शिशुओं मे दस्तों का प्रकोप और उनसे होने वाली मृत्यु दर कई देशों की मजबूरी सा बन चुका है । W.H.O. की रिपोर्ट के अनुसर जहाँ १९७९ तक सालाना ४.५ मिलयन मृत्य सिर्फ़ शिशुओं मे दस्तों के कारण होती थी वहाँ अब यह घट कर लगभग १.६ मिलयन तक रह गयी हैं । अभी भी यह अनुपात काफ़ी अधिक हैं । होम्योपैथी औषधियों का प्रभाव इन दस्तॊं मे काफ़ी प्रभावी देखा गया है लेकिन व्यापक प्रचार-प्रसार के अभाव मे अभी भी होम्योपैथी जन साधारण से कोसों दूर है ।
दस्त ( Diarrhea ) क्या है ?
Diarrhea एक लैटिन शब्द है जिसका शब्दिक अर्थ है , ” Milk of the Anus ” ग्रीक शब्दिक अर्थ के अनुसार , ” Flow like a stream ” | ढीले औए पतले मल का बार-२ त्यागना , दस्त कहलाता है ।
कारण ( Aetiology)
- संक्रमण : ( वायरस, बैक्टिया या परजीवी द्वारा )
- किसी खाध पदार्थ के प्रति अधिक संवेदन्शीलता
- किसी औषधि की प्रतिक्रिया स्वरूप
यदि दस्त का समुचित इलाज न किया जाये तो निर्जलीकरण ( शरीर मे पानी की कमी आ जाना ) हो सकती है । शरीर मे जल और अन्य द्र्व्यों की कमी के कारण मृत्यु भी हो सकती है ।
निर्जलीकरण की पहचान और लक्षण:
दस्त से बचाव के उपाय :
- मल त्याग के बाद बच्चों मे सबुन से हाथ धोने की आदत डालें ।
- खाने से पहले हथ अवशय साफ़ करें।
- फ़ल और सब्जियाँ धो के खायें ।
- खाध पदर्थों को ढक के रखें ।
क्या करें :
- शिशु मे पानी की कमी को पूरा करें ।
- शिशुओं को W.H.O. ओ.आर.एस. लगातार देते रहें ।
- स्तनपान जारी रखें ।
- शिशु का खाना बन्द न करें , बल्कि उसे नरम खाध पदार्थ जैसे केला , चावल , उबले आलू आदि देते रहें ।
याद रखें :
- दस्त के सभी रोगियों का निर्जलीकरण के लिये वर्गीकरण करें । जहाँ गम्भीर निर्लजीकरण हो उसे क्लीनिक मे I.V. fluid से manage करें या अस्पताल रेफ़र करें ।
- यदि मल मे खून आ रहा हो तो उसे पेचिश के लिये वर्गीकृत करें और औषधि के चुनाव के लिये प्लान दो को देखें ।
क्या न करें :
- शिशु को सिर्फ़ ग्लूकोज या अकेला चीनी का घोल न दें । सिर्फ़ ग्लूकोज आधारित घोल शिशु के पेट में fermentation पैदा करते हैं जिससे बैक्टर्यिल संक्रमण की संभावनायें बढ जाती हैं ।
- ऐसे तरल पदार्थ न दें जिसमें कैफ़ीन हो जैसे कोला या काँफ़ी ।
- दूध या दूध से बनी वस्तुओं न दें ।
घर मे तैयार नमक-चीनी का घोल या W.H.O. ORS में किसको चुनें :
घर मे बनाये गये नमक-चीनी के घोल मे सबसे बडी दिक्कत सही अनुपात का मिश्रण न हो पाना है जिससे या तो नमक की अधिकता हो जाती है या फ़िर चीनी का अनुपात बढ जाता है जो दोनॊ ही हालातों मे शिशु के लिये हानिकारक सिद्द होती है । लेकिन फ़िर भी अगर O.R.S. उपलब्ध नही है तो यह तरीका कारगर है ।
बनाने की विधि :
एक लीटर अथवा ५ ऊबले और ठंडे किये पानी मे १ छॊटा चम्मच नमक एवं ८ छॊटॆ चम्मच चीनी डालकर अच्छी तरह घोल ले और इस मिश्रण को २४ घंटॆ के अन्दर ही प्रयोग करें । बाकी बचे मिश्रण को फ़ेंक दें ।
होम्योपैथिक औषधियाँ :
शिशुओं मे आम प्रयोग होने वाकी होम्योपैथिक औषधियों की यह एक संक्षिप्त जानकारी है । [ नोट : स्वयं चिकित्सा करने की गलती न करें , आप का चिकित्सक ही आपको सही सलाह दे सकता है । ]
1. प्लान “A”
2. प्लान “B “:





















9 responses so far ↓
Dr. Mukhtar Ahmad (ALIGARH) // April 7, 2008 at 6:35 pm
How simply you have presented it sir….A nice approach to Public awareness….
प्रमेन्द्र पताप सिंह // April 7, 2008 at 6:41 pm
बहुत अच्छी जानाकारी है, आपके द्वारा दी जानकारी से हम काफी बीमारी से बचाव कर सकते है।
सागर नाहर // April 7, 2008 at 7:49 pm
दॉ साहब
बहुत ही बढ़िया जानकारी दी है आपने। जब हमारे यहाँ बच्चे छोटे थे तब इस समस्या से आये दिन जूझना पड़ता था। तब महीने में कम से कम दो बार डॉक्टर के चक्कर लग ही जाते थे।
इतनी उम्दा जानकारी देने के लिये धन्यवाद।
समीर लाल // April 7, 2008 at 8:50 pm
बहुत ही सरलता से उम्दा जानकारी बांटने का आभार. जल्द मुलाकात होती है.
Dr Yasmeen Fatima Khan // April 8, 2008 at 7:32 am
a nice way to present the therapeutics ! But so many important medicines are omitted , Arsenic , verat alb , cup met should also be included.
Dr Puneet Kapur // April 8, 2008 at 7:34 am
Thanks sir .
DR Vindu Gupta // April 19, 2008 at 11:48 pm
Thanks doctor ,there is lots of knowledge in homeopathic medicine.
DR Vindu Gupta // April 19, 2008 at 11:58 pm
in therapautics lots of medicine are there for children diarrhoea according to there age,mental age,climatic change etc.Your collection of medicine is so nice but incomplete.Thanks
vinduguptaghms@live.com
DR Vindu Gupta
GHMS
dr us gupta // April 20, 2008 at 12:22 am
thanks for popularizing homeopathic science
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