गत सप्ताह ७-५-२००८ के दैनिक हिन्दुस्तान में रवीश जी का लेख स्वास्थ संबधित विषयों और हिन्दी चिठ्ठाकारी पर छ्पा । ५-५-०८ को मुझे रवीश जी का मेल मिला औए उसके बाद शाम को एक फ़ोन काल , सवालों की दनादन बौछार , मुझे दो दिन बाद मे मालूम पडा कि यह तो समाचार पत्र के लिये एक लेख बन चुका था , स्टिगं आप्रेशन नहीं समझें
स्वास्थ विषयों पर हिन्दी मे चिकित्सकों के ब्लाग अभी कम ही हैं , लेकिन शुरुआत तो हो चुकी है । बाल रोग विशेषज्ञ डां बेजी जी का ज्ञान की गंगा बिखेरता स्पंदन , त्वचा विशेषज्ञ डां मिहिरभोज का स्वास्थ चर्चा , दन्त विशेषज्ञ डां प्रवीन चोपडा जी का मीडिया डाक्टर , आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक से संबधित डां रुपेश का आयुषवेद और डां देश बन्धु वाजपेयी जी का इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफ़ आदि प्रमुख हैं । आगे अलग-२ क्षेत्र से और भी चिकित्सक जुडेगें और हिन्दी को गरिमामयी स्थान दिलाने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगें । गूगल का भी योगदान कम नही है , गूगल के भाषा अनुवाद की मदद से आगे चिटठों को भाषा परिवर्तित करके आसानी से पढा जा सकेगा , हिन्दी को जनसाधारण और विशव मे लोकप्रिय करने का ही काम करेगा ।
शैशव काल से तरुण होती हिन्दी को जिन्होने आरम्भ से देखा और लिखने के क्रम को जारी रखा तब जब इन्टर्नेट में पढने वालों की संख्या नगण्य ही थी , असली बधाई के पात्र हैं ।
समाचार पत्र ” दैनिक हिन्दुस्तान ” की इस कटिगं को साफ़ देखने के लिये नीचे दिये चित्र पर चटका लगायें ।


























4 responses so far ↓
bhuvnesh // May 15, 2008 at 6:58 pm
बधाई.
वाकई बहुत सराहनीय काम कर रहे हैं आप ब्लॉग जगत के लिए.
समीर लाल // May 16, 2008 at 6:23 am
अति सराहनीय कार्य, साधुवाद.
अनूप शुक्ल // May 25, 2008 at 11:14 pm
अरे वाह! बधाई। रवीशजी बड़ा धांसू लिखे हैं। आप लोग महान काम कर रहे हैं। लगे रहें।
Dr. Desh Bandhu Bajpai // June 7, 2008 at 4:51 pm
Dr. Tondon ji, aapako dhanyawad, nishchaya hi aap bahut mahatva poorna karya kar rahe hain. mere saath samasya yah hai ki main, hindi mein type bahut achcha nahin kar pata, bas yahin par main pichchad jata hun. Doosara , kabhi kabhi karya ki ati vayastata ke karan , likahne ki ichcha bhi hoti hai, to taal jata hun. Apane anubhav se yadi chikitsa jagat ki seva hoti hai aur padhane walon ko yadi thoda sa bhi nai jankari hoti hai to ise sarthak karya samajhana chahiye. Dhanyawad.
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