होम्योपैथी-नई सोच/नई दिशायें

होम्योपैथिक साफ़्टवेएर-क्लासिक 8 (Homeopathic software-classic 8)

October 31, 2006 · 12 Comments

क्लासिक 8 और उसके उपयोग
डा प्रभात टन्डन

इसके पहले कि मैं इस साफ़्टवेएर को प्रयोग करने का तरीका और बाद में इससे मिल रहे परिंणामों की जानकारी यहां रखूं , कुछ विशेष बातें। इस समय अधिकतर युवा होम्योपैथिक चिकित्सक repertorisation के लिये साफ़्टवेएर का प्रयोग कर रहे हैं। कुछ जो प्रमुख प्रयोग होने वाले साफ़्टवेएर हैं उनमे मर्क्यूरियस, रडार, क्लासिक, आदि प्रमुख हैं। अन्य होम्योपैथिक साफ़्टवेएर की जानकारियाँ आप यहाँ भी देख सकते हैं। इनमें से क्लासिक 8 अधिकतर चिकित्सक प्रयोग कर रहे है, शायद इसका कारण इसका प्रयोग सरल और वयवाहारिक है। टेक्नोलोजी के बढते हुये दौर मे अधिकतर चिकित्सक साफ़्टवेएर तो ले आये लेकिन उसका सही उपयोग न कर पाये उसका परिणाम यह निकला कि यह सिर्फ़ एक शो-पीस बन कर रह गया। उत्तर प्रदेश की सरकारी होम्योपैथी डिस्पेन्सरियों के तो हाल और भी बुरे हैं। इसी साल “रडार” ( एक और साफ़्टवेएर) और कम्पयूटर की खरीद पर लाखों रूपये खर्च किये गये लेकिन सब ढाक के तीन पात ही निकला, कम्पयूटर है तो लाइट नही और अगर लाइट है तो चिकित्सको मे कोई उत्साह नहीं।
जो छात्र और छात्रायें अपना पहला प्रोफ़ेशनल समाप्त कर चुके हैं वह एक बात अच्छी तरह से समझ लें कि spot prescribing हर बार काम नहीं करती, विशेष कर पुराने और जटिल रोगों मे ,जहाँ लक्षण उलझे हुये होते हैं । आपको अपने केस पर मेहनत करनी ही होगी और यहाँ कोई शार्ट कट नही चलता। case taking और repertorisation एक महत्वपूर्ण स्तंभ है जिसको आज आपने न सीखा तो बाद के clinical practice के साल आपको रुलायेगें और होम्योपैथी को डुबोयेगें। तो क्या करे आप- कालेज की राजनीति मे पडने की बजाये अपने प्रोफ़ेसर की जान खायें और उनको clinically केस को समझाने के लिये जोर दें। इसके अलावा कुछ फ़ोरम भी आप की सहायता कर सकते हैं। आरकुट मे चल रहे डा प्रवीन गोस्वामी के फ़ोरम Revolutionized Homoeopathy का मै विशेष उल्लेख करना चाहूगाँ जो रोगी के लक्षणों को rubrics मे बदलने का सही तरीका आपको बखूबी समझा सकते हैं और डा नवीन बिदानी की Homoeopathy….Beyond Horizons जो पग-2 आपकी clinical समस्यायों को सुलझाने मे आपकी सहायता कर सकते हैं।

चलिये चलते है क्लासिक 8 की विशेषतायें की ओर:-

cl8

अगर मै शुरु मे हुये पंगों को छोड दूँ तो मै दावे के साथ कह सकता हूँ कि यह एक बेहतरीन साफ़्टवेएर है। तकरीबन 6 महीनो से इसका मै प्रयोग कर रहा हूँ , इसके पहले भी इसका दूसरा वर्जन 7 प्रयोग कर चुका हूँ जो कि वर्जन 8 के मुकबले कई मामले मे कमजोर था।

साफ़्टवेएर ही क्यों:-

यह एक ऐसा प्रशन है जो अक्सर पुराने अनुभवी होम्योपैथिक चिकित्सक पूछा करते है कि जब उनका काम बगैर इससे चल सकता है तो इतने तीम झाम मे क्यों पडा जाय्। नीचे एक उदाहरण के तौर मे एक रोगी के लक्षण रख रहा हूँ, जिसको कि साफ़्टवेएर मे डाला गया है।

श्री नरेन्द्र ने अपने लक्षणों को कुछ इस प्रकार रखा, उन्ही की जुबानी:

