, या पेटिकोट के नाडे के दबाब के चलते सफ़ेद दाग दिखे।

९- मियाज्म (Miasm) दोष- सोरा, सिफ़िलिस और साइकोसिस- ( मियाज्म (Miasm)कया है , इसके लिये यहाँ देखें

१०- जे जे हास्पिटल ,मुम्बई के डा जे श्रौफ़ ने Indian journal of medical science 1973 मे एक लेख के जरिये कुछ नये तर्क रखे। आपने पाया कि सफ़ेद दाग और कई औटो इमयून समस्यायें (auto immune disorders ) जैसे मधुमेह (diabetes), थाइरोड के कई रोग, और रक्ताभाव (pernicious anaemia) का आपस मे गहरा संबध है।

११- विटामिन बी काम्पलेक्स- कई विटामिन और खनिज तत्वों का भी मिलैनिन के उत्पादन पर असर देखा गया।

१२- ब्रेटनैक (Breathnach 1971 )ने पाया कि मिलैनिन के बनने की प्रक्रिया शरीर मे मौजूद इन्जाइम टायरोनेज (enzyme- tyrosinase ) पर निर्भर करती है और इन्जाइम टायरोनेज के बनने के लिये विटामिन की आवशयकता पडती है। इसके पहले सीव (Sieve 1965) ने विटामिन की कमी और सफ़ेद दाग के व्यापक प्रमाण दिये।

१३- खनिज तत्वों मे कापर ( copper) की catalytic activity सबसे अधिक इन्जाइम टायरोनेज (enzyme- tyrosinase ) पर देखी गयी । बाद के विशलेषणों मे पाया गया कि इन्जाइम टायरोनेज के अणु मे कापर की मात्रा 0.2% होती है और सफ़ेद दाग के रोगियों मे कापर का प्रतिशत आम लोगों की अपेक्षा कम देखा गया। ( V.C.Shah,N.J.Chinoy etc, deptt of zoology, gujrat university, Ahmedabad)
शायद यही कारण रहा कि आगरा के डा आर एस पारिख ने cuprum Acetium 6 के प्रयोग पर जोर दि्या।

१४- कुपोषण और बढती हुयी अंट-बंट (junk food) खाने की प्रवृति ने भी बच्चों मे सफ़ेद दाग की संख्या मे वृद्दि दिखाई दी , देखें यहाँ । (Behl PN, Agarwal A, Srivastava G- Etiopathogenesis of vitiligo : Are we dealing with an environmental disorder ?)

आहार और पथ्य (Diet & Regimen)

  • det.gif
  • जहाँ तक संभव हो माँसाहारी खाने का त्याग कर देना चाहिये । आधुनिकता के दौर मे खान -पान मे सब कुछ चलता है का शोर बहुत है लेकिन हम अपने तरफ़ यह नही देखते कि हम क्या खा रहे हैं। कई बीमार जानवरों के माँस के सेवन करने से नाना प्रकार के कृमि और अंडें खाने के साथ कृमिकोष (cyst) के रूप में आँतो के अन्दर चले जाते हैं।
    इसी तरह बच्चों मे अंट -संट (junk food) खाने की प्रवृति ने भी लियोकोडर्मा की बढती हुई समस्या मे इजाफ़ा किया है. 
  • l08.jpg  डा मौफ़टी के अनुसार ऐसे भोज्य तत्वों का समावेश खाने मे करना चाहिये जिनमे सोरेलिन (psoralen )की मात्रा अधिक हो जैसे चुकन्दर, गाजर, छुआरे, पालक आदि ।
  • dsc00639.jpg आटे मे से चोकर को हटाने की कवायद इधर अधिक देखी जाने लगी है , लेकिब जहाँ चोकर के तन्तु (fibre) पाचन क्रिया को आसान बनाते हैं , वही दूसरी तरफ़ शरीर मे आवशयक सोरेलिन भी सप्लाई करते हैं।
  • अमिबिक संक्रमण (Amoebiasis) और जियारडिया के संक्रमण (giardiasis) के सफ़ेद दाग के रोगियों मे प्रमाण मिलने से हमारी नजर दूषित पानी की तरफ़ भी जाती है, जहाँ तक सभव हो पानी को उबाल कर पीना चाहिये , विशेष कर लखनऊ और कानपुर जैसे शहरों के लिये तो यह बहुत ही आवशयक है।
  •  दूध या दूध से बनी वस्तुयें, खट्टे और रस भरे फ़ल भी आयुर्वेद चिकित्सा पद्दति के अनुसार हानिकारक है।

