ज़िंदगी हमें हर समय किसी-न-किसी मोड़ पर उलझाती रहती है. हम अपने तयशुदा रास्ते से भटक जाते हैं और मंजिल आँखों से ओझल हो जाती है. ऐसे में मैं हमेशा से यही ख्वाहिश करता आया हूँ कि काश मेरे पास ज़िंदगी को नए सिरे से शुरू करने के लिए कोई रीसेट बटन होता जैसा मोबाइल या कम्प्युटर में होता है, और ऐसा सोचनेवाला शायद मैं अकेला शख्स नहीं हूँ.
चौकियें नही , मै कोई टैली सिखाने की बात नही कर रहा हूँ , अनाडी इन्सान भला क्या सिखायेगा, गणित के सवाल और एकाउन्ट वैसे भी बायो वालों के लिये हमेशा से सरदर्द रहते हैं । लेकिन कुछ दिन पहले जब नेट पर टैली ९ का working demo ढूँढते-२ विनोद जी की एकाउन्टिगं की साईट पर जा पहुँचा , उनसे एक अनुरोध किया कि क्या कोई डेमो का लिंक मिल सकता है जिसमे टैली ९ की प्रयोग विधि समझाई गई हो , डेमो का तो विनोद जी कोई लिंक न दे पाये लेकिन हाँ मेरे अनुरोध पर चिकित्सकों के लिये एक सचित्र वर्णन एक पोस्ट के जरिये से अवशय समझा दिया । देखें यहाँ और उनके अनुभव का लाभ उठायें । टैली ९ का डेमो तो ढूँढते-२ टैली ७.२ का working demo अवशय मिल गया , देखें यहाँ । अब मुझे यह नही पता कि इसमे और टैली ९ मे कितना फ़र्क है । macromedia flash पर आधारित यह एक उपयोगी working डेमो है ।
गत सप्ताह ७-५-२००८ के दैनिक हिन्दुस्तान में रवीश जी का लेख स्वास्थ संबधित विषयों और हिन्दी चिठ्ठाकारी पर छ्पा । ५-५-०८ को मुझे रवीश जी का मेल मिला औए उसके बाद शाम को एक फ़ोन काल , सवालों की दनादन बौछार , मुझे दो दिन बाद मे मालूम पडा कि यह तो समाचार पत्र के लिये एक लेख बन चुका था , स्टिगं आप्रेशन नहीं समझें
स्वास्थ विषयों पर हिन्दी मे चिकित्सकों के ब्लाग अभी कम ही हैं , लेकिन शुरुआत तो हो चुकी है । बाल रोग विशेषज्ञ डां बेजी जी का ज्ञान की गंगा बिखेरता स्पंदन , त्वचा विशेषज्ञ डां मिहिरभोज का स्वास्थ चर्चा , दन्त विशेषज्ञ डां प्रवीन चोपडा जी का मीडिया डाक्टर , आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक से संबधित डां रुपेश का आयुषवेद और डां देश बन्धु वाजपेयी जी का इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफ़ आदि प्रमुख हैं । आगे अलग-२ क्षेत्र से और भी चिकित्सक जुडेगें और हिन्दी को गरिमामयी स्थान दिलाने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगें । गूगल का भी योगदान कम नही है , गूगल के भाषा अनुवाद की मदद से आगे चिटठों को भाषा परिवर्तित करके आसानी से पढा जा सकेगा , हिन्दी को जनसाधारण और विशव मे लोकप्रिय करने का ही काम करेगा ।
शैशव काल से तरुण होती हिन्दी को जिन्होने आरम्भ से देखा और लिखने के क्रम को जारी रखा तब जब इन्टर्नेट में पढने वालों की संख्या नगण्य ही थी , असली बधाई के पात्र हैं ।
समाचार पत्र ” दैनिक हिन्दुस्तान ” की इस कटिगं को साफ़ देखने के लिये नीचे दिये चित्र पर चटका लगायें ।
आपको इस नाचती हुई लडकी को देखकर क्या लगता है – यह किस दिशा मे नाच रही है – घड़ी की सुई की दिशा ( clockwise ) या घड़ी की सुई की विपरीत दिशा ( anticlockwise) में । अगर आप घड़ी की सुई की दिशा ( clockwise ) मे अपना अनुमान लगा रहे है तो आप अपने मस्तिष्क के दायें हिस्से का प्रयोग कर रहे हैं और अगर विपरीत दिशा मे तो बायें । तो इससे क्या अर्थ निकला , नीचे डेली टेलीग्राफ़ की रिपोर्ट देखें और परिणामों से अवगत हो लें । हाँ , Daily telegraph की इस रिपोर्ट पर आ रहे कमेन्ट को देखना न भूलें ।
If clockwise, then you use more of the right side of the brain and vice versa. Most of us would see the dancer turning anti-clockwise though you can try to focus and change the direction; see if you can do it.