मुझे सांस फ़ूलने की शिकायत करीब 5 सालों से है। अक्सर मुझे जुकाम य्र छीकें लगी रहती है। साँस ज्यादा लेटने से फ़ूलती है, बैठने से और झुक कर बैठने से आराम मिल जाता है, हाँ , बलगम निकलने से भी आराम मिल जाता है। बन्द कमरे मे बहुत घुटन महसूस होती है। इतना कह कर रोगी चुप हो गया।

और पूछने पर उसने कहा कि

मेरे पैरो के तलवों मे जलन बहुत होती है, पैर की बिवाइयाँ अकसर फ़ट जाती है,और पैर के तलुवे मे कई घोखरू भी निकल आये है। खाने मे मीठा अधिक पसन्द है, और सर्दी मे भी गर्म बहुत लगती है।”

जो लक्ष्ण रोगी ने दिये उनके आधार पर उनके रुबिर्क्स बनाये गये, जो इस प्रकार थे-यह सब लक्षण कम्पलीट रिपर्टरी की मदद से क्लासिक 8 मे डाले गये।

[Complete ] [Nose]Coryza:Asthma, with:
[Complete ] [Generalities]Warmth:Agg.:
[Complete ] [Extremities]Heat:Foot:Sole:
[Complete ] [Extremities]Cracked skin:Feet:Soles:
[Complete ] [Extremities]Callosities, horny:Soles, on:
[Complete ] [Extremities]Callosities, horny:Soles, on:Tenderness:
[Complete ] [Respiration]Difficult:Lying, while:Agg.:
[Complete ] [Respiration]Difficult:Sitting:Amel.:Half sitting amel.:
[Complete ] [Respiration]Difficult:Expectoration:Amel.:
[Complete ] [Respiration]Difficult:Inspiration:Agg.:
[Complete ] [Generalities]Food and drinks:Sweets:Desires:

अब इन रुबरिक्स को साफ़्टवेएर मे डाला गया:जिसके परिणाम कुछ इस तरह रहे:
pk10

गौरतलब है कि लक्षणों को साफ़्टवेएर मे डलने के बाद 336 औषधियाँ लिस्ट मे आई, औषधियों को ग्रेडिग के हिसाब से देखे तो ars,sulp,lyco,calc क्रमश: 15,14,13,12 अंक लेकर क्रमश; 8,7,6,7 लक्षणों को कवर कर रहे हैं। नीचे देखें कि एक ही समय मे चिकित्सक कई विकल्पों पर अपना भ्रम दूर कर सकता है। उदाहरण के लिये, अगर उसको लग रहा है कि ars पूरी तरह से उपयुक्त औषधि नही है , तो वह माउस के पाइन्टर को ars पर रखें और दायें दबाये, नीचे देखें कि कितने विकल्प उसके सामने आरहे हैं-
pk4-1

चित्र मे दिख रहे विकल्प कुछ इस तरह से हैं-

Symptom covered/not covered
Keynotes
Open materia medica
Conv rep to mm
Drug properties
Drug relation
Drug list

सबसे पहले इसी रोगी मे Symptom covered/not covered को देखते हैं-
pk5
दूसरे विकल्प मे Keynotes है, जो औषधि के लक्षणों को संक्षेप मे याद दिलाते है, जैसे-

pk6इसी तरह Open materia medica से अपनी चुनी हुयी औषधि के संबध मे पूरी
जानकारी ले सकते है, नीचे देखें-

pk7

अपनी पिछली दी हुयी औषधि की तुलना अगर नयी औषधि से करना चाहें तो विकल्प के रुप मे Drug relation को किल्क करे, देखे नीचे-

pk9
यह एक repertorisation की सामान्य प्रक्रिया है, कई बार चिकित्सक को सही सीमिलीमम को ढूढनेके लिये काफ़ी दुशवारी होती है, नीचे चित्र मे देखें कुछ और विकल्प मौजूद हैं-

pk11
Hand cursors पर नजर दौडायें।
बायें से पहला करसर सामान्य repertorisation दिखा रहा है।
बायें से दूसरा करसर Drug Filter के विकल्प दे रहा है।
बायें से तीसरा करसर Combine Repertorisation का विकल्प दे रहा है।
बायें से चौथा करसर cross repertorisation का विकल्प दे रहा है।
बायें से पाचँवा करसर Elimination repertorisation का विकल्प दिखा रहा है।
pk10
सामान्य repertorisation
drug filter
Drug Filter
combine
Combine Repertorisation
cross
cross repertorisation
elimination
Elimination repertorisation

यह सब झमेले पुराने और जटिल रोगों के लिये अधिक रहते हैं, नये रोगों मे quick repertorisation का तरीका अधिक कारगर होता है।
आज बस इतना ही। आगे और भी चर्चा करगें-क्लासिक 8 के बारे मे विस्तार से।