 

अगले भाग मे हम देखेगें लियकोडर्मा  पर हुये  होम्योपैथिक शोध-कार्य और साथ ही में प्रमुख होम्योपैथिक चिकित्सकों के मत ।

क्रमश: आगे जारी ……

 

संबधित पोस्ट :

1. VITILIGO & HOMEOPATHY
2. Leucoderma and Homeopathy ( सफ़ेद दाग और होम्योपैथी)
3. सफ़ेद दाग और होम्योपैथी- आशा की एक किरण -भाग-१ (Leucoderma & homeopathy- an ultimate hope -Part-1)
4.coming soon ….सफ़ेद दाग और होम्योपैथी- आशा की एक किरण -भाग-3 (Leucoderma & homeopathy- an ultimate hope -Part-3)


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मेरी डायरी से - 1- फ़ास्फ़ोरस ( phosphorous)

April 9, 2007 · 9 Comments

कभी-2 कुछ रोगी हमेशा एक समस्या बन जाते हैं और कभी-2 होम्योपैथिक औषधियों के परिणाम तो उससे भी अधिक आशचर्यचकित करने वाले होते हैं। अब श्रीमान ब्रीजेश को ही लें , पिछले कई सालों से अस्थमा ( bronchial asthma) से पीडित हैं और उम्र भी कुछ अधिक नहीं , मात्र 25 साल । अक्टुबर 2006 मे आप मेरे पास आये और चाहते हैं कि inhaler और bronchodilators से पूर्ण्तया छुट्कारा मिले ; जो वह कई सालों से ले रहे हैं। होम्योपैथिक तरीके से रोगी के लक्ष्णो को लिया गया जो निम्म थे :
Kent ] [Respiration]Difficult:Lying:Amel:
[Kent ] [Respiration]Difficult:Exertion:After:
[Kent ] [Respiration]Difficult:Walking:Agg:
[Complete ] [Generalities]Food and drinks:Sweets:Desires:
[Complete ] [Generalities]Food and drinks:Spices, condiments, piquant, highly seasoned food:Desires:
[Complete ] [Stomach]Heartburn:

रोगी के लक्षणों मे जो विशेष बात थी कि साँस फ़ूलने मे लेटने से आराम मिल रहा था और चलने -फ़िरने मे तकलीफ़ बहुत अधिक बढ जाती थी। इसके अलावा सीने मे जलन , खाने -पीने मे चटपटी चीजों का शौक भी था। एक बात और कि उस मौसम मे जब लखनऊ मे कोई विशेष ठंडक नही होती , वह कुछ अधिक कपडे पहने था।
रोगी जहाँ रह रहा था वह जगह स्वास्थ के लिहाज से कोई विशेष उपयुक्त नही थी, धूप का घर मे अभाव था और घर मे सीलन काफ़ी थी (hydrogenoid constitution ) ।खैर लक्षणो को रिपरटार्जेशन के लिये डाला गया और कम्पलीट रिपर्ट्री और केन्ट रिपर्ट्री की मदद ली गयी। Drug Filters को apply किया और जैसा उम्मीद थी कि Psorinum औषधि के विकल्प मे आयी । तो prescription कुछ इस तरह बना:
29-10-06 = psorinum 200 1*3 { 15 दिन मे एक बार }
nat sulph 6x 4 TDS { रोगी के hydrogenoid constitution को ध्यान रखते हुये दी गयी }