LEFT BRAIN FUNCTIONS uses logic detail oriented facts rule words and language present and past math and science can comprehend knowing acknowledges order/pattern perception knows object name reality based forms strategies practical safe RIGHT BRAIN FUNCTIONS uses feeling “big picture” oriented imagination rules symbols and images present and future philosophy & religion can “get it” (i.e. meaning) believes appreciates spatial perception knows object function fantasy based presents possibilities impetuous risk taking
यह भी अजीब संयोग है कि प्रकृति द्वारा प्रद्दत नाना प्रकार के फ़ल और सब्जी की संरचानाये हमारे शरीर के कई अंगों और कोशिकाओं से मिलती जुलती प्रतीत होती हैं । चीनियों ने प्रकृति के इस निराले खेल को ५००० वर्ष पहले ही से जाना और समझा ।
कुछ अंदाज लगायें कि क्या समानता हो सकती है १. एक कटी हुई गाजर और आँख मे या २. कटॆ हुये टमाटर और ह्रदय मे या ३. अखरोट और मस्तिषक के बीच या ४. शकरकन्दी और पैन्क्रियाज के मध्य । और भी है बहुत से ऐसे सम्बन्ध ; प्रकृति की इस निराले अंदाज को जानने के लिये नीचे इस वीडियो किल्प को देखें ।
टीकाकरण की उपयोगिता और उनसे होने वाली सुरक्षा से कोई भी इन्कार नही कर सकता लेकिन पिछ्ले कुछ सालों से नये-२ टीकॊं का प्रवेश , गली-२ टेन्ट लगाये ५०-१००/- तक टीकाकरण करने की होड ने एक सवालिया निशान खडा कर दिया है कि इनकी उपयोगिता वास्तव मे है या इसके अन्दर की कहानी कुछ और ही है । सरकारी जन-आन्दोलन मे टीकरण की महत्ता से हम पीछे हटने की बात नही कर रहे हैं , पोलियो, डी.पी.टी., बी.सी.जी. और खसरा के टीकों को छोडकर बाकी प्राइवेट लगने वाले टीके कितने सुरक्षित हैं , यह भी एक सवालिया निशान है । देर-सवेर अखबारों से निकलने वाली खबरें खुद ब खुद इन पर इशारा करती रहती हैं । नीचे इस वीडियो को ध्यान से देखिये और कुछ सच जानने की कोशिश करिये । स्त्रोत: informationliberation.com
This is the first half of the shocking but extremely informative video documentary “Vaccination – The Hidden Truth” (1998) where 15 people, including Dr. Viera Scheibner (a PhD researcher), five medical doctors, other researchers, and parents’ experiences, reveal what is really going on in relation to illness and vaccines. With so much government and medical promotion of vaccination for prevention of disease, ironically, the important facts presented here come from the orthodox medicine’s own peer-reviewed research. The result is a damning account of the ineffectiveness of vaccines and their often harmful effects.
It shows that parents are not being told the truth by the media, the Health Department and the medical establishment, with a medical doctor, Dr. Mark Donohoe, confessing that “It is a problem for me that I am part of a profession that is systematically lying to people.”
Find out how vaccines are proven to be both useless and have harmful effects to your health and how it is often erroneously believed to be compulsory.
Many people simply refuse to believe the truth regardless of how clear it is, but the impeccable documentation presented in this amazing video has changed the minds of many who have seen it.
