डा किशोर शाह गायनकालोजिसट हैं और पूना मे प्रकैटिस करते हैं , चिकित्सक होने के साथ ही वह बहुत अच्छे लेखक भी है।, यह उनका एक व्यक्तिगत संस्मरण है। डा नन्दना पई ने कुछ दिन पहले यह रोचक कहानी भेजी थी, जिसका हिन्दी रुपांतरण यहाँ लिख रहा हूँ।
वह कौन थी
मेरी पत्नी एक नाक, कान विशेषज्ञ हैं जब कि मै एक गायनाकोलिजिस्ट हूँ। और निकट भविष्य मे मेरा पुत्र जो एक प्रोकटोलोजिस्ट है एक यूरोलोजिस्ट डा से विवाह करने वाला है। इन सब वजह से कभी-2 अजीब सी समस्यायें खडी हो जाती है। अभी कुछ दिन पहले कि ही बात ले मेरे जानने वाले एक चिकित्सक ने गर्भ की सफ़ाई के लिये
एक मरीज और एक कान साफ़ करवाने के लिये एक और मरीज मेरी पत्नी के पास भेजा।
मैने अपने रिसपेन्शिट से यह कह दिया था कि जैसे ही आये उसको सीधे मेरे पास भेज दूँ। अब इसको क्या कहा जाये कि वह रोगी जिसका कान साफ़ होना था वह मेरी पत्नी के बजाय मेरे पास आ गई, जब कि मै समझ रहा था कि वह गर्भ गिरवाने आयी है।
अब आगे के वार्तालाप आप के सामने है-
” आइये बैठिये” मैने मुस्कराते हुये कहा, वैसे मै तभी मुस्कराता हूँ जब मुझे कोई मोटी रकम हाथ लगने वाली होती है। मरीज थोडी सकुचायी , ” आराम से बैठें “ मैने कहा।
” डा, क्या इसमे बहुत दर्द होगा।?”
“नही, बिल्कुल नही”
रोगी थोडे अब आराम से दिख रही थी और बोली, “डा , हमने घर मे सब तरह से कोशिश की, लेकिन कामयाब न हो पाये।”
मै कुछ हैरान हुआ, “क्या आप को मालूम है कि घर मे यह सब करने से बहुत गडबड हो सकती थी।”
“मैने इसको हटाने के लिये पहले ऊपर -नीचे किया लेकिन यह हटा ही नही।”
मै मुस्कराया और बोला, ” अगर यह इतना आसान होता तो हम डाक्टरों की जरुरत क्यूँ पडती ?”
उसने मुस्कराते हुये कहा , “मेरे पडौसी ने इसको ऊँगली से निकालने की कोशिश की लेकिन छेद इतना संकरा था कि उसे पिन डालनी पडी ।”
“हे भगवान” मैने कहा।
” और तो सुनिये! मेरी मां ने माचिस की तीली से भी कोशिश की लेकिन सफ़लता नही मिली।
मेरे स्वयं का रक्तचाप अब बढने लगा था और गुस्से से मेरे मुँह से बोल निकल नही पा रहे थे।
“डा मै आइंदा से क्या करुं कि यह गन्दगी दोबारा न आये।”
मै जानता था कि यह एक अंवछानीय गर्भ है, लेकिन उसे गन्दगी कहना मुझसे सहन न हुआ। मैने उससे कहा ,“आप को रात मे सावधानी रखनी चाहिये या फ़िर आप गोलियों का सहारा भी ले सकती हैं।
“तो आप का कहना है कि यह सिर्फ़ रात मे ही होता है।”
मैने उसकी बात को पकडा , ” नही-2! मेरे कहने का मतलब है किसी भी समय आप कर सकती है , जब भी आप का मूड करे, लेकिन पूरी सुरक्षा के साथ।”
अब कि बार वह कुछ परेशान सी दिखी, “इसमे मूड से क्या मतलब।”
मै उस का मतलब शायद कुछ-2 समझ रहा था , “यह हो जाता है, इसमे मूड की कोई बात नही है।”
“मेरे बाजू वाले ने राय दी कि रोड किनारे एक आदमी बैठता है ,उसको दिखा लूँ।”
“तो तुम्हारा मतलब है कि वह पिन वाला आदमी।”
“हाँ”
“तुम्हें उस पडोसी की राय नही माननी चाहिये थी।
“नही , लेकिन मैने उसकी दूसरी राय मानी। उसने मुझसे कहा कि इसमे गर्म तेल डालूँ और इन्तजार करुँ, लेकिन इस प्रयोग ने भी काम न किया।”
“लेकिन आपको अपने पति की इजाजत ले लेनी चाहिये थी।”
मुझे वह असमंजस मे दिखी , “क्या मुझे अपने पति की इजाजत लेनी पडेगी? लेकिन वह तो दुबई मे हैं। और हम पिछले एक साल से नही मिले।”
मेरी तो हवा अब सरकने लगी थी। मैने उसे फ़िर भी समझाया,“नही-2 इसमे पति की इजाजत लेने की क्या आवशयकता।”
“लेकिन क्या मै उनको फ़ोन से बता दूँ।”
मुझे समझ मे नही आ रहा था कि उसके पति को मुबारक बाद दूँ या सांतवना दूँ”
चलिये यह अच्छा हुआ कि आप जल्दी आ गयी।”
” मै तो सुबह ही आना चाहती थी लेकिन कुछ दूसरे काम आडे आ गये।”
” नही मेरा यह कहना नही था , अगर आप देर कर देती तो वह घूमने सा लगता और उसके दिल की धडकन भी सुनाई पडती।”
वह मेरी तरफ़ बडी-2 आँखे कर के देखने लगी जैसे कि वह रामसे ब्रदर्स की पिक्चर देख रही हो।”
उसके चेहरे को देखते हुये मैने कहा, “आपको थोडा सा रक्त स्त्राव होगा जो कुछ दिन चलेगा।”
वह बुरी तरह काँपने लगी, ” कितना रक्त स्त्राव होगा।”
” यह एक सिर्फ़ सामान्य मासिक धर्म से कुछ अधिक ही होगा और अधिक से अधिक एक हफ़्ते तक चलेगा।”
उसकी मन:स्थिति मुझे बहुत खराब दिखी, वह बार-2 अपने बालों को ऊँगली से लपेट रही थी , मैने बहुत नरमी से कहा, ” अब आप पलंग पर लेट जायें और कपडे ढीले कर लें।”
बस इसके बाद यह हमारे बीच आखिरी वार्तालाप था , वह बहुत तेजी से मुडी और फ़र्राटे से क्लीनिक का दरवाजा खोल कर निकल गयी।


