
श्रीमती रुही खान (नाम बदले गये हैं ), आयु ४५ वर्ष , आपके पति की अकस्मात मृत्यु एक रोड एक्सीडेंट मे गत वर्ष हुयी और उसके बाद शुरु हुआ मानसिक उलझनों का न अंत होने वाला लम्बा सिलसिला । घबराहट , नींद न आना , रात मे किसी के बुलाने की आवाज और भी कई लक्षण ।आरम्भ मे एलोपैथिक दवाओं का मानसिक चिकित्सक की सलाह पर इलाज शुरु किया लेकिन दवा का सिर्फ़ असर क्षणिक |
यही हाल कुछ १५ वर्षीया साजिया का भी रहा , पिता की अकस्मात मृत्यु ने सबसे अधिक उसको प्रभावित किया । बाकी घर के सदस्य तो बहुत जल्दी ही इस सदमे से उबर गये लेकिन वह न उबर सकी । हाथ पैर ठंडे हो जाना , दिल की असमान्य धडकन ,घबराहट होना , अजीब सी बैचैनी , घर मे मन न लगना इत्यादि लक्षण प्रमुख थे ।
पिछ्ले सप्ताह मेरे घर के सामने रहने वाली सक्सेना आंटी की मृत्यु ने उनकी पुत्र वधू शालिनी पर सब से अधिक मानसिक प्रभाव डाला । उलझन , घर से बाहर भागने एंकात की तीर्व इच्छा , हर समय रूलाई सा आना आदि ।
मन के किसी कोने पर लगनी वाली चोट सबसे अधिक असर इंसान के व्यक्तित्व पर दिखता है । असीमित महत्वकाक्षायें , दिल का टूटना चाहे वह मृत्यु के रुप मे हो ( NWS-Grief or death of beloved one : Nat Mur , Aur Met ( if suicidal , feels like life is gone), Ignatia )या विछोह , प्रेम (NWS- broken heart : Natrum Mur, Ignatia, Lachesis) या व्यपार मे असफ़लता के कारण (NWS – business failure-Ambra Grisea , Aur. calc. Cimic. coloc. Hyos. ign. kali-br. kali-p. nat-m. nux-v. ph-ac. puls. rhus-t. sep. sulph. verat.) या अपने लक्षय की पूर्ति न होते देख कर ,इन सब का अंतिम परिणाम मानसिक लक्षणॊं के उभरने पर ही मालूम होता है । एक बालक के अन्दर झांक कर देखें जहाँ उसके माता -पिता का पूरा कन्ट्रोल उसके व्यक्तित्व को पूरी तरह से ग्रसित कर जाता है ( NWS –Domination , children dominated by parents: CARC,Nat Mur, Staph) या उस अबला से जिसकी अस्मिता का शिकार कुछ हवशियों द्वारा किया जा चुका हो और पूरी जिदंगी वह उन सदमों से उबर पाने मे अपने को लाचार पाती हो (AILMENTS FROM – abused; after being – sexually-ACON. am-m. ambr. anac. androc. ARN. ars. aur-m. bapt. bell-p-sp. berb. calc-p. cann-i. CARC. caust. croc. cupr. cur. cycl. falco-pe. foll. hyos. IGN. kreos. lac-c. lac-f. lyc. lyss. Med. Melis. nat-c. Nat-f. NAT-M. nux-v. OP. Orig. oxyg. petr-ra. Plat. SEP. STAPH. stram. thuj. toxi. tub. ust. xanth. ;AILMENTS FROM – abused; after being – sexually – rape-aster. Carc.)। जो हो चुका है उसकी भरपाई करना असंभव है लेकिन हाँ , इन न दिखने वाली मानसिक चोट की भरपाई हम होम्योपैथिक औषधियों से अन्य पद्दतियों की अपेक्षा अधिक सुगमता और दवा बन्द होने के बाद बगैर दवा पर आश्रित रह कर कर सकते हैं । लेकिन अफ़सोस कि होम्योपैथिक चिकित्सक को ऐसे केस देर से मिलते हैं औत तब जब व्यक्ति अपनी बीमारी से अधिक उन दवाओं पर पूरी तरह से आश्रित हो जाता है और चाह कर भी वह उसे हटा नही पाता ।
शालिनी का केस कोई मुशिकिल नही था क्योंकि उसका कारण मेरे आँखॊं के सामने था , इग्नेशिया ( Ignatia ) की कुछ ही खुराखों से उस रात उसे नींद भी आई और अगले दिन मानसिक अवसाद उसके कन्ट्रोल मे थे । दो दिन तक कन्ट्रोल मे रहने के बाद जब स्थिति एक बार फ़िर पलटा खाने लगी तब Nat Mur ने मानसिक अवसादों पर पूरी तरह से कन्ट्रोल कर लिया ।
लेकिन अधिक परेशानी उन केसों मे आती है जहाँ व्यक्ति लक्षणॊ के समूह को लेकर तो आता है लेकिन उन केसों मे हम पिछले इतिहास ( past history ) को टटोलने की कोशिश नही करते । लुक डी फ़िशर ने past history से मिलने वाले इन लक्षणॊं को NWS कहा यानि NEVER WELL SINCE और केस को लेते समय इसकी भूमिका पर अपना प्रकाश डाला । NWS से संबधित यह ६ पृष्ठ लुक की पुस्तक , “ Hahnemann revisited “ का प्रमुख हिस्सा है , कापीराइट होने के कारण इस का अधिक विवरण देना यहाँ संभव नही है ।
कहना न होगा रूही और साजिया मे मैने उस NWS को ढूँढने की कोशिश की और सफ़ल भी रहा । बाकी का काम NWS से संबधित दवाओं की रही । Nat Muraticum ने इस केस को आसान सा कर दिया और रोगी को स्वस्थ किया । सिन्थीसिस रिपर्ट्री ( Synthesis repertory ) मे इस के रुब्रिक ailments from के शीर्षक के अन्दर मिलेगें ।जो होम्योपैथिक चिकित्सक रडार प्रयोग नही कर रहे हैं वह इस फ़ाइल को नीचे दिये लिंक से डाउनलोड कर सकते हैं ।
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6 responses so far ↓
Shastri JC Philip // September 9, 2008 at 11:09 am
होमियोपैथी संबंधी जानकारी इतने रोचक तरीके से प्रस्तुत करने के लिये आभार.