Categories: HOMEOPATHY · Homeo Software · होम्यो सॉफ्टवेयर

12 responses so far ↓

  • Dr pravin goswami // October 31, 2006 at 9:28 am

    very good.. and very useful for homoeopaths…
    iske liye aapko hardic badhai…

  • अनुनाद सिंह // October 31, 2006 at 10:19 am

    इतनी अच्छी और उन्नत किस्म की जानकारी हिन्दी माध्यम मे देकर आपने हिन्दी और आम जनता का उपकार किया है। भारत में ऐसे ही प्रोफेसनल व्यक्तिओं की जरूरत है को एक तरफ अंगरेजी और अन्य भाषाओं के माध्यम से सबसे उन्नत ज्ञान तक अपनी पहुंच बनाये रखें और दूसरी तरफ उस जानकारी को आम जनता तक आम जनता की भाषा के माध्यम से पहुँचाने का भी काम करें। जब ज्यादे लोगों तक ज्ञान पहुंचेगा और ज्यादा लोग ज्ञान के क्षेत्र में काम करेंगे तो वास्तविक क्रान्ति की नीव पड़ेगी।

  • रवि // November 1, 2006 at 6:34 am

    इससे यह तो पता चलता है कि होमियोपैथी में किसी भी रोग के लिए उपयुक्त औषधि का चुनाव बड़ा ही दुष्कर कार्य है.

    इसी वजह से बहुत से सिद्ध होमयोपैथ एक ख़ुराक में मर्ज ठीक कर देते हैं . ( कई झोला छाप मरीजों को महीनों भी घुमाते रहते हैं.)

  • Dr Shreesh P. Khandekar // November 1, 2006 at 6:35 am

    Sir
    the information you r providing through this site is realy very useful all new homoeopaths.

    I am so glad to get this in a very simple way.
    Thank You!

  • Dr. Neeti Shrivastava // November 1, 2006 at 6:10 pm

    Sir ,
    This site is realy very useful for new Drs..

  • प्रमेन्‍द्र प्रताप सिंह // November 2, 2006 at 5:20 am

    बहुत अच्‍छी जानकारी दी डा0 साहब धन्‍यवाद

  • Ramesh // November 2, 2006 at 5:12 pm

    You are doing classic work on net.
    realy! Only 5% new genration homoeopaths are net savoy , and should know about master work in new electronic era for The HOMOEOPATHY

    I am using Classic Seven since from Feb 2000
    and feal having added strength for solving the cases .

  • PRABHAT TANDON // November 2, 2006 at 5:15 pm

    definitely ramesh bhai,i was using classic 7 since 1 yr but in apiril 2006 i purchased the premium ed of cl 8, it is really a gem owing much due to the inclusion of complte repertory. have u ever seen the complete repertory in the net. I will give u the link if u really need complete repertory, the file size is about 90mb & it ‘ll take about 1.5 hrs to download

  • manu // November 29, 2006 at 5:52 am

    Gud website for guiding peaple abt homeopathy!!

  • हरिराम // December 19, 2006 at 11:56 am

    डॉ. साहब, आपके हम सभी आभारी हैं जो इतनी बहुमूल्य जानकारियों दी हैं। कृपया होमियोपैथिक दवाओं के गलत प्रयोग से होनेवाले खतरों पर भी एक विशेष लेख इस ब्लॉग में देने का कष्ट करें। क्योंकि आजकल बाजार में अनेक होमियोपैथी के छोटे-बड़े डॉक्टर और अनेक प्रकार की नकली दवाएँ, पानी मिलाकर या अलकोहल मिलाकर हल्की बनाई गई दवाओं की भरमार हो गई है।

    कभी कभी एक ही खुराक में भयंकर रोग अच्छा हो जाता है तो कभी कभी वर्षों तक दवा लेने पर भी ज्यादा फायदा नहीं होता, बल्कि कई अन्य रोग पनप उठते हैं।

    अतः सही उपचार से पहले गलत उपचार से बचाव के उपाय बताकर आम जनता का मार्गदर्शन करें जो हमारे लिए काफी राहत की बात होगी।

    सादर।

  • भागते युग की मशीनी समस्या- सरवाईकल स्पान्डयलोसिस(Cervical Spondylosis) « होम्योपैथी-नई सोच/नई दिशायें // July 31, 2007 at 11:31 pm

    [...] computerised repertorisation क्यों आज की आवश्यकता है इसके लिये यहाँ देखें । [...]

  • vinay patidar // June 19, 2009 at 2:27 pm

    this information is very useful to use the classic 8. thanks a lot for this information.

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