होम्योपैथी-नई सोच/नई दिशायें

"तारे जमीन पर"- डिस्लेक्सिया पर आधारित एक सच्चाई

January 12, 2008 · 5 Comments

सिनेमा और मेरा साथ बडी मुशकिल से ही होता है , नये साल के पहले ही दिन जब घर मे  सबने तय कर लिया  कि ” तारे जमीन पर” देखनी है तो मरता क्या न करता । रात की  क्लीनिक  दस बजे खत्म करने के बाद  सहारागंज के पी.वी.आर. मे रात ११ बजे  सपरिवार धमक ही गये । रात लगभग २ बजे तक चली इस  फ़िल्म के दौरान न तो नींद का एक भी झोंका आया और न ही नजरें इधर-उधर  गई :) । कारण , यह फ़िल्म है ही इतनी अनूठी कि जो भी जिस वर्ग से है उसको सोचने पर मजबूर कर देगी ।
  यह फ़िल्म आठ साल के उस बच्चे ( ईशान ) की है जिस की अपनी दुनिया है । अपने मे खोया ,अपने मे ही मस्त , सारे जहाँ की मुसीबत अपनी जगह लेकिन उसकी दुनिया मे एक अलग तरह की मस्ती का आलम है । वह मछलियों को उडते देख सकता है लेकिन उसके साथ दिक्कत यह है कि वह अंग्रेजी वर्णमाला के  बी और डी मे भेद नही कर पाता । सीधे शब्दों को वह उल्टा बनाता है और जब तीन का पहाडा उसको सुनाने के लिये कहा जाता है तो वह अपनी जादुई दुनिया मे खो जाता है और ग्रहों की टकराहट को याद करके जबाब देता है । स्कूल मे उसका उपहास उसके साथियों और शिक्षकों द्वारा उडाया जाता है  और यहाँ तक घर मे भी  माता-पिता उसको समझ नही पाते और उसकी हरकतों से तंग आकर उसको बोर्डिग स्कूल मे डाल देते हैं । वह उदास सा रहने लगता है , लेकिन उसकी उदासी को उस स्कूल का एक टीचर ( आमिर ) पहचान लेता है , वह स्कूल के प्रिसंपल , टीचर और उसके घर वालों को भी समझाता है कि ईशान डिस्लेक्सिया से पीडित है । डिस्लेक्सिया पढने से संबंधी एक विकार है । इसमे बच्चों को शब्दों को पहचानने , पढने , याद करने और बोलने मे भी परेशानी आती है । वह कुछ अक्षरों को उच्चारित भी कर सकते हैं लेकिन उनकी पढने की रफ़्तार और बच्चॊं की अपेक्षा काफ़ी कम होती है । यह विकार ३-१५ साल के सामान्य जनसंख्या के लगभग ३% बच्चॊं मे पाया जाता है । और देशॊं के बारे मे नही कह सकते लेकिन अपने देश मे वह चाहे माता-पिता हों या स्कूल की शिक्षा -प्रणाली डिस्लेक्सिया से पीडित बच्चॊं की समस्या से मुँह मोडते हुये दिखती है । कुछ हद तक यह भी कह सकते हैं कि शायद आम लोगों को जागरुक करने का काम ही नही हुआ । अधिकतर केस मे बच्चे को मंद बुद्दि कह कर उसके अन्दर छुपी प्रतिभा को नंजरंदाज ही किया जाता तहा है । आमिर को साधुवाद कि इस फ़िल्म के माध्यम से समाज के हर वर्ग मे एक संदेश देने की पहल की । ऐसी फ़िल्में अपने देश मे बहुत कम ही बनती हैं और आमिर हम आप से आगे भी उम्मीद रखेगें कि ऐसे अछूते विषयों पर फ़िल्मे बनाने का काम जारी रखें । डिस्लेक्सिया को समझने के लिये इस वीडियो को ध्यान से देखें :