– शास्त्री जे सी फिलिप
– बूंद बूंद से घट भरे. आज आपकी एक छोटी सी टिप्पणी, एक छोटा सा प्रोत्साहन, कल हिन्दीजगत को एक बडा सागर बना सकता है. आईये, आज कम से कम दस चिट्ठों पर टिप्पणी देकर उनको प्रोत्साहित करें!!
Dr Meakin Mittu // September 9, 2008 at 5:52 pm
Homoeopathy -the science of miracles..its commonly said when a case with an irresolutional point is cured with some sweet pills just coz a perfect homeopathic physician hit th bull’s eye and that eye is the causative or susceptogenic modality of the individual constitution.
Dr Tandon very truly such factors are really tiresome and very difficult to hunt out esp in mental cases as patient is non-cooperative and one has to rely on attendent’s versions for the cause.
But all these are really helping for the homeopathic physician.Please keep adding the helpful informations in your blog.
My Best wishes.
Dr Yasmeen Fatima Khan // September 9, 2008 at 5:57 pm
It’s true that mental symptoms play a important role in the selection of homeo medicine & equally too It’s important that the physician must open all his resources to find them . Thanks for the post & sharing in the blog.
Dr. Mukhtar Ahmad (ALIGARH) // September 10, 2008 at 12:49 pm
Sir…
Really in day to day life we come across such patients but unfortunately mass is not well aware of the true benefits of Homoeopathy in such cases….I have used CARCINOSIN, NAT MUR, IGNATIA as per symptoms similarity & found amazing response…
Tons of thanx for publishing such valuable posts…
Regards,
सिद्धार्थ जोशी // September 16, 2008 at 10:58 pm
डॉ साहब आप कीमती जानकारियों को मोतियों की तरह पिरोकर दे रहे हैं इसके लिए हृदय से धन्यवाद। बहुत पहले आपको पढ़ा, और बाद में नियमित पढ़ने लगा था। बीच में लम्बा अन्तराल आया। अब फिर से नियमित रूप से आपके ब्लॉग पर आने की कोशिश करूंगा।
मानसिक अवसाद वाली जानकारी के लिए एक बार फिर धन्यवाद।
एक बात और आपने शायद पूर्व में मुझे गाइड किया था कि एक पुस्तक है बारह राशियों के आधार पर बारह दवाओं के बारे में। लेकिन बीकानेर जैसे छोटे शहर में ऐसी किताब मिलना मुश्किल है। आप अनुमति दें तो बारह राशियों के मुताबिक मैं लोगों की मानसिक स्थिति का विश्लेषण चंद्रमा अलग-अलग की स्थितियों के आधार पर लिखकर भेजूं तो क्या आप मुझे मानसिक स्थिति के आधार पर विश्लेषण बनाकर दे सकेंगे। इससे ज्योतिष की एक और नई शाखा का जन्म हो सकता है। यानि होम्योपैथी एस्ट्रोलॉजी। वैसे एलोपैथी को तो पूर्ववर्ती ज्योतिषियों ने जोड़ा है लेकिन होम्योपैथी में नहीं। इसका भी एक कारण है वह यह कि होम्योपैथी में आप जिन लक्षणों को लेकर रोगी में रोग को ढूंढते हैं लगभग वैसे ही लक्षणों से हम योगों और संभावित पीडा देने वाले तत्वों को ढूंढने का प्रयास करते हैं। परिणाम यह होता है कि ज्योतिषीय विश्लेषण और होम्योपैथिक विश्लेषण आपस में क्रेश कर जाते हैं। यह मेरी मानसिक स्थिति है। पूर्व में जब मैंने बैच फ्लावर थेरेपी और सत्यव्रत सिद्धांतावलांकर और मैटीरिया मेडिका पढ़ी तो यही दक्कित सामने आई।
इस विषय में मैं आग्रह ही कर सकता हूं। हो सकता है आपकी ज्योतिष में रुचि न हो लेकिन मरीजों में तो होगी ही। हो सकता है कि आप भविष्य में किसी नेट्रम म्यूर के मरीज को चंद्रमा पहनने की सलाह दे दें और मैं राहू से पीडि़त व्यक्ति को गोमेद के बजाय इग्निशिया लेने के लिए कहूं। लेकिन साझा प्रयास से ही ये हो सकेगा।
आपके जवाब की प्रतीक्षा में
ज्योतिष विद्यार्थी
सिद्धार्थ जोशी
बीकानेर, राजस्थान
imjoshig@gmail.com
dr kashinath // December 25, 2008 at 6:28 am
highlight cases treated is very good for observation ,also for deep study it is very good sight for new comer as well students thanks