18-11-06= कोई विशेष आराम नही, औषधि बदली गई।
Nux vom 30 TDS
Nat sulph 6x
Blatta Q 10 बूंद तीन बार, आवशय्कता पडने पर { Blatta Q को palliation के लिये दिया गया ।}
22-12-06 = आराम और वह भी जब तक Blatta Q का असर रहे , जाहिर है कि यह सिर्फ़ अभी तक palliation ही था।

इस बार drug filters को apply नही करते हुये सामान्य रिपरटार्जेशन का सहारा लिया गया और दोनो रिपर्ट्री केन्ट और कम्पलीट को एक साथ प्रयोग किया गया , जिसकी आकृति नीचे है:
1
Ars, sulp,puls, phos मे से अब की बार phos देने का मन बनाया , क्योकि इसकी वजह नीचे दी गयी आकृति से स्पष्ट है :
2

25-12-06= Phosphorous 1000 {15 दिन मे एक बार }
Nat sulp 6x 4 TDS
10-1-2007= अब की बार रोगी सन्तुष्ट दिखा, इन 5 दिन के दौरान उसे न तो उसे inhalers का प्रयोग करना पडा और न तो blatta Q को लेना पडा। Wheezing न के बराबर थी और उसकी जगह crepitations ने ले ली थी।
15-1-2007= Phosphorous 1000 1*3
Nat Sulph 6x 4 TDS
22-2-2007 = Phosphorous 1000 1*3
Nat Sulph 6x 4 TDS
16-3-2007 =Phosphorous 1000 1*3
Nat Sulph 6x 4 TDS

Phosphorous 1000 ने जैसा कि अब तक लग रहा है कि फ़िलहाल रोगी को अब तक अस्थमा की समस्या से छुटकारा देने मे उपयुक्त औषधि है। अभी यह रोगी इन औषधियों का नियम से सेवन कर रहा है ।
लेकिन यह रोगी होम्योपैथिक दृष्टिकोण से मेरे लिये कई प्रशन खडे कर गया जिसका जबाब मै ढूँढ रहा हूँ ।
प्रशन 1- होम्योपैथिक मैटेरिया मेडिका मे यह कही भी वर्णित नही है कि फ़ाफ़्फ़ोरस मे साँस फ़ूलने मे लेटने से आराम मिलता है (dyspnoea > lying down )नीचे देखें। हाँ , Generalities मे अवशय लक्षण लेटने से और वह भी दायीं करवट लेटने से आराम दिलाते हैं (> Lying on right side ) और बायीं करवट से तकलीफ़ बढती है।
3
ऊपर आकृति न 2 मे केन्ट रिपर्ट्री इस लक्षण को कवर नही कर रहा है बल्कि कम्पलीट रिपर्ट्री मे यह आराम दिखा रहा है, यह कैसे हुआ। क्या यह clinical verification मे आया है । इसका जबाब मेरे पास नही है। लेकिन यह भी सच है कि रोगी को कम्पलीट रिपर्ट्री के भले ही clinical verification के जरिये से ही सही; रोग मे पूर्णतया आराम मिला है। इस लक्षण को मैने ग्रीस (Greece)के डा जार्ज विथेलीकोस (Dr George Vitholuks) से जबाब जानने के लिये एक हफ़्ते पहले मेल किया था और उनके जबाब की मुझे प्रतीक्षा है । इसके अलावा जो होम्योपैथिक चिकित्सक इस ब्लाग से गुजर रहे हो , वह भी मुझे बताये कि क्या वजह रही कि लक्षण मेटेरिया मेडिका मे न हiने के बावजूद रोगी को आराम दे गया। आपके उत्तर की प्रतीक्षा रहेगी।

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नये रोगों(Acute Diseases) मे मदर टिन्चर के प्रयोग और कई महत्वपूर्ण डाऊनलोड लिंक