फ़िल्म छूटने के बाद मेरा ध्यान मेरे परिचित  की १० वर्षिया लडकी की तरफ़ गया जो कि डिस्लेकिस्या से पीडित है लेकिन इधर एक साल से उसमे मैने काफ़ी अच्छे परिवर्तन देखे । वह दमे से मूलत: पीडित है और काफ़ी ऐलोपैथिक इलाज करवाने के बावजूद उसकी समस्या सिर्फ़ कुछ दिनों तक ही आराम मे दिखती रही । उसकी माँ ने लखनऊ  के ही एक वरिष्ठ एलोपैथिक चिकित्सक की मदद ली जो होम्योपैथिक पद्दति का अच्छा ज्ञान रखते हैं और अपनी पद्दति के अलावा होम्योपैथी को जटिल रोगों मे अक्सर कई रोगियों मे देते रहे हैं ।  लेकिन यह भी सच था कि उसकी माँ ने दमे के लिये चिकित्सक से संपर्क किया था , डिस्लेकिस्या के बारे मे तो उसका ज्ञान न के बराबर था । दमे ( asthma ) से होने वाले attacks मे होम्योपैथिक औषधियों के प्रभाव से तो काफ़ी कमी आई लेकिन साथ मे उसकी याददाश्त ,लिखावट और  पढने -लिखने मे एक अच्छा बदलाव भी दिखा । मेरी उत्सुकता कम से कम दवाओं मे तो बिल्कुल भी न थी  क्योंकि हर रोगी होम्यो्पैथिक दृष्टिकोण  से अलग-२ होता है और दवाये भी अलग-२ निकलती हैं । कई सालो से जिस लडकी का पास होना भी मुशिकल था उसमे इतना बदलाव ! सब के लिये  लिये आशचर्य ही था ! लेकिन यह शायद यह किसी चारित्रिक लक्षणॊं ( constitutional symptoms ) पर आधारित चयन की गई औषधि का काम हो सकता था ।
अगले दिन मेरे ध्यान मे आया कि क्यों नही रिपर्टरी मे सर्च कर के देखें कि डिस्लेक्सिया पर होम्योपैथी मे क्या  हो सकता है । आखिरकार सिन्थिसीस रिपर्टरी ( synthesis repertory ) मे इसका पूरा उल्लेख मिला ।

रडार ९.२ के प्रयोगकर्ता  सर्च मे जाकर dyslexia टाइप करें । नीचे दी हुई  खिडकी कुछ इस तरह खुलेगी :

 

सबसे पहले वाले को  किल्क करें । उसकी आकृति इस तरह से है और एक ही औषधि की तरफ़ इंगित कर रही है ।

 

दूसरे रूब्रिक को किल्क करें :

 

ऊपर दिये रुब्रिक के नीचे लक्षणॊं के सात समूह और भी दिये हैं , इन पर भी किल्क करें । यह dyslexia से मिलते जुलते लक्षणॊं के रूब्रिक्स और उनसे संबधित औषधियों को इंगित  करता दिखेगा । जिन होम्योपैथिक चिकित्सकों के पास रडार की सुविधा नही है उनके लिये विस्तार से देखने के लिये नीचे दिये PDF लिंक पर किल्क करके डाऊन्लोड करें । PDF आधारित इस फ़ाइल को देखने के लिये acrobat reader या foxit reader का प्रयोग करें ।

 

pdf

यहाँ कोई दावों और प्रतिदावों जैसी कोई बात नही है , यह सिर्फ़ एक संभावनाओं की ओर इशारा कर रही है , आगे देखना यह काम चिकित्सा क्षेत्र से जुडॆ लोगों का है कि वह होम्योपैथी को होम्योपैथी के तरीकों से ही समझें और प्रयोग मे लाकर देखें , ताकि हम समाज के उस बहुत महत्वपूर्ण ईकाई को नजरान्दाज न कर सकें ।

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5 responses so far ↓

  • balkishan // January 12, 2008 at 1:32 pm

    आपका लेख पढने के बाद उन सारी जिज्ञासाओं मे से कुछ शांत हुई है और कुछ को पुरा करने का रास्ता मिला है जो फ़िल्म देखने के बाद उत्पन्न हुई थी.
    आपने इस विषय पर अध्ययन किया है इसलिए पूछ रहा हूँ कि MR/ADHD पर भी क्या आपकी कोई जानकारी है. DYSLEXIA और MR/ADHD मे क्या कोई रिश्ता है.क्या होमियोपेथी मे कोई दवा उपलब्ध है? अगर हाँ तो मेरे मेल पर कृपया सम्पर्क करे.

