होम्योपैथी दवाओं के लिए नोएडा में पौधों का संरक्षण

Homeopathic medication

होम्योपैथी पद्दति में  करीब 1400 प्रकार की दवाएं पौधों से बनती हैं। इनमें 50 से ज्यादा पौधे ऐसे हैं, जिनका इस्तेमाल सिर से लेकर पैर तक के रोगों की कारगर दवा बनाने के लिए किया जाता है। ऐसे ही चार दर्जन से अधिक पौधों का सेक्टर-24 स्थित केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान केंद्र संरक्षण कर रहा है। इसके लिए अनुसंधान केंद्र में ग्रीन हाउस बनाने की भी तैयारी है। इस केंद्र में नई दवाओं को इजाद करने के लिए कई शोध भी किए जा रहे हैं।
अनुसंधान केंद्र के वनस्पति वैज्ञानिक अरुण कुमार तिवारी ने बताया कि हर छोटे और बड़े औषधीय पौधे की अपनी खासियत होती है। यह पौधे गंभीर बीमारियों के इलाज की क्षमता रखते हैं। यही वजह है कि यहां पौधों से दवाएं बनाने के अलावा उनकी अन्य गुणवत्ताओं की खोजों पर भी काम किया जाता है। समय-समय पर किए जाने वाले शोधों से बेहतरीन दवा इजाद की जाती है। एक दवा को बनाने के लिए एक ही प्रजाति के तीन से चार पौधों का रस निकाला जाता है। जिस पौधे से ज्यादा रस निकालता है, उसी से ज्यादा कारगर दवा बनती है। रस को सुखाया जाता है और एल्कोहल मिलाकर दवा बनाई जाती है। अरुण कुमार ने बताया कि अनुसंधान केंद्र की छत पर एक छोटा सा ग्रीन हाउस बनाया जाएगा, जिसमें पौधे और भी सुरक्षित रहेंगे।
कुछ प्रमुख पौधे
 वसाका
इस्तेमाल में आने वाला भाग- पत्तियां
उपयोग- सर्दी-जुकाम, खांसी
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आंवला
इस्तेमाल में आने वाला भाग- फल
उपयोग- रक्त शोधक
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 इमली
इस्तेमाल में आने वाला भाग- फल
उपयोग- सर्दी-जुकाम, बदजहमी
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सलपर्णी
इस्तेमाल में आने वाला भाग- जड़
उपयोग- बुखार, सिरदर्द, मेनेनजाइटिस
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 लाेंग
इस्तेमाल में आने वाला भाग- फल
उपयोग- बुखार, कफ निस्सारक
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अश्वगंधा
इस्तेमाल में आने वाला भाग- जड़ें
उपयोग- फेरेंजाइटिस, बवासीर और बुखार
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सतावर
इस्तेमाल में आने वाला भाग- अंकुरित हिस्सा
उपयोग- मधुमेह
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 जामुन
इस्तेमाल में आने वाला भाग- बीज
उपयोग- मधुमेह और मुहांसे
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एलोवेरा
इस्तेमाल में आने वाला भाग- पत्तियां
उपयोग- बवासीर और डायरिया
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पौधा- गिलोय
इस्तेमाल में आने वाला भाग- तना और जड़
उपयोग- पीलिया और कमजोरी
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पौधा- पत्थर चूर
इस्तेमाल में आने वाला भाग- पत्तियां
उपयोग- पेशाब संबंधी दिक्कतों का इलाज
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पौधा- कालमेध
इस्तेमाल में आने वाला भाग- पूरा पौधा
उपयोग-सर्दी- जुकाम, खांसी और पीलिया
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पौधा- जटरोफा
इस्तेमाल में आने वाला भाग- बीज
उपयोग- हैजा, डायरिया, बदहजमी
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पौधे- कुंदरू
इस्तेमाल में आने वाला भाग- पत्तियां
उपयोग- मधुमेह
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पौधे- सर्पगंधा
इस्तेमाल में आने वाला भाग- जड़े
उपयोग- हाइपरटेंशन
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पौधा- सतावर
इस्तेमाल में आने वाला भाग- जड़
उपयोग- महिलाओं के लिए शक्तिवर्धक
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(इनको मिलाकर करीब 50 किस्मों के पौधे अनुसंधान केंद्र में मौजूद हैं)

2013 के मध्य में शुरू होगा म्यूजियम
अनुसंधान केंद्र की सबसे ऊपरी मंजिल पर बन रहा म्यूजियम 2013 के मध्य में शुरू होगा। अनुसंधान केंद्र के उपनिदेशक डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि इस म्यूजियम में होम्योपैथी की शुरुआत, दवाओं और भविष्य में होने वाले शोध की जानकारी थ्री-डी और फोर-डी के जरिए दी जाएगी। म्यूजियम में 50 सीटों का एक छोटा सा हॉल भी होगा, जिसमें होम्योपैथी पर डॉक्यूमेंट्री मूवी दिखाई जाएगी।

साभार : अमर उजाला दिनांक १०-४-२०१२

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