March 26, 2007 · 4 Comments

नये रोगों मे सही सिमिलिमम का चयन करना होम्योपैथिक चिकित्सकों के लिये और विशेष नये चिकित्सक के लिये हमेशा एक सरदर्द सा रहता है । पुराने रोगों (Chronic Diseases)मे सिमिलिमम को रिपरटारिज करके चयन के लिये पर्याप्त समय होता है लेकिन नये रोगों मे एक चिकित्सक के पास इतना समय नही होता कि वह सही सिमिलिमम का चयन करे और उसका नतीजा कि आरम्भ मे ही रोगी का विशवास अपने चिकित्सक से ऊठ सा जाता है। बहुत से होम्योपैथिक चिकित्सक मदर टिन्चर का प्रयोग करके अपनी इस मुसीबत से काफ़ी हद तक छुटकारा पा रहे हैं। मदर टिन्चर यानी औषधि का मूल रूप का प्रयोग , हाँलाकि होम्योपैथी के सिद्दातों से बहुत हद तक इसकी पटरी नही खाती लेकिन फ़िर भी इनके निष्कर्ष जल्दी आते हैं। और सबसे बडी बात यह कि इनमे एक रोगी के लक्षणों को औषधि के लक्षणों से मिलाने की कोई बहुत अधिक आव्शय्कता नही पडती ।
मदर टिन्चर के प्रयोगों पर कोई बहुत अधिक संग्रह पुस्तकों का नही दिखता , Anshutz की New , Old & Forgotten Remedies ( प्रकाशक-Indian Books & Periodicals Syndicate ) , डा घोष की Drugs Of Hindustaan , Erlie Jones और यदुवीर सिन्हा की मदर टिन्चर पर पुस्तक थोडी बहुत जानकारी अवशय देती है, लेकिन Anshutz की New , Old & Forgotten Remedies और डा घोष की Drugs Of Hindustaan को छोडकर बाकी पुस्तकें जानकारी के मामले मे अपर्याप्त ही है ।
फ़ेल्टर की कम्पलीट मैटेरिया मेडिका टिन्चर प्रेमियों के लिये एक वरदान सी है। कल पाकिस्तान के डा मन्सूर अहमद ने यह महत्वपूर्ण लिंक भेजा है। सम्पूर्ण पुस्तक यहाँ से डाऊनलोड करें और पुस्तक को आनलाइन यहाँ पर देखें.

Arizona South West School Of Botanical Medicine के माइकल मूर ने फ़रवरी 1-2007 को साईट को अपडेट किया है, कई महत्वपूर्ण लिंक इस पेज पर है जो होम्योपैथिक चिकित्सकों के काफ़ी काम आ सकते हैं।

इसके अलावा शिकागो के Ellingwood की थेरापियूटिक्स और मैटेरिया मेडिका को भी Acrobat .pdf files मे यहां से डाऊनलोड कर सकते हैं और अगर इसको html मे देखना चाहें तो यहाँ देख सकते हैं।
ईलिगवूड की थेरापियूटिक्स के महत्वपूर्ण ग्रुप नीचे दिये हैं:

the.gif
Group I - Agents Acting on the Nervous System - 205 pages - 432K
1-1-Antipyretics.pdf
1-2-Analgesics.pdf
1-3-Sedatives.pdf
1-5-Minor nerve tonics.pdf
1-7-Reproductive Sedatives.pdf
2-1-Nerve Stimulants.pdf
2-2-Alcohol-antimalarials.pdf
2-3-Circulatory Stimulants.pdf
3-1-Tonic Stimulants.pdf
3-2-Sedative Stimulants.pdf
Antipyretics chart.pdf - 20k

Group II - Agents Acting Upon the Heart - 40 pages - 92K
1-Heart Agents.pdf
2-Heart Agents.pdf
Heart Remedy Chart.pdf