SOURCE: informationliberation.com
है तो यह प्रश्न अटपटा लेकिन प्रश्न तो प्रश्न ही है और जबाब भी खोजना है । मेरा जबाब तो नीचे रहा और आपका क्या है ? तो देर किस बात की, थोडा सा यहाँ घूम आयें और अपने मन मे उमडते हुये सवालों का जबाब देखें । ( वैसे जब मै अपने आप को 70% की श्रेणी मे देखता हूँ तो अन्य दिग्गज ब्लागरस पर सोचने पर मजबूर हो जाता हूँ कि उनका प्रतिशत कितना होगा ? )
” बत्तीसी संभाल गोरी , उडी चली जाये रे । ” यह बत्तीसी भी कमाल की हैं , कभी यह खो जाती हैं और कभी-२ इनको लगाने वाले इसको निगल तक जाते हैं । अब इन दादी अम्मा को देखिये , उत्साह मे कोई कमी नहीं , चली आसामान की सैर करने लेकिन कमबख्त यह बत्तीसी रास्ते मे टपक गयी । बत्तीसी निगलने और पाकाशय (oesophagus) की नली मे फ़ँसने के पहले भी कई केस सामने आ चुके हैं , देखें यहाँ , और यहाँ ।
अगर आप वाकई मे जंक फ़ूड के खतरे को समझ रहे हैं और घर मे अपने बच्चों इसके खतरे को देखते हुये नियत्रणं रखना चाहते हैं तो यह खबर शायद एक बार फ़िर से सचेत करने वाली हो । हरफ़र्ड्शायर मे कैडबैरीज की चौकलेट बनाने वाली ईकाई मे सीवेज के पानी के रिसाव होने से यह समस्या आई । करीब ५० से अधिक बच्चों मे इसका संक्रमण हुआ । इसके पहले भी कैडबरीज की यूनिट मे इस तरह की घटना प्रकाश मे आई थी ।
सालमोनेला संक्रमण सालमोनेला बैकटेरिया द्वारा जानवरों के मल द्वारा संक्रमित खाद्य पद्धार्थों के खाने से फ़ैलता है , इसके द्वारा उत्पन्न प्रमुख लक्षण १२-७२ घंटों के अन्दर दिखने लगते हैं जिनमें आंत्रशोध , उल्टी , बुखार और पेट मे मरोड आदि प्रमुख हैं ।
They are microscopic living creatures that pass from the feces of people or animals, to other people or other animals. There are many different kinds of Salmonella bacteria. They were discovered by a American scientist named Salmon, for whom they are named.
And how do you know if you have been infected?
Most persons infected with Salmonella develop diarrhea, fever, and abdominal cramps 12 to 72 hours after infection. The illness usually lasts 4 to 7 days, and most persons recover without treatment. However, in some persons the diarrhea may be so severe that the patient needs to be hospitalized. In these patients, the Salmonella infection may spread from the intestines to the blood stream, and then to other body sites and can cause death unless the person is treated promptly with antibiotics. The elderly, infants, and those with impaired immune systems are more likely to have a severe illness.
जन्म भूंमि और कर्म भूमि लखनऊ !! वर्ष १९८६ में नेशनल होम्योपैथिक कालेज , लखनऊ से G.H.M.S. किया , और सन १९८६ से ही इन्टर्नशिप के दौरान से ही प्रैक्टिस मे संलग्न .. वर्ष १९९४ मे P.H.M.S. join करते-२ मन बदला और तब से प्राइवेट प्रैक्टिस मे ...।
मैं डां प्रभात टन्डन" "होम्योपैथी नई सोच/ नई दिशायें का संस्थापक/प्रशासक हूँ । "होम्योपैथी नई सोच/ नई दिशायें " इंटरनेट पर अपनी तरह का सबसे ज्यादा पढ़ा जानेवाला होम्योपैथिक का हिंदी ब्लॉग है । इस ब्लाग का उद्देशय होम्योपैथिक चिकित्सा क्षेत्र मे निरंतर हो रहे शोध कार्यों और गतिविधियों को आपके सामने रखना है और उन लोगों को विशेषकर वह जो इस चिकित्सा पद्दति के घोर विरोधी हैं यह संदेश देना है कि यह पद्दति एक विशुद्ध वैज्ञानिक पद्दति है ।
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