  • Dr Prabhat Tandon // January 13, 2008 at 5:58 am

    DYSLEXIA और ADHD में लक्षणॊं मे काफ़ी समानता दिखती है ; यहाँ तक कि कुछ ADD के रोगी बच्चों मे डीस्लेक्सिया के लक्षण भी पाये जाते हैं । देखें : http://www.healthyplace.com/Communities/add/judy/dyslexia_1.htm
    लेकिन अगर र्होम्योपैथी के दृष्टिकोण से देखें तो treatment मे disease के नाम से कोई अधिक अन्तर नही पडता क्योंकि होम्योपैथी के लिये diseased लक्षणों का औषधि के लक्षणॊं से मिलना अधिक आवशयक है न कि मर्ज के अलग-२ नाम पर चिकित्सा ! होम्योपैथिक औषधियों की proving स्वस्थ मनुष्यों पर की जाती है और यहाँ सबसे महत्वपूर्ण बात है कि उन मानसिक लक्षणॊं का proving मे आना जो कि guinea pigs पर कि गई researches मे नही आते । अगर आप इसी लेख मे दिये pdf लिक को खोल के देखें तो कई औषधियों के proving मे हुये लक्षण dyslexia और ADHD के लक्षणॊं से मिलते हैं , अगर रोग मे और कई नये लख्षण आ रहे हैं जो कि इन औषधियों मे नही हैं तो हम अपने औषधि कोष यानि repertory मे जाकर उन लक्षणॊं को खोज कर रोग के लक्षणॊं से मिलान करवा सकते हैं । इसी बात को मै आखिरी मे भी कह रहा हूँ कि इसका समाधान होम्योपैथी के सि्द्दातों पर ध्यान रख के किया जाये न कि मर्ज के अलग-२ नाम पर ।
    मेरा फ़िलहाल कोई भी experience नही है लेकिन लुक डी फ़िशर ने इस संदर्भ मे काफ़ी काम किया है । देखें:
    http://www.homeopathysnc.org/luc_de_schepper_add_adhd.htm

  • कमल शर्मा // January 22, 2008 at 5:35 pm

    बेहतर शोध रिपोर्ट। वाकई आपने खूब अच्‍छी तरह समझाया है इसे। उम्‍मीद है लोग इसे पढ़ेंगे और समझेंगे कि हर बच्‍चा पढ़ाई में कमजोर नहीं होता। आशा है आप दूसरी बीमारियों के बारे में भी हमें अवगत कराएंगे।

  • सिध्दार्थ जोशी // January 24, 2008 at 5:16 pm

    नया विषय प्रस्तुत होने के साथ ही इस विषय में बेहतरीन जानकारी उपलब्‍ध हो जना सुखद अनुभव लगता है
    मैं अभी तक किसी ऐसे मरीज को नहीं जानता
    कहीं आवश्यकता होने पर आपके ब्लॉग का उल्लेख अवश्य करूंगा

  • pradip mazumder // January 28, 2008 at 10:24 am

    dear doctor,
    i am extremely happy to note that you are taking much importance to give the details on site, which is not only give guidance to homoeopathy for the general public but as well as to the upcoming doctor and homoeopathy hobby user.
    I am basically from the marketing field and working as sales manager for ADVEN BIOTECH PVT LTD, at Hyderabad hq.
    we wish you all the best .
    regards
    Pradip Mazumder
    +91 98480 31155

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