Group III - Agents Acting Upon the Respiratory Tract - 53 pages - 120K
1-Nauseating Expectorants.pdf
2-Mucosa Stimulants.pdf
3-Mucosa Stimulants.pdf
4-Sedatives and Tonics.pdf
5-Sedatives and Tonics.pdf

Group IV - Agents Acting upon the Stomach - 57 pages - 128K
1-Stomachics.pdf
2-Minor Stomach Tonics.pdf
3-GI Sedatives.pdf
4-Anti-emetics.pdf
5-Emetics.pdf
7-Digestives.pdf

Group V - Agents Acting upon the Intestinal Glandular Organs and the Canal - 84 pages - 188K
1-Laxatives-Cathartics.pdf
2-Liver Stimulants.pdf
3-Mild Liver Stimulants.pdf
4-Hydragogue Cathartics.pdf
6-Intestinal Astringents.pdf
7-Astringent Tonics.pdf
8-Hemostatic Astringents.pdf
Liver Herb Chart.pdf

Group VI - Agents Influencing the Character of the Blood - 90 pages - 204K
1-Antiseptic Alteratives.pdf
2-Glandular Alteratives.pdf
3-Special Glandulars.pdf
4-Antiseptic Alteratives.pdf
5-Special Alteratives.pdf
6-Antirheumatic Alteratives.pdf

Group VII - Agents Acting Upon the Genitourinary Organs - 62 pages - 140K
1-Renal Stimulants.pdf
2-Renal Stimulants.pdf
3-Stimulant-Sedatives.pdf
4-Sedatives-Correctives.pdf
5-Renal Correctives.pdf
6-Renal Correctives.pdf
7-Special remedies.pdf

Group VIII - Agents Used for Their Influence Upon the Skin - 19 pages - 56K

Group IX - Agents Acting upon the Female Reproductive Organs - 22 pages - 60K
Reproductive Herb Chart.pdf

Group X - Agents Acting upon Intestinal Parasites-Anthelmintics - 10 pages - 32K

Categories: HOMEOPATHY · Therapeuctics · मेटिरिया मेडिका · होम्योपैथिक समाचार

प्राचीन भारतीय औषधियाँ और उनके होम्योपैथी उपयोग-5

October 27, 2006 · 1 Comment

साराका इंडिका
asoka

सामान्य नाम : अशोक
संस्कृत : अशोक, ककली
हिन्दी : अशोक
परिवार : सिसलपीनियोसि

विवरण :अशोक के वृक्ष का उल्लेख हमारे धार्मिक ग्रंथों मे काफ़ी व्यापक रूप से हुआ है। प्राचीन ॠषियों ने मासिक धर्म सबधित रोगों मे इसकी प्रभावकारिता के लिये गुणगान किया है। इस वृक्ष के छिलके एव फ़ल से यह औषधि बनाई जती है।

होम्योपैथिक उपयोग:
कोलकाता के डा डी एन राय को इसका आशिक प्रमाणन का श्रेय दिया जाता है।

स्त्री रोग-
शवेत प्रदर- Sacrum मे दर्द के साथ गाढा, सफ़ेद एव खून मिश्रित स्त्राव
मासिक -(menstrual cycle)-
अनियमित मासिक , अधिकतर मासिक रूक जाना या कम होना, पेट के निचले हिस्से मे असहनीय दर्द जो मासिक धर्म के बहुत पहले शुरू हो जाता है।

बवासीर-
खूनी बवासीर मे इसका प्रयोग प्रमाणित है। मल्त्याग के बाद कष्ट एव खुजली। सख्त एव दुस्धाय कब्ज

पोटेन्सी-
Q,30

Categories: मेटिरिया मेडिका

प्राचीन भारतीय औषधियाँ और उनके होम्योपैथी उपयोग- 4

October 5, 2006 · 1 Comment

4: साइनोडोन डैक्टाइओन (Cyanodon D )

durban_grass

सामान्य नाम-दुर्बा
संस्कृत- ग्रंथि,दूबा
हिन्दी- दूब, हरियाली
अंग्रेजी-Bahama grass
परिवार-ग्रैमिनिया

विवरण-यह 2400 मीटर की ऊचांई तक पूरे भारत मे पायी जाने वाली एक बारह मासी घास है। यह दो प्रकार की होती है-हरा और सफ़ेद्। पशिचमी पंजाब के बलुयी
क्षेत्र को छोड कर यह पूरे भारत वर्ष मे पायी जाती है। यह ठंडे मौसम मे कम होती है तथा सडक के किनारे देखी जा सकती है।
पर्परागत रूप से आर्युवेद मे नासारक्त्स्त्राव, रक्तस्त्राव, दस्त और पेचिश मे इसका उपयोग होता रहा है।
एलोपैथिक चिकित्सा प्रणाली मे भी इसके व्यापक प्रमाण मिलते हैं। मूलत: इसका प्रयोग के प्रमाण खुजली,सिफ़लिस और डाइयूरिटिक( मूत्र बढाने के लिये) के लिये मिलते हैं।

होम्योपैथिक प्रयोग:-
डा शरत चन्द्र घोष की ‘ Drugs of Hindustan ‘ मे इस औषधि का उल्लेख है तथा डा जुगल किशोर ने कुछ रोगियों पर प्रमाणित भी किया है। C.C.R.H. द्ववारा पाँच विभिन्न केन्द्रों मे विस्तार से इसका प्रमाणन किया गया है।
नासारक्त्स्त्राव, चोट से खून बहना आदि मे रक्त्स्त्रावरोधी के रूप मे इस औषधि को सत्यापित किया गया है।

नासारक्त्स्त्राव (Epistaxis)- सुर्ख लाल रक्त ।

दस्त-आरभिक अवस्था मे। पेचिश के साथ, रक्त मिश्रित पतला और जलीय मल , भूख मे कमी तथा पित्ग्रस्त मितली। कोलाइटिस मे प्रभावी। इसके अलावा खूनी पेचिश मे भी प्रभावी है.

पोटेन्सी- :- Q,6x

Categories: मेटिरिया मेडिका

प्राचीन भारतीय औषधियाँ और उनके होम्योपैथी उपयोग-3

October 2, 2006 · 1 Comment

जस्टीसैया एधोटा [ Justicia Adhatoda ]
vasaka

सामान्य नाम-वसाका
अंग्रेजी-Malabhar Nut
हिन्दी-अरूशा
वनस्पति परिवार-अकेन्थेसी

विवरण :-
यह एक छोटा पौधा हैजो ठंडे मौसम मे फ़लता फ़ूलता है। पांरपरिक रुप से लम्बे समय से श्वास समस्याओं का उपचार इस औषधि से किया जाता है।

होम्योपैथिक उपयोग:-
डा शरत चन्द्र घोष, कलकत्ता को होम्योपैथिक मेटेरिया मेडिका मे लाने का श्रेय जाता है। होम्योपैथिक प्रमाणन एव चिकित्सा सत्यापन से ऊपरी शवसन तंत्र के बहुत सारे लक्षण प्रकाश मे आये हैं।

नासाशोध- लगातार छींक आने के साथ नाक से धारा प्रवाह एंव अत्याधिक स्त्राव्। नाक मे सूजन एंव अवरुधता। स्वाद और सूघने की क्षमता मे कमी। गला, मुख,जिह्वा सफ़ेद रग से लेपित हो जाती है।

खाँसी – दम घुटने एंव छाती मे घडघडात तथा खाँसी के दौरे, उल्टी के साथ आराम । खाँसी का वेग रात मे अधिक्। रक्त युक्त बलगम्। तपेदिक और दमा की शुरुआत मे कारगर।

पोटेन्सी-6 , Q

Categories: मेटिरिया मेडिका